पीढ़ी दर पीढ़ी का प्यार

आज की पीढ़ी का प्यार बोलता है,
हर पल शब्दों में खुद को तोलता है।
सिर्फ मोबाइल और स्क्रीन पे दिल धड़कते हैं,
इमोजी में जज़्बात रोज़ चमकते हैं।

“आई लव यू” के संदेश सुबह-शाम,
हर तस्वीर में रिश्तों का नाम।
दुनिया को दिखाने की है होड़ बड़ी,
भावनाओं की राह कहीं जाती मुड़ी।

पहले की पीढ़ी का प्यार बोलता नहीं था,
वो चुप रहकर भी कभी डोलता नहीं था।
नज़रों की भाषा में ही बातें होती थीं,
सन्नाटों में सिर्फ मुलाकातें होती थीं।

एक चिट्ठी कई दिनों तक महकती थी,
एक प्रतीक्षा उम्रभर दहकती थी।
हाथ-से-हाथ छू जाए तो धड़कन बढ़ जाती थी,
बिन कहे ही हर बात समझ आ जाती थी।

आज शब्द अधिक हैं, अर्थ कम हो गए,
रिश्ते तेज़ हुए, पर गहरे कम हुए।
साधन कम थे तब, पर अपनापन बहुत था,
हर वादे में सच्चाई का दर्पण था।

ना आज को बुरा कहें, ना कल को महान,
हर युग का अपना होता है सम्मान।
बस प्रेम में सच्चाई और धैर्य रहे,
मन से मन तक जाने का वैराग्य रहे।

प्यार अगर सच्चा हो, तो युग क्या देखे,
वो मौन में भी बोले, शब्दों में भी लिखे।
जिस दिल में सम्मान और विश्वास रहे,
वहीं हर पीढ़ी का प्रेम ख़ास रहे।

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