‘आधुनिक काल’ के प्रमुख आलोचकों के महत्वपूर्ण कथन – भारतेंदु युग से नई कविता तक

1. “वे पूरबीपन की परवाह न करके अपने बैसवारे की ग्राम्य

   कहावतें और शब्द भी बेधड़क रख दिया करते थे।”

   शुक्ल जी की इन पंक्तियों का संबंध किससे है?

    (प्रतापनारायण मिश्र, UP PGT, 2013)

2. “घूरे क लत्ता बीनै, कनातन क डौल बाँधे’ जैसा शीर्षक किस लेखक ने दिया है?

   (प्रतापनारायण मिश्र, UP PGT, 2013)

3. “आठ मास बीते जजमान! अब तौ करौ दच्छिना दान” इन पंक्तियों का संबंध किस संपादक से है?

   (प्रतापनारायण मिश्र, UP PGT, 2013)

4. “यह आँख बड़ी बला है, इसका आना, जाना, उठना, बैठना सब बुरा है।” यह किसने लिखा है?

   (बालकृष्ण भट्ट DSSSB PGT, 2018)

5. ‘हिन्दी-हिंदू-हिन्दुस्तान’ का नारा किस साहित्यकार ने दिया था? (प्रतापनारायण मिश्र DSSSB PGT, 2018)

6. ‘निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल।

   बिनु निज भाषा ज्ञान के, मिटत न हिय का सूल॥   यह कथन किसका है?

   (भारतेंदु हरिश्चन्द्र, DSSSB PGT, 2018)

7. “जो हो, मैंने आप कई बेर परिश्रम किया कि खड़ीबोली में कुछ कविता बनाऊँ पर वह मेरे चित्तानुसार नहीं”

   यह कथन किसका है?

   (भारतेंदु हरिश्चन्द्र, KVS PGT, 2018)

8. भीतर-भीतर सब रस चूसै, हंसि-हंसि के तन मन धन मूसै।

   यह पंक्ति किस कवि की है?

   (भारतेंदु हरिश्चन्द्र, 2014)

9. ‘भारतेंदु ने जिस प्रकार हिंदी गद्य की भाषा का परिष्कार किया, उसी प्रकार काव्य की ब्रजभाषा का भी।’

   इस पंक्ति के लेखक कौन है?

   (रामचंद्र शुक्ल, UGC, 2017)

10. ‘बगियान बसंत बसेरो कियो, बसिए, तेहि त्यागी तपाइए  ना।

    दिन काम-कुतूहल के जो बने, तिन बीच बियोग बुलाइए ना॥

उपर्युक्त काव्य पंक्तियों के रचनाकार हैं?

(बद्रीनारायण चौधरी ‘प्रेमघन’)

11. ‘वह हृदय नहीं है, पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं’ यह काव्य पंक्ति किस कवि की है?

    (गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’ GIC.PGT 2015)

12. ‘कविता करके तुलसी न लसे, कविता लसी पा तुलसी की  कला।’

    तुलसीदास जी के लिए यह प्रशस्ति वचन किसका है?

    (अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔंध’ GIC, 2018)

13. “सच्चा प्रेम वही है, जिसकी तृप्ति आत्मबलि पर हो निर्भर।

    त्याग बिना निष्प्राण प्रेम है, करो प्रेम पर प्राण निछावर॥”  इन पंक्तियों के रचयिता कौन हैं?

    (रामनरेश त्रिपाठी, GIC, 2017)

14. “यदि द्विवेदी जी न उठ खड़े होते तो जैसे अव्यवस्थित व्याकरणविरुद्ध और ऊटपटांग भाषा चारों ओर दिखाई पड़ी थी, उसकी परम्परा जल्दी न रूकती।” यह कथन किसका है?  

    (आचार्य रामचन्द्र शुक्ल, UPPCS, GIC, 2017)

15. ‘उठ जाग मुसाफिर भोर भई, अब रैन कहाँ जो सोवत है।’    यह किस ‘अवधी सम्राट’ कवि की रचना है?

    (वंशीधर शुक्ल GDC प्रवक्ता, 2017)

16. “कविता प्रभावशाली रचना है जो पाठक या श्रोता के मन  पर आनंददायी प्रभाव डालती है।” काव्य के संबंध में यह किसके विचार है?

