वर्णों का उच्चारण स्थान और प्रयत्न Pronunciation effort and its Classification (भाग – 2 : प्रयत्न)

श्वास (प्राण-वायु) की मात्रा के आधार पर वर्ण-भेद:    स्वर- अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ (11) अयोगवाह- अं और आ: दो अयोगवाह है। व्यंजन- ‘क’ वर्ग-  क, ख, ग, घ, ङ ‘च’ वर्ग-  च, छ, ज, झ, ञ ‘ट’ वर्ग-  ट, ठ, ड, ढ, ण ‘त’ वर्ग-  त, थ, द,… Continue reading वर्णों का उच्चारण स्थान और प्रयत्न Pronunciation effort and its Classification (भाग – 2 : प्रयत्न)

वर्णों का उच्चारण स्थान और प्रयत्न (भाग–1: उच्चारण स्थान) (Pronunciation effort and its Classification: Part-1)

उच्चारण स्थान- किसी वर्ण का उच्चारण करते समय अन्दर से आने वाला श्वास वायु जिस स्थान पर आकर रूकती है या जहाँ पर बिना रोके उसके निकलने का मार्ग बनाया जाता है। वही उस वर्ण का उच्चरण स्थान कहलाता है। लक्षण- किसी भी वर्ण को बोलते समय वायु तथा जिह्वा मुख के जिस-जिस भाग को… Continue reading वर्णों का उच्चारण स्थान और प्रयत्न (भाग–1: उच्चारण स्थान) (Pronunciation effort and its Classification: Part-1)

शब्द-भेद (Parts Of Speech)

विकार की दृष्टि से शब्दों के भेद विकार की दृष्टि से शब्दों के दो भेद होते हैं - (अ) विकारी शब्द और (आ) अविकारी शब्द (अ) विकारी शब्द के चार प्रकार होते हैं- संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया। (आ) अविकारी शब्द के भी चार प्रकार होते हैं- क्रिया विशेषण, सम्बन्ध बोधक, समुच्चय बोधक और विस्मयादि… Continue reading शब्द-भेद (Parts Of Speech)

क्रिया और उसके भेद

क्रिया की परिभाषा- जिस शब्द से किसी कार्य का करने या होने का बोध होता है, उसे क्रिया कहते हैं। जैसे- खाना, पढ़ना, लिखना, चलना, सोना आदि। क्रिया एक विकारी शब्द है, जिसका  रूप लिंग, वचन और पुरुष के अनुसार बदलते रहता है। क्रिया के मूल रूप को धातु कहते हैं, अर्थात जिन मूल अक्षरों… Continue reading क्रिया और उसके भेद

वचन

वचन- ‘वचन’ का शाब्दिक अर्थ होता है ‘संख्या’। वचन का अर्थ ‘कहना’ भी होता है। संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया के जिस रूप से संख्या का बोध होता है, उसे वचन कहते है। जैसे- शिक्षिका बच्चों को पढ़ा रही है। माली पौधों को सींच रहा है। तालाब में बच्चे स्नान कर रहे हैं। टोकरी में… Continue reading वचन

लिंग (Gender)

लिंग- संज्ञा के जिस रूप से किसी व्यक्ति या वस्तु के नर या मादा जाती का बोध होता हैं उसे लिंग कहते हैं। जैसे- दादा, दादी, माता, पिता, शेर, शेरनी, लड़का, लड़की आदि।  लिंग के तीन प्रकार होते हैं- पुल्लिंग- जिन शब्दों से ‘पुरुष’ या ‘नर’ जाती का बोध होता है उसे पुल्लिंग कहते हैं।… Continue reading लिंग (Gender)

रचना के आधार पर वाक्य के भेद

वाक्य की परिभाषा- शब्दों के सार्थक समूह को वाक्य कहते हैं। सार्थक का मतलब होता है अर्थ रखने वाला शब्द अथार्त शब्दों का ऐसा समूह जिससे सार्थक अर्थ निकलता हो, उसे वाक्य कहते हैं। जैसे- तुम जाओ, सीता पढ़ रही है। वाक्य एक पद का भी हो सकता है और अनेक पद का भी हो… Continue reading रचना के आधार पर वाक्य के भेद

शब्दों का वर्गीकरण

1. शब्दों का वर्गीकरण विभिन्न आधारों पर किया गया है- स्रोत या उद्गम के आधार पर शब्दों का वर्गीकरण-स्रोत या उद्गम के आधार पर शब्दों के चार भेद होते हैं। तत्सम, तद्भव, देशज, विदेशज और संकर (क) तत्सम- ‘तत्सम’ का अर्थ होता है उसके समान यानि ज्यों का त्यों। हिन्दी भाषा में शब्दों का मूल… Continue reading शब्दों का वर्गीकरण

‘शब्द’ और ‘पद’

शब्द की परिभाषा- एक या एक से अधिक वर्णों के मेल से बने सार्थक समूह को ‘शब्द’ कहते हैं। या वर्णों का ऐसा सार्थक समूह जिसका कोई अर्थ हो उसे ‘शब्द’ कहते है। शब्द के दो प्रकार होते है- 1. सार्थक शब्द और 2. निरर्थक शब्द सार्थक शब्द- वे शब्द जिनसे किसी अर्थ का बोध… Continue reading ‘शब्द’ और ‘पद’

हिंदी वर्णमाला

हिंदी वर्णमाला के दो प्रकार हैं- 1. स्वर और 2. व्यंजन स्वर की परिभाषा- स्वर वे अक्षर है जिसे बोलने के लिए किसी और ध्वनि की मदद नहीं लेनी पड़ती है। अ आ इ ई उ ऊ ए ऐ ओ औ – (11) अं अः अयोगवाह है – (अं) को अनुस्वार और (अः) विसर्ग कहते… Continue reading हिंदी वर्णमाला