रीतिकालीन साहित्य के महत्वपूर्ण तथ्य

आचर्य रामचंद्र शुक्ल के अनुसार-  'ऐतिहासिक' परिप्रेक्ष्य के आधार पर- 'उत्तर मध्यकाल' 'प्रवृति' के आधार पर- 'रीतिकाल' (विं.सं.1700-1900)-(1643- 1843 ई.) आचार्य शुक्ल ने 'रीतिकाल' को तीन प्रकरणों में बाँटा है: प्रकारण-1: सामान्य परिचय प्रकरण-2: रीतिग्रंथकार प्रकरण-3: रीतिकाल के आश्रित कवि रीतिकाल का समय सीमा- आचार्य रामचंद्र शुक्ल के अनुसार विं.सं.1700-1900 (सर्वमान्य मत) विश्वनाथ प्रसाद मिश्र… Continue reading रीतिकालीन साहित्य के महत्वपूर्ण तथ्य

हिंदी : उद्भव एवं विकास

हिंदी की उत्पत्ति:       हिंदी भाषा के उद्भव और विकास की जब भी बात की जाती है तब हमें आधुनिक हिंदी साहित्य के पितामह कहे जाने वाले महान साहित्यकार भारतेंदु हरिश्चंद्र की वे पंक्तियाँ याद आने लगती हैं -             "निज भाषा उन्नति अहै,  सब उन्नति के मूल ।             बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत… Continue reading हिंदी : उद्भव एवं विकास

एक प्रमुख हिंदी लेखक के साथ साक्षात्कार

बात सन् 2018 की है 'दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा' हैदराबाद से मैं लघु शोध के लिए प्रवेश-परीक्षा पास कर चुकी थी। अब शोध विषय के चयन करने की बारी थी। मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि किस विषय का चुनाव करूँ। मैं परेशान और चिंतित थी। मैंने अपने गाइड से सम्पर्क किया… Continue reading एक प्रमुख हिंदी लेखक के साथ साक्षात्कार