    (आचार्य महावीरप्रसाद द्विवेदी, हरियाणा असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा, 2017)

17. ‘राम तुम्हारा चरित स्वयं ही काव्य है।

    कोई कवि बन जाय, सहज संभाव्य है।” यह किस कवि ने कहा  है?

    (मैथिलीशरण गुप्त, DSSB PGT, 2018)

18. ‘चींटी से लेकर हाथी पर्यन्त पशु, भिक्षु से लेकर राजा पर्यन्त मनुष्य, बिन्दु से लेकर समुद्र पर्यन्त जल, अनंत आकाश अनंत पृथ्वी, अनंत पर्वत-सभी पर कविता हो सकती है।’ उक्त कथन किस विद्वान का है-

    (आचार्य महावीरप्रसाद द्विवेदी KVS PGT 2018)

19. ‘दिवस का अवसान समीप था, गगन था कुछ लोहित हो चला।’ यह किसकी पंक्तियाँ है?

    (अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔंध’ DSSSB TGT, 2018)

20. ‘मेरे चपल यौवन बाल अचल अंचल में पड़ा सो, मचल कर मत साल।’ यह काव्य पंक्तियाँ किसके द्वारा रचित है?

(मैथिलीशरण गुप्त, KVS PGT, 2018)

21. ‘अच्छी हिंदी बस एक ही व्यक्ति लिखता था’- यह कथन किस आलोचक ने किसके बारे में कहा था?

    (महावीरप्रसाद द्विवेदी ने बालमुकुंद गुप्त के बारे में कहा, UGC NET 2019)

22. “विख्यात जीवन-व्रत हमारा लोक-हित एकांत था, ‘आत्मा अमर है, देह नश्वर’ यह अटल सिद्धांत था।”

उपर्युक्त पंक्तियाँ किस कृति से संगृहित हैं?     (भारत भारती से GIC.PGT 2012)

23. “दिवस का अवसान समीप था।

    गगन था कुछ लोहित हो चला॥

    तरु शिखा पर थी अब राजती।

कमलिनी-कुल-वल्लभ की प्रभा॥” ये पंक्तियाँ किस काव्य संबंधित हैं?

(“प्रिय प्रवास” से, UP PGT 2013)

24. “क्षत्रिय! उठो अब तो कुयश की कालिमा को मेट दो।

निज देश को जीवन सहित तन मन तथा धन भेंट दो।

वैश्यों सुनो व्यापार सारा मिट चुका है देश का।

सब धन विदेशी हर रहें हैं पार है क्या क्लेश का।

उपर्युक्त काव्य पंक्तियों के रचनाकार कौन है?

(मैथिलीशरण गुप्त UGC NET, 2017)

25. “प्रिय की सुधि-सी ये सरिताएँ, ये कानन कांतार सुसज्जित।

मैं तो नहीं, किंतु है मेरा हृदय किसी प्रियतम से परिचित।

जिसके प्रेमपत्र आते हैं प्रायः सुख-संवाद-सन्निहित।”

उपर्युक्त काव्य पंक्तियाँ किस कवि की हैं?

(रामनरेश त्रिपाठी, UGC NET, 2017)

26. “अधिकार खोकर बैठा रहना, यह महा दुष्कर्म है।

न्यायार्थ अपने बन्धु को भी दण्ड देना धर्म है।”

उपर्युक्त काव्य पंक्तियाँ किस ग्रंथ से उद्धृत हैं? (जयद्रथ वध से, KVS PGT 2016)

27. “हम कौन थे क्या हो गए हैं और क्या होंगे अभी,

आओं विचारें आज मिलकर ये समस्याएँ सभी।”

उपर्युक्त काव्य पंक्तियाँ किस कवि की हैं? (मैथिलीशरण गुप्त KVS PGT 2016)

28. ‘मैं नीर भरी दुःख की बदली।’

महादेवी वर्मा का उपर्युक्त गीत उनके किस काव्य संग्रह से सम्बद्ध है? (सान्ध्यगीत से, UGC NET, 2019)

29. छायावाद को ‘स्थूल के विरुद्ध सूक्ष्म की प्रतिक्रिया’ किसने कहा था- (डॉ नगेंद्र, UPHSC, अ.प्रो. 2016)

30. “परमात्मा की छाया आत्मा में और आत्मा की छाया परमात्मा में पड़ने पर छायावाद की सृष्टि होती है।” यह कथन किसका है?

