एक समय की बात है। एक गाँव में एक बरगद के पेड़ पर एक चतुर कौवा रहता था। पेड़ के पास ही एक तालाब में एक कछुआ भी रहता था। कछुआ बहुत ही आलसी था। कुछ दिनों के बाद कछुआ भी पेड़ के कोटर में आकर रहने लगा। कौवा रोज मेहनत करके अपने लिए खाना… Continue reading कौवा और कछुआ (बाल कथा)
सुंदर विचार
‘नदी के द्वीप’-‘अज्ञेय’ (कविता) महत्वपूर्ण तथ्य
*यह कविता अज्ञेय द्वारा 11 दिसंबर, 1949 ई. को इलाहबाद में लिखी गयी। *यह 1965 ई. में आये उनके काव्य संग्रह ‘हरी घास पर क्षण भर’ में संकलित है। यह ‘प्रतीकात्मक’ कविता है। *‘नदी’ परंपरा और संस्कृति का प्रतीक है और ‘द्वीप’ व्यक्तित्व का प्रतीक है। *विशिष्ट व्यक्तित्व होना दुर्भाग्य नहीं सौभाग्य की बात है।… Continue reading ‘नदी के द्वीप’-‘अज्ञेय’ (कविता) महत्वपूर्ण तथ्य
मछली और नदी का प्रेम (बाल कथा)
एक छोटी सी मछली नदी में रहती थी। उसके मन में डर लगा रहता था कि कहीं उसे कोई बड़ी मछली खा न जाए। नदी एक दिन मछली से पूछी, तुम इतना डरती क्यों हो? मछली बोली मैं बहुत छोटी हूँ, इसलिए मैं बहुत डरती हूँ। नदी मछली से बोली, तुम डरो नहीं तेज तैरना… Continue reading मछली और नदी का प्रेम (बाल कथा)
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (संघ प्रार्थना)
“नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे त्वया हिन्दुभूमे सुखं वर्धितोऽहम्।” अर्थ- हे! सदा सुख-स्नेह और प्यार करने वाली मातृभूमि, मैं तुझे सदैव नमस्कार करता हूँ। तूने हमें सुख से लालन-पालन किया है। “महामङ्गले पुण्यभूमे त्वदर्थेपतत्वेष कायो नमस्ते नमस्ते॥” अर्थ- हे पुण्यभूमि! हे मंगलमयी मातृभूमि! तेरी सुरक्षा और सेवाकार्य में मेरा यह शरीर समर्पित हो। मैं तुझे बारंबार… Continue reading राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (संघ प्रार्थना)
वर्णों की बूंदें (कविता)
अक्षर हैं वर्णों की बूँदें, मन की खुशबू सी महके। सार्थक स्वर, मधुर व्यंजन, मिलकर रच दें भावों का संगम। कभी बने ये गीत सुहाने, कभी सजाएँ सपनों के ठिकाने। शब्दों के साथ खिले अक्षर, भावनाओं के दीप मिलें। ‘अ’ से आती अरुण किरण, ‘क’ से खिलता नद में कमल। ‘म’ से बनता मधुर मिठास,… Continue reading वर्णों की बूंदें (कविता)
मुकुटधर पांडेय (कविता)
छत्तीसगढ़ की पावन धरा पर,जन्मे कवि महान।छायावाद के जनक बने वे,दिलाया हिंदी को सम्मान॥ ‘प्रेमपथिक’ लिखकर उन्होंने,कविता को दी राह नई।प्रसाद, पंत, निराला और महादेवी को,दिखलाया उन्होंने चाह सही॥ प्रकृति-प्रेम और संवेदनाएँ,थी जिनकी पहचान।हृदय की गहराइयों से,गाया प्रकृति का गान॥ प्रेम की पगडंडी पर,चला कवि का कोमल मन।छाया में है ढूँढ़ता,सुख, शान्ति और अमन॥… Continue reading मुकुटधर पांडेय (कविता)
रघुवीर सहाय संपूर्ण साहित्यिक जीवन परिचय
कुछ होगा/ कुछ होगा अगर मैं बोलूँगा/ न टूटे न टूटे तिलिस्म सत्ता का/ मेरे अन्दर एक कायर टूटेगा जन्म- 9 दिसंबर 1929 ई. लखनऊ (उ.प्र) निधन- 30 दिसंबर 1990 ई. दिल्ली में हुआ था। पिता- हरदेव सहाय माता- तारादेवी थीं। ये प्रगतिशील काव्यधारा ‘नई कविता’ के प्रतिनिधि कवि थे। कवि के रूप में इन्हें… Continue reading रघुवीर सहाय संपूर्ण साहित्यिक जीवन परिचय
रामवृक्ष बेनीपुरी ‘माटी की मूरतें’ महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तरी
1. ‘माटी की मूरतें’ शब्द-चित्र संग्रह के रचनकार का नाम हैं ? A. हरिशंकर परसाई B. रामवृक्ष बेनीपुरी C. रामविलास शर्मा D. सरदार पूर्ण सिंह 2. ‘माटी की मूरतें’ शब्द-चित्र संग्रह के प्रथम संस्करण में कुल कितने शब्द-चित्र हैं? A. ग्यारह B. बारह C. तेरह D. चौदह 3. ‘माटी की मूरतें’ शब्द-चित्र… Continue reading रामवृक्ष बेनीपुरी ‘माटी की मूरतें’ महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तरी
वर्ण और वर्णमाला से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तरी
1. भाषा की सबसे लघुतम सार्थक इकाई क्या कहलाती है? A. वर्ण B. वाक्य C. शब्द D. अक्षर 2. ध्वनियों के मेल से बने सार्थक वर्ण समुदाय को क्या कहते है? A. अक्षर B. वाक्य C. अर्थ D. शब्द 3. एक ध्वनि या एकाधिक ध्वनियों की इकाई को, जिसका उच्चारण एक झटके में होता है,… Continue reading वर्ण और वर्णमाला से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तरी
चिंतन
अब बस भी कर ऐ जिंदगी, थोड़ी सुस्ता लेने दे। अगला दर्द भी सह लेंगे, पिछला तो भुला लेने दे॥ 2. हर कदम हमने, जीने के लिए समझौता किया। शौक तो ख़ुशी से जीने का था, लेकिन घुट-घुट जिया॥ 3. हम दिल के बुरे नहीं है, हमारी भी कुछ कहानी है। बदली… Continue reading चिंतन