दर्द का हिसाब (कविता)

दर्दों का कारवां, साथ चलता ही रहा, आँखें नम हुई, दिल थम सा गया। अब इतना भी, दर्द न दे ऐ जिंदगी! कि हिसाब भी, इसका कर न सकूँ। कुछ देकर दर्द, इतराते हैं, कुछ लेकर दर्द, हिम्मत बढ़ाते हैं। बस आदत अपनी कुछ ऐसी है, जो दर्द में भी दर्द सहती है। अब हिम्मत… Continue reading दर्द का हिसाब (कविता)

अदृश्य ‘कोरोना’ (कविता) (Invisible Corona – Poem)

अदृश्य ‘करोना’ ने मानव को उसका दृश्य दिखा दिया। चौपाया को राहों पर और मानव को, घर पर बैठा दिया। जो करते थे मतलब से बातें अब, बिना मतलब के बातें करते हैं। जो नहीं डरते थे शेर-चीता से उसे अदृश्य ‘कोरोना’ ने डरा दिया।

वक्त (कविता)

वक्त वक्त की बात है भईया वक्त बड़ा ही है बलवान ।   वक्त के आगे सब कोई हारा दुर्बल हो या हो पहलवान। वक्त बदलता रहता सबका गरीब हो या हो धनवान । वक्त वक्त पर भारी है अब वक्त बड़ा ही है बलवान।।   बदला वक्त जब हरिश्चन्द्र का पहुँचा दिया उनको श्मशान।… Continue reading वक्त (कविता)

निःशब्द ‘युवा’ (कविता)

बेरोजगार हैं युवा, किंतु निःशब्द नहीं प्रशिक्षित है किंतु बोलते नहीं। किसे कहे अपनी पीड़ा, यह प्रशिक्षित वर्ग उसकी आवाज कोई सुनता नहीं।   बीमार नहीं ये, आरक्षण के मारे हैं स्वार्थ का सितम, ढाया है सरकार ने तीस प्रतिशत वाले, हो गए अब आगे नब्बे प्रतिशत वाले, हो गए अब पीछे। चंद वोटों के… Continue reading निःशब्द ‘युवा’ (कविता)

वर्दी (कविता)

वर्दी के है विभिन्न प्रकार,सब वर्दियों की अपनी शान। अनेक रंगों कि वर्दी हमारी,विभिन्न रुपों में बदली हैं। वर्दी की है शान निरालीजो पहने उसकी बढ़ती मान। कुछ वर्दी पहन इतराते हैं,कुछ वर्दी पहन लोगों को डरातें हैं। कुछ लोग इसे इज्जत दिलवाते,कुछ लोग कलंकित कर देते हैं। कुछ लोग पहन करते जनता पर राज,कुछ… Continue reading वर्दी (कविता)

पर्यावरण (कविता)

आज देश की मांग यही है, पर्यावरण को हमें बचाना है।जल, वायु, मिट्टी और ध्वनि से रिश्ता हमारा पुराना है ।इन सबसे नेहा लगा कर, इनको मित्र बनाना है।आज देश की मांग यही है, पर्यावरण को हमें बचाना है। जब तक जग में पानी है, तब तक जग में जीवन है ।जब तक अनल में… Continue reading पर्यावरण (कविता)

फ्रेंडशिप रिक्वेस्ट (अनुरोध सखा) कविता

तुमसे है अनुरोध सखा, आया है एक संदेशा सखा। देख अनुरोध आई मुस्कान, मालूम न था हम दोनों मिलेंगे। मिलकर दोनों जुदा हुए थे, पर पता नही था कैसे मिलेंगे? मन में थी आशा फिर भी सखा, पर था यह बहुत कठिन सखा। हो! धन्यवाद आनन ग्रंथ (फेसबुक) का, बिछड़ों को मिला दिया इसने सखा।

आनन ग्रंथ (फेसबुक) कविता

मिडिया पर आई एक नई किताब, कहते हैं जिसे आनन ग्रंथ (फेसबुक)। यह आनन ग्रंथ निराला है, लगता है सबको प्यारा है। लॉग इन करके मित्र बनाते, और बढ़ाते अपनी पहचान। औरों की बात हम सुनते हैं, अपनी बात सुनाते है। सबकी होती सबसे पहचान, साझा करते सब अपनी बात। मित्र बनाते हैं सब मिलजुल,… Continue reading आनन ग्रंथ (फेसबुक) कविता

हे! पुरुष (कविता)

हमारे समाज में ज्यादातर कवि, लेखक और गीतकारों ने सिर्फ नारियों के ही गुणों का बखान अपने कविताओं, गीतों और कहानियों में किया है, जबकि पुरुष के बिना समाज की परिकल्पना ही नहीं की जा सकती है। पुरुष के बिना घर परिवार सुना-सुना रहता है। पुरुष घर, परिवार और समाज के शान और सरताज होते… Continue reading हे! पुरुष (कविता)

लौट जायेंगे हम (कविता)

जी को उदास न कीजिए, जी भर के जीना सीखिए। छोड़िये उलहना देना औरों को, बस धन्यवाद करना दीजिए। गुजरिए जिन रास्तों से होकर, प्यारा सा संदेश दीजिए। देख कर हर जन-जन को, जरा सा मुस्करा दीजिए। उम्र का हर दौड़ बेहतरीन है, हर उम्र का स्वाद लीजिये। लौट जायेंगे हम सब एक दिन, हर… Continue reading लौट जायेंगे हम (कविता)