रामधारी सिंह ‘दिनकर’ : ‘परशुराम की प्रतीक्षा’

Parshuram Ki Pratiksha कविता संग्रह-महत्वपूर्ण तथ्य रचना- ‘परशुराम की प्रतीक्षा’ कविता संग्रह (खंडकाव्य)  रचनाकाल- 1962/63 ई. के आसपास लिखा गया था। इसमें कुल 18 कविताएँ हैं, जिसमें ‘परशुराम की प्रतीक्षा’ प्रमुख हैं। इस संग्रह में 15 नयी कविताएँ और 3 ‘सामधेनी’ से ली गई है। ‘परशुराम की प्रतीक्षा’ कविता पाँच खंड में हैं। यह कविता…

रामधारी सिंह ‘दिनकर’ : कुरुक्षेत्र का साँतवा सर्ग महत्वपूर्ण तथ्य

रचना- ‘कुरुक्षेत्र’, कुल 7 सर्ग हैं। रचनकार- रामधारी सिंह ‘दिनकर’ प्रकाशन वर्ष- 1946 ई. काव्यरूप- ‘कुरुक्षेत्र’ प्रबंधात्मक महाकाव्य है। इसे आधुनिक युग की गीता कहा गया है। यह द्वितीय युद्ध की पृष्ठभूमि पर आधारित रचना है। इसका नायक ‘कुरुक्षेत्र’ हैं। इस युद्ध में शांति की समस्याओं का चित्रण किया गया है। यह ‘प्रतीकात्मक’ रचना है।…

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ : ‘बादल राग’ (कविता) महत्वपूर्ण तथ्य

* सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ द्वारा रचित ‘बादल राग’ कविता में बादलों को ‘क्रांति’ का प्रतीक माना गया है, जो शोषक वर्ग के लिए भय और शोषित वर्ग के लिए आशा का संचार करते हैं।  * यह कविता आम आदमी (लघुमानव) के दुःख को दर्शाती है। बादलों के माध्यम से क्रांति लाकर नवनिर्माण की कामना करती है,…

दुष्यंत कुमार त्यागी : ‘साये में धूप’ (ग़ज़ल संग्रह)

जन्म- 27 सितंबर 1931 ई. उ.प्र. में बिजनौर जिले के राजपुर नवादा गाँव में हुआ था। निधन- 30 दिसंबर 1975 ई. भोपाल में हुआ। पिता- चौधरी भगवत सहाय और माता- रामकिशोरी देवी थी। रचना – ‘साये में धूप’ (ग़ज़ल संग्रह) रचनाकार – दुष्यंत कुमार प्रकाशन वर्ष – 1975 ई. संकलित ग़ज़लें- 64 समर्पित – छोटे…

वर्णों का उच्चारण स्थान और प्रयत्न (भाग–1: उच्चारण स्थान)

(Pronunciation effort and its Classification: Part-1) उच्चारण स्थान- किसी वर्ण का उच्चारण करते समय अन्दर से आने वाला श्वास वायु जिस स्थान पर आकर रूकती है या जहाँ पर बिना रोके उसके निकलने का मार्ग बनाया जाता है। वही उस वर्ण का उच्चरण स्थान कहलाता है। लक्षण- किसी भी वर्ण को बोलते समय वायु तथा जिह्वा मुख के…

अविकारी शब्द ‘अव्यय’

अविकारी शब्द या अव्यय: ऐसे शब्द जिनके स्वरुप में लिंग, वचन, काल, पुरुष एवं कारक आदि के प्रभाव से कोई विकार नहीं होता अथार्त परिवर्तन नहीं होता है। वे अविकारी शब्द कहलाते हैं। अविकारी को ही ‘अव्यय’ कहते हैं। ‘अव्यय’ दो शब्दों के मिलने से बना है- अ + व्यय = अव्यय। ‘अ’ का अर्थ…

कर्म के आधार पर क्रिया के भेद:

क्रिया की परिभाषा-  जिस शब्द से किसी कार्य का करने या होने का बोध होता है, उसे ‘क्रिया’ कहते हैं। जैसे- खाना, पढ़ना, लिखना, चलना, सोना आदि। क्रिया एक विकारी शब्द है, जिसका  रूप लिंग, वचन और पुरुष के अनुसार बदलते रहता है। क्रिया के मूल रूप को ‘धातु’ कहते हैं, अर्थात जिन मूल अक्षरों से क्रियाएँ…

शब्द-भेद (Parts Of Speech)

विकार की दृष्टि से शब्दों के दो भेद होते हैं– (1) विकारी शब्द और (2) अविकारी शब्द (1) विकारी शब्द के चार प्रकार होते हैं- 1. संज्ञा, 2. सर्वनाम, 3. विशेषण और 4. क्रिया। (2) अविकारी शब्द के चार प्रकार होते हैं- 1. क्रिया विशेषण, 2. सम्बन्ध बोधक, 3. समुच्चय बोधक और 4. विस्मयादि बोधक…

वाच्य (Voice)

‘वाच्य’ का शब्दिक अर्थ है- ‘बोलने का विषय’। क्रिया से जिस रूपांतरण से यह जाना जाए कि क्रिया द्वारा किये गए विधान (कही गई बात) का विषय कर्ता है, कर्म है या भाव है उसे ‘वाच्य’ कहते हैं। हिंदी में वाच्य तीन प्रकार के होते हैं- 1. कर्तृवाच्य (Active Voice) 2. कर्मवाच्य (Passive Voice) 3.…

वृत्ति/क्रियार्थ (Mood)

सहायक क्रिया के वे अंश जिनसे उस क्रिया व्यापार के प्रति वक्ता की मानसिक अभिवृत्ति या ‘मूड’ (Mood) का पता चले वे ‘वृत्ति’ कहलाते हैं। वृत्ति का ‘क्रिया (प्रयोजन) /क्रियार्थ’ भी कहते हैं। क्रिया के जिस रूप से वक्ता अथवा लेखक के मन की स्थिति का ज्ञान होता है,, उसे ‘वृत्ति’ कहते हैं। जैसे- आज्ञा,…

पक्ष (Aspect)

सहायक क्रिया के वे अंश जो क्रिया की अपूर्णता, पूर्णता किसी वस्तु या व्यक्ति की अवस्था या स्थिति आदि की सूचना देते हैं वे ‘पक्ष’ (Aspect)सूचक अंश (चिह्न) कहे जाते हैं। प्रत्येक कार्य किसी कालावधि के बीच होता है जो प्रारंभ से अंत तक फैला रहता है। इस फैली हुई कालावधि  में कार्य व्यापार को…

काल (Tense)

सहायक क्रिया क्रियापद पदबंध में ‘मुख्य क्रिया’ (सरल, संयुक्त, नामिक, मिश्र व्युत्पन्न आदि) को छोड़कर जो भी अंश शेष रह जाता है वह ‘सहायक क्रिया’ (Auxiliary verv) का होता है। जहाँ मुख्य क्रिया ‘क्रिया पदबंध’ को मुख्य अर्थ या कोशगत अर्थ देती है वहाँ सहायक क्रिया से व्याकरणिक अर्थ को सूचना मिलती है। काल, पक्ष,…

