समास और समास के भेद : भाग-2 (तत्पुरुष समास)

2. तत्पुरुष समास- जिससमास का पूर्व पद गौण और उत्तर पद प्रधान हो उसे तत्पुरुष समास कहते हैं।

पं. कामता प्रसाद गुरु के अनुसार- “इस समास में पहला शब्द बहुधा संज्ञा अथवा विशेषण होता है। इसके विग्रह में इस शब्द के साथ कर्ता और संबोधन कारकों को छोड़ शेष सभी कारकों की विभक्तियाँ लगती है।”

तत्पुरुष का शाब्दिक अर्थ-  ‘तत्’ का अर्थ वह और ‘पुरुष’ का अर्थ ‘आदमी’ है अथार्त् वह दूसरा आदमी। इस प्रकार तत्पुरुष समास स्वयं तत्पुरुष समास का एक अच्छा उदाहरण है। इसी आधार पर इसका नाम तत्पुरुष समास पड़ा क्योंकि तत्पुरुष में दूसरा पद प्रधान होता है। इसका प्रथम पद गौण और उत्तर पद प्रधान होता है। जैसे-

1. हवन सामग्री = हवन का सामग्री   

2. राजपुत्र = राजा का पुत्र

3. गंगा जल = गंगाजल का जल यहाँ उपर्युक्त दिए गए उदाहरणों को हम समझते है। जैसे-

पहला उदाहरण है। हवन सामग्री- यहाँ जलने वाला हवन की  नहीं बल्कि हवन में डालने वाली सामग्री की बात कही गई है। अथार्त यहाँ ‘सामग्री’ दूसरा पद प्रधान है।

दूसरा उदाहरण है। राजपुत्र- इस उदाहरण में राजा की नहीं बल्कि राजा के पुत्र की चर्चा की गई है। अथार्त यहाँ पुत्र दूसरा पद प्रधान है।

तीसरे उदाहरण है। गंगा जल- इस उदाहरण में गंगा नहीं बल्कि गंगा जल की बात कही गई है। अथार्त यहाँ जल दूसरा पद जल प्रधान है। 

तत्पुरुष समास की पहचान के लिए हमें निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना आवश्यक है-

1. इसका प्रथम पद गौण तथा दूसरा पद प्रधान होता है।

2. सामान्यतः इसमें संज्ञा के साथ संज्ञा पद का योग होता है अथवा संज्ञा के साथ क्रिया पद का। जैसे-

  शिव (संज्ञा) आलय (संज्ञा) = शिवालय

  देश (संज्ञा) निकाला (संज्ञा) = देश निकाला। 

3. तत्पुरुष समास में किसी कारक की विभक्ति रहती है, परंतु समस्त पद में उसका लोप हो जाता है। जैसे-

   चिकित्सालय – चिकित्सा के लिए (आलय) घर

   तुलसीकृत- तुलसी द्वारा कृत

4. विभक्ति के स्थान पर अनेक बार कई शब्द होते है जिसे समास करने पर उनका लोप हो जाता है। जैसे-

   दहीबड़ा- दही में डूबा हुआ बड़ा

   ग्रामवासी- ग्राम में वास करने वाले।

पं. कामता प्रसाद गुरु के अनुसार- तत्पुरुष समास के दो भेद हैं- 1. व्याधिकरण तत्पुरुष 2. समानाधिकरण तत्पुरुष

1. व्याधिकरण तत्पुरुष समास- जिस तत्पुरुष समास में पूर्वपद तथा उत्तर पद विभक्तियाँ या परसर्गअलग-अलग होते हैं वहाँ व्याधिकरण तत्पुरुष समास होता है। संस्कृत में इन्हें द्वितीय तत्पुरुष या चतुर्थी तत्पुरुष नामों से विभक्त्यानुसार अभिहित किया जाता है, लेकिन हिंदी में द्वितीय जैसी संज्ञाएँ नहीं होने के कारण इसे करकानुसार अभिहित किया जाता है। इस आधार पर इसे ‘व्याधिकरण तत्पुरुष’ समास भी कहते हैं।

कारक चिह्नों के आधार पर तत्पुरुष समास के छह भेद हैं।

1. कर्म तत्पुरुष 2. करण तत्पुरुष 3. सम्प्रदान तत्पुरुष 4. अपादान तत्पुरुष 5. संबंध तत्पुरुष 6. अधिकरण तत्पुरुष।

