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हिन्दी का भाषिक स्वरुप: हिन्दी का स्वनिम व्यवस्था खंड्य और खंड्येतर (इकाई -1)

‘स्वनिम’ का अर्थ है ‘ध्वनि’। स्वनिम शब्द अंग्रेजी भाषा के ‘फोनिक’ का नवीनतम हिन्दी अनुवाद है। स्वनिम के लिए अब तक ‘ध्वनिग्राम’ और ‘स्वनग्राम’ शब्द का प्रयोग होता रहा है। किन्तु भारत सरकार के पारिभाषिक एवं तकनीकि शब्दावली आयोग में ‘फोनिक’ का हिन्दी अनुवाद ‘स्वनिम’ कर दिया गया। स्वनिम की परिभाषा: भोलानाथ तिवारी के शब्दों… Continue reading हिन्दी का भाषिक स्वरुप: हिन्दी का स्वनिम व्यवस्था खंड्य और खंड्येतर (इकाई -1)

प्रगतिवाद (इकाई -2)

‘प्रगतिवाद’: (1936 – 1943 ई०) सन् 1936 ई० में दो कार्य हुए- भारतीय प्रगतिशील लेखक संघ का पहला अधिवेशन मुंशी प्रेमचंद की अध्यक्षता में लखनऊ में हुआ था। उसी समय सुमित्रानंदन पंत के ‘युगांत’ रचना का प्रकाशन हुआ। तब सुमित्रानंदन पंत ने कहा था कि मैं छायावाद युग की समाप्ति की घोषणा करता हूँ। इसलिए… Continue reading प्रगतिवाद (इकाई -2)

हिन्दी व्याकरण (शब्द ज्ञान)

शब्द की परिभाषा: “ध्वनियों के सार्थक शब्द समूह को शब्द कहते है।” “अर्थ के स्तर पर ‘शब्द’ भाषा की सबसे ‘छोटी’ या ‘पहली’ इकाई है।” डॉ. भोलानाथ तिवारी के शब्दों में- “शब्द अर्थ के स्तर पर भाषा की लघुतम इकाई है।” ध्वनि- जिसे खण्ड नहीं कर सकते वह ध्वनि है। ध्वनि का लिखित रूप ‘वर्ण’… Continue reading हिन्दी व्याकरण (शब्द ज्ञान)

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Hindi Grammar

उपसर्ग और प्रत्यय (Prefix and Suffix)

उपसर्ग (Prefix) उप+सर्ग दो शब्दों के मेल से बना है। ‘उप’ का अर्थ होता है समीप, निकट या पास तथा ‘सर्ग’ का अर्थ होता है, बनाना या सृष्टि करना। उपसर्ग उस अव्यय या शब्दांश को कहते हैं, जो किसी शब्द के आरम्भ में जुड़कर उसके अर्थ में परिवर्तन कर विशेषता ला देता है। जैसे- ‘भाव’… Continue reading उपसर्ग और प्रत्यय (Prefix and Suffix)

कारक (Case)

कारक (case) के प्रकार और विभक्ति चिन्ह  कारक की परिभाषा- संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से वाक्य के अन्य शब्दों के साथ उसके संबंध का बोध होता है, उसे कारक कहते हैं। हिन्दी में आठ (8) कारक हैं- कर्ता, कर्म, करण, सम्प्रदान, अपादान, सम्बन्ध, अधिकरण और सम्बोधन कारक के विभक्ति चिन्ह  कारक के विभक्ति… Continue reading कारक (Case)

विराम चिन्ह (Punctuation Mark)

विराम (Punctuation Mark) – विराम का अर्थ होता है- रुकना या ठहरना। भिन्न-भिन्न भावों और विचारों को स्पष्ट करने के लिए जिन चिन्हों का प्रयोग वाक्य के बीच में या अंत में किया जाता है, उसे विराम चिन्ह कहते हैं। परिभाषा– जब हम अपने भावों को भाषा के द्वारा व्यक्त करते हैं, तब एक भाव… Continue reading विराम चिन्ह (Punctuation Mark)

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Poems

फिर लौटूंगी (कविता)

सतरंगी रंगों की निशां देकर चली गई होली। अपनी निशान छोड़कर चली गई होली। दो दिन की खुशियाँ देकर चली गई होली। अगले वर्ष फिर आउंगी कह गई होली। ‘कोरोना’ से बचकर रहना फिर खेलने आऊँगी होली।

कैसे कहूँ? (कविता)

हँसकर आँसू छुपा लेती हूँ मुस्कुराकर दर्द सह लेती हूँ रात गम में गुजार लेती हूँ दिल को कैसे समझाऊं? सुनते तो सब हैं मुझे अपनी बात को कैसे बताऊँ? कोशिश तो की थी सुनाने की लेकिन किसी को कैसे सुनाऊं?

हाथ की लकीरें (कविता)

माथे की लकीरों को देखते ही, उसने कहा! ओह! तुम्हारे तो भाग्य ही नही है कैसे रहोगी? कैसे जियोगी? खैर! दुखी होकर भी हमेशा, तुम मुस्कुराती रहोगी उसे क्या पता, मैं क्या हूँ? मैं भी मानव हूँ माथे के लकीरों को, आत्मशक्ति से  बदल सकती हूँ मैं, मैं जानती थी, अपने आपको मन में दर्द… Continue reading हाथ की लकीरें (कविता)

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Stories

‘पल्लू’ की गरिमा (लघु कथा)

‘पर्दा’ अरबी भाषा से आया हुआ शब्द है। जिसका अर्थ होता है, ‘ढकना’। ‘बुर्का’ भी एक तरह से घूँघट ही है, जिसे मुस्लिम समुदाय की महिलाएँ और लडकियाँ पुरुषों के गलत निगाह से बचने के लिए पहनती हैं। भारत में घूँघट प्रथा भी इस्लामों की देन है। इस्लामी आक्रमणकारियों और लुच्चे-लफंगों से अपनी बचाव के… Continue reading ‘पल्लू’ की गरिमा (लघु कथा)

दिलचस्प कहानी (लघु कथा)

सन् 1994 की बात है, उस समय हमारे देश के राष्ट्रपति श्री शंकर दयाल शर्मा जी थे। अधिकारिक यात्रा पर वे मस्कट गए थे। उस समय एयर इण्डिया में तीन दुर्लभ बातें हुई थी। पहली बात यह हुई कि ओमान के राजा ‘कबूस बिन सईद अल सईद’ किसी भी देश के गणमान्य व्यक्ति को हवाई… Continue reading दिलचस्प कहानी (लघु कथा)

अच्छे कर्मो का फल (लघु कथा)

कहा गया है कि माता-पिता के कर्मो का फल बच्चे को मिलता है। यह कहानी ब्रिटेन के स्कॉटलैंड में रहनेवाले फ्लेमिंग नामक एक गरीब किसान की है। फ्लेमिंग एक दिन अपने खेत में काम कर रहे थे। अचानक उसी समय उन्हें किसी के चीखने की आवाज सुनाई पड़ी। वे काम छोड़कर उस आवाज की ओर… Continue reading अच्छे कर्मो का फल (लघु कथा)

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