सीता को तोते का शाप

देवताओं और ऋषि-मुनियों द्वारा मनुष्य को खुश होकर ‘वरदान’ देना और क्रोधित होने पर ‘शाप’ देना। यह प्रथा सबसे अधिक ‘रामायण’ काल और ‘महाभारत’ काल में था। वरदान और शाप से संबंधित अधिक कथाएँ भी उन्हीं दोनों कालों में हुई। यह प्रथा आज भी समाज में विद्यमान है। रामायण के हर पन्ने में कोई-न-कोई रहस्य… Continue reading सीता को तोते का शाप

बरगद को वरदान

प्रभु श्री राम के वन जाने से अयोध्या के सभी निवासी दु:खी थे। राजा दशरथ, अपने दोनों बेटे और बहु के वियोग को बर्दाश्त नहीं कर सके। वे स्वर्ग सिधार गए। पिता की मृत्यु की खबर से राम, लक्ष्मण और सीता बहुत दु:खी हुए। उन्होंने जंगल में ही पिंडदान करने का निश्चय किया। पिंडदान के… Continue reading बरगद को वरदान

उपसर्ग और प्रत्यय (Prefix and Suffix)

उपसर्ग (Prefix) उप+सर्ग दो शब्दों के मेल से बना है। ‘उप’ का अर्थ होता है समीप, निकट या पास तथा ‘सर्ग’ का अर्थ होता है, बनाना या सृष्टि करना। उपसर्ग उस अव्यय या शब्दांश को कहते हैं, जो किसी शब्द के आरम्भ में जुड़कर उसके अर्थ में परिवर्तन कर विशेषता ला देता है। जैसे- ‘भाव’… Continue reading उपसर्ग और प्रत्यय (Prefix and Suffix)

कारक (Case)

कारक (case) के प्रकार और विभक्ति चिन्ह  कारक की परिभाषा- संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से वाक्य के अन्य शब्दों के साथ उसके संबंध का बोध होता है, उसे कारक कहते हैं। हिन्दी में आठ (8) कारक हैं- कर्ता, कर्म, करण, सम्प्रदान, अपादान, सम्बन्ध, अधिकरण और सम्बोधन कारक के विभक्ति चिन्ह  कारक के विभक्ति… Continue reading कारक (Case)

विराम चिन्ह (Punctuation Mark)

विराम (Punctuation Mark) - विराम का अर्थ होता है- रुकना या ठहरना। भिन्न-भिन्न भावों और विचारों को स्पष्ट करने के लिए जिन चिन्हों का प्रयोग वाक्य के बीच में या अंत में किया जाता है, उसे विराम चिन्ह कहते हैं। परिभाषा- जब हम अपने भावों को भाषा के द्वारा व्यक्त करते हैं, तब एक भाव… Continue reading विराम चिन्ह (Punctuation Mark)

बुझ त जानी (भोजपुरी बुझौअल) : Riddles

लोक साहित्य की जब भी बात चलती है, तब मन लौट कर लोक जन-जीवन की ओर पहुँच जाता है। जहाँ जाकर लोकगीत, लोक-कला, कथा-कहावतों और लोकोक्तियों का दिव्य दर्शन होता है। मन आनंद विभोर हो जाता है। यह अलिखित लोक साहित्य जन-जीवन के जिह्वा पर होता है और पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ता रहता है।… Continue reading बुझ त जानी (भोजपुरी बुझौअल) : Riddles

बाणों की शय्या (कहानी)

भीष्म पितामह महाभारत के सबसे महत्वपूर्ण पात्रों में से एक थे। भीष्म पितामह गंगा तथा शांतनु के आठवीं संतान थे। उनका मूलनाम देवव्रत था। भीष्म ने अपने पिता शांतनु का सत्यवती से विवाह करवाने के लिए आजीवन ब्रह्मचर्य का पालन करने की ‘भीष्म प्रतिज्ञा’ किया था। अपने पिता के लिए इस तरह की पितृभक्ति देखकर… Continue reading बाणों की शय्या (कहानी)

शापित कुन्ति

कुन्ति महाभारत में वर्णित पांडवों की माता थी। वे वासुदेवजी की बहन और भगवान श्री कृष्णा की बुआ थी। महाराज कुन्तिभोज ने कुंती को गोद लिया था। कुन्तिभोज के परम मित्र शूरसेन थे। वे बड़े ही धर्मात्मा थे। कुन्तिभोज के पास सब कुछ तो था किन्तु संतान नहीं थी। राजा कुन्तिभोज संतान के अभाव में… Continue reading शापित कुन्ति

संजय की दिव्यदृष्टि

महाभारत एक ऐसा ग्रन्थ है, जिसमें भारत का ही नहीं, विश्व इतिहास का भी रहस्य छुपा हुआ है। संजय महाभारत का महत्वपूर्ण पात्र और अंधे कौरव राजा धृतराष्ट्र के सारथी थे। संजय महर्षि व्यास के शिष्य और धृतराष्ट्र की राज्यसभा के सम्मानित सदस्य थे। संजय विद्वान गावाल्गण नामक सूत के पुत्र थे। वे विनम्र और… Continue reading संजय की दिव्यदृष्टि