अकर्मक और सकर्मक क्रिया की पहचान

जब वाक्य में प्रयुक्त क्रिया से ‘क्या’, ‘किसी’ और ‘किसको’ प्रश्नों के उत्तर मिले या यह प्रश्न बनता है, तब वहाँ क्रिया सकर्मक होती है। जैसे-

1. राम पुस्तक पढ़ता है।

2. राधा पत्र लिखती है

3. रामू जूते बना रहा है।

4. एक महिला आलू खरीद रही है।

4. राधा टीवी देख रही है।

6. श्याम ने मोहन को पिटा।

7. बच्चा अखबार पढ़ रहा है।

उपर्युक्त वाक्य में रेखांकित शब्द ‘सकर्मक क्रिया’ हैं।

पहचान- वाक्य की क्रिया के साथ ‘क्या’ ‘किसको’ तथा ‘किसे’ प्रश्न पूछने पर यदि कुछ न

कुछ उत्तर मिल जाए तो यह समझना चाहिए कि वह क्रिया सकर्मक क्रिया है। जैसे-

1. मोहन क्या पड़ता है?          उत्तर- पुस्तक

2. राधा क्या लिखती है?          उत्तर- पत्र

3. श्याम को क्या बना रहा है?     उत्तर- जूते

4. एक लड़की क्या खरीद रही है?   उत्तर- आलू

5. सीता क्या देख रही है?         उत्तर- टीवी

6. कमल ने किसको पिटा?        उत्तर- मोहन

2. वाक्य की क्रिया के साथ ‘क्या’ ‘किसे’ ‘किसको’ प्रश्न पूछने पर यदि कुछ भी उतर नहीं मिले तो समझना चाहिए कि वह क्रिया अकर्मक है। जैसे-

1. बच्चा रो रहा था?

2. नदी बह रही है?

3. राकेश हंसता है?

4. एक लड़का तैर रहा है?

5. लड़की दौड़ेगी?

‘क्या’ ‘किसे’ ‘किसको’ प्रश्न पूछने पर-

1.बच्चा क्या रो रहा है?          उत्तर कुछ नहीं

2. नदी क्या बह रही है?          उत्तर कुछ नहीं अथवा

3. नदी किसको बह रही है?       उत्तर- कुछ नहीं

4. राकेश क्या हंसता है?          उत्तर- कुछ नहीं

5. लड़का क्या तैर रहा है?        उत्तर- कुछ नहीं अथवा

6. लड़का किसको तैर रहा है?      उत्तर- कुछ नहीं

7. लड़की क्या दौड़ेगी?            उत्तर- कुछ नहीं अथवा

8. लड़की किसे दौड़ेगी?           उत्तर- कुछ नहीं

उपर्युक्त वाक्य में प्रयुक्त क्रिया से ‘क्या’ ‘किसे’ ‘किसको’ प्रश्न में जोड़ने से प्रश्नों के उत्तर नहीं मिल रहे हैं या प्रश्न ही अटपटे लग रहे हैं। अतः ये ‘अकर्मक’ क्रियाएँ हैं।

अकर्मक और सकर्मक क्रिया में अंतर:

अकर्मक तथा सकर्मक क्रिया के अंतर को समझने के लिए वाक्य में प्रयुक्त क्रिया पर ‘क्या’ से प्रश्न करके देखना चाहिए। यदि ‘क्या’ प्रश्न के उत्तर में कोई निर्जीव संज्ञा प्राप्त होती है, तो वह संज्ञा उसे क्रिया की ‘कर्म’ कही जाती है और जो क्रिया वाक्य में ‘कर्म’ के प्रयोग की आवश्यकता अनुभव करती है वह सकर्मक क्रिया कहलाती है।

अकर्मक क्रिया में क्या से प्रश्न करने पर उत्तर में कोई संज्ञा प्राप्त नहीं होती अर्थात अकर्मक क्रिया ‘कर्म’ की अपेक्षा नहीं रखती। उदाहरण के लिए ‘बच्चा पत्र लिख रहा है’ वाक्य में क्रिया पर ‘क्या’ से प्रश्न करने पर (क्या लिख रहा है?) उत्तर में कोई-न-कोई निर्जीव संज्ञा अवश्य प्राप्त होती है- पत्र, निबंध, कहानी, लेख, आदि। यह संज्ञा ही लिखना क्रिया का कर्म है। अतः ‘सोना’ क्रिया कर्म की अपेक्षा नहीं रखती है।

यहाँ यह भी ध्यान रखना होगा कि अकर्मक या सकर्मक होना क्रिया का मूल प्रवृत्ति है। वाक्य में ‘कर्म’ का प्रयोग हुआ है या नहीं, इस बात से क्रिया के अकर्मक या सकर्मक रूप का निर्धारण नहीं होता। यदि खाना, पीना, पढ़ना आदि सकर्मक क्रिया हैं तो वह एक निश्चित अर्थ में सकर्मक ही रहेगी भले ही वाक्य में कर्म का प्रयोग हुआ हो या उसका लोप कर दिया गया हो, जैसे-

1. बच्चा पत्र लिख रहा है।         बच्चा लिख रहा है।

2. लड़की खाना खा रही है।        लड़की खा रही है।

वस्तुतः खाना, लिखना वे क्रिया हैं जो कर्म की अपेक्षा रखती हैं और इस बात का पता चलता है कि ‘क्या’ से प्रश्न करने के बाद। इसी तरह से वाक्य में प्रयुक्त हर संज्ञा को देखकर यह भी नहीं समझ लेना चाहिए कि वह संज्ञा ‘कर्म’ होगी और तदनुसार क्रिया सकर्मक है। जैसे-

1. बच्चा घर जा रहा है।

2. हम दिल्ली पहुंच रहे हैं।

इन वाक्यों में प्रयुक्त ‘घर’ तथा ‘दिल्ली’ संज्ञाएँ कर्म न होकर स्थानवाची क्रियाविशेषण हैं तथा ‘जाना’ ‘पहुँचना’ क्रियाएँ अकर्मक क्रिया हैं, क्योंकि इन पर हम ‘क्या जा रहा है’, ‘क्या पहुँच रहा है’ जैसे प्रश्न नहीं कर सकते है।

मूल क्रिया:

अकर्मक – हँसना, रोना, उठना, खुलना, उड़ना, चलना, जाना, कटना, ठहरना लेटना फटना।

सकर्मक – सोना, खाना, देना, पीना, देखना, काटना, करना, धोना, लिखना, बोलना, छोड़ना, दौड़ना, पढ़ना, खेलना, सीखना, सुनना।  

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