(डॉ. रामकुमार वर्मा, UPHSC, अ.प्रो. 2016)

31. “दुःख की पिछली रजनी बीच

विकसता सुख का नवल प्रभात।” यह काव्य पंक्ति किस कृति से है? (कामायनी से, UPPCS GIC 2017)

32. “मानव अथवा प्रकृति के सूक्ष्म, किंतु व्यक्त सौंदर्य में आध्यात्मिक छाया का भान मेरे विचार से छायावाद की एक सर्वमान्य व्याख्या हो सकती है।” यह किसका कथन है? (नंददुलारे वाजपेयी, UPPCS GIC 2017)

33. “हो गया है व्यर्थ/जीवन मैं रण में गया हार।”

यह काव्य पंक्ति निराला की किस कविता से है? (वनबेला, GDC प्रवक्ता, 2017)

34. “ज्ञान भिन्न कुछ क्रिया भिन्न है,

इच्छा क्यों पूरी हो मन की।

एक दूसरे से न मिल सकें,

यह विडंबना है जीवन की॥”

उपर्युक्त पंक्तियाँ ‘कामायनी’ के किस सर्ग से ली गई है? (‘रहस्य’ सर्ग से, GDC प्रवक्ता, 2017)

35. “शत्रु मेरा बन गया है, छल रहित व्यवहार मेरा।”

उक्त पंक्ति किस कृति से ली गई है? (‘मधुकलश’ से, GDC प्रवक्ता, 2017)

36. ‘छायावाद और उत्तर-छायावाद के बीच कुछ वैसा ही संबंध दिखता है, जैसे मध्यकाल में भक्ति काव्य और रीति काव्य के बीच था।’

उपर्युक्त पंक्तियों के लेखक हैं? (डॉ. रामस्वरूप चतुर्वेदी, GIC.PGT 2012)

37. “छायावाद तत्वतः प्रकृति के बीच जीवन का उद्गीथ है।”

यह उद्घोष किसका है- (महादेवी वर्मा का, GDC प्रवक्ता, 2017)

38. ‘आराधन का दृढ़ आराधना से दो उत्तर,

तुम वरो विजय संयत प्राणों से प्राणों पर।’

‘सरयू’ में संकलित ‘राम की शक्ति पूजा’

उद्धृत उक्त कथन किसका है? (जाम्बवान, राज. स्कूल, कॉलेज 2014, 2018)

39. “दुःख ही जीवन की कथा रही,

क्या कहूँ आज, जो नहीं कही!’

उपर्युक्त पंक्तियाँ किस कविता से उद्धृत हैं? (सरोज स्मृति से, DSSSB PGT, JH.PGT, HA.A.PRO  2018)

40. “काव्य आत्मा की संकल्पनात्मक अनुभूति है।” यह कथन किसका है? (जयशंकर प्रसाद, DSSSB PGT, 2018)

41. “वियोगी होगा पहला कवि, आह से उपजा होगा गान” के रचनाकार कौन हैं? (सुमित्रानंदन पंत, DSSSB PGT, 2018)

42. “चंचल किशोर सुन्दरता की, मैं करती रहती रखवाली।

मैं वह हल्की-सी मसलन हूँ, जो बनती कानों की लाली।”

उपर्युक्त काव्यांश में किसका वर्णन किया गया है? (‘लज्जा’ सर्ग का, राज. कॉ. ले. 2014)

43. “ओ जीवन की मरू- मरीचिका, कायरता के अलस विषाद”

काव्यांश में किस भाव का उद्बोधन है? (चिंता भाव का, राज. कॉ. ले. 2014)

44. “उज्ज्वल वरदान चेतना का, सौंदर्य जिसे सब कहते हैं,

जिससे अनन्त अभिलाषा के सपने सब जगते रहते है।”

प्रस्तुत पंक्तियाँ ‘कामायनी’ के किस सर्ग से है? (‘लज्जा सर्ग से, राज. कॉ. ले. 2014)

45. “संसार का सारा कारोबार बच्चों को खिलाने-पिलाने-सुलाने आदि के लिए हो रहा है और इस महत्वपूर्ण कर्त्तव्य में भूल न होने देने का काम माँ नामधारी जीवों को सौपा गया है।” यह किसका कथन है?

