समास और समास के भेद : भाग-5 (व्याधिकरण तत्पुरुष समास)

व्यधिकरण तत्पुरुष समास के अन्य भेद

जिस तत्पुरुष समास में कारक चिह्न का लोप नहीं होता उसे अलुक् तत्पुरुष समास कहते हैं। अलुक् तत्पुरुष समास में कारक चिह्न किसी न किसी रूप में विद्यमान रहता है।

अलुक् शब्द अ + लुक् के योग से बना है, जिसका शाब्दिक अर्थ ‘न छिपना’ होता है। दरअसल, तत्पुरुष समास की प्रक्रिया में किसी न किसी कारक चिह्न का लोप होता है, लेकिन जब समास प्रक्रिया में कारक विभक्ति का लोप नहीं हो तो उसे अलुक् तत्पुरुष समास कहते हैं।

पं. कामता प्रसाद गुरु के अनुसार- “परसर्गाधार व्यधिकरण तत्पुरुष समास के कारक के अलावा अन्य भेद निम्नलिखित हैं-

1. अलुक् तत्पुरुष

2. उपपद तत्पुरुष

3. नञ् तत्पुरुष

4. प्रादि तत्पुरुष

1. अलुक तत्पुरुष समास – जिस व्यधिकरण समास में पहले पद की विभक्ति का लोप नहीं होता, उसे अलुक तत्पुरुष समास कहते हैं। इस समास में विभक्ति चिह्न ज्यों का त्यों बना रहता हैं। इसमें ‘लुक्’ पारिभाषिक शब्द है, जिसका अर्थ होता है- ‘प्रत्यय का लोप हो जाना।’

अलुक का अर्थ है- ‘प्रत्यय का लोप न होना।’ यहाँ विभक्तियाँ प्रत्यय हैं। विभक्ति का लोप न होना अलुक है।

इस प्रकार यह कहा जा सकता हैं, कि जहाँ प्रथम पद (पूर्वपद) में प्रयुक्त विभक्ति का लोप नहीं होना अथार्त शब्द का विभक्ति के साथ ही प्रयोग होता है। उसे अलुक समास कहते है। जैसे- युधिष्ठिर – युद्ध में स्थिर रहने वाला।

इस उदाहरण में युद्ध की जगह युधि हो गया है अथार्त ‘में’ चिह्न मिल गया है। यह सप्तमी विभक्ति हो गया है।   

इसी तरह अन्य उदाहरण- तीर्थंकर– तीर्थों को करने वाला। इसमें पहला शब्द तीर्थ नहीं बल्कि तीर्थंम है अथार्त संस्कृत के कर्म कारक की विभक्ति ‘म्’ उपस्थित है, अतः तीर्थंकर अलुक् तत्पुरुष समास है।

अलुक् तत्पुरुष के निम्नलिखित उदाहरण इस प्रकार हैं-

समस्त पद समासविभक्ति
खेचरआकाश में विचरण करने वालासप्तमी
आत्मनेपदआत्मा के लिए प्रयुक्त पदचतुर्थी
धनंजयधनं (कुबेर) को जय करने वालाद्वितीया
धुरंधरधुरी को धारण करने वालाद्वितीया
भयंकरभय को करने वालाद्वितीया
प्रलयंकरप्रलय को करने वालाद्वितीया
मनसिजमनसि(मन)में जन्म लेनेवाला (कामदेव)सप्तमी
मृत्युंजयमृत्यु को जय करने वालाद्वितीया
वसुंधरावसुओं को धारण करने वालाद्वितीया
सरसिजसर (तालाब) में जन्म लेने वालासप्तमी
तीर्थंकरतीर्थों को करने वालाद्वितीया
युधिष्ठिरयुधि (युद्ध) में स्थिर रहने वालाद्वितीया
वनेचरवन में विचरण करने वालासप्तमी
वाचस्पतिवाचः (वाणी) का पतिषष्ठी
शुभंकरशुभ को करने वालाद्वितीया
विश्वभरविश्वं (विश्व को) भरण करने वालाद्वितीया

