चिंतन

  1. अब बस भी कर ऐ जिंदगी, थोड़ी सुस्ता लेने दे।

     अगला दर्द भी सह लेंगे, पिछला तो भुला लेने दे॥

2. हर कदम हमने, जीने के लिए समझौता किया।

     शौक तो ख़ुशी से जीने का था, लेकिन घुट-घुट जिया॥

3. हम दिल के बुरे नहीं है, हमारी भी कुछ कहानी है।

     बदली हुई जो लगती हूँ, ये अपनों की मेहरबानी है॥

4. तू धैर्य रख, ऐ जिंदगी!

     तेरी ताकत, किसी भी जड़ को उखाड़ नहीं सकती है।

5. सभी जानते है, सत्य बहुत कठिन होता है

     सत्य की राह पर चलने वाला, कष्ट में जिंदगी जीता है।

6. जो दुःख में बिना बुलाये आते हैं, उन्हें ही ख़ुशी में बुलाना चाहिए।

     जो बुरे समय में  साथ दे उसे कभी नहीं भुलाना चाहिए॥

7. जो व्यक्ति हम से चिढ़े, उसे छोड़ देना चाहिए

     क्योंकि पेड़ भी अपने पुराने पत्ते छोड़ देते हैं।

8. नरम होकर रहते है हम, ये हमारी कमजोरी नहीं है।

     नरम तो पानी भी होता है, जो चट्टानों को भी तोड़ देता है॥

9. हम अपनी हर सुख-दुःख के जिम्मेदार खुद हैं ।

     इसे हम जितनी जल्दी समझ लें उतनी ही बेहतर है॥

10. “भक्ति से संपत्ति की प्राप्ति नहीं होती है।

    परन्तु भक्ति से प्रसन्नता और आत्मिक बल मिलता है॥

11. मानव की तरक्की की सबसे बड़ी बाधा है, ‘लोग क्या कहेंगे’?

    इसकी चिंता छोड़ देना उचित है, रस्ते स्वयं मिल जायेंगे ॥

12. जो चला गया उसका गम नहीं, जो पाया वह भी तो कम नहीं।

    जो सामने नहीं वह सपना है, जो मिला वही अपना है॥”

13. दूसरे की गलतियों को सहन करना होगा।

    क्योंकि बिना गलतियों के इंसान नहीं मिलेंगे॥”

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