नीरव वेदना की दीपशिखा: महादेवी

नीरव नभ की श्यामल छाया मेंकिसने यह करुणा-दीप जलाया?किस वीणा के मूक स्वरों नेअश्रु-संगीत जगत में गाया? वह तुम ही थीं-वेदना की वेणु पर जीवन का राग सुनाती,निशा की नीरव गोद में बैठपीड़ा की ज्योति जगाती। तुम्हारी पंक्तियों मेंदुख की मंदाकिनी बहती है,हर अक्षर में मानोआत्मा की अनुगूँज रहती है। नील गगन की उदास चाँदनी-सीतुम्हारी…

ईश्वर की असीम अनुकंपा के दस अद्भुत उपहार

हम जीवन की आपाधापी में जब उलझे हुए रहते हैं, तब अक्सर उन चमत्कारों को भूल जाते हैं जो हर क्षण हमारे साथ घटित हो रहे होते हैं। हम बड़ी-बड़ी उपलब्धियों के लिए तो ईश्वर को याद करते हैं, पर उन सहज, निरंतर और नि:शब्द उपहारों पर ध्यान नहीं देते जिनके सहारे हमारा जीवन चल…

कलम है जीवन की नैया (कविता)

कलम है जीवन की नैया,शब्द बने इसके पतवार,सोच के सागर पार कराती,दिखलाती सत्य का संसार। अज्ञान की काली घटाओं में,यह दीपक बन जलती है,झूठ, भ्रम और अंधकार को,क्षण भर में ही छलती है। जहाँ मौन बोझिल हो जाए,वहाँ कलम स्वर पाती है,दबी हुई हर पीड़ा को,काग़ज़ पर उतार लाती है। सत्ता से प्रश्न पूछे जो,वह…

“करुणा की दीपशिखा : महादेवी”

वेदना की वीणा परसजाया जिसने संगीत जीवन का शब्दों में आँसू पिरोकरमानवता का दीप जलाया। वह स्वर थी नीरव पीड़ा का,वह करुणा की गहरी धारा थी,हिंदी के नभ में चाँद बनीवह काव्य-गगन की तारा थी। मृदुल भाव की मंद बयार,संवेदना का अमर उजाला,हर पंक्ति में झरता दिखताहृदय का निर्मल नीर निराला। नारी के मौन संतापों…

क्यों जिंदगी इम्तिहान लेती है?

पता नहीं क्यों? जिंदगी इतना, इम्तिहान क्यों लेती है? खुशियों को राहें छीन, गम ही गम देती है जो ढूँढ़ता है चैन, उसे वह भटकाती है दिल के उजाले को, वह अक्सर धूँधला बनाती हैं कभी आशाओं की दीप जलाती है तो कभी वह आँसुओं से बुझाती है हँसी के पल दिखाकर वह न जाने…

“नीर भरी संध्या की वेणु”

नीलिमा के नीरव आँगन मेंकिसने यह दीप जलाया है?किसके करुण कपोलों सेअश्रु-मोती झर आया है? शायद किसी विरही बादल नेमन की पीड़ा गाई होगी,या चाँदनी की मौन लहर नेअंतर की वीणा छेड़ी होगी। वन की पथराई छाया मेंजब पवन सिसकियाँ भरता है,तब लगता है कोई प्राची सेमूक व्यथा का पत्र धरता है। ओ अज्ञात पथिक!तुम्हारे…

स्वामी विवेकानंद : माँ की शिक्षा

स्वामी विवेकानंद का बचपन का नाम नरेंद्र था। वे बचपन में बहुत चंचल, जिज्ञासु और साहसी स्वभाव के थे। उनके व्यक्तित्व के निर्माण में उनकी माता भुवनेश्वरी देवी की शिक्षा और संस्कारों का बहुत बड़ा योगदान था। नरेंद्र की माँ उन्हें बचपन से ही सत्य, साहस और निडरता की शिक्षा देती थीं। वे अक्सर उन्हें…

“शेर की तरह साहसी बनो : विवेकानंद का प्रेरक प्रसंग”

स्वामी विवेकानंद बचपन से ही अत्यंत निडर, साहसी और तर्कशील स्वभाव के थे। उनका बाल्यकाल का नाम नरेंद्रनाथ था। वे किसी भी बात को बिना सोचे-समझे स्वीकार नहीं करते थे, बल्कि हर बात को तर्क और अनुभव की कसौटी पर परखते थे। एक बार की बात है, नरेंद्र अपने मित्रों के साथ एक पेड़ पर…

“एकाग्रता की शक्ति” : स्वामी विवेकानंद

पत्थर भी ध्यान नहीं तोड़ सके स्वामी विवेकानंद को ध्यान और साधना से विशेष लगाव था। वे प्रायः एकांत स्थानों में बैठकर ध्यान किया करते थे। एक बार की बात है, वे नदी के किनारे शांत वातावरण में ध्यानमग्न होकर बैठे थे। उसी समय कुछ शरारती युवक वहाँ से गुज़रे। उन्होंने स्वामी जी को ध्यान…

स्वामी विवेकानंद की बुद्धिमत्ता और मर्यादा

“सच्ची शिक्षा वही है जो मनुष्य के चरित्र, विचार और जीवन को महान बनाती है।” एक बार स्वामी विवेकानंद विदेश यात्रा पर थे। उनके तेजस्वी व्यक्तित्व, प्रभावशाली वाणी और उच्च विचारों से अनेक लोग प्रभावित होते थे। एक दिन एक विदेशी महिला उनसे अत्यंत प्रभावित होकर उनके पास आई और बोली— “मैं आपसे विवाह करना…

नेताजी सुभाषचंद्र बोस : तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा

भारत को अंग्रेजों के शासन से स्वतंत्र कराने के लिए अनेक क्रांतिकारियों ने अपना बलिदान दिया है। उन्हीं क्रांतिकारियों में से एक क्रांतिकारी थे नेताजी सुभाषचंद्र बोस। बालक सुभाष बचपन से ही राष्ट्राभिमानी थे। उन्होंने भारत को स्वतंत्र कराने के लिए देश के युवकों को आवाहन कर नारा दिया था कि, ‘तुम मुझे खून दो,…

स्वामी विवेकानंद : उत्तम सीख का महत्व

एक बार की बात है। स्वामी विवेकानंद खेतरी (राजस्थान) गए हुए थे। वहाँ के राजा ने उनके सम्मान में एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम में मैनाबाई नामक एक प्रसिद्ध नृत्यांगना ने नृत्य प्रस्तुत किया। जब नृत्य आरंभ हुआ, तो स्वामी विवेकानंद उस वातावरण को अपने संन्यासी आदर्शों के अनुकूल नहीं समझ पाए…

अज्ञेय की कविता ‘साँप’

