काल (Tense)

सहायक क्रिया

क्रियापद पदबंध में ‘मुख्य क्रिया’ (सरल, संयुक्त, नामिक, मिश्र व्युत्पन्न आदि) को छोड़कर जो भी अंश शेष रह जाता है वह ‘सहायक क्रिया’ (Auxiliary verv) का होता है। जहाँ मुख्य क्रिया ‘क्रिया पदबंध’ को मुख्य अर्थ या कोशगत अर्थ देती है वहाँ सहायक क्रिया से व्याकरणिक अर्थ को सूचना मिलती है। काल, पक्ष, वृत्ति तथा वाच्य ऐसी व्याकरणिक कोटियाँ हैं। जिनके प्रत्यय सहायक क्रिया का निर्माण करते हैं। अतः सहायक क्रिया से संबंधित व्याकरणिक कोटियाँ इस प्रकार हैं-

काल (Tense)

काल किसे कहते है ?

काल का अर्थ है? ‘समय’। प्रायः लोग ‘काल’ और ‘समय’ को एक ही मान लेते हैं। परन्तु ‘काल’ और ‘समय’ एक नहीं हैं। ‘समय’ एक ‘भौतिक इकाई’ (भौतिक सत्य) है तथा ‘काल’ एक व्याकरणिक (भाषिक) इकाई’ या समय के प्रति वक्ता का मानसिक बोध जो भाषा (व्याकरण) में व्यक्त होता है वही ‘काल’ है।

क्रिया के जिस रूप से उसके होने का समय मालूम हो, उसे ‘काल’ कहते है। काल के इस रूप से क्रिया की पूर्णता, अपूर्णता के साथ ही संपन्न होने के समय का बोध होता है।

काल के तीन भेद हैं

1. भूतकाल (Past Tense)
2. वर्तमान काल (Present Tense)
3. भविष्यत् काल (Future Tense)

1. भूतकाल (Past Tense)

भूतकाल का अर्थ है बीता हुआ समय। किसी क्रिया के घटित होने से पूर्व की स्थिति ‘भूतकाल’ कही जाती है। अतः किसी कार्य के बीते हुए समय (भूतकाल) में निरंतर होने या किसी अनिश्चित समय पर होने का बोध होता है, या वाक्य में जिस क्रिया रूप से बीते समय का होना पाया जाता है वह भूतकाल कहलाता है। यह क्रिया की समाप्ति बतलाने वाला रूप होता है। जैसे-

1. मैं आगरा गया था।

2. बच्चा चला गया।

3. वे पात्र लिख रहे थे।

4. माता जी कहानी सुना रही थी।

5. वह शाम को चार बजे लौटी थीं।

6. वे दिल्ली चले गए।

भूतकाल के सूचक चिह्न हैं- था, थे, थी, अथवा आ, ए, ई।  

भूतकाल के भेद:

1. सामान्य भूत (Simple Past या Past Indefinite) जिस काल से भूतकाल में क्रिया के सामान्य रूप होने का संकेत मिलता है, उसे सामान्य भूत कहते है। जैसे-

1. राम आया और मोहन चला गया।

2. उसने खाना खाया।

3. मैं स्कूल गया।

4. रवि ने देखा।

2. आसन्न भूत (Recent Past) आसन्न का अर्थ है- ‘पास’ या ‘निकट’। क्रिया के जिस रूप से क्रिया के अभी-अभी समाप्त होने का बोध हो, उसे आसन्न भूतकाल कहते हैं। जैसे-

1. वह अभी आया है।

2. उसने पुस्तक पढ़ी है।

3. राहुल ने खाना खाया है।

4. राधा गेंद से खेली है।


3. पूर्ण भूत (Past Perfect) भूतकाल की जिस क्रिया से यह सुचोइत होता है कि कोई कार्य भूतकाल में बहुत पहले समाप्त हो चूका था, वह पूर्ण भूत कहलाता है। जैसे-

1. छात्रों ने पाठ पढ़ा था।

2. राम खाना खा चूका था।

3. सुरेश कल दिल्ली गया था।

4. छात्र परीक्षा दे चुके थे।

4. अपूर्ण भूतकाल (Past Imperfect या Incomplete Past) भूतकाल की जिस क्रिया से यह विदित हो कि कार्य भूतकाल में प्रारंभ हो चूका था, किन्तु काम की पूर्णता प्रकट नहीं हो उसे अपूर्ण भूत कहते है। जैसे-

1. गोविंद पढ़ रहा था।

2. सुशीला खाना बना रही थी।

3. राधा गीत गा रही थी।

4. मोहन खाना खा रहा था।  

5. संदिग्ध भूत (Doubtful Past) भूतकाल के जिस क्रिया के करने या अथवा होने पर संदेह प्रतीत हो, उसे संदिग्ध भूत कहते है। जैसे-