कुछ अन्य उदाहरण इस प्रकार हैं-

बृहस्पतिबृहद है जो पति
कर्तरिप्रयोगकर्ता से संबंधित प्रयोग
कर्मणिप्रयोगकर्म से संबंधित प्रयोग

रूढ़ अर्थ में प्रयुक्त अन्य उदाहरण इस प्रकार हैं-

सब्जीवालासब्जी देने वाला
मिठाईवालामिठाई (पकवान) से संबंधित काम करने वाला
चायवालाचाय बनाने का कार्य करने वाला
सूबेदारसूबे का दार (मालिक)
पहरेदारपहरे का दार (करने वाला)
किरायेदारकिराये का दार (देने वाला)
चूहेदानीचूहे पकड़ने की दानी
केलेवालाकेलेवाला
कुल्फीवालाकुल्फी का काम करने वाला
ठेलेवालाठेले का मालिक

विशेष नोट- इस समास का प्रयोग संस्कृत में है, हिंदी में ऐसे उदाहरण बहुत कम हैं।

2. उपपद तत्पुरुष- कभी-कभी धातुओं में प्रत्यय लगाने के लिए अनिवार्य रूप से कोई न कोई उपपद रखना पड़ता है। ऐसे समस्त पदों को ‘उपपद तत्पुरुष’ कहते हैं।

पं. कामता प्रसाद गुरु के शब्दों में- “जब तत्पुरुष समास का दूसरा पद कृदंत होता है, जिसका स्वतंत्र उपयोग नहीं हो सकता हैं। ऐसे समस्त पदों को उपपद तत्पुरुष समास कहते हैं। उदाहरण-

जलज- जल में उत्पन्न करने वाला

कुंभकार- कुंभ को करने वाला उपर्युक्त दिए गए उदाहरणों में ‘जलज’ में ‘ज’ और ‘कुंभकार’ में ‘कार’ दोनों अप्रचलित कृदंत हैं।

‘उपपद’ के कुछ अन्य उदाहरण इस प्रकार हैं-

अंबुधिअंबु को धारण करने वाला
अंबुदअंबु (जल) को धारण करने वाला
कृतघ्नकृत (उपकार) को न मानने वाला
कष्टप्रदकष्ट को प्रदान करनेवाला
कुंभकारकुंभ को करने वाला
कठफोड़वाकाठ को फोड़ने वाला
चर्मकारचर्म का कार्य करने वाला
चित्रकारचित्र को बनाने वाला
जलधिजल को धारण करने वाला
जलजजल में जन्म लेने वाला
जलचरजल में विचरण करने वाला
थलचरथल में विचरण करने वाला
नभचरनभ में विचरण करने वाला
नीरदनीर (जल) को देने वाला
नीरजजल (जल) में उत्पन्न होने वाला
पंकजपंक (कीचड़) में जन्म लेने वाला
फिल्मकारफिल्म का कार्य करने वाला
महीपपृथ्वी को पालने वाला
मनोज्ञमन को जानने वाला
मूर्तिकारमूर्ति को बनाने (कार्य करने) वाला
राजनीतिज्ञराजनीति को जानने वाला
वारिजवारि (जल) में जन्म लेने वाला
शिल्पकारशिल्प का कार्य करने वाला
शक्तिदायकशक्ति को देने वाला
संगीतकारसंगीत का कार्य करने वाला
सुखदायीसुख को देने वाला
स्वर्णकारस्वर्ण का कार्य करने वाला
साहित्यकारसाहितय का कार्य करने वाला
स्वस्थस्व में स्थिर रहने वाला
वारिधिवारि को धारण करेने वाला
बटमारबाट (मार्ग) में मारने वाल

नोट- यह समास संस्कृत में ही अधिक प्रचलित है। हिंदी में इस समास के उदाहरण कम हैं।

इस समास के अधिकांश उदाहरण में तीसरा अर्थ प्रधान है, जिसके कारण इन्हें बहुव्रीहि समास के उदाहरणों में सम्मिलित किया जाता है।

