क्र.संशब्दपर्यायवाची शब्द1.यमुनाकालिंदी, तरणि-तनुजा, सूर्यसुता, अर्कजा, जमुना, रवितनया, यमभगिनी कृष्णा, रवितनया, कालगंगा2.युद्धरण, समर, संग्राम, जंग, द्वंद्व, सघर्ष, लड़ाई3.युवतीतरुणी, श्यामा, रमणी, प्रमदा, सुंदरी, स्त्री, नारी, औरत, वनिता, कांता, वामा, त्रिया4.यमकीनाश, जीवितेश, श्राद्धदेव, दण्डधर, सूर्यपुत्र,5.यमराजअंतक, धर्मराज, कृतान्त, जीवितेश, श्राद्धदेव, यम, कीनाश, दंडधर6.यात्रासफर, गमन, तीर्थाटन, प्रयाण, प्रस्थान, भ्रमण, देशाटन7.यकायकअचानक, एकाएक, सहसा, आकस्मिक, अगत्या, तुरंत8.यज्ञयाग, सत्र, हव, मख, हवन, होम,… Continue reading पर्यायवाची शब्द : भाग-3 ‘य’ से ‘त्र’ तक के शब्द (Synonyms)
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शब्दों का वर्गीकरण
1. शब्दों का वर्गीकरण विभिन्न आधारों पर किया गया है- स्रोत या उद्गम के आधार पर शब्दों का वर्गीकरण-स्रोत या उद्गम के आधार पर शब्दों के चार भेद होते हैं। तत्सम, तद्भव, देशज, विदेशज और संकर (क) तत्सम- ‘तत्सम’ का अर्थ होता है उसके समान यानि ज्यों का त्यों। हिन्दी भाषा में शब्दों का मूल… Continue reading शब्दों का वर्गीकरण
‘शब्द’ और ‘पद’
शब्द की परिभाषा- एक या एक से अधिक वर्णों के मेल से बने सार्थक समूह को ‘शब्द’ कहते हैं। या वर्णों का ऐसा सार्थक समूह जिसका कोई अर्थ हो उसे ‘शब्द’ कहते है। शब्द के दो प्रकार होते है- 1. सार्थक शब्द और 2. निरर्थक शब्द सार्थक शब्द- वे शब्द जिनसे किसी अर्थ का बोध… Continue reading ‘शब्द’ और ‘पद’
‘हाइकु’
‘हाइकु’ मूल रूप से जापानी कविता की एक विधा है। इसका प्रचलन 16वीं शताब्दी में प्रारम्भ हो गया था। हाइकु का जन्म जापानी संस्कृति की परम्परा और जापानी लोगों के सौंदर्य चेतना में हुआ था। हाइकु में अनेक विचार धाराएँ मिलती है जैसे- बौद्ध-धर्म, चीनी दर्शन और प्राच्य-संस्कृति आदि। यह भी कहा जा सकता है कि हाइकु में इन सभी विचार धाराओं की झाँकी मिल जाती है या हाइकु इन सबका दर्पण है।
हिन्दी गद्य विधा का वैश्विक स्तर पर महत्व
जन जन की है भाषा हिन्दी, जन समूह की जिज्ञासा हिन्दी । जन जन में रची बसी है, जन मन की अभिलाषा हिन्दी ।। वैश्विकरण का शाब्दिक अर्थ होता है किसी भी स्थानीय या क्षेत्रीय वस्तुओं का विश्व स्तर पर रूपांतर होना, 21वीं शताब्दी को अगर वैश्विकरण की शदी कहें तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी।… Continue reading हिन्दी गद्य विधा का वैश्विक स्तर पर महत्व