1. उसने कविता पढ़ी होगी।

2. उसने गीत गाया होगा।

3. मोहन सो गया होगा।

4. पिताजी बाजार गए होंगे।

6. हेतु-हेतुमद भूत (Conditional Past) जिस क्रिया से यह जाना जा सके कि कार्य भूतकाल में हो सकता था, परन्तु किसी अन्य कार्य के न हो सकने के कारण न हो सका, वहां हेतु-हेतुमद भूत होता है। जैसे-

1. छात्र पढ़ते तो उतीर्ण हो जाते।

2. कपिल पढता तो पास हो जाता।

3. यदि वर्षा होती तो किसान खुश होता।

4. अगर तुम मिल जाते तो मेरा काम बन जाता।   

2. वर्तमान काल ((Present Tense) : वर्तमान काल के तीन भेद हैं-

1. सामान्य वर्तमान (Present Indefinite)

2. अपूर्ण वर्तमान (Present Continuous/Imperfect)

3. संदिग्ध वर्तमान (Doubtful Present)

1. सामान्य वर्तमान (Present Indefinite) क्रिया के जिस रूप से वर्तमान काल में क्रिया का होना या करना पाया जाता है, उसे सामान्य वर्तमान काल कहते हैं। जैसे-

1. वह प्रातः उठता है।

2. वह जाता है।

3. वे जाते हैं।

4. पिताजी बाजार जाते हैं।

2. अपूर्ण वर्तमान (Present Continuous/Imperfect) क्रिया के जिस रूप से यह पता चले कि कार्य वर्तमान काल में शुरू हो गया है और अभी तक जारी है, उसे अपूर्ण वर्तमान काल कहते हैं। जैसे-

1. कपिल खेल रहा है।

2. आचार्य पढ़ा रहे हैं।

3. छात्र पढ़ रहे हैं।

4. मैं रेडियो सुन रहा हूँ।

विशेष- इस काल का प्रयोग भविष्य म,ए होने वाले कार्य का संकेत करने के लिए किया जाता है। जैसे-

1. वह कल हैदराबाद जा रहा है।

2. राष्ट्रपति 20 जुलाई को यहाँ आ रहे हैं।

3. संदिग्ध वर्तमान (Doubtful Present) क्रिया के जिस रूप द्वारा काम के वर्तमान काल में होने या करने में संदेह का बोध हो, संदिग्ध वर्तमान काल कहते है। जैसे-

1. अध्यापक महोदय आते होंगे।

2. पिताजी दफ्तर पहुँचते होंगे।

3. मेहमान गाँव से आ रहे होंगे।

3. भविष्यत् काल (Future Tense)

क्रिया के जिस रूप से यह ज्ञाता होता है कि कार्य आने वाले समय में संपन्न होगा, उसे भविष्यत् काल कहते हैं, जैस-

1. वह पत्र लिखेगा।

2. वह पुस्तक पढ़ेगी।

भविष्यत काल के तीन भेद है-

1. सामान्य भविष्यत् काल (Future Indefinite/Simple Future)

2. संभाव्य भविष्यत काल (Future Doubtful Tense)

3. हेतु हेतु मद् भविष्यत् काल (Future Continuous Tense)

1. सामान्य भविष्यत् काल (Future Indefinite/Simple Future)क्रिया के जिस रूप से यह पता चले कि काम भविष्यत् काल में सामान्य रूप से पूरा होगा, उसे सामान्य भविष्यत् काल कहते हैं। जैसे-

1. माली पौधे में पानी देगा

2. हम सब खेलने जाएँगे

3. कृष्णा लेख लिखेगी।

4. विकाश गाँव जायेगा।

2. संभाव्य भविष्यत काल (Future Doubtful Tense) क्रिया का वह रूप, जिसमे काम के भविष्य के किए जाने या होने की संभावना मात्र है, निश्चय नहीं, वह संभाव्य या संदिग्ध भविष्यत् काल कहलाता है। जैसे-

1. शायद आज वर्ष होगी।

2. हो सकता है मुझे पुरस्कार मिल जाए।

3. शायद विनोद चला गया।

4., शायद कल सवेरे वह आ जाए।

3. हेतु हेतु मद भविष्यत् काल (Future Continuous Tense) इस रूप में क्रिया किसी कारण पर आधारित होती है। काल का यह रूप भी दो उपवाक्यों को जोड़ता है और परिणाम भविष्यत् में दर्शाता है। जैसे-

1. यदि पढ़ेगा तो उतीर्ण होगा।

2. यदि वर्षा होगी तो फसल भी अच्छी होगी।

3. वह आएगा रभी मैं जाऊँगा।

4. व्यायाम करोगे तभी स्वस्थ रहोगे।

विशेष- मानक हिंदी व्याकरण में भविष्यत् काल के दो भेद माने गए हैं।

1. सामान्य भविष्यत् काल और 2. संभाव्य भविष्यत काल।

जय हिन्द

Leave a comment

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.