अज्ञेय की कविता ‘साँप’ : विवेचना ‘साँप’ कविता में कवि साँप को प्रतीक बनाकर नगरीय सभ्यता में रहने वाले मनुष्य के दोगले और कुटिल चरित्र पर तीखा व्यंग्य करते हैं। कवि कहता है कि साँप नगर में तो बस गया है, पर वह सभ्य नहीं बन पाया। इसके माध्यम से कवि यह संकेत देता है…

स्वामी विवेकानंद : धैर्य और विश्वास

स्वामी विवेकानंद का जीवन संघर्ष, साधना और आत्मविश्वास की अद्भुत गाथा है। उनका व्यक्तित्व हमें यह सिखाता है कि विपरीत परिस्थितियाँ भी यदि धैर्य और विश्वास से सामना की जाएँ, तो सफलता स्वयं मार्ग खोज लेती है। एक बार की बात है जब स्वामी विवेकानंद अमेरिका में आयोजित विश्व धर्म महासभा में भाग लेने गए।…

स्वामी विवेकानंद : आज्ञा माँ शारदा की

एक बार स्वामी विवेकानंद ने माँ शारदे से पूछा, “माँ क्या मैं दुनिया को धर्म का उपदेश देने जा सकता हूँ?” माँ शारदे ने उनकी तरफ देख कर कहा- “बेटा, तुम्हारा कार्य दुनिया के लिए है। जब तक तुम दूसरों के लिए नहीं जिओगे, तुम्हारी साधना अधूरी रहेगी।” इसी प्रेरणा ने उन्हें जीवन भर समाजसेवा…

सार्वनामिक विशेषण के भेद

सार्वनामिक विशेषण के भेद: (मानक हिंदी व्याकरण तथा रचना के अनुसार) कुछ सर्वनाम जब किसी संज्ञा की विशेषता बताने के लिए विशेषण के रूप में प्रयुक्त होते हैं तब उन्हें ‘सार्वनामिक विशेषण’ कहा जाता है। जैसे- 1. मेरी किताब 2. अपना बेटा 3. किसी का मकान 4. कौन-सी कमीज 5. कोई लड़का आदि। यहाँ, मेरी,…

स्वामी विवेकानंद का ‘बच्चों से प्यार’

स्वामी विवेकानंद को बच्चों से बहुत लगाव था। एक बार उन्होंने कहा था- “बच्चों के हृदय में ईश्वर का वास होता है। अगर हम उन्हें सही दिशा दिखाएँगे, तो वे समाज का भविष्य बदल सकते है।” वे बच्चो के साथ खेलते और उन्हें शिक्षा के महत्व को समझाते थे। स्वामी विवेकानंद केवल एक महान संन्यासी…

नेताजी सुभाष चन्द्रबोस : ‘सेवा ही सच्चा राष्ट्र धर्म है’

सुभाषचंद्र बोस के घर के सामने एक बुढ़िया भिखारिन रहती थी। वे देखते थे कि वह हमेशा भीख मांगती थी। उसका दर्द साफ दिखाई देता था। उसकी ऐसी अवस्था देखकर उनका दिल दहल जाता था। भिखारिन से मेरी हालत कितनी अच्छी है यह सोचकर वे स्वयं शर्म महसूस करते थे। उन्हें यह देखकर बहुत कष्ट होता…

कर्म कारक और संप्रदान कारक में अन्तर

कर्म कारक- शब्द के जिस रूप पर क्रिया का फल पड़ता है उसे ‘कर्म कारक’ कहते हैं। ‘कर्म कारक’ की  विभक्ति ‘को’ है। कभी-कभी ‘को’ विभक्ति का प्रयोग नहीं भी होता है। जैसे- 1. मोहन पत्र लिखता है। 2. मैंने पत्र लिखा। 3. सोहन ने मोहन को समझाया। विभक्ति रहित कर्म को पहचानने के लिए…

नेताजी सुभाषचंद्र बोस : “निष्काम सेवा”

ओडिशा के कटक शहर स्थित उड़िया बाजार में एक बार प्लेग फैल गया। केवल बापू पाड़ा मोहल्ला इससे बचा हुआ था क्योंकि वहां पढ़े-लिखे लोग रहते थे और वे आसपास की सफाई पर ध्यान देते थे। वहां के कुछ लड़कों ने सफाई अभियान चलाने के लिए एक दल बनाया जिसमें 10 साल के बच्चे से…

नेताजी सुभाषचंद्र बोस : ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा।’

भारत को अंग्रेजों के शासन से स्वतंत्र कराने के लिए अनेक क्रांतिकारियों ने अपना बलिदान दिया है। उन्हीं क्रांतिकारियों में से एक क्रांतिकारी थे नेताजी सुभाषचंद्र बोस। बालक सुभाष बचपन से ही राष्ट्राभिमानी थे। उन्होंने भारत को स्वतंत्र कराने के लिए देश के युवकों को आवाहन कर नारा दिया था कि, ‘तुम मुझे खून दो,…

सुभाषचंद्र बोस ‘हिंदी भाषा का महत्व’

नेताजी सुभाषचंद्र बोस उन दिनों बर्मा में थे। वे अंग्रेजों के विरुद्ध आजाद हिन्द फ़ौज के सिपाहियों को युद्ध के लिए तैयार कर रहे थे। बर्मा में व्यवसाय करने वाले भारतीयों ने नेताजी से संपर्क किया। नेताजी के इस काम के लिए उन व्यापारियों ने काफी धन जमा किया ताकि इस राष्ट्रीय कार्य में किसी…

अकर्मक और सकर्मक क्रिया की पहचान

जब वाक्य में प्रयुक्त क्रिया से ‘क्या’, ‘किसी’ और ‘किसको’ प्रश्नों के उत्तर मिले या यह प्रश्न बनता है, तब वहाँ क्रिया सकर्मक होती है। जैसे- 1. राम पुस्तक पढ़ता है। 2. राधा पत्र लिखती है 3. रामू जूते बना रहा है। 4. एक महिला आलू खरीद रही है। 4. राधा टीवी देख रही है।…

पोखरा ठकुराइन का (कविता)

एक दिन पोती ने दादी से पूछा-“दादी, ये बताओ न,सब कुछ ठकुराइन का ही क्यों है?” दादी मुस्कुराईं,झुर्रियों में छिपी कहानियों का पन्ना खोला-“क्यों बेटी, क्या पूछा तूने?” पोती बोली- पोखरा ठकुराइन का,कुआँ ठकुराइन का,तो फिर पानी किसका दादी?जिससे सबकी प्यास बुझे,उसपर भी उनका ही अधिकार है क्या? फुलवारी ठकुराइन की,आम-इमली ठकुराइन की,तो फिर फूलों…

अंजान परी एलिशा

मलेशिया का लंकावी समुद्र तट, सांझ की सुनहरी धूप लहरों पर नाच रही थी। हम दोनों कुछ देर सागर में तैरने के बाद तट के किनारे चादर बिछाकर बैठे हुए थे। हवा में सनसनाहट थी और समुद्र के किनारे पेड़ों की सरसराहट मिलकर एक अद्भुत संगीत सुना रही थी। समुद्र की लहरें जैसे अपने ही…

