छिपा के नयनों में आँसू मुस्कुराना पड़ा दिल के दर्द को हँसी में सजाना पड़ा। जो अपना था, वही हमसे दूर हो गया भुलाने के लिए उसे, दिल को समझाना पड़ा। हमसे पूछता रहा, वो वफ़ा के मायने जबाब में मुझे, खुद को मिटाना पड़ा। अँधेरे में चले थे, साथ हम उजाला के लिए मुझे… Continue reading गज़ल – 2
Category: poems
मेरी कविताएँ
मोनालिसा (कविता)
लियो की तूलिका से निकली एक छवि अद्भूत निराली रहस्य भरी आँखों में उसकी भरी थी अनगिनत कहानी। मुस्कान में थी जादू उसके देख जैसे समय ठहर जाए। पड़े नजर जिसकी भी उसपर दिल में हलचल सी हो जाए। सदियों से वह रुकी रही उसकी आकर्षण भी वही रही करे सवाल हर युग उससे पर… Continue reading मोनालिसा (कविता)
क्षणिकाएँ (सावन)
1. अंबर नाचे झूम-झूम ओढ़े चुनरियाँ बूंदों की धरती नाचे घूम-घूम सावन की हरियाली में 2. सावन में बगिया महके लगी मेहंदी हथेलियों पर सावन आया संग सखी गाएँ गीत हम बगियन में 3. बादल जब गाए प्रेम राग नाचे मोर बगियन में सावन में हर पत्ता… Continue reading क्षणिकाएँ (सावन)
मिलन का दर्द (कविता)
जब तक मिली न थी उनसे, तबतक बिछड़ने का डर था साथ होने के बाद भी, दिल में गहराई का असर था। उनकी आँखों में छीपे सवाल का मौन मेरा जवाब था दोनों के बीच का सन्नाटा, ही जैसे संवाद था। थी मैं उनकी धडकन मगर मुझे उनका इंतजार था उनकी बाहों में राहत थी… Continue reading मिलन का दर्द (कविता)
क्षणिकाएँ (सावन)
1. अंबर नाचे झूम-झूम ओढ़े चुनरियाँ बूंदों की धरती नाचे घूम-घूम सावन की हरियाली में 2. साजन में बगिया महके लगी मेहंदी हथेलियों पर सावन आया संग सखी गाएँ गीत हम बगियन में 3. बादल जब गाए प्रेम राग नाचे मोर बगियन में सावन में हर पत्ता… Continue reading क्षणिकाएँ (सावन)
बहुत जी ली, औरों की जिंदगी (कविता)
बहुत जी ली, औरों की जिंदगी अब अपनी जिंदगी जीती हूँ मेरा जो मन कहता है, मैं वही करती हूँ दिखावें की जिंदगी न तब जीति थी और न अब जीति हूँ बीती हुई जिंदगी को भूल नई जिंदगी जीने की कोशिश करती हूँ। कभी किसी की जीवनी, संस्मरण पढ़ने लगती हूँ, कभी-कभी कुछ लिखने… Continue reading बहुत जी ली, औरों की जिंदगी (कविता)
गजल – 1
दिल के पन्नों में यादों की कहानी लिखी, उन यादों को दिल में सहेजकर रखी। विधू ने कहा, तुमसे शिकायत कर दूं, तेरी स्मृति को हमने छिपाकर रखी। दिल की बगिया ने देखते रहे सपने तेरे, हर पल सूरत तेरी अनुरागी रखी। वेदना जो दिल में थे हमने छुपाकर रखे, पर होठों पर तेरी हँसी… Continue reading गजल – 1
गम न कर जिंदगी (कविता)
अब और न गम कर जी ले जिंदगी हर पल को अपना सनम (प्रिय) कर जिंदगी गम ना कर जी ले जिंदगी कल किसने देखा है यूँ ना सिसक तू आज की ख़ुशी को मरहम कर जिंदगी गम ना कर जी ले जिंदगी छिपा है सबक हर आँसू में डर मत जाना टूटे… Continue reading गम न कर जिंदगी (कविता)
वो कौन थी? मैं नहीं जानती (कविता)
रोज की तरह उस दिन भी मैं बस अड्डे पर खड़ी थी, बार-बार उस ओर देख रही थी जिस ओर से बस आती थी। अचानक मेरी नजर थोड़ी दूर से आ रही उस अधेड़ बुजुर्ग पर पड़ी जिसकी झुरियों की रेखाएँ उसके जीवन की गाथा सुना रही थी पता नहीं वो कौन थी ? तन… Continue reading वो कौन थी? मैं नहीं जानती (कविता)
पुरुष विमर्श (कविता)
सब कहते हैं कि लडकियाँ परायी होती हैं लेकिन समय बदल गया है कोई माने या न माने, लडकियाँ नहीं लड़के पराये होते हैं। कुछ कहते हैं, मर्द को दर्द नहीं होता कौन कहता है? मर्द को दर्द नहीं होता? दर्द होता है, लेकिन किससे कहे वह कौन सुनता है उसकी? इसीलिए कहा जाता है… Continue reading पुरुष विमर्श (कविता)