प्रत्यय (Suffix) भाग-1

परिभाषा- शब्दों के बाद जो अक्षर या अक्षरसमूह लगाया जाता है उसे ‘प्रत्यय’ कहते हैं।

प्रत्यय दो शब्दों से बना है- प्रति + अय। प्रति का अर्थ ‘साथ में पर बाद में’ और ‘अय’ का अर्थ चलनेवाला होता है। अतएव, ‘प्रत्यय’ का अर्थ है ‘शब्दों के साथ’, पर बाद में चलनेवाला या लगनेवाला।

‘प्रत्यय’ उपसर्गों की तरह अविकारी शब्दांश है, जो शब्दों के बाद जोड़े जाते हैं। जैसे- ‘भला’ शब्द में ‘आई’ प्रत्यय लगाने से ‘भलाई’ शब्द बनता है। यहाँ प्रत्यय ‘आई’ है।

परिभाषा- ‘प्रत्यय’ भाषा का वह लघुतम सार्थक खंड है, जो शब्द के अंत में जुड़कर नए-नए शब्दों का निर्माण करते हैं, वे ‘प्रत्यय’ कहलाते हैं।

दूसरे शब्दों में कहे तो, वे शब्दांश जो किसी शब्द के अंत में लगकर उनके अर्थ को प्रभावित करते हैं, उन्हें ‘प्रत्यय’ कहते हैं। जैसे- यहाँ ‘बल’ के साथ ‘हीन’ प्रत्यय लगाने से ‘बलहीन’ शब्द बनता है। यहाँ प्रत्यय ‘हीन’ है।

प्रत्यय के भेद- मूलतः प्रत्यय के दो प्रकार/भेद हैं-

1. कृत् प्रत्यय और 2. तद्धित प्रत्यय

1. कृत् प्रत्यय- क्रिया या धातु के अंत में प्रयुक्त होनेवाले प्रत्ययों को ‘कृत’ प्रत्यय कहते हैं, और उनके मेल से बनने वाले शब्द को ‘कृदंत’ कहते हैं। ये प्रत्यय क्रिया या धातु को नया रूप देते हैं। इनसे ‘संज्ञा’ और ‘विशेषण’ बनते हैं। हिंदी में क्रियाओं के अंत का ‘ना’ हटा देने पर जो अंश बच जाता है वही धातु है।

जैसे- कहना की कह्, चलना की चल्। धातु में ही प्रत्यय लगते हैं। यहाँ ऊपर आए ‘धातु’ शब्द की जानकारी रखना भी आवश्यक है।

धातु- क्रिया के मूल रूप को अथवा क्रिया में मूल शब्दों को ‘धातु’ कहते हैं। जैसे- खेलता, खलने, खेल रहा, खेल रही, खेल रहे, आदि में ‘खेल’ धातु है। धातु का अर्थ है, क्रिया के सभी रूपों को धारण करने वाला मूल शब्द। हिंदी में क्रियाओं के अंत में ना हटा देने पर जो अंश रह जाता है, वही धातु है।

धातुओं के अंत में लगकर संज्ञा, विशेषण तथा अव्यय बनाने वाले प्रत्यय को ‘कृत प्रत्यय’ कहते हैं। इनके योग से बने शब्दों को ‘कृदंत’ (कृत+अंत) कहते हैं।

कृत (कृदंत) प्रत्यय के मुख्य पाँच भेद हैं-

1. कर्तृवाचक      2. कर्मवाचक

3. करणवाचक     4. भाववाचक

5. क्रियावाचक या क्रिया बोधक

1. कर्तृवाचक- यह वह प्रत्यय है, जिनको धातु के अंत में  जोड़ने पर कर्तावाचक शब्द बनता है, उसे ‘कर्तृवाचक प्रत्यय’ कहते हैं।

यहाँ कुछ महत्वपूर्ण ‘कर्तृवाचक प्रत्ययों’ की चर्चा करेंगे जो परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। जैसे-

अक, आक, आका, आकू, अक्कड़, आऊ, ई, आड़ी, इया, ऐया, इयल, एरा, ऐत, ओडा, ता, वाला, हार/हरा ।

नोट- ‘कर्तृवाचक प्रत्ययों’ से संज्ञा और विशेषण दोनों बनते हैं।

1. अंकधातुप्रत्यय कृदंत
 कार (कृ)     अककारक
 गाय (गै)    अक  गायक
 घातअकघातक
 चालअकचालक
 जातअकजातक
 तार (तृ)अकतारक
 दाय (दै)अकदायक
 दीपअकदीपक
 धार (धृ)अकधारक
 धाव (धौ)अकधावक
 नाय (नौ)अकनायक
 पालअकपालक
 पाठअकपाठक
 पाव (पौ)अकपावक
 मार (मृ)अकमारक
 लिखअकलेखक
 शाव (शौ)अकशावक
    
2. ‘आक’धातुप्रत्ययकृदंत
 उड़ (ना)आकउड़ाक
 चालआकचालाक
 तड़आकतड़ाक
 तैर (ना) आकतैराक
 पैर (ना) आकपैराक
    
3. ‘आका’धातुप्रत्यय      कृदंत
 धड़आकाधड़ाक
 धमआकाधमाका
 भड़    आका  भड़ाका
 लड़आकालड़ाका
    