पुकार गौरैया की (कविता)

प्रकृति की गोद में रहती,नन्ही-सी प्यारी गौरइया।सबेरे गीत सुनाती सबको,जगाती अपने नौनिहालों को। था पेड़ों पर उसका घरौंदा,फूलों से महका था आँगन।मानव ने जब कटवाए पेड़,लूट गया उसका मधुर जीवन। रोकर फिर, बोली गौरइया —“अब घर मैं कहाँ बनाऊँगी?कहाँ मिलेगा ठिकाना मुझको,अपने बच्चे कैसे पालूँगी?” बच्चों ने दी उसको हिम्मत —“मत रो, हम लाएँगे हरियाली।हम…

What’s something you would attempt if you were guaranteed not to fail. I will increase my action

बालक नरेंद्र (स्वामी विवेकानंद)

बचपन से ही नरेंद्र मेधावी थे। वे जो कुछ भी कहते, उनके साथी मंत्रमुग्ध होकर उन्हें सुनते थे। एक दिन कक्षा में वे कुछ मित्रों को कहानी सूना रहे थे। उनके सभी साथी सुनने में मुग्ध थे। उन्हें पता ही नहीं चला कि शिक्षक कक्षा में आ गए और पढ़ाना शुरू कर दिया है। इसी…

कौवा और कछुआ (बाल कथा)

एक समय की बात है। एक गाँव में एक बरगद के पेड़ पर एक चतुर कौवा रहता था। पेड़ के पास ही एक तालाब में एक कछुआ भी रहता था। कछुआ बहुत ही आलसी था। कुछ दिनों के बाद कछुआ भी पेड़ के कोटर में आकर रहने लगा। कौवा रोज मेहनत करके अपने लिए खाना…

‘नदी के द्वीप’-‘अज्ञेय’ (कविता) महत्वपूर्ण तथ्य

*यह कविता अज्ञेय द्वारा 11 दिसंबर, 1949 ई. को इलाहबाद में लिखी गयी। *यह 1965 ई. में आये उनके काव्य संग्रह ‘हरी घास पर क्षण भर’ में संकलित है। यह ‘प्रतीकात्मक’ कविता है। *‘नदी’ परंपरा और संस्कृति का प्रतीक है और ‘द्वीप’ व्यक्तित्व का प्रतीक है। *विशिष्ट व्यक्तित्व होना दुर्भाग्य नहीं सौभाग्य की बात है।…

मछली और नदी का प्रेम (बाल कथा)

एक छोटी सी मछली नदी में रहती थी। उसके मन में डर लगा रहता था कि कहीं उसे कोई बड़ी मछली खा न जाए। नदी एक दिन मछली से पूछी, तुम इतना डरती क्यों हो? मछली बोली मैं बहुत छोटी हूँ, इसलिए मैं बहुत डरती हूँ। नदी मछली से बोली, तुम डरो नहीं तेज तैरना…

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (संघ प्रार्थना)

“नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे त्वया हिन्दुभूमे सुखं वर्धितोऽहम्।” अर्थ- हे! सदा सुख-स्नेह और प्यार करने वाली मातृभूमि, मैं तुझे सदैव नमस्कार करता हूँ। तूने हमें सुख से लालन-पालन किया है। “महामङ्गले पुण्यभूमे त्वदर्थेपतत्वेष कायो नमस्ते नमस्ते॥” अर्थ- हे पुण्यभूमि! हे मंगलमयी मातृभूमि! तेरी सुरक्षा और सेवाकार्य में मेरा यह शरीर समर्पित हो। मैं तुझे बारंबार…

वर्णों की बूंदें (कविता)

अक्षर हैं वर्णों की बूँदें, मन की खुशबू सी महके। सार्थक स्वर, मधुर व्यंजन, मिलकर रच दें भावों का संगम। कभी बने ये गीत सुहाने, कभी सजाएँ सपनों के ठिकाने। शब्दों के साथ खिले अक्षर, भावनाओं के दीप मिलें। ‘अ’ से आती अरुण किरण, ‘क’ से खिलता नद में कमल। ‘म’ से बनता मधुर मिठास,…

मुकुटधर पांडेय (कविता)

छत्तीसगढ़ की पावन धरा पर,जन्मे कवि महान।छायावाद के जनक बने वे,दिलाया हिंदी को सम्मान॥   ‘प्रेमपथिक’ लिखकर उन्होंने,कविता को दी राह नई।प्रसाद, पंत, निराला और महादेवी को,दिखलाया उन्होंने चाह सही॥ प्रकृति-प्रेम और संवेदनाएँ,थी जिनकी पहचान।हृदय की गहराइयों से,गाया प्रकृति का गान॥ प्रेम की पगडंडी पर,चला कवि का कोमल मन।छाया में है ढूँढ़ता,सुख, शान्ति और अमन॥…

रघुवीर सहाय संपूर्ण साहित्यिक जीवन परिचय

कुछ होगा/ कुछ होगा अगर मैं बोलूँगा/ न टूटे न टूटे तिलिस्म सत्ता का/ मेरे अन्दर एक कायर टूटेगा जन्म- 9 दिसंबर 1929 ई. लखनऊ (उ.प्र) निधन- 30 दिसंबर 1990 ई. दिल्ली में हुआ था। पिता- हरदेव सहाय माता- तारादेवी थीं। ये प्रगतिशील काव्यधारा ‘नई कविता’ के प्रतिनिधि कवि थे। कवि के रूप में इन्हें…

रामवृक्ष बेनीपुरी ‘माटी की मूरतें’ महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तरी

1. ‘माटी की मूरतें’ शब्द-चित्र संग्रह के रचनकार का नाम हैं ? A. हरिशंकर परसाई    B. रामवृक्ष बेनीपुरी C. रामविलास शर्मा    D. सरदार पूर्ण सिंह 2. ‘माटी की मूरतें’ शब्द-चित्र संग्रह के प्रथम संस्करण में कुल कितने शब्द-चित्र हैं? A. ग्यारह   B. बारह   C. तेरह D. चौदह 3. ‘माटी की मूरतें’ शब्द-चित्र…

वर्ण और वर्णमाला से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तरी

1. भाषा की सबसे लघुतम सार्थक इकाई क्या कहलाती है?     A. वर्ण  B. वाक्य  C. शब्द  D. अक्षर 2. ध्वनियों के मेल से बने सार्थक वर्ण समुदाय को क्या कहते है? A. अक्षर   B. वाक्य   C. अर्थ   D. शब्द 3. एक ध्वनि या एकाधिक ध्वनियों की इकाई को, जिसका उच्चारण एक झटके में होता है,…

चिंतन

     अगला दर्द भी सह लेंगे, पिछला तो भुला लेने दे॥ 2. हर कदम हमने, जीने के लिए समझौता किया।      शौक तो ख़ुशी से जीने का था, लेकिन घुट-घुट जिया॥ 3. हम दिल के बुरे नहीं है, हमारी भी कुछ कहानी है।      बदली हुई जो लगती हूँ, ये अपनों की मेहरबानी है॥ 4.…

