बुझ त जानी (भोजपुरी बुझौअल) : Riddles

लोक साहित्य की जब भी बात चलती है, तब मन लौट कर लोक जन-जीवन की ओर पहुँच जाता है। जहाँ जाकर लोकगीत, लोक-कला, कथा-कहावतों और लोकोक्तियों का दिव्य दर्शन होता है। मन आनंद विभोर हो जाता है। यह अलिखित लोक साहित्य जन-जीवन के जिह्वा पर होता है और पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ता रहता है।… Continue reading बुझ त जानी (भोजपुरी बुझौअल) : Riddles

हिन्दी वर्णमाला

वर्ण- भाषा की सबसे छोटी इकाई जिसके खंड या टुकड़े नहीं किए जा सकते हैं, उसे वर्ण कहते हैं। जैसे- अ, आ, इ, ई आदि। वर्णमाला- वर्णों की व्यवस्थित समूह को ‘वर्णमाला’ कहते हैं। वर्णमाला में वर्णों की कुल संख्या 52 है। हिन्दी वर्णमाला के समस्त वर्णों को दो भागों में विभक्त किया गया है-… Continue reading हिन्दी वर्णमाला

‘सुशांत’ छिछोरा ! (संस्मरण) Sushant Singh Rajput (Memory)

‘सुशांत’ छिछोरा तो नहीं था तू कमजोर भी नहीं जाते तो सभी हैं किन्तु तरीका ठीक न था ! जाने की इतनी जल्दी क्यों पड़ी थी ? बहुत कुछ करना था अभी बाकी करना ही था छिछोरापन तो फिर जिंदगी से ना करते !! बड़ी आशाएँ थीं, तुमसे हमारी उदाहरण थे, युवाओं के तुम दिल… Continue reading ‘सुशांत’ छिछोरा ! (संस्मरण) Sushant Singh Rajput (Memory)

दसानन

वाल्मीकि रामायण के अनुसार रावण (दसानन) ‘पुलस्य’ मुनि का पौत्र और ‘विश्रवा’ का पुत्र था। विश्रवा की ‘वरवर्णिनी’ और ‘कैकसी’ नाम की दो पत्नियाँ थी। रावण कैकसी का पुत्र था। रामायण में जब रावण सिंहासन पर बैठा रहता था, तब रावण के पैर के नीचे एक नीला रंग का व्यक्ति पेट के बल पर लेटा… Continue reading दसानन

श्रीराम रक्षास्त्रोत मंत्र

राम रामेति रामेति, रमे रामे मनोरमे। सहस्त्रनाम  ततुल्यं, रामनाम वरानने।।  इस मंत्र को ‘श्री रामतारक मंत्र’ भी कहा जाता है। इस मंत्र का जाप, सम्पूर्ण विष्णु सहस्त्रनाम या विष्णु जी के एक हजार नामों के जाप के सामान है। इस मंत्र से संबंधित एक कथा भी प्रचलित है। एक समय भगवान भूतनाथ जी ने अपनी… Continue reading श्रीराम रक्षास्त्रोत मंत्र

नचिकेता

वैदिक युग में नचिकेता नाम का एक तेजस्वी ऋषिबालक था। उस बालक की कथा ‘तैत्रीय ब्राह्मण’, ‘कठोपनिषद्’ तथा ‘महाभारत’ में भी उपलब्ध है। नचिकेता ने बाल्यकाल में ही भौतिक वस्तुओं का परित्याग कर यम से ‘आत्मा’ और ‘ब्रह्म’ का ज्ञान प्राप्त कर लिया था। वह ऋषि वाजश्रवा का पुत्र था। नचिकेता के पिता महर्षि वाजश्रवा ने "विश्वजित्" यज्ञ किया। उन्होंने प्रतिज्ञा किया था कि इस यज्ञ… Continue reading नचिकेता

वक्त (कविता)

वक्त वक्त की बात है भईया वक्त बड़ा ही है बलवान ।   वक्त के आगे सब कोई हारा दुर्बल हो या हो पहलवान। वक्त बदलता रहता सबका गरीब हो या हो धनवान । वक्त वक्त पर भारी है अब वक्त बड़ा ही है बलवान।।   बदला वक्त जब हरिश्चन्द्र का पहुँचा दिया उनको श्मशान।… Continue reading वक्त (कविता)

लिंग (Gender)

लिंग- संज्ञा के जिस रूप से किसी व्यक्ति या वस्तु के नर या मादा जाती का बोध होता हैं उसे लिंग कहते हैं। जैसे- दादा, दादी, माता, पिता, शेर, शेरनी, लड़का, लड़की आदि।  लिंग के तीन प्रकार होते हैं- पुल्लिंग- जिन शब्दों से ‘पुरुष’ या ‘नर’ जाती का बोध होता है उसे पुल्लिंग कहते हैं।… Continue reading लिंग (Gender)

तृण धरि ओट

बात उस समय कि है, जब रावण माता सीता का हरण करके लंका ले गया था। लंका में माता सीता जी वट वृक्ष के नीचे बैठ गई और चिंतित रहने लगी। रावण वही पर आकर सीता माता को रोज धमकाता और चला जाता था लेकिन सीता माता उसे कुछ भी नहीं बोलती थी। कई बार… Continue reading तृण धरि ओट

रघुकुल का त्याग एवं समर्पण

रघुकुल रीत सदा चली आई। प्राण जाए पर वचन न जाई।। रामायण ‘रघुकुल’ की त्याग एवं समर्पण की कथा है। बात उस समय की है, जब दशरथ पुत्र भरत नंदीग्राम में रहते थे। तब शत्रुघ्न जी भरत के आदेशानुसार राज्य का संचालन कर रहे थे। एक दिन माता कौशल्या अपने महल में सो रही थी,… Continue reading रघुकुल का त्याग एवं समर्पण