वर्णों की बूंदें (कविता)

अक्षर हैं वर्णों की बूँदें, मन की खुशबू सी महके। सार्थक स्वर, मधुर व्यंजन, मिलकर रच दें भावों का संगम। कभी बने ये गीत सुहाने, कभी सजाएँ सपनों के ठिकाने। शब्दों के साथ खिले अक्षर, भावनाओं के दीप मिलें। ‘अ’ से आती अरुण किरण, ‘क’ से खिलता नद में कमल। ‘म’ से बनता मधुर मिठास,… Continue reading वर्णों की बूंदें (कविता)

मुकुटधर पांडेय (कविता)

छत्तीसगढ़ की पावन धरा पर,जन्मे कवि महान।छायावाद के जनक बने वे,दिलाया हिंदी को सम्मान॥   ‘प्रेमपथिक’ लिखकर उन्होंने,कविता को दी राह नई।प्रसाद, पंत, निराला और महादेवी को,दिखलाया उन्होंने चाह सही॥ प्रकृति-प्रेम और संवेदनाएँ,थी जिनकी पहचान।हृदय की गहराइयों से,गाया प्रकृति का गान॥ प्रेम की पगडंडी पर,चला कवि का कोमल मन।छाया में है ढूँढ़ता,सुख, शान्ति और अमन॥… Continue reading मुकुटधर पांडेय (कविता)

चिंतन

अब बस भी कर ऐ जिंदगी, थोड़ी सुस्ता लेने दे।      अगला दर्द भी सह लेंगे, पिछला तो भुला लेने दे॥ 2. हर कदम हमने, जीने के लिए समझौता किया।      शौक तो ख़ुशी से जीने का था, लेकिन घुट-घुट जिया॥ 3. हम दिल के बुरे नहीं है, हमारी भी कुछ कहानी है।      बदली… Continue reading चिंतन

तन्हाई (कविता)

लगता है अब रातें भी मुझसे रूठने लगी हैं, हर यादें मेरे सीने में ज्वाला सी धधकने लगी हैं। अब तो चाँद भी मेरे छत से कहीं दूर चला जाता है, मेरी दर्द को देख कर, वह भी मुझ से कतराता है। मेरे भींगे हुए नैनों से डर कर, नींदें भी चली गई हैं, बीती… Continue reading तन्हाई (कविता)

मानव हूँ मैं (कविता)

मानव हूँ मैं, इसलिए डरता हूँ, सपनों में भी सत्य से लड़ता हूँ। भीड़ में रहकर भी, अकेला रहता हूँ, अपने ही साये से, अक्सर मैं डरता हूँ। आँधियाँ मिटाना चाहती है मुझे, दीपक की तरह सदा कपकपाता हूँ। झूठ के बाजार में सत्य टिकता कहाँ, फिर भी सच कहने में काँपने लग जाता हूँ।… Continue reading मानव हूँ मैं (कविता)

गज़ल – 2

छिपा के नयनों में आँसू मुस्कुराना पड़ा दिल के दर्द को हँसी में सजाना पड़ा। जो अपना था, वही हमसे दूर हो गया भुलाने के लिए उसे, दिल को समझाना पड़ा। हमसे पूछता रहा, वो वफ़ा के मायने जबाब में मुझे, खुद को मिटाना पड़ा। अँधेरे में चले थे, साथ हम उजाला के लिए मुझे… Continue reading गज़ल – 2

मोनालिसा (कविता)

लियो की तूलिका से निकली एक छवि अद्भूत निराली रहस्य भरी आँखों में उसकी भरी थी अनगिनत कहानी। मुस्कान में थी जादू उसके देख जैसे समय ठहर जाए। पड़े नजर जिसकी भी उसपर दिल में हलचल सी हो जाए। सदियों से वह रुकी रही उसकी आकर्षण भी वही रही करे सवाल हर युग उससे पर… Continue reading मोनालिसा (कविता)

क्षणिकाएँ (सावन)

1. अंबर नाचे झूम-झूम   ओढ़े चुनरियाँ बूंदों की   धरती नाचे घूम-घूम   सावन की हरियाली में 2. सावन में बगिया महके   लगी मेहंदी हथेलियों पर   सावन आया संग सखी   गाएँ गीत हम बगियन में 3. बादल जब गाए प्रेम राग   नाचे मोर बगियन में   सावन में हर पत्ता… Continue reading क्षणिकाएँ (सावन)

मिलन का दर्द (कविता)

जब तक मिली न थी उनसे, तबतक बिछड़ने का डर था साथ होने के बाद भी, दिल में गहराई का असर था। उनकी आँखों में छीपे सवाल का मौन मेरा जवाब था दोनों के बीच का सन्नाटा, ही जैसे संवाद था। थी मैं उनकी धडकन मगर मुझे उनका इंतजार था उनकी बाहों में राहत थी… Continue reading मिलन का दर्द (कविता)

क्षणिकाएँ (सावन)

1. अंबर नाचे झूम-झूम   ओढ़े चुनरियाँ बूंदों की   धरती नाचे घूम-घूम   सावन की हरियाली में 2. साजन में बगिया महके   लगी मेहंदी हथेलियों पर   सावन आया संग सखी   गाएँ गीत हम बगियन में 3. बादल जब गाए प्रेम राग   नाचे मोर बगियन में   सावन में हर पत्ता… Continue reading क्षणिकाएँ (सावन)