आचार्य महावीर प्रसाद द्वेवेदी जीवन परिचय

जन्म- सन् 1864 ई. में उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले के दौलतपुर गाँव में हुआ था। पिता- पंडित रामसहाय द्विवेदी थे। कहा जाता है कि उन्हें ‘महावीर का इष्ट’ था, इसलिए पिता ने अपने पुत्र का नाम ‘महावीर’ रखा। माता- ज्योतिष्मती थी। निधन- 21 दिसम्बर  1938 ई. को रायबरेली में हुआ। * महावीर प्रसाद द्विवेदी जी…

पंडित रामनरेश त्रिपाठी संपूर्ण परिचय

ये पूर्वछायावादी युग के हिंदी कवि, उपन्यासकार और संपादक थे। रामनरेश त्रिपाठी ने ‘मिलन’, ‘पथिक’ और ‘स्वप्न’ जैसी राष्ट्रीय भावना से ओतप्रोत रचनाएँ लिखी। इन्होंने ग्राम गीतों के संकलन ‘कविता कौमुदी’ का संपादन किया और बाल साहित्य के विकास में भी अपना योगदान दिया। ये हिंदी साहित्य सम्मलेन प्रयाग के प्रचार मंत्री भी रहे थे।…

‘आधुनिक काल’ के प्रमुख आलोचकों के महत्वपूर्ण कथन – भारतेंदु युग से नई कविता तक

1. “वे पूरबीपन की परवाह न करके अपने बैसवारे की ग्राम्य    कहावतें और शब्द भी बेधड़क रख दिया करते थे।”    शुक्ल जी की इन पंक्तियों का संबंध किससे है?     (प्रतापनारायण मिश्र, UP PGT, 2013) 2. “घूरे क लत्ता बीनै, कनातन क डौल बाँधे’ जैसा शीर्षक किस लेखक ने दिया है?    (प्रतापनारायण…

तन्हाई (कविता)

लगता है अब रातें भी मुझसे रूठने लगी हैं, हर यादें मेरे सीने में ज्वाला सी धधकने लगी हैं। अब तो चाँद भी मेरे छत से कहीं दूर चला जाता है, मेरी दर्द को देख कर, वह भी मुझ से कतराता है। मेरे भींगे हुए नैनों से डर कर, नींदें भी चली गई हैं, बीती…

मानव हूँ मैं (कविता)

मानव हूँ मैं, इसलिए डरता हूँ, सपनों में भी सत्य से लड़ता हूँ। भीड़ में रहकर भी, अकेला रहता हूँ, अपने ही साये से, अक्सर मैं डरता हूँ। आँधियाँ मिटाना चाहती है मुझे, दीपक की तरह सदा कपकपाता हूँ। झूठ के बाजार में सत्य टिकता कहाँ, फिर भी सच कहने में काँपने लग जाता हूँ।…

हिंदी मानक ‘भाषा’ पर आधारित महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तरी (भाग-2)

1. दूसरे किस देश में हिंदी भाषा का प्रयोग लिखने व बोलने के लिए किया जाता है? A. दक्षिण अमेरिका     B. मॉरीशस C. ऑस्ट्रेलिया         D. पाकिस्तान 2. प्रारंभ में ‘पिंगल’ नाम किस बोली के लिए प्रयुक्त होता था? A. खड़ी बोली  B. मारवाड़ी  C. ब्रजभाषा  D. अवधी 3. नीचे लिखे बोलियों में से कौन सी…

हिंदी मानक ‘भाषा’ पर आधारित महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तरी (भाग-1)

1. ‘खड़ी बोली’ शब्द का सर्वप्रथम उल्लेख किसने किया था? A. इंशाअल्लाह खां  B. लल्लूजी लाल (प्रेमसागर में) C. सदल मिश्र     D. सदासुखलाल 2. मानकीकरण का सर्वप्रथम उल्लेख किसने किया? A. मैक्समूलर B. गिलक्रिस्ट C. ग्रियर्सन D. एथरिंगटन 3. द्वित व्यंजनों का प्रयोग किसमें होता है? A. कौरवी में          B. भोजपुरी में   C.…

रामचन्द्र शुक्ल की दृष्टि में ‘कामायनी’ का मूल्यांकन

* हिंदी साहित्य के इतिहास’ में जयशंकर प्रसाद जी की चर्चा आधुनिक काल, प्रकरण-4 के अंतर्गत, काव्य खंड, नई धारा, तृतीय उत्थान में किया गया है। तृतीय उत्थान के अंतर्गत शुक्ल जी ने जयशंकर प्रसाद को 11वें नंबर पर जगह दिया है। * किसी एक विशाल भावना को रूप देने की ओर भी अंत में प्रसाद जी…

रामचंद्र शुक्ल की दृष्टि में जयशंकर प्रसाद

* हिंदी साहित्य के इतिहास’ में जयशंकर प्रसाद जी की चर्चा आधुनिक काल, प्रकरण-4 के अंतर्गत, काव्य खंड, नई धारा, तृतीय उत्थान में किया गया है। तृतीय उत्थान के अंतर्गत शुक्ल जी ने जयशंकर प्रसाद को 11वें नंबर पर जगह दिया है। * ये पहले ब्रजभाषा की कविताएँ लिखा करते थे जिनका संग्रह ‘चित्राधार’ में…

छायावाद के प्रतिनिधि कवि सुमित्रानंदन ‘पंत’

जीवन परिचय- सुमित्रानंदन पंत जन्म- 20 मई 1900 ई. कौशाबी ग्राम, अल्मोड़ा, जिला उत्तराखंड (कुर्मांचल प्रदेश) में हुआ। बचपन का नाम- गोसाई दत्त था।   माता का नाम- सुमित्रा था। माता-पुत्र दोनों का नाम मिलाकर इनका नाम पड़ा, ‘सुमित्रानंदन’    निधन- 28 दिसंबर, 1977 ई. इलाहबाद सुमित्रानंदन पंत के उपनाम: 1. छायावाद का विष्णु (कृष्णदेव…

छायावाद के प्रतिनिधि कवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

जीवन परिचय: सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ जन्म – 21 फरवरी 1899 ई. को बंगाल के महिषादल रियासत (जिला-मिदनापुर) में हुआ था। बसंत पंचमी पर इनका जन्मदिन मनाने की परंपरा 1930 में शुरू हुई। इनके पिता पंडित रामसहाय त्रिपाठी उन्नाव (बैसवाड़ा) के रहने वाले थे और महिषादल में सिपाही की नौकरी करते थे। मूल रूप से वे…

छायावाद की प्रतिनिधि कवयित्री महादेवी वर्मा

जीवन परिचय- महादेवी वर्मा जन्म- 24 मार्च 1907 ई. को (होली के दिन) फर्रुखाबाद, उ.प्र. निधन- 11 सितंबर, 1987 ई. इलाहाबाद पिता- श्री गोविंद प्रसाद वर्मा और माता- हेमरानी देवी थी। पति- रुनारायण वर्मा थे। * 11 वर्ष की अवस्था में महादेवी वर्मा जी का विवाह रुनारायण वर्मा के साथ हुआ था। * महादेवी वर्मा…

