मनुष्य के जीवन का सबसे सुनहरा, खुबसूरत और चिंता मुक्त पल बचपन है। जिसे फिर से जीने का मन करता है लेकिन बिता हुआ समय कभी भी वापस नहीं आता है। सिर्फ वो यादें ही रहती है, जिसे फिर से एक बार जीने का मन करता है।
सुंदर विचार
गुरु का महत्व
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वर: ।गरु:साक्षात् परब्रह्म, तस्मै श्रीगुरुवे नमः।। पौराणिक समय से ही हमारे देश में गुरु का विशेष महत्व है। गुरु ही शिष्य के जीवन में ज्ञान रूपी प्रकाश फैलता है। कबीर दास जी भी कहते है कि गुरु कुम्भार शिष कुंभ है, गढ़ी-गढ़ी काढ़ै खोट।अंतर हाथ सहारि दै, बाहर बाहै चोट।। … Continue reading गुरु का महत्व
मिथ्या सत्य (कविता)
सत्य और मिथ्या दो है भाई, दोनों में थी हुई लड़ाई । साथ कभी ना रह सकते, क्योंकि दोनों की सोच अलग थी। कभी एक आगे बढ़ जाता, और दूसरा रह जाता पीछे। ऐसा लगता है कि, मिथ्या का ही है जमाना।
शिक्षण और प्रशिक्षण
सचिव वैद्य गुरु तीन जौं प्रिय बोलहिं भय आस । राज धर्म तन तीनि कर होइ बेगिहीं नास ।। गोस्वामी तुलसी दास जी ने कहा है कि मंत्री, वैद्य और गुरु यदि भय बस सच न बोलकर (हित की बात न कहकर) प्रिय बोलें अर्थात सामने वाले को खुश रखने के लिए बोलें तो… Continue reading शिक्षण और प्रशिक्षण
किन्नर (कविता)
“वाह रे ! कुदरत तेरी कैसी खेल निराली, एक का घर भर दिया, दुसरे की झोली भी खाली । जिसको दिया आधा, दिल का वही है राजा, फिर भी घर-घर घूमकर, बजाता है बाजा । वे अपनी पहचान को भी हैं तरसते, फिर भी, उनकी दुआओं से हैं दुसरों के घर सजते ।।” “ना तो… Continue reading किन्नर (कविता)
ठूँठ (कविता)
हरी भरी वसुंधरा पर, था खड़ा, एक ठूँठ वृक्ष कभी वो खुद को निहारता, कभी दिशाओं को देखता पुष्पहीन, पत्रहीन, असहाय सा था खड़ा ना वसेरा चिडियों का, ना लोगों के लिए ठिकाना जब थी मैं हरी भरी और खुशहाल पक्षियों के कलरव से गूंजती थी डाल-डाल पथिकों का होता था बैठक यहाँ लेकिन चुप… Continue reading ठूँठ (कविता)
हिन्दी गद्य विधा का वैश्विक स्तर पर महत्व
जन जन की है भाषा हिन्दी, जन समूह की जिज्ञासा हिन्दी । जन जन में रची बसी है, जन मन की अभिलाषा हिन्दी ।। वैश्विकरण का शाब्दिक अर्थ होता है किसी भी स्थानीय या क्षेत्रीय वस्तुओं का विश्व स्तर पर रूपांतर होना, 21वीं शताब्दी को अगर वैश्विकरण की शदी कहें तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी।… Continue reading हिन्दी गद्य विधा का वैश्विक स्तर पर महत्व
हिन्दी साहित्य के मुस्लिम लेखक : गंगा जमुनी तहज़ीब (रसखान)
हिन्दी साहित्य के इतिहास में आदिकाल से लेकर आधुनिक काल तक अनेकों मुसलमान लेखकों ने हिन्दी साहित्य को समृद्ध करने में विशेष भूमिका निभाई है। उसीप्रकार कई हिन्दू रचनाकारों ने भी उर्दू साहित्य को समृद्ध करने का काम किया है। हिन्दी साहित्य के रीतिकाल में रीतिमुक्त धारा के कविओं में रसखान का महत्वपूर्ण स्थान है।… Continue reading हिन्दी साहित्य के मुस्लिम लेखक : गंगा जमुनी तहज़ीब (रसखान)
पूर्वोत्तर भारत में हिन्दी
भाषा का कोई रंग, रूप, जाति या आकार नहीं होता है। इसे तो सिर्फ सुनकर महसूस किया जाता है। हमारी हिन्दी का तो कुछ कहना ही नहीं इसकी शब्दों में इतनी मिठास है कि विश्व का हर व्यक्ति इसे सीखना और बोलना चाहता है। कुछ लोग तो हिन्दी सीखकर अपने आपको गौरवान्वित महसूस करते हैं।… Continue reading पूर्वोत्तर भारत में हिन्दी
हत्यारिन राजनीति (कविता)
हे! मानव तुमने ये क्या कर दिया? मैं क्या थी और तुमने मुझे क्या बना दिया? खुद को संवारने के लिए मुझे दाग-दाग कर दिया। मैं तो रानी थी राजाओं के नीतियों की तुमने मुझे हत्यारिन बना दिया। मुझे तो मेरे पूर्वजों ने इजज्त और सम्मान दिया लेकिन तुमने मुझे कलंकित कर दिया। थी मैं… Continue reading हत्यारिन राजनीति (कविता)


