पक्ष (Aspect)

सहायक क्रिया के वे अंश जो क्रिया की अपूर्णता, पूर्णता किसी वस्तु या व्यक्ति की अवस्था या स्थिति आदि की सूचना देते हैं वे ‘पक्ष’ (Aspect)सूचक अंश (चिह्न) कहे जाते हैं। प्रत्येक कार्य किसी कालावधि के बीच होता है जो प्रारंभ से अंत तक फैला रहता है। इस फैली हुई कालावधि  में कार्य व्यापार को… Continue reading पक्ष (Aspect)

काल (Tense)

सहायक क्रिया क्रियापद पदबंध में ‘मुख्य क्रिया’ (सरल, संयुक्त, नामिक, मिश्र व्युत्पन्न आदि) को छोड़कर जो भी अंश शेष रह जाता है वह ‘सहायक क्रिया’ (Auxiliary verv) का होता है। जहाँ मुख्य क्रिया ‘क्रिया पदबंध’ को मुख्य अर्थ या कोशगत अर्थ देती है वहाँ सहायक क्रिया से व्याकरणिक अर्थ को सूचना मिलती है। काल, पक्ष,… Continue reading काल (Tense)

नीरव वेदना की दीपशिखा: महादेवी

नीरव नभ की श्यामल छाया मेंकिसने यह करुणा-दीप जलाया?किस वीणा के मूक स्वरों नेअश्रु-संगीत जगत में गाया? वह तुम ही थीं-वेदना की वेणु पर जीवन का राग सुनाती,निशा की नीरव गोद में बैठपीड़ा की ज्योति जगाती। तुम्हारी पंक्तियों मेंदुख की मंदाकिनी बहती है,हर अक्षर में मानोआत्मा की अनुगूँज रहती है। नील गगन की उदास चाँदनी-सीतुम्हारी… Continue reading नीरव वेदना की दीपशिखा: महादेवी

ईश्वर की असीम अनुकंपा के दस अद्भुत उपहार

हम जीवन की आपाधापी में जब उलझे हुए रहते हैं, तब अक्सर उन चमत्कारों को भूल जाते हैं जो हर क्षण हमारे साथ घटित हो रहे होते हैं। हम बड़ी-बड़ी उपलब्धियों के लिए तो ईश्वर को याद करते हैं, पर उन सहज, निरंतर और नि:शब्द उपहारों पर ध्यान नहीं देते जिनके सहारे हमारा जीवन चल… Continue reading ईश्वर की असीम अनुकंपा के दस अद्भुत उपहार

कलम है जीवन की नैया (कविता)

कलम है जीवन की नैया,शब्द बने इसके पतवार,सोच के सागर पार कराती,दिखलाती सत्य का संसार। अज्ञान की काली घटाओं में,यह दीपक बन जलती है,झूठ, भ्रम और अंधकार को,क्षण भर में ही छलती है। जहाँ मौन बोझिल हो जाए,वहाँ कलम स्वर पाती है,दबी हुई हर पीड़ा को,काग़ज़ पर उतार लाती है। सत्ता से प्रश्न पूछे जो,वह… Continue reading कलम है जीवन की नैया (कविता)

“करुणा की दीपशिखा : महादेवी”

वेदना की वीणा परसजाया जिसने संगीत जीवन का शब्दों में आँसू पिरोकरमानवता का दीप जलाया। वह स्वर थी नीरव पीड़ा का,वह करुणा की गहरी धारा थी,हिंदी के नभ में चाँद बनीवह काव्य-गगन की तारा थी। मृदुल भाव की मंद बयार,संवेदना का अमर उजाला,हर पंक्ति में झरता दिखताहृदय का निर्मल नीर निराला। नारी के मौन संतापों… Continue reading “करुणा की दीपशिखा : महादेवी”

क्यों जिंदगी इम्तिहान लेती है?

पता नहीं क्यों? जिंदगी इतना, इम्तिहान क्यों लेती है? खुशियों को राहें छीन, गम ही गम देती है जो ढूँढ़ता है चैन, उसे वह भटकाती है दिल के उजाले को, वह अक्सर धूँधला बनाती हैं कभी आशाओं की दीप जलाती है तो कभी वह आँसुओं से बुझाती है हँसी के पल दिखाकर वह न जाने… Continue reading क्यों जिंदगी इम्तिहान लेती है?

“नीर भरी संध्या की वेणु”

नीलिमा के नीरव आँगन मेंकिसने यह दीप जलाया है?किसके करुण कपोलों सेअश्रु-मोती झर आया है? शायद किसी विरही बादल नेमन की पीड़ा गाई होगी,या चाँदनी की मौन लहर नेअंतर की वीणा छेड़ी होगी। वन की पथराई छाया मेंजब पवन सिसकियाँ भरता है,तब लगता है कोई प्राची सेमूक व्यथा का पत्र धरता है। ओ अज्ञात पथिक!तुम्हारे… Continue reading “नीर भरी संध्या की वेणु”

स्वामी विवेकानंद : माँ की शिक्षा

स्वामी विवेकानंद का बचपन का नाम नरेंद्र था। वे बचपन में बहुत चंचल, जिज्ञासु और साहसी स्वभाव के थे। उनके व्यक्तित्व के निर्माण में उनकी माता भुवनेश्वरी देवी की शिक्षा और संस्कारों का बहुत बड़ा योगदान था। नरेंद्र की माँ उन्हें बचपन से ही सत्य, साहस और निडरता की शिक्षा देती थीं। वे अक्सर उन्हें… Continue reading स्वामी विवेकानंद : माँ की शिक्षा

“शेर की तरह साहसी बनो : विवेकानंद का प्रेरक प्रसंग”

स्वामी विवेकानंद बचपन से ही अत्यंत निडर, साहसी और तर्कशील स्वभाव के थे। उनका बाल्यकाल का नाम नरेंद्रनाथ था। वे किसी भी बात को बिना सोचे-समझे स्वीकार नहीं करते थे, बल्कि हर बात को तर्क और अनुभव की कसौटी पर परखते थे। एक बार की बात है, नरेंद्र अपने मित्रों के साथ एक पेड़ पर… Continue reading “शेर की तरह साहसी बनो : विवेकानंद का प्रेरक प्रसंग”