गज़ल – 2

छिपा के नयनों में आँसू मुस्कुराना पड़ा दिल के दर्द को हँसी में सजाना पड़ा। जो अपना था, वही हमसे दूर हो गया भुलाने के लिए उसे, दिल को समझाना पड़ा। हमसे पूछता रहा, वो वफ़ा के मायने जबाब में मुझे, खुद को मिटाना पड़ा। अँधेरे में चले थे, साथ हम उजाला के लिए मुझे…

बुझीं त जानी (भोजपुरी बुझौअल) : Riddles

लोक साहित्य की जब भी बात चलती है, तब मन लौट कर लोक जन-जीवन की ओर पहुँच जाता है। जहाँ जाकर लोकगीत, लोक-कला, कथा-कहावतों और लोकोक्तियों का दिव्य दर्शन होता है। मन आनंद विभोर हो जाता है। यह अलिखित लोक साहित्य जन-जीवन के जिह्वा पर होता है और पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ता रहता है।…

मोनालिसा (कविता)

लियो की तूलिका से निकली एक छवि अद्भूत निराली रहस्य भरी आँखों में उसकी भरी थी अनगिनत कहानी। मुस्कान में थी जादू उसके देख जैसे समय ठहर जाए। पड़े नजर जिसकी भी उसपर दिल में हलचल सी हो जाए। सदियों से वह रुकी रही उसकी आकर्षण भी वही रही करे सवाल हर युग उससे पर…

क्षणिकाएँ (सावन)

1. अंबर नाचे झूम-झूम   ओढ़े चुनरियाँ बूंदों की   धरती नाचे घूम-घूम   सावन की हरियाली में 2. सावन में बगिया महके   लगी मेहंदी हथेलियों पर   सावन आया संग सखी   गाएँ गीत हम बगियन में 3. बादल जब गाए प्रेम राग   नाचे मोर बगियन में   सावन में हर पत्ता…

क्षणिकाएँ (सावन)

1. अंबर नाचे झूम-झूम   ओढ़े चुनरियाँ बूंदों की   धरती नाचे घूम-घूम   सावन की हरियाली में 2. सावन में बगिया महके   लगी मेहंदी हथेलियों पर   सावन आया संग सखी   गाएँ गीत हम बगियन में 3. बादल जब गाए प्रेम राग   नाचे मोर बगियन में   सावन में हर पत्ता…

क्षणिकाएँ (सावन)

1. अंबर नाचे झूम-झूम   ओढ़े चुनरियाँ बूंदों की   धरती नाचे घूम-घूम   सावन की हरियाली में 2. सावन में बगिया महके   लगी मेहंदी हथेलियों पर   सावन आया संग सखी   गाएँ गीत हम बगियन में 3. बादल जब गाए प्रेम राग   नाचे मोर बगियन में   सावन में हर पत्ता…

कवि जाने कविता की रीति (कविता)

कवि जाने कविता की रीति शब्दों के मन की भावों की प्रीति छंदों में उसकी गहरी रस धार अंतर्मन एहसास की पार । वर्णों की मेला, अर्थों की क्रीड़ा छुपी हुई हैं हर पंक्ति में वेदना, स्नेह, पीड़ा, और दर्द दिखाती अपनी जीवन लीला । बिंब, प्रतीक का सुंदर सुयोजन कभी व्यंग्य, कभी मधुर प्रयोजन…

मिलन का दर्द (कविता)

जब तक मिली न थी उनसे, तबतक बिछड़ने का डर था साथ होने के बाद भी, दिल में गहराई का असर था। उनकी आँखों में छीपे सवाल का मौन मेरा जवाब था दोनों के बीच का सन्नाटा, ही जैसे संवाद था। थी मैं उनकी धडकन मगर मुझे उनका इंतजार था उनकी बाहों में राहत थी…

क्षणिकाएँ (सावन)

1. अंबर नाचे झूम-झूम   ओढ़े चुनरियाँ बूंदों की   धरती नाचे घूम-घूम   सावन की हरियाली में 2. साजन में बगिया महके   लगी मेहंदी हथेलियों पर   सावन आया संग सखी   गाएँ गीत हम बगियन में 3. बादल जब गाए प्रेम राग   नाचे मोर बगियन में   सावन में हर पत्ता…

बहुत जी ली, औरों की जिंदगी (कविता)

बहुत जी ली, औरों की जिंदगी अब अपनी जिंदगी जीती हूँ मेरा जो मन कहता है, मैं वही करती हूँ दिखावें की जिंदगी न तब जीति थी और न अब जीति हूँ बीती हुई जिंदगी को भूल नई जिंदगी जीने की कोशिश करती हूँ। कभी किसी की जीवनी, संस्मरण पढ़ने लगती हूँ, कभी-कभी कुछ लिखने…

गजल – 1

दिल के पन्नों में यादों की कहानी लिखी, उन यादों को दिल में सहेजकर रखी। विधू ने कहा, तुमसे शिकायत कर दूं, तेरी स्मृति को हमने छिपाकर रखी। दिल की बगिया ने देखते रहे सपने तेरे, हर पल सूरत तेरी अनुरागी रखी। वेदना जो दिल में थे हमने छुपाकर रखे, पर होठों पर तेरी हँसी…

गम न कर जिंदगी (कविता)

अब और न गम कर जी ले जिंदगी हर पल को अपना सनम (प्रिय) कर जिंदगी गम ना कर जी ले जिंदगी कल किसने देखा है यूँ ना सिसक तू   आज की ख़ुशी को   मरहम कर जिंदगी गम ना कर जी ले जिंदगी छिपा है सबक हर आँसू में डर मत जाना टूटे…

वो कौन थी? मैं नहीं जानती (कविता)

रोज की तरह उस दिन भी मैं बस अड्डे पर खड़ी थी, बार-बार उस ओर देख रही थी जिस ओर से बस आती थी। अचानक मेरी नजर थोड़ी दूर से आ रही  उस अधेड़ बुजुर्ग पर पड़ी जिसकी झुरियों की रेखाएँ उसके जीवन की गाथा सुना रही थी पता नहीं वो कौन थी ? तन…

पुरुष विमर्श (कविता)

सब कहते हैं कि लडकियाँ परायी होती हैं लेकिन समय बदल गया है कोई माने या न माने,  लडकियाँ नहीं लड़के पराये होते हैं। कुछ कहते हैं, मर्द को दर्द नहीं होता कौन कहता है? मर्द को दर्द नहीं होता? दर्द होता है, लेकिन किससे कहे वह  कौन सुनता है उसकी? इसीलिए कहा जाता है…

मैं गांधारी नहीं हूँ ! (कविता)

