सुंदर विचार

आचार्य महावीर प्रसाद द्वेवेदी जीवन परिचय

जन्म- सन् 1864 ई. में उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले के दौलतपुर गाँव में हुआ था। पिता- पंडित रामसहाय द्विवेदी थे। कहा जाता है कि उन्हें ‘महावीर का इष्ट’ था, इसलिए पिता ने अपने पुत्र का नाम ‘महावीर’ रखा। माता- ज्योतिष्मती थी। निधन- 21 दिसम्बर  1938 ई. को रायबरेली में हुआ। * महावीर प्रसाद द्विवेदी जी… Continue reading आचार्य महावीर प्रसाद द्वेवेदी जीवन परिचय

पंडित रामनरेश त्रिपाठी संपूर्ण परिचय

ये पूर्वछायावादी युग के हिंदी कवि, उपन्यासकार और संपादक थे। रामनरेश त्रिपाठी ने 'मिलन', 'पथिक' और 'स्वप्न' जैसी राष्ट्रीय भावना से ओतप्रोत रचनाएँ लिखी। इन्होंने ग्राम गीतों के संकलन ‘कविता कौमुदी’ का संपादन किया और बाल साहित्य के विकास में भी अपना योगदान दिया। ये हिंदी साहित्य सम्मलेन प्रयाग के प्रचार मंत्री भी रहे थे।… Continue reading पंडित रामनरेश त्रिपाठी संपूर्ण परिचय

‘आधुनिक काल’ के प्रमुख आलोचकों के महत्वपूर्ण कथन – भारतेंदु युग से नई कविता तक

1. “वे पूरबीपन की परवाह न करके अपने बैसवारे की ग्राम्य    कहावतें और शब्द भी बेधड़क रख दिया करते थे।”    शुक्ल जी की इन पंक्तियों का संबंध किससे है?     (प्रतापनारायण मिश्र, UP PGT, 2013) 2. “घूरे क लत्ता बीनै, कनातन क डौल बाँधे’ जैसा शीर्षक किस लेखक ने दिया है?    (प्रतापनारायण… Continue reading ‘आधुनिक काल’ के प्रमुख आलोचकों के महत्वपूर्ण कथन – भारतेंदु युग से नई कविता तक

तन्हाई (कविता)

लगता है अब रातें भी मुझसे रूठने लगी हैं, हर यादें मेरे सीने में ज्वाला सी धधकने लगी हैं। अब तो चाँद भी मेरे छत से कहीं दूर चला जाता है, मेरी दर्द को देख कर, वह भी मुझ से कतराता है। मेरे भींगे हुए नैनों से डर कर, नींदें भी चली गई हैं, बीती… Continue reading तन्हाई (कविता)

मानव हूँ मैं (कविता)

मानव हूँ मैं, इसलिए डरता हूँ, सपनों में भी सत्य से लड़ता हूँ। भीड़ में रहकर भी, अकेला रहता हूँ, अपने ही साये से, अक्सर मैं डरता हूँ। आँधियाँ मिटाना चाहती है मुझे, दीपक की तरह सदा कपकपाता हूँ। झूठ के बाजार में सत्य टिकता कहाँ, फिर भी सच कहने में काँपने लग जाता हूँ।… Continue reading मानव हूँ मैं (कविता)

हिंदी मानक ‘भाषा’ पर आधारित महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तरी (भाग-2)

1. दूसरे किस देश में हिंदी भाषा का प्रयोग लिखने व बोलने के लिए किया जाता है? A. दक्षिण अमेरिका     B. मॉरीशस C. ऑस्ट्रेलिया         D. पाकिस्तान 2. प्रारंभ में ‘पिंगल’ नाम किस बोली के लिए प्रयुक्त होता था? A. खड़ी बोली  B. मारवाड़ी  C. ब्रजभाषा  D. अवधी 3. नीचे लिखे बोलियों में से कौन सी… Continue reading हिंदी मानक ‘भाषा’ पर आधारित महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तरी (भाग-2)

हिंदी मानक ‘भाषा’ पर आधारित महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तरी (भाग-1)

1. ‘खड़ी बोली’ शब्द का सर्वप्रथम उल्लेख किसने किया था? A. इंशाअल्लाह खां  B. लल्लूजी लाल (प्रेमसागर में) C. सदल मिश्र     D. सदासुखलाल 2. मानकीकरण का सर्वप्रथम उल्लेख किसने किया? A. मैक्समूलर B. गिलक्रिस्ट C. ग्रियर्सन D. एथरिंगटन 3. द्वित व्यंजनों का प्रयोग किसमें होता है? A. कौरवी में          B. भोजपुरी में   C.… Continue reading हिंदी मानक ‘भाषा’ पर आधारित महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तरी (भाग-1)

रामचन्द्र शुक्ल की दृष्टि में ‘कामायनी’ का मूल्यांकन

* हिंदी साहित्य के इतिहास’ में जयशंकर प्रसाद जी की चर्चा आधुनिक काल, प्रकरण-4 के अंतर्गत, काव्य खंड, नई धारा, तृतीय उत्थान में किया गया है। तृतीय उत्थान के अंतर्गत शुक्ल जी ने जयशंकर प्रसाद को 11वें नंबर पर जगह दिया है। * किसी एक विशाल भावना को रूप देने की ओर भी अंत में प्रसाद जी… Continue reading रामचन्द्र शुक्ल की दृष्टि में ‘कामायनी’ का मूल्यांकन

रामचंद्र शुक्ल की दृष्टि में जयशंकर प्रसाद

* हिंदी साहित्य के इतिहास’ में जयशंकर प्रसाद जी की चर्चा आधुनिक काल, प्रकरण-4 के अंतर्गत, काव्य खंड, नई धारा, तृतीय उत्थान में किया गया है। तृतीय उत्थान के अंतर्गत शुक्ल जी ने जयशंकर प्रसाद को 11वें नंबर पर जगह दिया है। * ये पहले ब्रजभाषा की कविताएँ लिखा करते थे जिनका संग्रह ‘चित्राधार’ में… Continue reading रामचंद्र शुक्ल की दृष्टि में जयशंकर प्रसाद

छायावाद के प्रतिनिधि कवि सुमित्रानंदन ‘पंत’

जीवन परिचय- सुमित्रानंदन पंत जन्म- 20 मई 1900 ई. कौशाबी ग्राम, अल्मोड़ा, जिला उत्तराखंड (कुर्मांचल प्रदेश) में हुआ। बचपन का नाम- गोसाई दत्त था।   माता का नाम- सुमित्रा था। माता-पुत्र दोनों का नाम मिलाकर इनका नाम पड़ा, ‘सुमित्रानंदन’    निधन- 28 दिसंबर, 1977 ई. इलाहबाद सुमित्रानंदन पंत के उपनाम: 1. छायावाद का विष्णु (कृष्णदेव… Continue reading छायावाद के प्रतिनिधि कवि सुमित्रानंदन ‘पंत’