स्वर्ग लोक से जब आई मैं भू पर, माँ ही एक सहारा थी। माँ की गोद मुझे अब तो, सारे ब्रह्माण्ड से प्यारा थी।। ममता की एक झलक पाकर, मैं बहुत खुश हो जाती थी। उसका दूध (अमृत) पीकर हमें, नया जीवन मील जाती थी।। हम चाहे कितना भी दुःख दें, वो मेरे सुख में… Continue reading माँ (कविता)
सुंदर विचार
सच्ची घटना (कहानी) दोषी कौन
हमारे जीवन में चाहे जो भी घटनाएं घटती है। हम बिना कुछ सोचे-समझे भगवान को दोषी बना देते है। आज मैं जिस घटना की चर्चा करने जा रही हूं वह आंखों देखी है। करीब चालीस साल पहले की बात है। मेरे पड़ोस में एक परिवार रहता था। उस परिवार में एक बेटा और दो बेटियाँ… Continue reading सच्ची घटना (कहानी) दोषी कौन
परछाईं (कविता)
जबसे हमने होश सम्भाला, तब से मैं उसे देख रही हूँ कभी देखकर दुखी हो जाती, कभी देख खुश हो जाती हूँ पता नही वो कौन है? जो साथ-साथ रहती है मेरे कभी तो उससे डर जाती हूँ, कभी सोंच में पड़ जाती हूँ हिम्मत करके पूछ ही बैठी, बताओं कौन हो तुम ? क्या… Continue reading परछाईं (कविता)
ऋषि अष्टावक्र
हम हमेशा से यह सुनते आ रहे हैं कि जिस पेड़ में फल-फूल पूर्ण रूप से आता है वह पेड़ झुका हुआ रहता है अर्थात पूर्णता ही ज्ञान है। यहाँ मैं जिस कथा की चर्चा करने जा रही हूं वह त्रेता युग की घटना है और महर्षि ‘अष्टावक्र’ की कहानी है। ऋषि ‘उद्दालक’ की पुत्री… Continue reading ऋषि अष्टावक्र
पुलवामा के शहीद
14 फरवरी का दिन देश में एक कलंक के रूप में याद किया जायेगा। 1947 में देश के बटवारे के बाद कबाईलियो ने कश्मीर को कुचलने के लिए कश्मीर पर हमला कर दिया था। चारों तरफ से मुसीबत से घीरे कश्मीर के महाराज हरि सिंह ने भारत सरकार से आत्म रक्षा की गुहार लगाई और… Continue reading पुलवामा के शहीद
‘हाइकु’
‘हाइकु’ मूल रूप से जापानी कविता की एक विधा है। इसका प्रचलन 16वीं शताब्दी में प्रारम्भ हो गया था। हाइकु का जन्म जापानी संस्कृति की परम्परा और जापानी लोगों के सौंदर्य चेतना में हुआ था। हाइकु में अनेक विचार धाराएँ मिलती है जैसे- बौद्ध-धर्म, चीनी दर्शन और प्राच्य-संस्कृति आदि। यह भी कहा जा सकता है कि हाइकु में इन सभी विचार धाराओं की झाँकी मिल जाती है या हाइकु इन सबका दर्पण है।
प्रेम और भक्ति
भारत में त्याग की परम्परा पुरातन काल से ही चली आ रही है। हमारे देश में अनेक महापुरुष, नारी, विद्वान आदि त्यागी हुए है जो देश और धर्म के लिए बड़े से बड़ा त्याग कर चुके हैं। त्याग करने में वे थोड़ा भी हिचकिचाते नहीं हैं। त्याग की भावना अत्यंत पवित्र है। त्याग करने वाले लोग ही संसार को प्रकाशमान बनाते हैं। गीता में भगवान कहते हैं कि “त्याग से शांति की प्राप्ति होती है और जहाँ त्याग है वही शांति होती है”।
सफ़र जिंदगी का (कविता)
आज एक झलक देखी मैंने अपनी जिंदगी उससे पूछी ऐ जिंदगी! अभी तक जो मैंने जिया, क्या वही थी मेरी जिंदगी?
प्रहरी
फौज का नाम सुनते ही हम सब का मन फौजी के प्रति आदर और सम्मान की भावना से भर जाता है। देश के रक्षक के रूप में उनके सेवा, त्याग और कर्तव्य निष्ठा के प्रति हम अपनी सेना के लोगों पर गर्व करते हैं और दिल से उनका आदर करते हैं। वे हमारे देश और… Continue reading प्रहरी
ऋतुराज बसंत
भारतवर्ष के प्रसिद्धी के अनेक कारण है जैसे- साहित्य, संस्कृति, संस्कार, भाषा आदि। भारत को ऋतुओं का देश भी कहा जाता है। भारत अनेकता में एकता का उदहारण प्रस्तुत करता है। वैसे तो हमारे देश में छः ऋतुएँ हैं लेकिन मुख्य रूप से चार का महत्व अधिक है- बसंत ऋतु, ग्रीष्म ऋतु, वर्षा ऋतु और… Continue reading ऋतुराज बसंत


