हिंदी : उद्भव एवं विकास

हिंदी की उत्पत्ति:       हिंदी भाषा के उद्भव और विकास की जब भी बात की जाती है तब हमें आधुनिक हिंदी साहित्य के पितामह कहे जाने वाले महान साहित्यकार भारतेंदु हरिश्चंद्र की वे पंक्तियाँ याद आने लगती हैं -             "निज भाषा उन्नति अहै,  सब उन्नति के मूल ।             बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत… Continue reading हिंदी : उद्भव एवं विकास

भारतीय भाषाओँ के राष्ट्रीय कवियों

में राष्ट्रीय एकता की भावना     'राष्ट्रीय एकता' भारत की 'आत्मा' है और 'राष्ट्रीयता' भारतियों की 'भावना'। राष्ट्रीयता शब्द अंग्रेजी भाषा के 'नैशनलिटी' (Nationality) शब्द का हिंदी रूपांतर है। जिसकी उत्पत्ति लैटिन भाषा के 'नेशियो' (Natio) शब्द से हुई है। इस शब्द से 'जन्म' और 'जाति' का बोध होता है। राष्ट्रीयता सांस्कृतिक तथा आध्यात्मिक भावना… Continue reading भारतीय भाषाओँ के राष्ट्रीय कवियों

हिन्दी गद्य विधा का वैश्विक स्तर पर महत्व

जन जन की है भाषा हिन्दी, जन समूह की जिज्ञासा हिन्दी │ जन जन में रची बसी है, जन मन की  अभिलाषा  हिन्दी ││ वैश्विकरण का शाब्दिक अर्थ होता है किसी भी स्थानीय या क्षेत्रीय वस्तुओं का विश्व स्तर पर रूपांतर होना, 21वीं शताब्दी को अगर वैश्विकरण की शदी कहें तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी│… Continue reading हिन्दी गद्य विधा का वैश्विक स्तर पर महत्व

मृदुला सिन्हा के कहानी संग्रह ‘ढाई बीघा जमीन’ में सामाजिक यथार्थ

प्रस्तुति मृदुला सिन्हा आधुनिक युग की लेखिका हैं। उन्होंने अपनी समस्त कहानियों में आधुनिकता, सामाजिक विसंगतियों, आधुनिक बोध, मानवीय मूल्यों का विघटन, जीवन दर्शन, मशीनी युग, कुंठा आदि का सजीव चित्रण किया है। साहित्य एक ऐसा दर्पण है, जिसमे मानव जीवन का ही वर्णन नहीं, अपितु आस–पास के परिवेश का भी चित्रण होता है। साहित्यकार… Continue reading मृदुला सिन्हा के कहानी संग्रह ‘ढाई बीघा जमीन’ में सामाजिक यथार्थ

दक्षिण भारत के स्वतंत्रता सेनानियों से संबंधित परिचयात्मक लेख

स्वतंत्रता सेनानियों का हर एक-एक कतरा वरदान है। आजादी के हर साँस पर उनके कुर्बानियों के नाम है। गाथाएँ उन सेनानायकों की जब-जब दोहराई जायेगी। तब-तब अमर वीर शहीदों की कहानियाँ याद आएगी। स्वतंत्रता सेनानी भारत माता के वे बहादुर और साहसी सपूत थे जिन्होंने 200 वर्षो के अंग्रेजी हुकूमत की गुलामी से देश को… Continue reading दक्षिण भारत के स्वतंत्रता सेनानियों से संबंधित परिचयात्मक लेख

देवनागरी लिपि को रोमन लिपि से मिलती चुनौतियाँ

जिस तरह साहित्य ‘समाज का दर्पण’ है। उसी तरह लिपि ‘वाणी का दर्पण’ है। लिपि से ही वाणी का प्रतिबिंब, लेखन के रूप में दिखाई देता है। हमारी हिंदी भाषा और लिपि देवनागरी, सिर्फ एक भाषा और लिपि नहीं है, ये भारतवासियों की सभ्यता और संस्कृति की अमूल्य धरोहर भी है। आज एक बार देवनागरी… Continue reading देवनागरी लिपि को रोमन लिपि से मिलती चुनौतियाँ

भारत की आजादी का अमृत महोत्सव

श्रीरामचरित मानस में गोस्वामी तुलसीदास ने लिखा है कि ‘पराधीन सपनेहुं सुख नाहीं’ यानी दूसरे के अधीन, परतंत्रता की बेड़ियों में जकड़ा व्यक्ति तो सपने में भी सुखी नहीं रह सकता। हमारा अतीत भी उस दर्द का साक्षी रहा है, जब इतिहास के एक लंबे कालखंड तक देश को गुलामी का दंश झेलना पड़ा। प्रधानमंत्री… Continue reading भारत की आजादी का अमृत महोत्सव

बारीन्द्र नाथ घोस (स्वतंत्रता सेनानी तथा पत्रकार)

बारीन्द्र नाथ घोष भारत के प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी, पत्रकार तथा ‘युगांतर’ के संस्थापको में से एक थे। वे ‘बारिन घोष’ के नाम से अधिक लोकप्रिय थे। बारिन घोस अध्यात्मवादी अरविंद घोष के छोटे भाई थे। बंगाल में क्रांतिकारी विचारधारा को फैलाने का श्रेय बारीन्द्र नाथ घोष और भूपेन्द्र नाथ दत्त को जाता है। भूपेन्द्र नाथ… Continue reading बारीन्द्र नाथ घोस (स्वतंत्रता सेनानी तथा पत्रकार)

मैना कुमारी (बाल वीरांगना)

सन् 1857 ई० के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भारतीय सेनानियों का नेतृत्व नाना साहब पेशवा कर रहे थे। देश को आजाद कराने के लिए हजारों-लाखों क्रांतिकारियों ने अपने-अपने ढंग से अपनी-अपनी भूमिका निभाया था। उन्हीं में से एक क्रांतिकारी नाना साहेब पेशवा द्वितीय भी थे। वे 1857 के प्रथम शिल्पकार थे। इस दौरान नाना… Continue reading मैना कुमारी (बाल वीरांगना)

ढाई आखर का रहस्य

संत कबीरदास जी का यह दोहा हम बचपन से पढ़ते आ रहे हैं। पोथी पढ़ि-पढ़ि जग मुवा, पंडित भया न कोय। ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सु पंडित होय।। इस ढाई अक्षर के रहस्य को हम समझ नहीं पाएँ हैं। कबीर का मानना था कि प्रेम तत्व ज्ञान से अधिक महत्वपूर्ण है। सच्चा प्रेम ज्ञान… Continue reading ढाई आखर का रहस्य