इसमेंदो कारक चिह्नों ‘कर्ता’ और ‘संबोधन’ को छोडकर शेष छह कारकों की विभक्तियों के अर्थ में तत्पुरुष समास होता है। तत्पुरुष समास में अधिकतर दोनों पद संज्ञा या पहला पद संज्ञा और दूसरा पद विशेषण होता है।

तत्पुरुष समास भेद- कारक चिह्नों के आधार पर तत्पुरुष समास के छह भेद है। इसी आधार पर इसे व्याधिकरण तत्पुरुष समास भी कहते हैं।

1. कर्म तत्पुरुष- इसमें कर्म कारक चिह्न ‘को’ का लोप होता है।

2. करण तत्पुरुष- इसमें करण कारक चिह्न ‘से’, ‘के द्वारा’ का लोप होता है। 

3. सम्प्रदान तत्पुरुष- इसमें संप्रदान कारक चिह्न ‘के लिए’ का लोप होता है।

4. अपादान तत्पुरुष- इस समास में अपादान कारक चिह्न ‘से’ (अलग होने के अर्थ में) का लोप होता है।

5. सम्बन्ध तत्पुरुष- इस समास में संबंध तत्पुरुष चिह्न ‘का’ का लोप होता है।

6. अधिकरण तत्पुरुष– इस समास में अधिकरण कारक चिह्न

  ‘में’, ‘पर’ का लोप होता है।

1. कर्म तत्पुरुष समास- इस समास में कर्मकारक चिह्न ‘को’ का लोप होता है। जैसे-

समस्तपद विग्रह
अधिकार प्राप्तअधिकार को प्राप्त
आदर्शोन्मुखआदर्श को उन्मुख
आशातीतआशा को लांघकर गया हुआ
आत्मविस्मृतआत्मा को विस्मृत करनेवाला
कनकटाकान को काटनेवाला
कमरतोड़कमर को तोड़ने वाला
कनपटीतोड़कनपटी को तोड़ने वाला
ख्यातिप्राप्तख्याति को प्राप्त
ग्रंथकारग्रंथ को करनेवाला
गगनचुंबीगगन को चुमने वाला
घरफूँकघर को फूँकने वाला
चक्रधरचक्र को धारण करने वाला
चित्तचोरचित्त को चोरने वाला
जलपिपासुजल का पिपासु
जितेंद्रियइंद्रियों को जीतने वाला
तर्कसंगततर्क को संगत
तिलकुटातिल को कूटकर बनाया हुआ
दिवाकरदिवा को करने वाला
दिनकरदिन को करने वाला
दुःखातीतदुःख को अतीत
देशगतदेश को गत
धरनीधरधरणी को धारण करने वाला
नरभक्षीनरों को भक्षित करने वाला
पयोधरपानी को धारण करने वाला
परलोकगमनपरलोक को गमन
भण्डाफोड़भण्डा को फोड़ने वाल
बंशीधरबंशी को धारण करने वाला
माखनचोरमाखन को चुराने वाला
यशप्राप्तयश को प्राप्त
रथचालकरथ को चलानेवाला
लीलाधरलीला को धारण करने वाला
विदेशगमनविदेश को गमन
शरणागतशरण को आया हुआ
सुखप्रदसुख को देने वाला
स्वर्गगतस्वर्ग को गया हुआ
हस्तगतहाथ को गया हुआ

2. करण तत्पुरुष समास- इस समास में करण कारक चिह्नों ‘से’ और ‘के द्वारा’ का लोप होता है। जैसे-

