मिलन का दर्द (कविता)

जब तक मिली न थी उनसे,

तबतक बिछड़ने का डर था

साथ होने के बाद भी,

दिल में गहराई का असर था।

उनकी आँखों में छीपे सवाल का

मौन मेरा जवाब था

दोनों के बीच का सन्नाटा,

ही जैसे संवाद था।

थी मैं उनकी धडकन

मगर मुझे उनका इंतजार था

उनकी बाहों में राहत थी मुझे

उनसे मिलने की जूनून थी।

मिल के भी हम अधूरे थे

जैसे नदी सागर से मिल खो गई

पास होकर भी दूर थे हम  

दोनों अपने-अपने दर्द में मजबूर थे।

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