* हिंदी साहित्य के इतिहास’ में जयशंकर प्रसाद जी की चर्चा आधुनिक काल, प्रकरण-4 के अंतर्गत, काव्य खंड, नई धारा, तृतीय उत्थान में किया गया है। तृतीय उत्थान के अंतर्गत शुक्ल जी ने जयशंकर प्रसाद को 11वें नंबर पर जगह दिया है। * किसी एक विशाल भावना को रूप देने की ओर भी अंत में प्रसाद जी… Continue reading रामचन्द्र शुक्ल की दृष्टि में ‘कामायनी’ का मूल्यांकन
सुंदर विचार
रामचंद्र शुक्ल की दृष्टि में जयशंकर प्रसाद
* हिंदी साहित्य के इतिहास’ में जयशंकर प्रसाद जी की चर्चा आधुनिक काल, प्रकरण-4 के अंतर्गत, काव्य खंड, नई धारा, तृतीय उत्थान में किया गया है। तृतीय उत्थान के अंतर्गत शुक्ल जी ने जयशंकर प्रसाद को 11वें नंबर पर जगह दिया है। * ये पहले ब्रजभाषा की कविताएँ लिखा करते थे जिनका संग्रह ‘चित्राधार’ में… Continue reading रामचंद्र शुक्ल की दृष्टि में जयशंकर प्रसाद
छायावाद के प्रतिनिधि कवि सुमित्रानंदन ‘पंत’
जीवन परिचय- सुमित्रानंदन पंत जन्म- 20 मई 1900 ई. कौशाबी ग्राम, अल्मोड़ा, जिला उत्तराखंड (कुर्मांचल प्रदेश) में हुआ। बचपन का नाम- गोसाई दत्त था। माता का नाम- सुमित्रा था। माता-पुत्र दोनों का नाम मिलाकर इनका नाम पड़ा, ‘सुमित्रानंदन’ निधन- 28 दिसंबर, 1977 ई. इलाहबाद सुमित्रानंदन पंत के उपनाम: 1. छायावाद का विष्णु (कृष्णदेव… Continue reading छायावाद के प्रतिनिधि कवि सुमित्रानंदन ‘पंत’
छायावाद के प्रतिनिधि कवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’
जीवन परिचय: सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' जन्म – 21 फरवरी 1899 ई. को बंगाल के महिषादल रियासत (जिला-मिदनापुर) में हुआ था। बसंत पंचमी पर इनका जन्मदिन मनाने की परंपरा 1930 में शुरू हुई। इनके पिता पंडित रामसहाय त्रिपाठी उन्नाव (बैसवाड़ा) के रहने वाले थे और महिषादल में सिपाही की नौकरी करते थे। मूल रूप से वे… Continue reading छायावाद के प्रतिनिधि कवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’
छायावाद की प्रतिनिधि कवयित्री महादेवी वर्मा
जीवन परिचय- महादेवी वर्मा जन्म- 24 मार्च 1907 ई. को (होली के दिन) फर्रुखाबाद, उ.प्र. निधन- 11 सितंबर, 1987 ई. इलाहाबाद पिता- श्री गोविंद प्रसाद वर्मा और माता- हेमरानी देवी थी। पति- रुनारायण वर्मा थे। * 11 वर्ष की अवस्था में महादेवी वर्मा जी का विवाह रुनारायण वर्मा के साथ हुआ था। * महादेवी वर्मा… Continue reading छायावाद की प्रतिनिधि कवयित्री महादेवी वर्मा
गज़ल – 2
छिपा के नयनों में आँसू मुस्कुराना पड़ा दिल के दर्द को हँसी में सजाना पड़ा। जो अपना था, वही हमसे दूर हो गया भुलाने के लिए उसे, दिल को समझाना पड़ा। हमसे पूछता रहा, वो वफ़ा के मायने जबाब में मुझे, खुद को मिटाना पड़ा। अँधेरे में चले थे, साथ हम उजाला के लिए मुझे… Continue reading गज़ल – 2
बुझीं त जानी (भोजपुरी बुझौअल) : Riddles
लोक साहित्य की जब भी बात चलती है, तब मन लौट कर लोक जन-जीवन की ओर पहुँच जाता है। जहाँ जाकर लोकगीत, लोक-कला, कथा-कहावतों और लोकोक्तियों का दिव्य दर्शन होता है। मन आनंद विभोर हो जाता है। यह अलिखित लोक साहित्य जन-जीवन के जिह्वा पर होता है और पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ता रहता है।… Continue reading बुझीं त जानी (भोजपुरी बुझौअल) : Riddles
मोनालिसा (कविता)
लियो की तूलिका से निकली एक छवि अद्भूत निराली रहस्य भरी आँखों में उसकी भरी थी अनगिनत कहानी। मुस्कान में थी जादू उसके देख जैसे समय ठहर जाए। पड़े नजर जिसकी भी उसपर दिल में हलचल सी हो जाए। सदियों से वह रुकी रही उसकी आकर्षण भी वही रही करे सवाल हर युग उससे पर… Continue reading मोनालिसा (कविता)
क्षणिकाएँ (सावन)
1. अंबर नाचे झूम-झूम ओढ़े चुनरियाँ बूंदों की धरती नाचे घूम-घूम सावन की हरियाली में 2. सावन में बगिया महके लगी मेहंदी हथेलियों पर सावन आया संग सखी गाएँ गीत हम बगियन में 3. बादल जब गाए प्रेम राग नाचे मोर बगियन में सावन में हर पत्ता… Continue reading क्षणिकाएँ (सावन)
क्षणिकाएँ (सावन)
1. अंबर नाचे झूम-झूम ओढ़े चुनरियाँ बूंदों की धरती नाचे घूम-घूम सावन की हरियाली में 2. सावन में बगिया महके लगी मेहंदी हथेलियों पर सावन आया संग सखी गाएँ गीत हम बगियन में 3. बादल जब गाए प्रेम राग नाचे मोर बगियन में सावन में हर पत्ता… Continue reading क्षणिकाएँ (सावन)