प्रहरी

फौज का नाम सुनते ही हम सब का मन फौजी के प्रति आदर और सम्मान की भावना से भर जाता है। देश के रक्षक के रूप में उनके सेवा, त्याग और कर्तव्य निष्ठा के प्रति हम अपनी सेना के लोगों पर गर्व करते हैं और दिल से उनका आदर करते हैं। वे हमारे देश और हम देशवासियों की रक्षा करते हैं। सभी फौजीयों का भी अपना घर और परिवार होता है। फिर भी देश की खातीर वे अपना घर परिवार छोड़कर सीमाओं पर कठिन परिस्थियों में निरन्तर तैनात रहते हैं। उनकी इस कुर्वानी के कारण ही हम अपने घरों में चैन की नींद सोते हैं। हमें ज्ञात है कि हमारे देश के सपूत प्रहरी बनकर सीमाओं पर सजग पहरेदारी करते हैं। हमारी सुखद नींद के लिए वे हमेशा जागते रहते हैं। हम सभी जानते हैं कि सेना के तीन अंग हैं। वायु सेना, जल सेना और थल सेना तीनों सेनाओं की अपनी एक अलग-अलग भूमिका और अलग–अलग कार्य है। इन सैनिकों और उनके परिवारों की जिंदगी बाहर की दुनिया से विल्कुल अलग होती है। ये हर स्थिति में अपने आप को ढाल लेने की क्षमता रखते हैं। एक बात की कमी अवश्य होती है कि ये बाहर की दुनिया से बिलकुल अलग-थलग हो जाते हैं। ये उन्हें तब महसूस होता है जब ये रिटायर होने के बाद पुन: बाहर निकलते हैं। तब वे कैसा महसूस करते हैं?

एक फौजी ऑफिसर के सेवा निवृति के बाद एक पत्रकार उनका साक्षात्कार लेने आया। साक्षात्कार के दौरान पत्रकार ने कई सवाल किए और उन्होंने सभी प्रश्नों का उत्तर बड़ी ही सहजता के साथ दिया। पत्रकार ने कहा कि अब एक आखरी सवाल है। अभी आपको फौज से बाहर आने के बाद कैसा महसूस हो रहा है? तब उन्होंने इस प्रश्न का उत्तर बड़ी ही भावनात्मकता से दिया। कहा कि हम यहाँ अपने आप को शतरंज की विषाद की तरह समझते हैं। जब तक शतरंज का खेल चल रहा था तब तक तो राजा, रानी, हाथी, घोड़ा, ऊँट और सिपाही खेल में अपनी-अपनी भूमिका निभा रहे होते हैं और खेल ख़त्म होने के बाद सभी को अर्थात राजा, रानी, हाथी, घोड़ा, ऊँट और सिपाही सभी को एक ही डब्बे में बंद कर दिया जाता है। उसी प्रकार अब हम सब एक ही डब्बे में बंद हैं। अर्थात खेल खत्म होने के बाद सभी एक साथ हैं। यह दुनिया भी एक रंगमंच है और हम सभी इस रंगमंच पर अपनी अपनी भूमिकाएँ निभा रहे हैं लेकिन जैसे ही खेल समाप्त होता है सभी उस भूमिका से अलग हो जाते हैं। इसके अतिरिक्त भी इन भावनाओं का कुछ अलग अर्थ निकाला जा सकता है और वो अर्थ क्या होगा ये हम आप पर छोड़ते हैं।

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