बाणों की शय्या (कहानी)

भीष्म पितामह महाभारत के सबसे महत्वपूर्ण पात्रों में से एक थे। भीष्म पितामह गंगा तथा शांतनु के आठवीं संतान थे। उनका मूलनाम देवव्रत था। भीष्म ने अपने पिता शांतनु का सत्यवती से विवाह करवाने के लिए आजीवन ब्रह्मचर्य का पालन करने की ‘भीष्म प्रतिज्ञा’ किया था। अपने पिता के लिए इस तरह की पितृभक्ति देखकर… Continue reading बाणों की शय्या (कहानी)

शापित कुन्ति

कुन्ति महाभारत में वर्णित पांडवों की माता थी। वे वासुदेवजी की बहन और भगवान श्री कृष्णा की बुआ थी। महाराज कुन्तिभोज ने कुंती को गोद लिया था। कुन्तिभोज के परम मित्र शूरसेन थे। वे बड़े ही धर्मात्मा थे। कुन्तिभोज के पास सब कुछ तो था किन्तु संतान नहीं थी। राजा कुन्तिभोज संतान के अभाव में… Continue reading शापित कुन्ति

संजय की दिव्यदृष्टि

महाभारत एक ऐसा ग्रन्थ है, जिसमें भारत का ही नहीं, विश्व इतिहास का भी रहस्य छुपा हुआ है। संजय महाभारत का महत्वपूर्ण पात्र और अंधे कौरव राजा धृतराष्ट्र के सारथी थे। संजय महर्षि व्यास के शिष्य और धृतराष्ट्र की राज्यसभा के सम्मानित सदस्य थे। संजय विद्वान गावाल्गण नामक सूत के पुत्र थे। वे विनम्र और… Continue reading संजय की दिव्यदृष्टि

अंगद उवाच

यह बात लंका काण्ड की है। राम और रावण का युद्ध चल रहा था। उस समय रावण को अंगद ने कहा, हे रावण! तू तो मरा हुआ है। तुझे मारने से क्या फायदा...! अंगद की बात सुनकर रावण बोला, मैं तो जीवित हूँ, मरा हुआ कैसे हूँ? अंगद बोले, सिर्फ साँस लेने वाले को जीवित… Continue reading अंगद उवाच

कैकेयी के पुत्र प्रेम

रामायण सनातन धर्म का प्रमुख ग्रन्थ है। इसे पौराणिक, ऐतिहासिक, धार्मिक और दार्शनिक ग्रन्थ मना जाता है। रामायण की एक बड़ी घटना भगवान श्री राम का वन जाना था। राजा दशरथ से विवाह के पहले रानी कैकेयी महर्षि दुर्वासा की सेवा किया करती थी। कैकेयी की सेवा से प्रसन्न होकर महर्षि दुर्वासा ने उनका एक… Continue reading कैकेयी के पुत्र प्रेम

श्रीराम रक्षास्त्रोत मंत्र

राम रामेति रामेति, रमे रामे मनोरमे। सहस्त्रनाम  ततुल्यं, रामनाम वरानने।।  इस मंत्र को ‘श्री रामतारक मंत्र’ भी कहा जाता है। इस मंत्र का जाप, सम्पूर्ण विष्णु सहस्त्रनाम या विष्णु जी के एक हजार नामों के जाप के सामान है। इस मंत्र से संबंधित एक कथा भी प्रचलित है। एक समय भगवान भूतनाथ जी ने अपनी… Continue reading श्रीराम रक्षास्त्रोत मंत्र

नचिकेता

वैदिक युग में नचिकेता नाम का एक तेजस्वी ऋषिबालक था। उस बालक की कथा ‘तैत्रीय ब्राह्मण’, ‘कठोपनिषद्’ तथा ‘महाभारत’ में भी उपलब्ध है। नचिकेता ने बाल्यकाल में ही भौतिक वस्तुओं का परित्याग कर यम से ‘आत्मा’ और ‘ब्रह्म’ का ज्ञान प्राप्त कर लिया था। वह ऋषि वाजश्रवा का पुत्र था। नचिकेता के पिता महर्षि वाजश्रवा ने "विश्वजित्" यज्ञ किया। उन्होंने प्रतिज्ञा किया था कि इस यज्ञ… Continue reading नचिकेता

रघुकुल का त्याग एवं समर्पण

रघुकुल रीत सदा चली आई। प्राण जाए पर वचन न जाई।। रामायण ‘रघुकुल’ की त्याग एवं समर्पण की कथा है। बात उस समय की है, जब दशरथ पुत्र भरत नंदीग्राम में रहते थे। तब शत्रुघ्न जी भरत के आदेशानुसार राज्य का संचालन कर रहे थे। एक दिन माता कौशल्या अपने महल में सो रही थी,… Continue reading रघुकुल का त्याग एवं समर्पण

उर्मिला का त्याग

जब भगवान ‘राम जी’ को चौदह वर्ष का वनवास हुआ तब उनकी पत्नी ‘सीता जी’ ने भी सहर्ष वनवास स्वीकार कर लिया और बचपन से ही राम की सेवा में रहने वाले लक्ष्मण भाई अपने राम भैया से कैसे दूर रह सकते थे? इसलिए उन्होंने ने भी राम के साथ वन जाने के लिए माता… Continue reading उर्मिला का त्याग