महत्वपूर्ण तत्सम तद्भव शब्द

क्र.संतत्समतद्भवक्र.संतत्समतद्भव1पदमपदम31वाष्पभाप2पट्टिकापाटी/पट्टी32भाटकभाड़ा3परीक्षापरख33भिक्षाभीख4पर्पटपापड़34मृतिकामिट्टी5पवनपौन35मुखमुँह6पत्रपत्ता36मंडूकमेढ़क7पाशपंदा37मौक्तिकमोती8पादपैर38मयूरमोर9पाषणपाहन39मातृश्वसामौसी10पुच्छपूँछ40अरघट्टरहट11पुष्करपोखर41राज्ञीरानी12पिपासाप्यास42राशिरास13पीतपीला43रिक्तरीता14पुत्रपूत44भगिनीबहन15पुष्पपुहुप45शुष्ठीसोंठ16पंक्तिपंगत46स्वकसगा17प्रहरपहर47स्वप्नसपना18पानीयपानी48शलाकासलाई19पूर्णपूरा49श्रृंखलासांकल20पंचमपाँचवाँ50श्रृंगसींग21पूर्वपूरब51श्रृंगालसियार22प्रियपिय 52शूकरसुअर23प्रस्तरपत्थर53सौभाग्यसुहाग24पितृपितर54शुकसुआ25प्रकटप्रगट55श्वष्टसास26मुक्ता मोती56श्रावणसावन27मुखमुँह57शोभनसोहन28मेघमेह58शुष्कसूखा29मंत्रकारीमदारी59हरीतकीहरड़30भल्लुकभालू60तुंदतोंदक्र.संतत्समतद्भवक्र.संतत्समतद्भव61तिथिवारत्योहार91म्रक्षणमाखन62श्वसुरससुर92मत्सरमच्छर63शिक्षासीख93मधूकमहुआ64दमनदबाना94अग्निष्ठिकाअँगीठी65दद्रुदाद95अंगुष्ठअँगूठी66दीपावालीदीवाली96अंधअंधा67दुग्धदूध97एकलअकेला68द्विगुणदूना / दुगुना98अक्षोटअखरोट69द्विवरदेवर99आश्चर्यअचरज70धूमधुआँ100आर्द्रकअदरक71धूलिधूल101आत्मनःअपना72धावनधोना102आम्रचूर्णअमचूर73नप्तृनाती103आखेटअहेर74नारिकेलनारियल104अलग्नअलग75निर्वहननिभाना105अक्षिआँख76निम्बकनींबू106अर्चिआँच77निम्बनीम107अग्निआग78पंक्तिपंगत108अद्दआज79परिकूटपरकोटा109आश्रयआसरा80परीक्षापरख110इक्षुईंख81पर्पटपराठा111उद्गलनअगलना82प्रभुत्वपहुँच112उलूकउल्लू83पुरातनपुराना113उच्चऊँचा84फुल्लफूल114उष्ट्रऊँट85फशिकाफाँसी115ईदृशऐसा86वत्सबच्चा116उपाध्यायओझा87वधूबहू117कंकणकंगन88वन्धया बाँझ118कंकतीकंघी89वारिदबादल119स्कंधकंधा90विरूपबुरा120कमलकँवल क्र.संतत्समतद्भवक्र.संतत्समतद्भव121कर्पटकपड़ा151घृष्टढीठ122कथानिकाकहानी152अकार्यअकाज123क्वाथकाढ़ा153अगम्यअगम124कूर्दनकूदना154आश्चर्यअचरज125काचकाँच155अक्षतअच्छत126काष्ठकाठ156अट्टालिकाअटारी127कीदृशकैसा157आम्रचूर्णअमचूर128कुक्षिकोख158अंगुष्ठअंगूठा129कोणकोना159अष्टादशअठारह130कोकिलकोयल160अर्द्धआधार131खर्जूरखजूर161अश्रुआँसू112खट्वाखाट162अग्निआग133क्षारखार163अन्नअनाज134क्षोदनखेदना164अमृतअमिय135गर्दभगधा165आम्रआम136गोधूमगेहूँ166अर्पणअरपन137गोपालग्वाल167आखेटअहेर138गोत्रगोत168अगणितअनगिनत139क्रोडगोद169आलस्यआलस140गृहघर170असीसआशिष141घोटकघोड़ा 171उज्जवलउजला142चक्रवातचकवा172उच्चऊँचा143चणकचना173उष्ट्रऊँट144चर्वनचबाना174एकत्रइकठ्ठा145चित्रकचीता 175कर्पासकपास146चतुष्कचौक176इक्षुईख147युवानजवान177उलूकउल्लू148यौवनजोबन178एलाइलाइची149टंकशालाटकसाल179अंचलआँचल150दंशकडसना180कटुकड़वा क्र.संतत्समतद्भवक्र.संतत्समतद्भव181तडागतालाब209कपाटकिवाड़182तिरश्यतिरछा210कंटककाँटा183काष्ठकाठ211छिद्रछेद184काककौवा/कौआ212जन्मजनम185किरणकिरन213ज्योतिजोत186कुकुरकुत्ता214जिह्वाजीभ187कुपुत्रकपूत215जंघाजाँघ188कोणकोना216जयेष्ठजेठ189कृषककिसान217जामाताजमाई / जवाई190गोधूमगेहूँ218जीर्णझीना191गीष्मगरमी219झरनाझरना192घटघड़ा220नयननैन193घोटकघोड़ा221निंबनीम194घृतघी222निंद्रानींद195गहनघना223नासिकानाक196चर्मचाम224निम्बुकनींबू197चंद्रचाँद225निष्ठुरनिठर198चतुष्कोणचौकोर226पक्षपंख199चतुर्दशचौदह227पक्षीपंछी200चित्रकारचितेरा228वामनबौना201चैत्रचैत229कृत्यगृहकचहरी202छत्रछाता230कंटफलकटहल203चर्मकारचमार231चतुर्विशचौबिस204चर्वनचबाना232चौरचोर205चंद्रिकाचाँदनी233चित्रकचीता206चतुर्थचौथा234चुंबनचुमना207चतुष्पदचौपाया235चक्रचक्कर208चंचुचोंच236छायाछाँह अरबी भाषा के शब्द - अमीर, औलाद, खत, उम्दा, मशाल, लगान, कत्ल, आखिर, कसूर, ख्याल, हवालात, कब्र, गरीब, तहसील, वालित, मीनार, आदत, कदम, जिस्म, किताब, दवाखाना, मुरब्बा, कानून, इज्जत, कमाल, जलसा, मौलवी, नकद, खुफिया, आजाद, ईमान, कर्ज, अल्लाह, बहस, जिक्र, मौसम, इमतहान, इस्तीफा, किस्मत, इरादा, मौका, तमाम, फकीर,… Continue reading महत्वपूर्ण तत्सम तद्भव शब्द

