सुंदर विचार

छायावाद के प्रतिनिधि कवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

जीवन परिचय: सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' जन्म – 21 फरवरी 1899 ई. को बंगाल के महिषादल रियासत (जिला-मिदनापुर) में हुआ था। बसंत पंचमी पर इनका जन्मदिन मनाने की परंपरा 1930 में शुरू हुई। इनके पिता पंडित रामसहाय त्रिपाठी उन्नाव (बैसवाड़ा) के रहने वाले थे और महिषादल में सिपाही की नौकरी करते थे। मूल रूप से वे… Continue reading छायावाद के प्रतिनिधि कवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

छायावाद की प्रतिनिधि कवयित्री महादेवी वर्मा

जीवन परिचय- महादेवी वर्मा जन्म- 24 मार्च 1907 ई. को (होली के दिन) फर्रुखाबाद, उ.प्र. निधन- 11 सितंबर, 1987 ई. इलाहाबाद पिता- श्री गोविंद प्रसाद वर्मा और माता- हेमरानी देवी थी। पति- रुनारायण वर्मा थे। * 11 वर्ष की अवस्था में महादेवी वर्मा जी का विवाह रुनारायण वर्मा के साथ हुआ था। * महादेवी वर्मा… Continue reading छायावाद की प्रतिनिधि कवयित्री महादेवी वर्मा

गज़ल – 2

छिपा के नयनों में आँसू मुस्कुराना पड़ा दिल के दर्द को हँसी में सजाना पड़ा। जो अपना था, वही हमसे दूर हो गया भुलाने के लिए उसे, दिल को समझाना पड़ा। हमसे पूछता रहा, वो वफ़ा के मायने जबाब में मुझे, खुद को मिटाना पड़ा। अँधेरे में चले थे, साथ हम उजाला के लिए मुझे… Continue reading गज़ल – 2

बुझीं त जानी (भोजपुरी बुझौअल) : Riddles

लोक साहित्य की जब भी बात चलती है, तब मन लौट कर लोक जन-जीवन की ओर पहुँच जाता है। जहाँ जाकर लोकगीत, लोक-कला, कथा-कहावतों और लोकोक्तियों का दिव्य दर्शन होता है। मन आनंद विभोर हो जाता है। यह अलिखित लोक साहित्य जन-जीवन के जिह्वा पर होता है और पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ता रहता है।… Continue reading बुझीं त जानी (भोजपुरी बुझौअल) : Riddles

मोनालिसा (कविता)

लियो की तूलिका से निकली एक छवि अद्भूत निराली रहस्य भरी आँखों में उसकी भरी थी अनगिनत कहानी। मुस्कान में थी जादू उसके देख जैसे समय ठहर जाए। पड़े नजर जिसकी भी उसपर दिल में हलचल सी हो जाए। सदियों से वह रुकी रही उसकी आकर्षण भी वही रही करे सवाल हर युग उससे पर… Continue reading मोनालिसा (कविता)

क्षणिकाएँ (सावन)

1. अंबर नाचे झूम-झूम   ओढ़े चुनरियाँ बूंदों की   धरती नाचे घूम-घूम   सावन की हरियाली में 2. सावन में बगिया महके   लगी मेहंदी हथेलियों पर   सावन आया संग सखी   गाएँ गीत हम बगियन में 3. बादल जब गाए प्रेम राग   नाचे मोर बगियन में   सावन में हर पत्ता… Continue reading क्षणिकाएँ (सावन)

क्षणिकाएँ (सावन)

1. अंबर नाचे झूम-झूम   ओढ़े चुनरियाँ बूंदों की   धरती नाचे घूम-घूम   सावन की हरियाली में 2. सावन में बगिया महके   लगी मेहंदी हथेलियों पर   सावन आया संग सखी   गाएँ गीत हम बगियन में 3. बादल जब गाए प्रेम राग   नाचे मोर बगियन में   सावन में हर पत्ता… Continue reading क्षणिकाएँ (सावन)

क्षणिकाएँ (सावन)

1. अंबर नाचे झूम-झूम   ओढ़े चुनरियाँ बूंदों की   धरती नाचे घूम-घूम   सावन की हरियाली में 2. सावन में बगिया महके   लगी मेहंदी हथेलियों पर   सावन आया संग सखी   गाएँ गीत हम बगियन में 3. बादल जब गाए प्रेम राग   नाचे मोर बगियन में   सावन में हर पत्ता… Continue reading क्षणिकाएँ (सावन)

कवि जाने कविता की रीति (कविता)

कवि जाने कविता की रीति शब्दों के मन की भावों की प्रीति छंदों में उसकी गहरी रस धार अंतर्मन एहसास की पार । वर्णों की मेला, अर्थों की क्रीड़ा छुपी हुई हैं हर पंक्ति में वेदना, स्नेह, पीड़ा, और दर्द दिखाती अपनी जीवन लीला । बिंब, प्रतीक का सुंदर सुयोजन कभी व्यंग्य, कभी मधुर प्रयोजन… Continue reading कवि जाने कविता की रीति (कविता)

मिलन का दर्द (कविता)

जब तक मिली न थी उनसे, तबतक बिछड़ने का डर था साथ होने के बाद भी, दिल में गहराई का असर था। उनकी आँखों में छीपे सवाल का मौन मेरा जवाब था दोनों के बीच का सन्नाटा, ही जैसे संवाद था। थी मैं उनकी धडकन मगर मुझे उनका इंतजार था उनकी बाहों में राहत थी… Continue reading मिलन का दर्द (कविता)