उर्मिला का त्याग

जब भगवान ‘राम जी’ को चौदह वर्ष का वनवास हुआ तब उनकी पत्नी ‘सीता जी’ ने भी सहर्ष वनवास स्वीकार कर लिया और बचपन से ही राम की सेवा में रहने वाले लक्ष्मण भाई अपने राम भैया से कैसे दूर रह सकते थे? इसलिए उन्होंने ने भी राम के साथ वन जाने के लिए माता… Continue reading उर्मिला का त्याग

हे! प्रभु आनंद-दाता (प्रार्थना)

प्रार्थना मनुष्य के मन की समस्त विश्रृंखलित एवं चारों तरफ भटकने वाली प्रवृतियों को एक केन्द्र पर एकाग्रचित करने वाला मानसिक व्यायाम है। प्रार्थना एक ऐसा कवच है जो डर या भय से हमारी रक्षा करते हुए हमें सत्य, ज्योति, और अमृत को प्राप्त करने के लिए समर्थवान बनता है। रामनरेश त्रिपाठी ‘पूर्व छायावाद युग’… Continue reading हे! प्रभु आनंद-दाता (प्रार्थना)

प्रेम और भक्ति

भारत में त्याग की परम्परा पुरातन काल से ही चली आ रही है। हमारे देश में अनेक महापुरुष, नारी, विद्वान आदि त्यागी हुए है जो देश और धर्म के लिए बड़े से बड़ा त्याग कर चुके हैं। त्याग करने में वे थोड़ा भी हिचकिचाते नहीं हैं। त्याग की भावना अत्यंत पवित्र है। त्याग करने वाले लोग ही संसार को प्रकाशमान बनाते हैं। गीता में भगवान कहते हैं कि “त्याग से शांति की प्राप्ति होती है और जहाँ त्याग है वही शांति होती है”।