स्वामी विवेकानंद का बचपन का नाम नरेंद्र था। वे बचपन में बहुत चंचल, जिज्ञासु और साहसी स्वभाव के थे। उनके व्यक्तित्व के निर्माण में उनकी माता भुवनेश्वरी देवी की शिक्षा और संस्कारों का बहुत बड़ा योगदान था। नरेंद्र की माँ उन्हें बचपन से ही सत्य, साहस और निडरता की शिक्षा देती थीं। वे अक्सर उन्हें प्रह्लाद और शिवाजी महाराज जैसे वीर और धर्मनिष्ठ व्यक्तियों की कहानियाँ सुनाया करती थीं, ताकि उनके भीतर साहस, धर्म और आत्मविश्वास के संस्कार विकसित हो सकें।
एक बार उनकी माँ ने उन्हें समझाते हुए कहा—
“जीवन में सदा सत्य के मार्ग पर चलो और निडर बनकर जियो। जो व्यक्ति सत्य के साथ जीता है, उसे किसी से भी डरने की आवश्यकता नहीं होती।”
माता की यह शिक्षा नरेंद्र के मन में गहराई से बस गई। यही कारण था कि आगे चलकर स्वामी विवेकानंद के व्यक्तित्व में सत्यनिष्ठा, निर्भीकता और आत्मविश्वास के गुण स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं। उनकी माँ द्वारा दिए गए ये संस्कार ही उनके जीवन की प्रेरणा और शक्ति का स्रोत बने।
जय हिन्द