धनतेरस

 धनतेरस कार्तिक महीने में कृष्ण पक्ष के ‘त्रयोदशी’ तिथि को मनाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार इसी दिन भगवान धनवंतरी का जन्म हुआ था। कई जगहों पर इसे ‘जमदियारी’ भी कहते हैं। भारत सरकार ने धनतेरस को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। जैन आगम में धनतेरस को 'धन्य तेरस' या 'ध्यान… Continue reading धनतेरस

उस पीढ़ी के लोग

हम उस पीढ़ी के लोग हैं जिन्होंने अपने जीवन को हर मुश्किलों में जीते हुए यहाँ तक पहुंचा है। शायद हमारे पूर्वजों ने इसतरह के दिन नहीं देखें होंगे जो हम देख रहे हैं। हमने जो अपने जीवन में देखा है हमारे बच्चों ने उसे नहीं देखा और आने वाली पीढ़ियाँ भी उसे नहीं देखेंगी।… Continue reading उस पीढ़ी के लोग

लोकोक्तियाँ (proverbs)

‘लोकोक्ति’ का अर्थ होता है लोक में प्रचलित ‘उक्ति या कथन’। यह दो शब्दों के मेल से बना है ‘लोक+उक्ति’ लोक का अर्थ होता है ‘लोक’ और ‘उक्ति’ का अर्थ होता है ‘कथन’। अथार्त लोक में प्रचलित उक्ति या कथन। लोकोक्ति के रचनाकार का पता नहीं होता है। इसलिए अंग्रेजी में इसकी परिभाषा दी गई… Continue reading लोकोक्तियाँ (proverbs)

रामरस (नमक) salt

हमारे जीवन में रामरस का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है। जिस प्रकार राम के बिना जीवन अधूरा है। उसी प्रकार रामरस के बिना भोजन अधूरा है। हम चाहे जितना भी जायकेदार भोजन बना ले और उसमे नमक नहीं डाले तो भोजन का जायका ही बिगड़ जाता है। नमक रसोईघर की सबसे महत्वपूर्ण वस्तु है। यह… Continue reading रामरस (नमक) salt

नमस्कार का मीठा फल

‘नमस्कार’ या ‘प्रणाम’ करना ‘संस्कार’ और ‘सम्मान’ दोनों है। प्रणाम एक यौगिक और मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया भी है। भारत में दोनों हाथ जोड़कर नमस्कार और प्रणाम करने की परम्परा रही है। नमस्कार करने से सामने वाला व्यक्ति अपने आप विनम्र हो जाता है। ‘नमस्कार’ ‘नमः’ धातु से बना है। नमः का अर्थ होता है ‘नमन करना’… Continue reading नमस्कार का मीठा फल

सुशीला (संस्मरण)

सावन का महीना था। गांव में चारों तरफ हरियाली ही हरियाली दिखाई दे रही थी। कभी रिमझिम हल्की सी फुहार, कभी जोर से बरसात, कभी काली घटाओं का घिरना और चले जाना तो कभी बिजली कड़कना और जोर से बरसना। ये सभी प्राकृतिक क्रियाएं मन को बहुत ही लुभा रही थी। गाँव के सभी लोग… Continue reading सुशीला (संस्मरण)

खुद्बुदी चिरैया

प्रकृति का हर प्राणी, हर जीव प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप में एक दूसरे पर निर्भर हैं। हमारे देश में पक्षियों की बहुत सारी प्रजातियाँ पाई जाती है। गौरया उनमे एक छोटी सी चिड़िया है। यह एक घरेलू चिड़िया है। जहाँ लोग रहते है, वही पर यह नन्हीं चिड़िया रहना पसंद करती है। गौरया मानव के… Continue reading खुद्बुदी चिरैया

ईश्वर के नाम पत्र

हे परमेश्वर!   चरण स्पर्श  हे प्रभू! बहुत दिनों से मेरे मन में कुछ विचार आ रहे थे। मन बहुत ही चिंतित और व्याकुल था। मैं अपने अंतर्मन की बात किससे कहूँ। यह समझ में नहीं आ रहा था। लोगों से कहने पर वे तो हँसेंगे या मजाक उड़ाएंगे। रहीम कवि ने कहा था- “रहिमन… Continue reading ईश्वर के नाम पत्र

भाषा एवं संस्कृति के प्रसार में अनुवाद की भूमिका

आज के युग को यदि अनुवाद का युग कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में प्रगति होने से आज विश्व सिमट कर छोटा होता जा रहा है। यातायात और संचार के साधनों में क्रांतिकारी परिवर्तन हुआ है जिसके फलस्वरूप हम भौगोलिक सीमाओं को पार कर बड़े-बड़े और दूर-दूर के देशों से… Continue reading भाषा एवं संस्कृति के प्रसार में अनुवाद की भूमिका

भारतीय संस्कृति और राष्ट्र

भूमिका- भारतीय संस्कृति प्राचीन एवं गौरवपूर्ण है। विश्व संस्कृति के इतिहास में इसका विशिष्ठ स्थान है। इस संस्कृति को समृद्ध और समुन्नत बनाने में हमारे ऋषियों, मुनियों, साधू-संतों, दार्शनिकों, विचारकों, आदि का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। गुरु वेदव्यास, बाल्मीकि, कालिदास, स्वयंभू, पुष्पदंत, संत तुलसीदास, संत कबीर दास, गरुनानक देव, गुरुगोविंद सिंह, रामधारी सिंह ‘दिनकर’, जयशंकर… Continue reading भारतीय संस्कृति और राष्ट्र