
“नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे
त्वया हिन्दुभूमे सुखं वर्धितोऽहम्।”
अर्थ- हे! सदा सुख-स्नेह और प्यार करने वाली मातृभूमि, मैं तुझे सदैव नमस्कार करता हूँ। तूने हमें सुख से लालन-पालन किया है।
“महामङ्गले पुण्यभूमे त्वदर्थे
पतत्वेष कायो नमस्ते नमस्ते॥”
अर्थ- हे पुण्यभूमि! हे मंगलमयी मातृभूमि! तेरी सुरक्षा और सेवाकार्य में मेरा यह शरीर समर्पित हो। मैं तुझे बारंबार नमस्कार करता हूँ।
“प्रभो शक्तिमन् हिन्दुराष्ट्राङ्गभूता,
इमे सादरं त्वां नमामो वयम्।
त्वदीयाय कार्याय बद्धा कटीयम्,
शुभामाशिषं देहि तत्पूर्तये।”
अर्थ- हे सर्वशक्तिमान ईश्वर! हम हिंदू राष्ट्र के सुपुत्र तुझे आदर सहित प्रणाम करते हैं। तेरे ही कार्य के लिए हमने
अपनी कमर कस ली है। उसे पूर्ण करने के लिए तू हमें शुभ आशीर्वाद दे।
“अजय्यां च विश्वस्य देहीश शक्तिम्,
सुशीलं जगद्येन नम्रं भवेत्।
श्रुतं चैव यत्कण्टकाकीर्णमार्गम्,
स्वयं स्वीकृतं नः सुगंकारयेत्।”
अर्थ- हे ईश्वर! हमें ऐसी शक्ति दो जिससे यह विश्व हमें कभी कोई चुनौति नहीं दे सके। हमें ऐसा शुद्ध चारित्र्य दे जिसके समक्ष संपूर्ण विश्व नतमस्तक हो जाये। हमें ऐसा ज्ञान दे कि स्वयं के द्वारा स्वीकृत किया गया यह काँटों से भरा हुआ मार्ग सुगम हो जाये।
“समुत्कर्ष निःश्रेयसस्यैकमुग्रम्,
परं साधनं नाम वीरव्रतम्।
तदन्तः स्फुरत्वक्षया ध्येयनिष्ठा
हृदन्तः प्रजागर्तु तीव्राऽनिशम्।”
अर्थ- उग्र/तीव्र वीरव्रती की भावना हम में उत्स्फूर्त (Spontan eous) होती रहे, जो उच्चतम आध्यात्मिक सुख एवं महानतम ऐहिक समृद्धि प्राप्त करने का एकमेव श्रेष्ठ्तम साधन है। तीव्र एवं अखंड ध्ययेनिष्ठता हमारे अंतःकारण में सदैव जागती रहे।
“विजेत्री च नः संहता कार्यशक्तिर्,
विधायास्य धर्मस्य संरक्षणम्।
परं वैभवं नेतुमेतत् स्वराष्ट्रम्
समर्था भवत्वाशिषा ते भृशम्।”
अर्थ- हे माँ तेरी कृपा से हमारी यह विजयशालिनी संघटित कार्यशक्ति हमारे धर्म का संरक्षण कर इस राष्ट्र को वैभव से उच्चतम शिखर पर पहुँचाने में समर्थ हो।
॥भारत माता की जय॥
॥जय मातृभूमि॥