समस्त पद विग्रह
अकालपीड़ितअकाल से पीड़ित
अभावग्रस्तअभाव से ग्रस्त
आँखोंदेखाआँखों के द्वारा देखा
ईश्वरदत्तईश्वर के द्वारा दत्त
कार्ययुक्तकार्य से युक्त
गुणयुक्तगुण से युक्त
चिंताव्याकुलचिंता से व्याकुल
डण्डीमारडंडी के द्वारा मारनेवाला 
तुलसीकृततुलसी के द्वारा कृत
तर्कसिद्धतर्क द्वारा सिद्ध
दोषपूर्णदोष से पूर्ण
दयार्द्रदया से आर्द्र
धर्मयुक्तधर्म से युक्त
धर्मभ्रष्टधर्म से भ्रष्ट
नेत्रहीननेत्र से हीन
प्रश्नाकुलप्रश्न से आकुल
प्रमाणसिद्धप्रमाण से सिद्ध
बाढ़पीड़ितबाढ़ से पीड़ित
बिहारीरचितबिहारी के द्वारा रचित
भक्तिवशभक्ति के द्वारा वश
भयग्रस्तभय से ग्रस्त
महिमामंडितमहिमा से मंडित
माघप्रणीतमाघ के द्वारा प्रणीत(रचित)
मुँहमाँगामुँह से माँगा
युक्तियुक्तयुक्ति से युक्त
रेखांकितरेखा के द्वारा अंकित
लोकसेव्यलोक के द्वारा सेव्य
वज्राहतवज्र से आहत
शोकातुरशोक से आतुर
सूररचितसूर के द्वारा रचित
स्वयंसिद्धस्वयं से सिद्ध
स्वचिंतनस्वयं के द्वारा चिंतन

3. सम्प्रदान तत्पुरुष समास: इस समास में संप्रदान कारक चिह्न ‘के लिए’ का लोप होता है। जैसे-

समस्त पद विग्रह
अनाथालयअनाथों के लिए आलय
आरामकुर्सीआराम के लिए कुर्सी
उपासना भूमिउपासना के लिए भूमि
कर्णफूलकर्ण (कान) के लिए फूल
कृषिभवनकृषि के लिए भवन
क्रीड़ाक्षेत्रक्रीड़ा के लिए क्षेत्र
गृहस्थाश्रमगृहस्थों के लिए आश्रम
गौशालागौओं के लिए शाला
घुड़शालाघोड़ों के लिए शाला
घर खर्चघर के लिए खर्च
चिकित्शालयचिकित्सा के लिए आलय
छात्रावासछात्रों के लिए आवास
जेबखर्चजेब के लिए खर्च
डाकगाड़ीडाक ले लिए गाड़ी
तपोवनतप के लिए वन
देवालयदेव के लिए आलय
दान-धानदान के लिए धान
धर्मशालाधर्म के लिए शाला
नाट्यशालानाट्य के लिए शाला
न्यायालयन्याय के लिए आलय
प्रयोगशालाप्रयोग के लिए शाला
परीक्षा भवनपरीक्षा के लिए भवन
पशुशालापशु के लिए शाला
पुण्य दानपुण्य के लिए दान
बलिवेदीबलि के लिए वेदी
बालामृतबालकों के लिए अमृत
भण्डार घरभण्डार के लिए घर
भूत बलिभूतों के लिए बलि
मालगोदाममाल के लिए गोदाम
मार्ग व्ययमार्ग के लिए व्यय 
यज्ञशालायज्ञ के लिए शाला
युद्ध क्षेत्रयुद्ध के लिए क्षेत्र
रसोईघररसोई के लिए घर 
रण भूमिरण के लिए भूमि
रसायन शालारसायन के लिए शाला
रोकड़बही रोकड़ के लिए बही
लोकहितकारीलोक के लिए हितकारी
व्यायामशालाव्यायाम के लिए शाला
विधानपरिषदविधान के लिए परिषद्
विद्युतगृहविद्युत के लिए गृह
शिवालयशिव के लिए आलय
शपतपत्रशपत के लिए पात्र
सत्याग्रहसत्य के लिए आग्रह
सभाभवनसभा के लिए भवन
हवनसामग्रीहवन के लिए सामग्री
हवनकुण्डहवन के लिए कुण्ड

4. अपादान तत्पुरुष समास: इस समास में अपादान कारक चिह्न ‘से’ (अलग होने के अर्थ में) का लोप होता है। जैसे-