3. नञ् तत्पुरुष-  जिस समस्त पद का पहला पद अभावात्मक/ नकारात्मक ‘न’ का अर्थ देने वाला हो उसे नञ् तत्पुरुष समास कहते हैं। इसके समस्त पद के प्रारंभ में ‘अ’ या ‘अन’ का प्रयोग करते है।

इस प्रकार शब्द के प्रारंभ में ‘अ’ या ‘अन’ को देखकर इस समास की पहचान सरलता से की जा सकती है। विग्रह करते समय इसके दोनों प्रकार के पदों में ‘न’ का सामान रूप से प्रयोग होता है। ‘नञ्’ संक्षिप्त रूपही ‘न’ है।

उदाहरण के लिए: “न ब्राह्मण” का अर्थ है “अब्राह्मण” यानी जो ब्राह्मण नहीं है।

‘नञ् तत्पुरुष’ समास के कुछ और उदाहरण इस प्रकार हैं-

अनश्वरन नश्वर
अनदेखान देखा हुआ
अनचाहान चाहा हुआ  
असत्यन सत्य
अकारणन कारण/ बिना कारण 
अडिगन डिगने वाला  
अगोचरन गोचर
अनिच्छुकन इच्छुक
अनुपयुक्तन उपयुक्तता से रहित अनशन  
असभ्यन सभ्य (नहीं है सभ्य जो)
अप्रियन प्रिय
अमोघन मोघ
अलगन लगा हुआ
अकाजन काज (कार्य)
अटूटन टुटा हुआ
अतृप्तन तृप्त
अनादिन आदि
अमंगलन मंगल
अलौकिकन लौकिक
नगण्यन गण्य
नागवारन (नहीं) है गवारा जो
अनावश्यकन आवश्यक
अकाट्यन काटने योग्य
अशोच्यन शोचनीय
अमिटन मिट
अव्ययन व्यय
अस्थिरन स्थिर
अपवित्रन पवित्र
अदृश्यन दृश्य
अज्ञानन ज्ञान
अछूतन छूत
अचलन चल
अचेतनन चेतन
अकालन काल (समय ठीक नहीं है)
अजरन बूढ़ा होने वाला
अटलन टलने वाला
अजन्मान जन्म लेने वाला
अनादृतनहीं है ढका जो  
अनाश्रितबिना आश्रय के
अनशन   भोजन से रहित
अनजानन जाना हुआ
अनुदारन उदार
नागवारन (नहीं) है गवारा जो
अज्ञानन ज्ञान
अविकृतन विकृत
अनाचारन आचार
अनचाहान चाहा हुआ
नालायकन लायक
नामुरादन (नहीं) है मुराद जो
असंभवन संभव
अनिष्टन इष्ट
अमरन मरने वाला
अनबनन बनना
अनादिन आदि
अगोचरन गोचर
अनंतन अंत
नापसंदन पसंद

4. प्रादि तत्पुरुष समास:

कामता प्रसाद गुरु के अनुसार- जिस प्रादि तत्पुरुष के प्रथम स्थान में उपसर्ग आता है, उसे संस्कृत व्याकरण में ‘प्रादि समास’ कहते हैं।

प्रादि (प्र + आदि) से उपसर्गों का बोध होता है। जिस समस्त पद में ‘प्र’, ‘परा’, ‘अप’ आदि उपसर्ग पूर्व पद हो उसमें प्रादि तत्पुरुष होता है।

डॉ. हरदेवबाहरी के शब्दों में- इसमें अपि, प्रति, उप आदि पहले खंड में होते हैं।

‘प्रादि तत्पुरुष’ समास के उदाहरण इस प्रकार हैं-

अतिवृष्टिअधिक वृष्टि
अतिक्रमआगे जाना
प्रगतिप्रथम गति
प्रतिध्वनिध्वनि के बाद ध्वनि
प्रतिबिंबबिंब के सामान बिंब
प्रतिमूर्तिकिसी आकृति की नकल
परित्यक्तउपकार के पहले किया गया उपकार

जय हिंद

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