(महादेवी वर्मा का, DSSSB PGT, 2018)

46. ‘कामायनी’ का महाकाव्यत्व असंदिग्ध है। यह किसका कथन है? (डॉ, नगेंद्र, DSSSB PGT, 2018)

47. “नारी तुम केवल श्रद्धा हो, विश्वास रजत नग पगतल में

पीयूष स्रोत सी बहा करो जीवन के सुन्दर समतल में।”

उपर्युक्त पंक्तियाँ कामायनी के किस सर्ग की है? (‘लज्जा’ सर्ग से, DSSSB PGT, 2018)

48. “वस्तु विन्यास की दृष्टि से कामायनी को दुखांत रचना

मान लेने में कोई आपत्ति नहीं।” यह किसका कथन है? (नंददुलारे वाजपेयी, DSSSB PGT, 2018)

49. ‘गा कोकिल बरसा पावक कण’

यह पंक्ति किस रचनाकार की है? (सुमित्रानंदन पंत, DSSSB TGT, 2018)

50. ‘छायावाद’ को राष्ट्रीय जागरण की काव्यात्मक अभिव्यक्ति किसने कहा है? (डॉ. नामवर सिंह ने, NVS PGT, 2019)

51. ‘प्रथम रश्मि का आना रंगिणि, तूने कैसे पहचाना? यह पंक्ति किसके द्वारा लिखित है?

(सुमित्रानंदन पंत NVS PGT, MP Ass Prof 2019)

52. “गिरा हो जाती सनयन, नयन करते नीरव भाषण”-

जैसे विरोधाभाषी चमत्कार का सौंदर्य किसकी कविता से प्राप्त है-

(सुमित्रानंदन पंत, LT Hindi 2018)

53. किस समीक्षक ने कहा? “छ्यावादी काव्य में भारतीय परंपरा के जीवन तत्वों का समावेश हुआ है।”

(नगेंद्र, Asst Prof, 2018)

54. ‘सुनकर क्या तुम भला करोगे, मेरी भोली आत्मकथा

अभी समय भी नहीं, थकी सोई है मेरी मीन व्यथा।’

    उपर्युक्त काव्य पंक्ति किसकी है? (जयशंकर प्रसाद, KVS PGT 2018)

55. “निराला जी पर बंग भाषा की कव्यशैली का प्रभाव समास में गुम्फित पदवल्लरी, क्रियापद के लोप आदि में स्पष्ट झलकता है। लाक्षणिक वैलक्षण्य लाने की प्रवृत्ति इनमें उतनी नहीं पाई जाती जितनी प्रसाद और पंत में।”

उपर्युक्त कथन किसका है? (आचार्य रामचन्द्र शुक्ल, UGC NET 2019)

56. “इस समय तो भारतीय पुरुष जैसे अपने मनोरंजन के लिए रंग-बिरंगे पक्षी पाल लेता है, उपयोग के लिए गाय और घोड़ा पाल लेता है, उसी प्रकार वह एक स्त्री को पालता है तथा पालित पशु-पंक्षियों के सामान ही वह उसके शरीर और मन पर अधिकार समझता है।”

उपर्युक्त कथन किसका है? (महादेवी वर्मा, UGC SET 2019)

57. सबका निचोड़ लेकर तुम सुख से सूखे जीवन में।

बरसो प्रभात हिमकन-सा आँसू इस विश्व सदन में॥

प्रस्तुत पंक्ति निम्न में से किस की है- (जयशंकर प्रसाद, UGC NET 2017)

58. ‘कामायनी’ को ‘छायावाद’ का उपनिषद् किसने कहा?

(शांतिप्रिय द्विवेदी, UPPSC 2013)

59. ‘धिक् जीवन जो पाता ही आया है विरोध’- पंक्ति में किसके जीवन-सत्य की अभिव्यक्ति मिलती है?

(सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’, NVS.PGT. 2014)

60. “स्नेह-निर्झर बह गया है। रेत ज्यों तन रह गया है।”

उपरोक्त गीत किस कवि की है? (सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’, UGC NET)

61. “तेरा वैभव देखूँ या जीवन का क्रंदन देखूँ।”

यह पंक्ति किसकी है? (महादेवी वर्मा, K.V.S 2015)

62. “इस करुणा कलित हृदय में अब विकल रागिनी बजती।

क्यों हाहाकार स्वरों में वेदना असीम गरजती॥”

इन पंक्तियों के रचनाकार हैं? (जयशंकर प्रसाद, UP PGT 2009)

63. “मिलन का मत नाम लो, मैं विरह में चिर हूँ।”

यह पंक्ति किस रचनाकार की है? (महादेवी वर्मा, UP PGT 2010)

64. “यदि श्रद्धा और मनु अथार्त् मनन के सहयोग से मानवता

का विकास रूपक है तो भी बड़ा भावमय और श्लाघ्य है।”

यह किसका कथन है? (जयशंकर प्रसाद, UPPSC 2008)

65. “मनु श्रद्धा और इड़ा इत्यादि अपना ऐतिहासिक अस्तित्व रखते हुए, सांकेतिक अर्थ की भी अभिव्यक्ति करें, तो मुझे कोई आपत्ति नहीं।” यह कथन किसका है?

(जयशंकर प्रसाद, JGAKHAND PGT 2018)

66. किस छायावादी कवि की कविता में माधुर्य गुण की अधिकता को रेखांकित करते हुए आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने उसे ‘मधुचर्या’ का कवि कहा है?

(जयशंकर प्रसाद को, KVS PGT 2017)

67. ‘चाह नहीं मैं सुरबाला के गहनों में गूंथा जाऊँ’

पुष्प की अभिलाष किस कवि की रचना है? (माखनलाल चतुर्वेदी, MP Asst.prof 2017)

68. ‘जिस तरह हम बोलते हैं उस तरह तू लिख, और उसके बाद भी हमसे बड़ा तू दिख।’

उपर्युक्त पंक्ति के रचनाकार हैं: (भवानीप्रसाद मिश्र, DIET PGT 2014)

69. ‘तुम्हारी यह दंतुरित मुस्कान, मृतक में भी डाल देगी जान।’

उपर्युक्त काव्य-पंक्तियाँ किसकी है? (नागार्जुन, KVS PGT)

70. ‘……रचना न तो दर्शन है और न किसी ज्ञानी के प्रौढ़ मस्तिष्क का चमत्कार। यह तो अंततः, एक साधारण मनुष्य की शंकाकुल हृदय ही है, जो मस्तिष्क के स्तर पर चढ़कर बोल रहा है।’ रामधारी सिंह द्वारा कहा गया यह कथन उनके किस काव्य के संबंध में है?

(कुरुक्षेत्र से, JHARKHAND PGT 2018)

71. प्रस्तुत पंक्तियाँ किस कृति से ली गयी हैं?

“इस वैयक्तिक भोगवाद से फूटी विष की धारा

तड़प रहा है जिसमें पड़कर मानव-समाज यह सारा।”

(कुरुक्षेत्र से, JHARKHAND PGT 2018)

72. ‘सबको मुक्त प्रकाश चाहिए,

सबको मुक्त समीरण,

बाधा-रहित विकास,

मुक्त आशंकाओं से जीवन।’

ये पंक्तियाँ किस कृति से ली गई हैं? (कुरुक्षेत्र से, JHARKHAND PGT 2018)

73. ‘अगर मैं तुमको/ ललाती सांझ के नभ की अकेली तारिका/ अब नहीं कहता/ या शरद के भोर की नीहार न्हायी कुई/ टटकी कली चम्पे की/ वगैरह, तो/प्रस्तुत पंक्तियाँ अज्ञेय की किस कविता से उद्धत हैं ?

(कलगी बाजरे की, DSSSB PGT 2018)

74. “प्रयोगवाद बैठे-ठाले का धंधा है” किसने कहा?

(नंददुलारे वाजपेयी, DSSSB PGT 2018)

75. “ये उपमान मैले हो गए हैं देवता इन प्रतीकों के कर गए हैं कूच कभी वासन अधिक घिसने से मुलम्मा छूट जाता है।’

(सच्चितानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय, KVS PGT)

76. ‘मैं रथ का टुटा हुआ पहिया हूँ, लेकिन मुझे फेंको मत’ ये किस कवि की पंक्ति है?

(धर्मवीर भारती, UPPCS GIC 2017)

77. ‘सिर पर जूता/पैर में टोपी’ ने नई कविता को बदनाम किया, तो एक संस्कार भी दिया।’ इस कविता के रचयिता कौन है?

(लक्ष्मीकांत वर्मा, DSSSB PGT 2018)

जय हिंद

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