समस्त पद विग्रह
अवसर वंचितअवसर से वंचित
अपराधमुक्तअपराध से मुक्त
आकाशवाणीआकाश से आगत वाणी
अभियोगमुक्तअभियोग से मुक्त
आकाशपतीतआकाश से पतित
ईश्वरविमुखईश्वर से विमुख
इंद्रियातीतइंद्रियों से अतीत
ऋणमुक्तऋण से मुक्त
कार्यमुक्तकार्य से मुक्त
कर्तव्यच्युतकर्तव्य से च्युत
कर्म-भिन्नकर्म से भिन्न
कामचोरकाम से जी चुराने वाला
गुणहीनगुण से हीन
गुणरहितगुण से रहित
गुणातीतगुणों से अतीत (परे)
जीवनमुक्तजीवन से मुक्त
जलहीनजल से हीन
जन्मांधजन्म से अंधा
जात-बाहरजात से बाहर
जाति-भ्रष्टजात से भ्रष्ट
दूरदर्शनदूर से दर्शन
दोष-युक्तदोष से युक्त
देश-निकालादेश से निकाला
धनहीनधन से हीन
धर्मविमुखधर्म से विमुख
नेत्रहीननेत्र से हीन
नरकभयनरक से भय
पापमुक्तपाप से मुक्त
पापरहितपाप से रहित
पथभ्रष्टपथ से भ्रष्ट
फलरहितफल से रहित
फलहीनफल से हीन
बंधनमुक्तबंधन से मुक्त
बुद्धिहीनबुद्धि से हीन
भयभीतभय से भीत
भाग्यहीनभाग्य से हीन
रोगमुक्तरोग से मुक्त
राजद्रोहराज से द्रोह
लोकभयलोक से भय
लोकोत्तरलोक से उत्तर
लक्ष्यभ्रष्टलक्ष्य से भ्रष्ट
विद्यारहितविद्या से रहित
वर्णनातीतवर्णन से अतीत (परे)
शब्दातीतशब्द से अतीत (परे)
सुखविहीनसुख से विहीन
सेवामुक्तसेवा से मुक्त
सेवानिवृत्त सेवा से निवृत्त 
हतश्रीश्री (शोभा) से हत (रहित)
ह्रदयहीनह्रदय से हीन
त्रुटिहीनत्रुटि से हीन 
ज्ञानशून्यज्ञान से शून्य  

5. सम्बन्ध तत्पुरुष समास: इस समास में संबंध तत्पुरुष चिह्न ‘का’ ‘की’ ‘के’ का लोप होता है। उदाहरण-

समस्त पद विग्रह
अमृतधाराअमृत की धारा
अश्वमेघअश्व का मेघ
अक्षांशअक्ष का अंश
आत्मनियंत्रणआत्मा का नियंत्रण
आत्मसम्मानआत्मा का सम्मान
आत्मज्ञानआत्मा का ज्ञान
आज्ञानुसारआज्ञा के अनुसार
उल्कापातउल्का का पात 
उद्योगपतिउद्योग का पति
ऋषिकन्याऋषि की कन्या
करुणासागरकरुणा का सागर
करोड़पतिकरोड़ (रुपयों) का पति
कनकघटकनक का घट
गंगाजलगंगा का जल
गृहस्वामीगृह का स्वामी
ग्रंथावलीग्रंथों की अवली
ग्रामोत्थानग्राम का उत्थान
गोदानगो (गाय) का दान
घुड़दौड़घोड़ों की दौड़
चरित्रहननचरित्र का हनन
चंद्रोदयचंद्र का उदय
चाय बगानचायों के बगान (बगीचे)
जलधाराजल की धारा
जल प्रवाहजल का प्रवाह
जनसंगठनजन का संगठन
जगन्नाथजगत् (लोक) का नाथ
जीवनदानजीवन का दान
तमपुंजतम (अँधेरा) का पुंज (समूह)
दयासागरदया का सागर
दयानिधिदया का निधि
दुःखसागरदुःख का सागर
दीपसीखादीप की शिखा
धनपतिधन का पति
नियमावलीनियमों की अवली
पवनपुत्रपवन का पुत्र
परनिंदापर की निंदा
पथपरिवहनपथ का परिवहन
पराधीनपर (दूसरों) के अधीन
पुष्पवर्षापुष्पों की वर्षा
पुस्तकालयपुस्तकों का आलय
फुलवारीफूलों की वाड़ी (वाटिका)
भारतरत्नभारत का रत्न
भाग्यविधाताभाग्य का विधाता
भूकंपभू का कंप (कांपना)
भारत रत्नभारत का रत्न
मृगशावकमृग का शावक (बच्चा)
मृत्युदण्डमृत्यु का दण्ड
मन:स्थितिमन की स्थिति
मंत्रिभवनमंत्री का भवन
मंत्रालयमंत्री का आलय
राजसभाराजा की सभा
रघुवंशरघु का वंश
रक्तवर्द्धकरक्त का वर्द्धन करने वाला
रामाश्रयराम का आश्रय
रक्तशोधकरक्त का शोध करने वाला
राजमाताराजा की माता
राष्ट्रहितराष्ट्र का हित
राष्ट्रपतिभवनराष्ट्रपति का भवन
राष्ट्रनिर्माताराष्ट्र का निर्माता
लोककल्याणलोक का कल्याण
लोकनायकलोक का नायक
लोकहितलोक का हित
लक्ष्मीपतिलक्ष्मी का पति
विभागाध्यक्षविभाग का अध्यक्ष
विश्वासपात्रविश्वास का पात्र
वितरण विधिवितरण की विधि
वित्तहानि वित्त की हानि
वाग्दानवाक् (वाणी) का दान
वाचस्पतिवाच: (वाणी) का दान
शास्त्रानुकूलशास्त्र के अनुकूल
शांतिपुत्र शांति का पुत्र
शांतिदूतशांति का दूत
सेनापतिसेना का पति
सचिवालयसचिव का आलय
संसदसदस्यसंसद का सदस्य
सेनानायकसेना का नायक
सेहराबंधाईसेहरा बाँधने की भेट
सभापतिसभा का पति
सौरमंडलसूर्य का मंडल
सीमारेखासीमा की रेखा
हुक्मनामहुक्म का नाम (प्रपत्र)