महावीर प्रसाद द्विवेदी और हिंदी नवजागरण

द्विवेदी जी ने 1903-1920 ई. तक 'सरस्वती' का संपादन किया। इसी के माध्यम से उनहोंने नवजागरण के संबंध में अपने विचारों को आगे बढ़ाया।       'सरस्वती' हिंदी नवजागरण की एक सशक्त पत्रिका के रूप में स्थापित हुई। महावीर प्रसाद द्विवेदी जी ने सरस्वती पत्रिका के माध्यम से भारतीयों में राजनीतिक चेतना जाग्रत करने का अथक… Continue reading महावीर प्रसाद द्विवेदी और हिंदी नवजागरण

भारतेंदु और हिंदी नवजागरण

नवजागरण का शाब्दिक अर्थ है- "नये रूप से जागना"       हिंदी साहित्य में आधुनिक युग का आरंभ भारतेंदु से माना जाता है। उन्होंने समाज में चल रही नवजागरण की प्रक्रिया का न केवल वैचारिक धरातल पर संज्ञान लिया, बल्कि उन मूल्यों को साहित्य से जोड़कर उसे आधुनिक भाव-बोध से समृद्ध भी किया।       * भारतेंदुयुगीन… Continue reading भारतेंदु और हिंदी नवजागरण

भारतीय नवजागरण और स्वाधीनता आंदोलन की वैचारिक पृष्ठभूमि : हिंदी नवजागरण

नवजागरण से तात्पर्य एक नयी विचार से है, जिसके कारण देश में सामाजिक आर्थिक धार्मिक एवं राजनीतिक बदलाव लाया जा सके।       किसी देश या समाज की वैचारिकी सुसुप्ति (सोने की अवस्था) का अंत, 'जागरण' का नवीनतम रूप ही 'नवजागरण' है।       नवजागरण के लिए प्रायः कई पर्यायवाची शब्दों का प्रयोग किया जाता है जैसे… Continue reading भारतीय नवजागरण और स्वाधीनता आंदोलन की वैचारिक पृष्ठभूमि : हिंदी नवजागरण

औचित्य संप्रदाय

क्षेमेन्द्र : (समय 11वीं शताब्दी) ये काशी के निवासी थे। रचना - 'औचित्यविचार चर्चा' * क्षेमेन्द्र आचार्य अभिनवगुप्त के शिष्य थे।   * क्षेमेन्द्र ने 'औचित्यविचार चर्चा' में 'औचित्य' को काव्य की 'आत्मा' मानकर काव्यशास्त्र के विभिन्न सिद्धांतों के बीच एक समन्वयकारी औचित्य सिद्धांत का स्थापना किया है। * इन्हें 'समन्वयकारी आचार्य' भी कहा जाता… Continue reading औचित्य संप्रदाय

वक्रोक्ति संप्रदाय

आचार्य कुंतक : (समय - 10वीं शताब्दी के उत्तरार्ध) ये कश्मीर के निवासी थे। आचार्य कुंतक का मूलनाम - 'कुंतल' था। रचना - 'वक्रोक्ति जीवितम्' 'वक्रोक्ति जीवितम्' में कुल 4 अध्याय है, जिन्हें 'उन्मेष' कहा गया है। 'वक्रोक्ति जीवितम्' के दो भाग है- (i) कारिका (ii) सूत्र विशेष तथ्य: कुंतक 'ध्वनि' विरोधी आचार्य थे। इन्होंने… Continue reading वक्रोक्ति संप्रदाय

ध्वनि संप्रदाय

आचार्य अनंदवर्धन : (समय - 9वीं शताब्दी का मध्य भाग) 'ध्वनि' संप्रदाय के प्रवर्तक। * डॉ. भगीरथ मिश्र ने इनका इनका समय 9वीं शताब्दी का उतरार्द्ध माना है। * ये कश्मीर के राजा अवंती वर्मा के सभा पंडित थे। प्रमुख रचनाएँ:       1. ध्वन्यलोक       2. अर्जुन चरित (महा काव्य)       3. विषम वाण  लीला… Continue reading ध्वनि संप्रदाय