फिर लौटूंगी (कविता)

सतरंगी रंगों की निशां देकर चली गई होली। अपनी निशान छोड़कर चली गई होली। दो दिन की खुशियाँ देकर चली गई होली। अगले वर्ष फिर आउंगी कह गई होली। ‘कोरोना’ से बचकर रहना फिर खेलने आऊँगी होली।

कैसे कहूँ? (कविता)

हँसकर आँसू छुपा लेती हूँ मुस्कुराकर दर्द सह लेती हूँ रात गम में गुजार लेती हूँ दिल को कैसे समझाऊं? सुनते तो सब हैं मुझे अपनी बात को कैसे बताऊँ? कोशिश तो की थी सुनाने की लेकिन किसी को कैसे सुनाऊं?

कदम का फूल ‘BUTTER FLOWER TREE’ (लेख)

‘कदम’ का नाम आते ही सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता ‘कदम का पेड़’ की याद आ जाती है। उन्होंने इस कविता में बालक के मन की इच्छा को चित्रित किया है। जो कन्हैया बनकर कदंम के पेड़ पर खेलना चाहता है। बालक माँ से कहता है-   “यह  कदम  का पेड़ अगर माँ होता यमुना… Continue reading कदम का फूल ‘BUTTER FLOWER TREE’ (लेख)

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ – सरोज स्मृति (कविता)

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की 'सरोज स्मृति' और 'राम की शक्ति-पूजा' एक ही समय में लिखी गई हैं। ‘सरोज स्मृति’ कविता का रचनाकाल 1935 है और राम की शक्ति पूजा का  1936। ‘सरोज स्मृति’ हिन्दी का श्रेष्ठतम शोक गीत है। कवि निराला के द्वारा अपनी पुत्री की मृत्यु पर लिखी गई इस कविता में करुणा भाव… Continue reading सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ – सरोज स्मृति (कविता)

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ – कुकुरमुत्ता (कविता)

‘कुकुरमुत्ता’ सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ जी की एक लंबी और प्रसिद्ध कविता है। इस कविता में कवि ने पूंजीवादी सभ्यता पर कुकुरमुत्ता के बहाने करारा व्यंग्य किया है। यह कविता स्वतंत्रता पूर्व सनˎ 1941 में लिखी गई निराला जी की बहुचर्चित, सामाजिक, व्यंग्यात्मक कविता है। इस कविता का मूल स्वर प्रगतिवादी है। ‘कुकुरमुत्ता’ कविता की सही-सही… Continue reading सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ – कुकुरमुत्ता (कविता)

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ – जूही की कली (कविता)

सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी ने 1920 ई० के आस-पास लेखन कार्य आरम्भ किया था। उनकी पहली रचना ‘जन्म-भूमि’ पर लिखा गया एक गीत था। लम्बे समय तक निराला जी की प्रथम रचना के रूप में प्रसिद्ध ‘जूही की काली’ जिसका रचना काल निराला ने स्वयं 1916 ई० बतलाया था। वस्तुतः 1921 में लिखी गई थी… Continue reading सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ – जूही की कली (कविता)

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’- राम की शक्तिपूजा (काव्य)

‘राम की शक्तिपूजा’ सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी की महानतम रचनाओं में से है। यह एक लघु पौराणिक आख्यान काव्य है। इसकी रचना 1936 में की गई थी। यह एक लम्बी कविता है। जो राम-रावण युद्ध की पौराणिक घटना पर आधारित है। इस कविता में आधुनिक युग का प्रतिबिम्ब है। वाल्मीकि से लेकर तुलसीदास आदि कवियों… Continue reading सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’- राम की शक्तिपूजा (काव्य)

गजानन माधव ‘मुक्तिबोध’ – भूल-गलती (कविता)

गजानन माधव ‘मुक्तिबोध’ जी का आधुनिक युग में ‘प्रगतिवाद’ और ‘प्रयोगवादी’ कविताओं में महत्वपूर्ण स्थान है। उन्हें प्रगतिवाद और नई कविता के बीच का ‘सेतु’ भी माना जाता है। गजानन माधव ‘मुक्तिबोध’ का संपूर्ण काव्य ‘फैंटसी’ शिल्प पर आधारित है। मुक्तिबोध अपने आप में एक अनूठे कवि थे। उनके जैसा उनके पहले कोई कवि नहीं… Continue reading गजानन माधव ‘मुक्तिबोध’ – भूल-गलती (कविता)

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ – बांधों न नाव इस ठाँव बंधु (कविता)

‘बाँधो न नाव इस ठाँव, बंधु!’ कविता निराला जी के ‘अर्चना’ कविता संग्रह में संकलित है। ‘अर्चना’ का प्रकाशन 1950 में हुआ था। ‘बाँधो न नाव इस ठाँव बंधु!’ कविता में कवि ‘डलमऊ’ के पक्के घाट पर गुंबद के नीचे बैठकर अपनी पत्नी को याद करके यह कविता लिखते हैं। कवि नाविक को अपनी नाव… Continue reading सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ – बांधों न नाव इस ठाँव बंधु (कविता)

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’- जागो फिर एक बार (कविता)

‘जागो फिर एक बार’ कविता के रचयिता सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी है। निराला जी की यह कविता ‘परिमल’ कविता संग्रह में संकलित है। जिसका प्रकाशन 1930 में हुआ था। इस कविता में कवि ने भारत के अतीत का गौरवमय चित्रण किया है। इसी संदर्भ में कवि भारतियों को जागते रहने का संदेश देते हुए कहते… Continue reading सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’- जागो फिर एक बार (कविता)