गम न कर जिंदगी (कविता)

अब और न गम कर

जी ले जिंदगी

हर पल को अपना

सनम (प्रिय) कर जिंदगी

गम ना कर जी ले जिंदगी

कल किसने देखा है

यूँ ना सिसक तू  

आज की ख़ुशी को  

मरहम कर जिंदगी

गम ना कर जी ले जिंदगी

छिपा है सबक हर आँसू में

डर मत जाना टूटे ख़्वाबों से

उन्हीं से बनता है

नया सफर कर जिंदगी  

गम ना कर जी ले जिंदगी

हर दर्द को बना

अपना तू

हर शाम के बाद

नई सुबह होगी

हर अँधेरे से निकलेगा

नया हल जिंदगी

गम ना कर जी ले जिंदगी

गिरने के बाद

संभल कर चल

जिंदगी है गीत,

इसे गा कर जी

हर साँस को

उत्सव बना जिंदगी

गम ना कर जी ले जिंदगी अब यूँ ना सिसक तू जी ले जिंदगी—-?

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