6. अधिकरण तत्पुरुष समास: इसमें कारक के ‘में’ और ‘पर’ चिह्न का लोप होता है। उदाहरण-

समस्त पद विग्रह
अश्वारोहनअश्व पर आरोहण
अश्वारूढ़अश्व पर आरूढ़
आनंदमग्नआनंग में मग्न
आत्मविश्वासआत्मा पर विश्वास
आपबीतीअपने पर बीती हुई
ईश्वराधीनईश्वर पर आधीन
ऋषिराजऋषियों में राजा
कविशिरोमानीकवियों में शिरोमणि
कर्तव्यपरायणकर्तव्य में परायण
कविराजकवियों में राजा
कलाप्रवीणकला में प्रवीण
कविवरकवियों में वर (श्रेष्ठ)
कूपमंडूककूप में रहने वाला मंडूक
काव्यनिपुणकाव्य में निपुण
गृहप्रवेशगृह में प्रवेश
ग्रामवासीग्राम में वासी
घुड़सवारघोड़े पर (होने वाला) सवार
जलजजल में जन्मा 
जलमग्नजल में मग्न
तर्ककुशलतर्क में कुशल
तीर्थाटनतीर्थों में अटन
दीनदयालदीन पर दया करने वाला
देशवासीदेश में वास करने वाला
देवाश्रितदवों पर आश्रित
दानवीरदान (देने) में वीर 
ध्यानमग्न  ध्यान में मग्न
धर्मप्रवृतधर्म में प्रवृत
धर्मवीरधर्म में वीर
नीतिनिपुण नीति में निपुण
नरोत्तमनरों में उत्तम
नरश्रेष्ठनरों में श्रेष्ठ
नराधमनरों में अधम (नीच)
पुरुषोत्तमपुरुषों में उत्तम
पुरुषसिंहपुरुषों में सिंह
पलाधरितपल पर आधारित 
पर्वतारोहनपर्वत पर आरोहण
फलासक्तफलों में आसक्त
भूमिगतभूमि में गत
भाषाधिकारभाषा पर अधिकार
मध्यांतरमध्य में अंतर
मृत्युंजयमृत्यु पर जय
मुनिश्रेष्ठ मुनियों में श्रेष्ठ
मदांधमद में अंधा 
युद्धवीरयुद्ध में वीर
युद्धरतयुद्ध में रत
रणकौशलरण में कौशल
रणवीररण में वीर
लोकप्रियलोक में प्रिय
वाग्वीरवाक् (बोलने) में वीर
वाक् चातुर्यवाक् में चातुर्य
वाक् पटुवाक् में पटु (चतुर)
विद्याप्रवीणविद्या में प्रवीण
शरणागतशरण में आगत
शोकमग्नशोक में मग्न
सर्वोत्तमसर्व (सभी) में उत्तम 
सर्वोपरिसर्व में ऊपर
सर्वश्रेष्ठसर्व में श्रेष्ठ
सर्वव्यापकसर्व में व्यापक
सत्तारूढ़सत्ता पर आरूढ़
स्वर्गवासस्वर्ग में वास
सिरदर्दसिर में दर्द
हवाईयात्राहवा में यात्रा
हरफ़नमौलाहर फ़न(काम कुशल) में मौला 

जय हिंद

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