छायावाद में मुकुटधर पाण्डेय की भूमिका (आलेख)

हिन्दी साहित्य को पढ़ना और पढ़ाना जितना आसान समझा जाता है, असल में यह उतना आसन है नहीं। हिन्दी साहित्य में अनेक विधाएं हैं। उन सभी विधाओं में काव्य और काव्य की विधा में ‘छायावाद’ का तो कुछ कहना ही नहीं। छायावाद हिन्दी साहित्य की अत्यंत समृद्ध, सौन्दर्यशालिनी, सशक्त एवं कलात्मक काव्यधारा रही है। हिन्दी… Continue reading छायावाद में मुकुटधर पाण्डेय की भूमिका (आलेख)

गोत्र (Lineage)

विवाह के पश्चात् हर बेटी या लड़की को उसके पिता का गोत्र छोड़कर पति का गोत्र अपनाना होता है। यह एक परम्परा है। इस परम्परा के पीछे कुछ कारण अवश्य होंगे। उसे जानने और समझने का प्रयास करते हैं। पहले इसका वैज्ञानिक कारण जानने का प्रयास करते हैं। हम सभी जानते हैं कि स्त्री में… Continue reading गोत्र (Lineage)

‘श्रम का महत्व’ लिंकन (लघु कथा)

अब्राहम लिंकन अमेरिका के सोलहवें और अश्वेत राष्ट्रपति थे। जब वे अमेरिका के राष्ट्रपति बने थे, उस समय उनके पिता मोची का काम करते थे। सीनेट सभा में कुछ घमंडी और अहंकारी व्यक्ति इस बात से बहुत दुखी और नाराज थे कि एक मोची का बेटा राष्ट्रपति कैसे बन गया? पहला दिन सीनेट में जैसे… Continue reading ‘श्रम का महत्व’ लिंकन (लघु कथा)

सीता को तोते का शाप

देवताओं और ऋषि-मुनियों द्वारा मनुष्य को खुश होकर ‘वरदान’ देना और क्रोधित होने पर ‘शाप’ देना। यह प्रथा सबसे अधिक ‘रामायण’ काल और ‘महाभारत’ काल में था। वरदान और शाप से संबंधित अधिक कथाएँ भी उन्हीं दोनों कालों में हुई। यह प्रथा आज भी समाज में विद्यमान है। रामायण के हर पन्ने में कोई-न-कोई रहस्य… Continue reading सीता को तोते का शाप

बुझ त जानी (भोजपुरी बुझौअल) : Riddles

लोक साहित्य की जब भी बात चलती है, तब मन लौट कर लोक जन-जीवन की ओर पहुँच जाता है। जहाँ जाकर लोकगीत, लोक-कला, कथा-कहावतों और लोकोक्तियों का दिव्य दर्शन होता है। मन आनंद विभोर हो जाता है। यह अलिखित लोक साहित्य जन-जीवन के जिह्वा पर होता है और पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ता रहता है।… Continue reading बुझ त जानी (भोजपुरी बुझौअल) : Riddles

हिन्दी वर्णमाला

वर्ण- भाषा की सबसे छोटी इकाई जिसके खंड या टुकड़े नहीं किए जा सकते हैं, उसे वर्ण कहते हैं। जैसे- अ, आ, इ, ई आदि। वर्णमाला- वर्णों की व्यवस्थित समूह को ‘वर्णमाला’ कहते हैं। वर्णमाला में वर्णों की कुल संख्या 52 है। हिन्दी वर्णमाला के समस्त वर्णों को दो भागों में विभक्त किया गया है-… Continue reading हिन्दी वर्णमाला

‘सुशांत’ छिछोरा ! (संस्मरण) Sushant Singh Rajput (Memory)

‘सुशांत’ छिछोरा तो नहीं था तू कमजोर भी नहीं जाते तो सभी हैं किन्तु तरीका ठीक न था ! जाने की इतनी जल्दी क्यों पड़ी थी ? बहुत कुछ करना था अभी बाकी करना ही था छिछोरापन तो फिर जिंदगी से ना करते !! बड़ी आशाएँ थीं, तुमसे हमारी उदाहरण थे, युवाओं के तुम दिल… Continue reading ‘सुशांत’ छिछोरा ! (संस्मरण) Sushant Singh Rajput (Memory)

दसानन

वाल्मीकि रामायण के अनुसार रावण (दसानन) ‘पुलस्य’ मुनि का पौत्र और ‘विश्रवा’ का पुत्र था। विश्रवा की ‘वरवर्णिनी’ और ‘कैकसी’ नाम की दो पत्नियाँ थी। रावण कैकसी का पुत्र था। रामायण में जब रावण सिंहासन पर बैठा रहता था, तब रावण के पैर के नीचे एक नीला रंग का व्यक्ति पेट के बल पर लेटा… Continue reading दसानन

श्रीराम रक्षास्त्रोत मंत्र

राम रामेति रामेति, रमे रामे मनोरमे। सहस्त्रनाम  ततुल्यं, रामनाम वरानने।।  इस मंत्र को ‘श्री रामतारक मंत्र’ भी कहा जाता है। इस मंत्र का जाप, सम्पूर्ण विष्णु सहस्त्रनाम या विष्णु जी के एक हजार नामों के जाप के सामान है। इस मंत्र से संबंधित एक कथा भी प्रचलित है। एक समय भगवान भूतनाथ जी ने अपनी… Continue reading श्रीराम रक्षास्त्रोत मंत्र

नचिकेता

वैदिक युग में नचिकेता नाम का एक तेजस्वी ऋषिबालक था। उस बालक की कथा ‘तैत्रीय ब्राह्मण’, ‘कठोपनिषद्’ तथा ‘महाभारत’ में भी उपलब्ध है। नचिकेता ने बाल्यकाल में ही भौतिक वस्तुओं का परित्याग कर यम से ‘आत्मा’ और ‘ब्रह्म’ का ज्ञान प्राप्त कर लिया था। वह ऋषि वाजश्रवा का पुत्र था। नचिकेता के पिता महर्षि वाजश्रवा ने "विश्वजित्" यज्ञ किया। उन्होंने प्रतिज्ञा किया था कि इस यज्ञ… Continue reading नचिकेता