नीलिमा के नीरव आँगन मेंकिसने यह दीप जलाया है?किसके करुण कपोलों सेअश्रु-मोती झर आया है? शायद किसी विरही बादल नेमन की पीड़ा गाई होगी,या चाँदनी की मौन लहर नेअंतर की वीणा छेड़ी होगी। वन की पथराई छाया मेंजब पवन सिसकियाँ भरता है,तब लगता है कोई प्राची सेमूक व्यथा का पत्र धरता है। ओ अज्ञात पथिक!तुम्हारे… Continue reading “नीर भरी संध्या की वेणु”
सुंदर विचार
स्वामी विवेकानंद : माँ की शिक्षा
स्वामी विवेकानंद का बचपन का नाम नरेंद्र था। वे बचपन में बहुत चंचल, जिज्ञासु और साहसी स्वभाव के थे। उनके व्यक्तित्व के निर्माण में उनकी माता भुवनेश्वरी देवी की शिक्षा और संस्कारों का बहुत बड़ा योगदान था। नरेंद्र की माँ उन्हें बचपन से ही सत्य, साहस और निडरता की शिक्षा देती थीं। वे अक्सर उन्हें… Continue reading स्वामी विवेकानंद : माँ की शिक्षा
“शेर की तरह साहसी बनो : विवेकानंद का प्रेरक प्रसंग”
स्वामी विवेकानंद बचपन से ही अत्यंत निडर, साहसी और तर्कशील स्वभाव के थे। उनका बाल्यकाल का नाम नरेंद्रनाथ था। वे किसी भी बात को बिना सोचे-समझे स्वीकार नहीं करते थे, बल्कि हर बात को तर्क और अनुभव की कसौटी पर परखते थे। एक बार की बात है, नरेंद्र अपने मित्रों के साथ एक पेड़ पर… Continue reading “शेर की तरह साहसी बनो : विवेकानंद का प्रेरक प्रसंग”
“एकाग्रता की शक्ति” : स्वामी विवेकानंद
पत्थर भी ध्यान नहीं तोड़ सके स्वामी विवेकानंद को ध्यान और साधना से विशेष लगाव था। वे प्रायः एकांत स्थानों में बैठकर ध्यान किया करते थे। एक बार की बात है, वे नदी के किनारे शांत वातावरण में ध्यानमग्न होकर बैठे थे। उसी समय कुछ शरारती युवक वहाँ से गुज़रे। उन्होंने स्वामी जी को ध्यान… Continue reading “एकाग्रता की शक्ति” : स्वामी विवेकानंद
स्वामी विवेकानंद की बुद्धिमत्ता और मर्यादा
“सच्ची शिक्षा वही है जो मनुष्य के चरित्र, विचार और जीवन को महान बनाती है।” एक बार स्वामी विवेकानंद विदेश यात्रा पर थे। उनके तेजस्वी व्यक्तित्व, प्रभावशाली वाणी और उच्च विचारों से अनेक लोग प्रभावित होते थे। एक दिन एक विदेशी महिला उनसे अत्यंत प्रभावित होकर उनके पास आई और बोली— “मैं आपसे विवाह करना… Continue reading स्वामी विवेकानंद की बुद्धिमत्ता और मर्यादा
नेताजी सुभाषचंद्र बोस : तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा
भारत को अंग्रेजों के शासन से स्वतंत्र कराने के लिए अनेक क्रांतिकारियों ने अपना बलिदान दिया है। उन्हीं क्रांतिकारियों में से एक क्रांतिकारी थे नेताजी सुभाषचंद्र बोस। बालक सुभाष बचपन से ही राष्ट्राभिमानी थे। उन्होंने भारत को स्वतंत्र कराने के लिए देश के युवकों को आवाहन कर नारा दिया था कि, ‘तुम मुझे खून दो,… Continue reading नेताजी सुभाषचंद्र बोस : तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा
स्वामी विवेकानंद : उत्तम सीख का महत्व
एक बार की बात है। स्वामी विवेकानंद खेतरी (राजस्थान) गए हुए थे। वहाँ के राजा ने उनके सम्मान में एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम में मैनाबाई नामक एक प्रसिद्ध नृत्यांगना ने नृत्य प्रस्तुत किया। जब नृत्य आरंभ हुआ, तो स्वामी विवेकानंद उस वातावरण को अपने संन्यासी आदर्शों के अनुकूल नहीं समझ पाए… Continue reading स्वामी विवेकानंद : उत्तम सीख का महत्व
अज्ञेय की कविता ‘साँप’
अज्ञेय की कविता ‘साँप’ : विवेचना ‘साँप’ कविता में कवि साँप को प्रतीक बनाकर नगरीय सभ्यता में रहने वाले मनुष्य के दोगले और कुटिल चरित्र पर तीखा व्यंग्य करते हैं। कवि कहता है कि साँप नगर में तो बस गया है, पर वह सभ्य नहीं बन पाया। इसके माध्यम से कवि यह संकेत देता है… Continue reading अज्ञेय की कविता ‘साँप’
स्वामी विवेकानंद : धैर्य और विश्वास
स्वामी विवेकानंद का जीवन संघर्ष, साधना और आत्मविश्वास की अद्भुत गाथा है। उनका व्यक्तित्व हमें यह सिखाता है कि विपरीत परिस्थितियाँ भी यदि धैर्य और विश्वास से सामना की जाएँ, तो सफलता स्वयं मार्ग खोज लेती है। एक बार की बात है जब स्वामी विवेकानंद अमेरिका में आयोजित विश्व धर्म महासभा में भाग लेने गए।… Continue reading स्वामी विवेकानंद : धैर्य और विश्वास
स्वामी विवेकानंद : आज्ञा माँ शारदा की
एक बार स्वामी विवेकानंद ने माँ शारदे से पूछा, “माँ क्या मैं दुनिया को धर्म का उपदेश देने जा सकता हूँ?” माँ शारदे ने उनकी तरफ देख कर कहा- “बेटा, तुम्हारा कार्य दुनिया के लिए है। जब तक तुम दूसरों के लिए नहीं जिओगे, तुम्हारी साधना अधूरी रहेगी।” इसी प्रेरणा ने उन्हें जीवन भर समाजसेवा… Continue reading स्वामी विवेकानंद : आज्ञा माँ शारदा की