गांधारी नहीं मैं कि  सत्य का अपमान करूँ, पत्थर की मूर्ति नहीं मैं  जो अपनी आँखों पर पट्टी बाँध लूँ।   हर अन्याय को सहती रहूँ, यह मेरा धर्म नहीं सिर्फ आँसू बहाती रहूँ,    यह मेरा कर्म नहीं। हर अन्याय से लड़ने की रखती हूँ मैं साहस। झूठ के आगे नहीं झुकने की रखती हूँ मैं…

नालंदा (कविता)

जहाँ कभी जलता था ज्ञान का दीप आज खड़ा है वीरान खंडहरों के बीच लिखी है पत्थरों पर समय की कहानी झलकती है संस्कृति, दिखती है निशानी।  जहाँ गूँजा करते थे ज्ञान के गीत वहाँ गूँजते हैं अब सन्नाटे की गूँज थी चहल-पहल जहाँ विद्यार्थियों की अब उड़ते हैं सन्नाटे में मिट्टी और धूल। जहाँ…

हाथों की लकीरें (कविता)

माथे की लकीरों को देखते ही उसने कहा, ओह! तुम्हारे तो भाग्य ही नहीं है!! कैसे रहोगी? कैसे जियोगी? खैर! दुखी होकर भी हमेशा तुम मुस्कुराती रहोगी मैं सोंची, उसे क्या पता, मैं भी जिद्दी हूँ, माथे की लकीरों को आत्मशक्ति से बदल सकती हूँ, मैं जानती थी, अपने आपको मन में दर्द था, आत्मशक्ति…

हमारी ‘हिन्दी’ (कविता)

सरस भाषा हिन्दी है, सरल भाषा हिन्दी है, सरस, सरल  और रुचिर  भाषा  हिन्दी है। मृदुल भाषा हिन्दी है, मधुर भाषा हिन्दी है, मृदुल, मधुर  और  कोमल भाषा हिन्दी है। कर्म भाषा हिन्दी है, धर्म भाषा हिन्दी है, कर्म, धर्म और  काव्य  भाषा  हिन्दी है। संस्कार भाषा हिन्दी है, संस्कृति भाषा हिन्दी है, संस्कार, संस्कृति…

छायावाद के प्रतिनिधि कवि जयशंकर प्रसाद

जीवन परिचय- जयशंकर प्रसाद जन्म- 30 जनवरी 1889 ई. काशी के ‘गोवर्धनसराय’ में हुआ था। इनका परिवार ‘सूघनी साहू’ के नाम से जाना जाता था। निधन- 15 नवंबर 1937 ई. में हुआ था। पिता- बाबू देविप्रसाद और माता- मुन्नी देवी थी। जयशंकर प्रसाद जी के उपनाम: 1. इनके बचपन का नाम ‘झारखंडी’ था। 2. इन्हें…

हिंदी साहित्य ‘निबंध’ और ‘आलोचना’ – नई रचनाएँ और रचनाकार

क्र.सं. निबंधकार निबंध संग्रह 2018 1. डॉ. उमेश प्रसाद सिंह मैं तुम्हारा पता नहीं जानता 2. ज्ञान चतुर्वेदी रंदा * 3. अष्टभुजा प्रदास शुक्ल पानी पर पटकथा * 4. हरीश नवल दीनानाथ के हाथ 5. हरीश नवल वाया पेरिस आया गाँधीवाद 6. हरीश नवल पिली छत पर काला निशान 7. हरीश नवल निराला की गली…

हिंदी साहित्य : उपन्यास और उपन्यासकार

क्र.सं. उपन्यासकार उपन्यास (2018)   1. प्रभु जोशी नान्या   2. भालचंद्र जोशी प्रार्थना में पहाड़   3. अवधेश प्रीत अशोक राजपथ   4. वीरेंद्र सारंग आर्यगाथा   5. संतोष चौबे बेतरतीब पन्ने   6. विकाश कुमार झा गयासुर संधान   7. ज्ञान चतुर्वेदी पागलखाना *   8. शैलेंद्र नागर ये इश्क नहीं आसां  …

हिंदी कहानी संग्रह नवीन रचनाएँ एवं रचनाकार

क्र.सं रचनाकार रचनाएँ ‘कहानी संग्रह’ (2018) 1. लता शर्मा मैं अर्णा * 2. क्षमा शर्मा इक्कीसवीं सदी का लड़का * 3. असगर वजाहत भीड़तंत्र * 4. राजेंद्र लहरिया सियासत 5. राजकुमार राकेश आपातकाल डायरी 6. कृष्ण बिहारी तीन कप कॉफ़ी और एक अनाम रिश्ता 7. संजय सहाय मुलाक़ात 8. राम नगीना मौर्य आप कैमरे की…

रचना के आधार पर वाक्य के भेद

भाषा की सबसे छोटी इकाई वर्ण है, वर्णों के मेल से शब्द बनते हैं और शब्दों के मेल से वाक्य बनता है। वाक्य की परिभाषा- शब्दों के सार्थक समूह को वाक्य कहते हैं। सार्थक का मतलब होता है अर्थ रखने वाला शब्द अथार्त शब्दों का ऐसा समूह जिससे सार्थक अर्थ निकलता हो, उसे वाक्य कहते हैं।…

समास से संबंधित प्रश्नोत्तरी

1. निम्नलिखित में किस शब्द में समास और संधि दोनों है? A. यज्ञशाला B. स्वधर्म C. जलोष्मा D. पंकज  2.‘शक्ति के अनुसार’ का सामासिक पद क्या होगा? A. शक्तिमान B. शक्तिपुंज C. शक्तिशाली D. यथाशक्ति   3. ‘शाखामृग’ शब्द में कौन सा समास है? A. कर्मधारय समास     B. तत्पुरुष समास C. बहुव्रीहि समास      D. द्वंद्व…

समास और समास के भेद : भाग-7 (बहुव्रीहि समास-Attributive Compound)

बहुव्रीहि समास- बहुव्रीहि दो शब्दों के मेल से बना है। बहु + व्रीहि = बहुव्रीहि जिसमें ‘बहु’ का अर्थ होगा ‘बहुत सारे अर्थों का’ और व्रीहि का अर्थ होगा ‘निषेध करने वाला’ अथार्त बहुत सारे अर्थों का निषेध कर एक अर्थ को रखनेवाला समास को बहुव्रीहि समास कहते है। पं. कामता प्रसाद गुरु के अनुसार-…

समास और समास के भेद : भाग-6 (द्वंद्व समास)

द्वंद्व समास (Copulative Compound) साधारण बोलचाल की भाषा में ‘द्वंद्व’ समास के दोनों पद प्रधान होते हैं। पं. कामता प्रसाद गुरु के शब्दों में- “जिस समास में सब पद अथवा उनका समाहार प्रधान रहता है, उसे द्वंद्व समास कहते है।” द्वंद्व समास में समस्त पद के दोनों पद प्रधान होते हैं। समस्त पद का विग्रह…

समास और समास के भेद : भाग-5 (व्याधिकरण तत्पुरुष समास)

