हिन्दी भाषा के विकास में दक्षिण भारतीय लेखकों का योगदान

भाषा का कोई रंग, रूप, जाति या आकर नहीं होता है। इसे तो सिर्फ सुनकर, समझकर महसूस किया जा सकता है। हिन्दी भारत की एकमात्र ऐसी भाषा है, जिसे भारत के अधिकांश लोग जानते और समझते हैं। यह पूरे भारत की सम्पर्क भाषा है। हिन्दी भाषा अघोषित राष्ट्रभाषा ही नहीं बल्कि राज्य भाषा और संपर्क… Continue reading हिन्दी भाषा के विकास में दक्षिण भारतीय लेखकों का योगदान

विषय: आत्मनिर्भर भारत ‘अवसर और चुनौतियाँ’

“जहाँ डाल-डाल पर सोने की चिड़िया करती है बसेरा वो भारत देश है मेरा” राजेन्द्र कृष्ण जी का लिखा हुआ यह गीत सुनकर हमें लगता है कि आखिर भारत को किसकी नजर लग गई। इस ‘सोने की चिड़िया’ की जगह अब प्लास्टिक की चिड़िया पेड़ों को शोभायमान करने लगी है। यह सत्य है कि भारत… Continue reading विषय: आत्मनिर्भर भारत ‘अवसर और चुनौतियाँ’

जगतगुरु ‘शंकराचार्य’ – ‘मंडन मिश्र’ सम्वाद

भारतीय इतिहास में शंकराचार्य सबसे श्रेष्ठतम दार्शनिक थे। उन्होंने अद्वैतवाद को प्रचलित किया। उन्होंने उपनिषदों, श्रीमद्भागवत गीता एवं ब्रह्मसूत्र पर ऐसे भाष्य लिखे जो दुर्लभ हैं। वे अपने समय के उत्कृष्ट विद्वान एवं दार्शनिक थे। शंकराचार्य का जन्म ढ़ाई हजार साल पूर्व दक्षिण भारत के केरल में हुआ था। शंकराचार्य ने पूरे भारत की यात्रा… Continue reading जगतगुरु ‘शंकराचार्य’ – ‘मंडन मिश्र’ सम्वाद

चन्द्रमा का ‘पुत्र मोह’

महाभारत को धर्म युद्ध भी कहा जाता है लेकिन महाभारत पूर्णरूप से धर्मयुद्ध न होकर कर्मयुद्ध भी था। महाभारत से जुड़ी बहुत सी बातें हैं जो अपने आप में एक रहस्य हैं। भगवान होते हुए भी श्री कृष्ण अपने प्रिय अर्जुन और अपनी बहन सुभद्रा के पुत्र ‘अभिमन्यु’ को युद्ध में नहीं बचा पाए? उसे… Continue reading चन्द्रमा का ‘पुत्र मोह’

शकुनी के ‘पासा’ का रहस्य

महाभारत युद्ध होने के कई कारण थे। इसका मुख्य कारण कौरवों की उच्च महत्वाकांक्षाएँ और धृतराष्ट्र का पुत्र मोह के साथ शकुनी का ‘प्रण’ था। शकुनी चौसर के खेल में जिन पासों का प्रयोग करता था। वह मामूली पाशा नहीं था जिससे वह हमेशा अपनी चाल में सफल होता था। इन पासों के साथ जुड़ी… Continue reading शकुनी के ‘पासा’ का रहस्य

महाभारत का युद्ध कुरुक्षेत्र में ही क्यों हुआ?

कुरुक्षेत्र युद्ध कौरवों और पाण्डवों के मध्य कुरु साम्राज्य के सिंहासन की प्राप्ति के लिए लड़ा गया था। इस युद्ध में दोनों तरफ से करोड़ो योद्धा मारे गए थे। यह संसार का सबसे भीषण युद्ध था। भविष्य में ऐसा युद्ध होने की कोई संभावना नहीं है। महाभारत के अनुसार इस युद्ध में भारत के प्रायः सभी… Continue reading महाभारत का युद्ध कुरुक्षेत्र में ही क्यों हुआ?

चरणामृत और पंचामृत

चरणामृत मंदिर में या घर पर जब भी कोई पूजा-पाठ होती है, तो चरणामृत या पंचामृत जरुर दिया हैं। मगर बहुत लोग इसकी महिमा और इसके बनने की प्रक्रिया को नहीं जानते होंगे। ‘चरणामृत’ का अर्थ है, भगवान के चरणों का अमृत जल। पंचामृत का अर्थ है पांच अमृत यानि पांच पवित्र वस्तुओं से बना… Continue reading चरणामृत और पंचामृत

हनुमान चालीसा की रचना

श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुर सुधार । बरनौ रघुवर बिमल जसु, जो दायक फल चारि।। बुद्धिहीन तनु जानि के, सुमिरौ पवन कुमार। बल बुद्धि विद्या देहु मोहि हरहुं कलेश विकार।। हनुमान चालीसा की रचना हिन्दी साहित्य के महाकवि गोस्वामी तुलसीदास जी ने किया था। तुलसीदास जी के द्वारा रचित हनुमान चालीसा में… Continue reading हनुमान चालीसा की रचना

अनोखा साक्षात्कार

विश्व धर्मसभा शिकागो में अंग्रेज विवेकानंदजी का मजाक उड़ाते थे। उन्ही में से एक पत्रकार ने विवेकानंदजी का मजाक उड़ाने के दृष्टिकोण से प्रश्न किया था। पत्रकार सामने वाले व्यक्ति (सन्यासी) से : सर ! आपने अपने अंतिम लेक्चर में ‘संपर्क’ (contact) और ‘जुडाव’ (connection) पर एक स्पीच दिया था लेकिन यह बहुत ही कन्फ्यूज… Continue reading अनोखा साक्षात्कार

रानी बाघेली का त्याग

जिस तरह मेवाड़ राज्य की स्वामिभक्त पन्ना धाय अपने दूध पिते पुत्र का बलिदान देकर चितौड़ के राजकुमार की हत्या होने से बचा लिया था। ठीक उसी तरह राजस्थान के मारवाड़ (जोधपुर) राज्य के नवजात राजकुमार अजीतसिंह को औरंगजेब से बचाने के लिए मारवाड़ राज्य के बलुन्दा की रहने वाली रानी बाघेली ने अपनी नवजात… Continue reading रानी बाघेली का त्याग