परिभाषा- वह समास जिसका पहला पद यानी पूर्व पद कोई संख्यावाची शब्द तथा उत्तर पद संज्ञा शब्द हो तथा सम्पूर्ण सामासिक पद का कोई अन्य अर्थ अभिव्यक्त नहीं हो उसे द्विगु समास कहते है। जैसे-
चौराहा = चार राहों का समाहार (चौराहा का कोई अन्य अर्थ नहीं निकल रहा है। अतः द्विगु समास है।)
पं. कामता प्रसाद गुरु के शब्दों में- “जिस कर्मधारय समास में पहला पद संख्यावाची होता है और जिससे समुदाय (समाहार) का बोध होता है, उसे संख्यापूर्व कर्मधारय समास कहते हैं। इसी समास को संस्कृत व्याकरण में ‘द्विगु’ कहते हैं।”
‘द्विगु समास’ में पहला पद संख्यावाची तथा उत्तर पद प्रधान होता है। यह तत्पुरुष समास का ही एक भेद है। अतः इसका उत्तर पद प्रधान होता है।
जिस समास में पहला पद संख्यावाचक हो और दोनों पदों के बीच विशेषण-विशेष्य संबंध हो और समस्त पद समूह (समाहार) का ज्ञान कराए, उसे ‘द्विगु समास’ कहते हैं।
‘द्विगु’ शब्द का शाब्दिक अर्थ है। ‘दो गायों का समूह’ अतः द्विगु शब्द में द्विगु समास ही है।
द्विगु समास के उदाहरण इस प्रकार हैं-
| समस्त पद | विग्रह |
| अष्टधातु | अष्ट धातुओं का समूह |
| अष्टध्यायी | अष्ट अध्यायों का समूह |
| अष्टभुज | अष्ट भुजाओं का समूह |
| अठन्नी | आठ आनों का समूह |
| अठमासा | आठ महीनों का समूह |
| अष्टसिद्धि | अष्ट सिद्धियों का समूह |
| अठवारा | आठ बार/आठ दिनों तक लगने वाला बाजार |
| इकट्ठा | एक स्थान पर स्थित |
| इकलौता | एक ही है जो |
| एकतरफा | एक तरफ वाला |
| एकांकी | एक अंक का (नाटक) |
| एकतंत्र | एक का तंत्र |
| चतुष्पदी | चार पदों का समूह |
| चौराहा | चार राहों का समाहार |
| चतुर्युग | चार युगों का समूह |
| चतुरंगणी | चार अंगों वाली सेना |
| चतुर्भुज | चार भुजाओं वाला |
| चवन्नी | चार आनों का समूह |
| चतुर्वर्ग | चार वर्गों (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष) का समूह |
| चहारदीवारी | चार दीवारों का समूह |
| चौपाई | चार पदों का समूह |
| चौमासा | चार मासों का समूह |
| चारपाई | चार पैरों वाली |
| चतुर्वेदी | चार वेदों का समूह |
| चौघड़ा | चार घड़ों वाला |
| चौकोर | चार कोर/कोनों का समूह |
| तिकोना | तीन कोनों वाला |
| तिरंगा | तीन रंगों के समूह वाला |
| तिमाही | तीन माह के बाद आने वाली |
| तिराहा | तीन राहों का समूह |
| त्रिभुज | तीन भुजाओं वाला |
| त्रिकाल | तीन कालों का समूह |
| त्रिवेणी | तीन वेणियों (धाराओं) का समूह |
| त्रिलोक | तीन लोकों का समूह |
| त्रिवेद | तीन वेदों का समूह |
| त्रिवेदी | तीन वेदों को जानने वाला |
| त्रिगुण | तीन गुणों वाला |
| त्रिशूल | तीन शूलों का समूह |
| त्रिलोक | तीन लोकों का समाहार |
| त्रिफला | तीन फलों का समूह |
| त्रिनेत्र | तीन नेत्रों का समूह |
| त्रिपिटिक | तीन पिटकों का समूह |
| दशक | दस वर्षों का समाहार |
| दोराहा | दो राहों का समूह |
| दुधारी | दो धारों से युक्त |
| दुमट | दो प्रकार की मिट्टी |
| दुगुना | दो बार गुना |
| दुअन्नी | दो आनों का समूह |
| दुमंजिला | दो मंजिलों से युक्त |
| दुपट्टा | दो पाट वाला |
| दोलड़ा | दो लड़ियों से युक्त |
| दुपहिया | दो हैं जिसके पहिये |
| दोनाली | दो नाल वाली |
| दुपहर | दो प्रहर (पहर) के बाद का समय |
| द्विगु | दो गाओं का समूह |
| द्विवेदी/दूबे | दो वेदों को जानने वाला |
| दशाब्दी/दशक | दस वर्षों का समूह |
| नौगाँव | नौ गाँवों का समूह |
| नौलखा | नौ लाख रूपये के मूल्य का |
| नवग्रह | नव ग्रहों का समूह |
| नवरत्न | नौ रत्नों का समूह |
| पंजाब | पाँच हो आब (पानी, नदी) |
| पंचमुख | पाँच मुखों का समूह |
| पंचरात्र | पाँच रात्रियों का समूह |
| पंचभुज | पाँच भुजाओं का समूह |
| पंसेरी/पनसेरी | पाँच सेरों का समूह |
| पंचतंत्र | पाँच तंत्रों का समूह |
| पंचरंगा | पाँच रंगों का |
| पंचामृत | पाँच अमृतों का समूह |
| पंचवदन | पाँच वदनों का समूह |
| पंचमढ़ी | पाँच मढ़ी हो जहाँ |
| पंचमहाभूत | पाँच महाभूतों का समूह |
| पंचवटी | पाँच वटों का समूह (BPSC, 1986) |
| पंचमात्राएँ | पाँच मात्राओं का समूह |
| पंचपात्र | पाँच पात्रों का समूह (BPSC, 1986) |
| शतक | सौ संख्याओं का समूह |
| शताब्दी | सौ अब्दों (वर्षों) का समूह |
| षड्गुण | छह (छः) प्रकार के गुण |
| षड्ररस | छह (छः) रसों का समूह |
| षड्ऋतु | छह (छः) ऋतुओं का समूह |
| सतनजा | सात प्रकार का अनाज |
| सहस्त्राब्दी | सहस्त्र अब्दों (वर्षों) का समूह |
| सप्तसिंधु | सात सिंधुओं का समूह |
| सतरंग | सात रंगों का समूह |
| सप्तपदी | सात पदों का समूह |
| सप्ताह | सात दिनों का समूह |
| सतसई | सात सौ पदों/दोहों का समूह |
| सप्तशती | सात सौ (श्लोक) का समूह |
| सतमासा | सात मासों का समूह |
जय हिंद