    
4. ‘आकू’धातुप्रत्ययकृदंत
 अड़ (ना)आकूअड़ाकू
 उड़ (ना)        आकूउडाकू
 पढ़ (ना)          आकूपढ़ाकू
 लड़ (ना)आकूलड़ाकू  
    
5. ‘अक्कड़’धातुप्रत्ययकृदंत
 कूदअक्कड़  कुदक्कड़
 नाचअक्कड़नचक्कड़
 घूमअक्कड़ घुमक्कड़
 पीअक्कड़ पियक्कड़
 बुझअक्कड़ बुझक्कड़
 भूलअक्कड़भूलक्कड़
    
6. ‘आऊ’धातुप्रत्यय             कृदंत
 उड़ा (ना)आऊउड़ाऊ
 गिर (ना)आऊगिराऊ
 चल (ना)आऊचलाऊ
 जल (ना)आऊजलाऊ
 टिक (ना)आऊटिकाऊ
 जूझ (ना)आऊ   जुझाऊ
 दिख (ना)आऊदिखाऊ
 बिक (ना)आऊबिकाऊ
7. ‘ई’धातुप्रत्यय       कृदंत
 बोलबोली
 हँसई     हँसी
    
8. ‘आड़ी’धातुप्रत्ययकृदंत
 कबाड़आड़ीकबाड़ी
 खेलआड़ीखिलाड़ी
 पींपाआड़ी  पींपाड़ी
    
9. ‘इया’धातुप्रत्ययकृदंत
 जड़ (ना)इया    जड़िया
 धुन (ना)   इया    धुनिया
 नियार (ना)       इयानियारिया
 लख (ना)      इयालखिया
    
10. ‘ऐया’धातुप्रत्ययकृदंत
 काट(ना)     ऐयाकटैया
 खे (ना)ऐयाखिवैया
 गा (ना)ऐयागवैया
 रख (ना) ऐयारखैया
 रच (ना)ऐयारचैया
 परोस (ना)   ऐया     परोसैया
 बचा (ना)           ऐयाबचैया
 बज/बजा (ना)ऐयाबजैया
 भर (ना)ऐयाभरैया
    
11. ‘इयल’धातुप्रत्यय      कृदंत
 मर (ना)इयलमरियल
 बढ़ (ना)इयकबढ़ियल
 अड़ (ना)इयलअड़ियल
 सड़ (ना)इयलसड़ियल
    
12. ‘एरा’धातुप्रत्ययकृदंत
 लूट (ना)एरालुटेरा
 लिख (ना)एरालिखेरा
 कमा (ना)एराकमेरा
 झला (ना)एराझलेरा
 बस (ना)एराबसेरा
 चितएराचितेरा
 पथएरापथेरा
    
13. ‘ऐत’धातुप्रत्ययकृदंत
 फेंक (ना)ऐतफिकैत
 टिक (ना)ऐतटिकैत
 डाकाऐतडकैत
 लड़ (ना)ऐतलड़ैत
    
14. ‘ओडा’धातुप्रत्ययकृदंत
 भाग(ना)   ओड़ाभगोड़ा
 हँस (ना)   ओड़ाहँसोड़ा
 मर (ना)   ओड़ामरोड़ा
    
15. ‘ता’धातुप्रत्ययकृदंत
 वचतावक्ता
 ज्ञाताज्ञाता
 दातादाता
 श्रु (श्रो)ताश्रोता
 ध्यान/ध्याताध्याता
    
16. ‘वाला’धातुप्रत्ययकृदंत
 दे (ना)वालादेने वाला
 धो (ना)      वालाधोने वाला
 ढो (ना)    वालाढोने वाला
 कर(ना)   वालाकरने वाला
 खा (ना)वालाखाने वाला
 गा (ना)वाला गाने वाला
 चाह (ना)    वालाचाहने वाला
 जा (ना)       वालाजाने वाला
 झपट (ना)      वालाझपटनेवाला
 डाल (ना)वालाडालने वाला
 तैर (ना)       वालातैरने वाला
 थाम (ना)   वालाथामने वाला
 भर (ना)        वालाभरने वाला
 हँस (ना)वालाहँसने वाला       
 नाच (ना)वालानाचने वाला
 पढ़ (ना)         वालापढ़ने वाला
 बोल (ना)        वालाबोलने वाला
 लिख (ना)  वालालिखने वाला
 मर (ना)        वालामरने वाला
 रोक (ना)  वालारोकने वाला
 लूट (ना)   वालालूटने वाला
 खा (ना)वालाखाने वाला  
    
17. ‘हार/हारा’धातुप्रत्यय  कृदंत
 खेव (खेवन)हारखेवनहार
 पाल् (ना) हारपालनहार
 जान (ना) जनन  हारजाननहार
 टूट (ना) टूटन    हारटूटनहार
 तार (तारन)     हारतारनहार
 तारन (तारण)हारतारणहारा
 देवनहारादेवनहारा
 खेवनहाराखेवनहार
 सेवनहारासेवनहारा
 चख (चाखन)हाराचाखनहारा

                                                                  विशेष नोट- ‘कर्तृवाचक प्रत्ययों’ से ‘संज्ञा’ और ‘विशेषण’ दोनों बनते हैं।

जय हिन्द

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