व्यधिकरण तत्पुरुष समास के अन्य भेद जिस तत्पुरुष समास में कारक चिह्न का लोप नहीं होता उसे अलुक् तत्पुरुष समास कहते हैं। अलुक् तत्पुरुष समास में कारक चिह्न किसी न किसी रूप में विद्यमान रहता है। अलुक् शब्द अ + लुक् के योग से बना है, जिसका शाब्दिक अर्थ ‘न छिपना’ होता है। दरअसल, तत्पुरुष…

समास और समास के भेद : भाग-4 (द्विगु समास) (Numeral Compound)

परिभाषा- वह समास जिसका पहला पद यानी पूर्व पद कोई संख्यावाची शब्द तथा उत्तर पद संज्ञा शब्द हो तथा सम्पूर्ण सामासिक पद का कोई अन्य अर्थ अभिव्यक्त नहीं हो उसे द्विगु समास कहते है। जैसे- चौराहा = चार राहों का समाहार  (चौराहा का कोई अन्य अर्थ नहीं निकल रहा है। अतः द्विगु समास है।) पं.…

समास और समास के भेद : भाग-3 (कर्मधारय समास)

समानाधिकरण तत्पुरुष समास अथार्त ‘कर्मधारय समास’- कर्मधारय समास में, एक शब्द दूसरे शब्द की विशेषता बताता है, यानी पहले शब्द का अर्थ दूसरे शब्द के गुण या विशेषता को दर्शाता है।  उदाहरण- ‘नीलकमल’ में ‘नीला’ रंग कमल की विशेषता को दर्शाता है।  परिभाषा: कर्मधारय समास में, पूर्वपद (पहला पद) विशेषण होता है और उत्तरपद (दूसरा पद)…

समास और समास के भेद : भाग-2 (तत्पुरुष समास)

2. तत्पुरुष समास- जिससमास का पूर्व पद गौण और उत्तर पद प्रधान हो उसे ‘तत्पुरुष समास’ कहते हैं। पं. कामता प्रसाद गुरु के अनुसार- “इस समास में पहला शब्द बहुधा संज्ञा अथवा विशेषण होता है। इसके विग्रह में इस शब्द के साथ कर्ता और संबोधन कारकों को छोड़ शेष सभी कारकों की विभक्तियाँ लगती है।”…

समास और समास के भेद : भाग-1 (अव्ययीभाव समास)

‘समास’ शब्द की उत्पति ‘सम्’ (उपसर्ग) + ‘आस’ (प्रत्यय) के मिलने से हुआ है। ‘सम’ का अर्थ होता है ‘पूर्णरूप’ से और ‘आस’ का अर्थ है ‘नजदीक आना’ अथार्त दो या दो से अधिक पदों का पूर्ण रूप से मिलना या नजदीक आना ‘समास’ कहलाता है। इसका शाब्दिक अर्थ ‘संक्षेपण’ होता है। परिभाषा- दो या…

उपसर्ग और प्रत्यय से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य

1. प्रायः जिस प्रकार का शब्द होता है, उसी प्रकार का उपसर्ग उस शब्द के साथ लगाया जाता है; अथार्त तत्सम शब्द के साथ तत्सम उपसर्ग, तद्भव शब्द के साथ तद्भव उपसर्ग तथा विदेशी शब्द के साथ विदेशी उपसर्ग। जैसे- ‘सु’ तत्सम उपसर्ग है, यहा तत्सम शब्द ‘पुत्र’ के साथ लगकर ‘सुपुत्र’ शब्द बनता है…

प्रत्यय : भाग-5

(तद्धित प्रत्यय) 4. अपत्यवाचक/ संतानवाचक/ संतानसूचक प्रत्यय- जिन प्रत्ययों के योग से वंश, कुल, संतान का बोध कराने वाले शब्दों का निर्माण होता है, उसे ‘अपत्यवाचक प्रत्यय’ कहते हैं। इन प्रत्ययों में भी शब्दों के प्रथम वर्ण में लगे हुए स्वर में इक प्रत्यय की तरह परिवर्तन हो जाता है। जैसे- 1. अ का आ…

प्रत्यय (Suffix) भाग-4

3. गुणवाचक तद्धित प्रत्यय- जिन प्रत्ययों के योग से गुणवाचक शब्दों का निर्माण होता है, उसे गुणवाचक तद्धित प्रत्यय कहते हैं। जैसे- आ, ई, आना, आलु/आलू, इक, इत, इन, ‘ईन/ईण’,ईय, ईला, दार, मान, पूर्वक, शाली, वाँ, श:, वत्।   1. ‘आ’ मूलशब्द प्रत्यय तद्धितांत   प्यार आ प्यारा   प्यास आ प्यासा   ठंड आ…

प्रत्यय (Suffix) भाग-3

क्रिया को छोड़कर संज्ञा, सर्वनाम और विशेषण के अंत में लगनेवाले प्रत्यय को ‘तद्धित प्रत्यय’ कहा जाता है। और उनके मेल से बनने वाले को ‘तद्धितांत शब्द’ कहते है। जैसे- मानव + ता = मानवता अच्छा + आई = अच्छाई अपना + पन = अपनापन जादू  + गर = जादूगर विशेष- ‘कृत’ प्रत्यय धातुओं के…

प्रत्यय (Suffix) भाग-2

2. कर्मवाचक ‘प्रत्यय’- जिन प्रत्ययों से कर्मवाचक शब्द बनता है, उसे ‘कर्मवाचक कृत’ प्रत्यय कहते हैं। ‘कर्मवाचक कृत’ के कुछ महत्वपूर्ण प्रत्यय निम्नलिखित हैं-­ औना/औनी, ना, नी 1. औना/औनी धातु प्रत्यय कृदंत   खेल (ना)     औना खिलौना   घिन औना घिनौना   गा (गै) औना गाना   पहर औनी पहरौनी   बिछ औना बिछौना…

प्रत्यय (Suffix) भाग-1

परिभाषा- शब्दों के बाद जो अक्षर या अक्षरसमूह लगाया जाता है उसे ‘प्रत्यय’ कहते हैं। प्रत्यय दो शब्दों से बना है- प्रति + अय। प्रति का अर्थ ‘साथ में पर बाद में’ और ‘अय’ का अर्थ चलनेवाला होता है। अतएव, ‘प्रत्यय’ का अर्थ है ‘शब्दों के साथ’, पर बाद में चलनेवाला या लगनेवाला। ‘प्रत्यय’ उपसर्गों…

हिंदी व्याकरण – ‘उपसर्ग’ और ‘प्रत्यय’ (Prefix & Suffix) भाग-3

तद्भव/हिंदी उपसर्ग- तद्भव उपसर्ग मूलतः संस्कृत के (तत्सम) उपसर्गों से ही विकसित हुआ है। इसे ही हिंदी उपसर्ग कहते हैं। हिंदी में तद्भव उपसर्गों की संख्या 10 है- अ, अध, उन, औ, दु, अन, बिन, भर, कु और सु। 1. अ (उपसर्ग) अर्थ- निषेध, अभाव शब्द- अनपढ़, अनजान, अनहोनी, अनबोल, अछूत, अथाह, अनबन, अचेत, अनमोल,…