सुंदर विचार

समास और समास के भेद : भाग-3 (कर्मधारय समास)

समानाधिकरण तत्पुरुष समास अथार्त ‘कर्मधारय समास’- कर्मधारय समास में, एक शब्द दूसरे शब्द की विशेषता बताता है, यानी पहले शब्द का अर्थ दूसरे शब्द के गुण या विशेषता को दर्शाता है।  उदाहरण- 'नीलकमल' में 'नीला' रंग कमल की विशेषता को दर्शाता है।  परिभाषा: कर्मधारय समास में, पूर्वपद (पहला पद) विशेषण होता है और उत्तरपद (दूसरा पद)… Continue reading समास और समास के भेद : भाग-3 (कर्मधारय समास)

समास और समास के भेद : भाग-2 (तत्पुरुष समास)

2. तत्पुरुष समास- जिससमास का पूर्व पद गौण और उत्तर पद प्रधान हो उसे ‘तत्पुरुष समास’ कहते हैं। पं. कामता प्रसाद गुरु के अनुसार- “इस समास में पहला शब्द बहुधा संज्ञा अथवा विशेषण होता है। इसके विग्रह में इस शब्द के साथ कर्ता और संबोधन कारकों को छोड़ शेष सभी कारकों की विभक्तियाँ लगती है।”… Continue reading समास और समास के भेद : भाग-2 (तत्पुरुष समास)

समास और समास के भेद : भाग-1 (अव्ययीभाव समास)

‘समास’ शब्द की उत्पति ‘सम्’ (उपसर्ग) + ‘आस’ (प्रत्यय) के मिलने से हुआ है। ‘सम’ का अर्थ होता है ‘पूर्णरूप’ से और ‘आस’ का अर्थ है ‘नजदीक आना’ अथार्त दो या दो से अधिक पदों का पूर्ण रूप से मिलना या नजदीक आना ‘समास’ कहलाता है। इसका शाब्दिक अर्थ ‘संक्षेपण’ होता है। परिभाषा- दो या… Continue reading समास और समास के भेद : भाग-1 (अव्ययीभाव समास)

उपसर्ग और प्रत्यय से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य

1. प्रायः जिस प्रकार का शब्द होता है, उसी प्रकार का उपसर्ग उस शब्द के साथ लगाया जाता है; अथार्त तत्सम शब्द के साथ तत्सम उपसर्ग, तद्भव शब्द के साथ तद्भव उपसर्ग तथा विदेशी शब्द के साथ विदेशी उपसर्ग। जैसे- ‘सु’ तत्सम उपसर्ग है, यहा तत्सम शब्द ‘पुत्र’ के साथ लगकर ‘सुपुत्र’ शब्द बनता है… Continue reading उपसर्ग और प्रत्यय से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य

प्रत्यय : भाग-5

(तद्धित प्रत्यय) 4. अपत्यवाचक/ संतानवाचक/ संतानसूचक प्रत्यय- जिन प्रत्ययों के योग से वंश, कुल, संतान का बोध कराने वाले शब्दों का निर्माण होता है, उसे ‘अपत्यवाचक प्रत्यय’ कहते हैं। इन प्रत्ययों में भी शब्दों के प्रथम वर्ण में लगे हुए स्वर में इक प्रत्यय की तरह परिवर्तन हो जाता है। जैसे- 1. अ का आ… Continue reading प्रत्यय : भाग-5

प्रत्यय (Suffix) भाग-4

3. गुणवाचक तद्धित प्रत्यय- जिन प्रत्ययों के योग से गुणवाचक शब्दों का निर्माण होता है, उसे गुणवाचक तद्धित प्रत्यय कहते हैं। जैसे- आ, ई, आना, आलु/आलू, इक, इत, इन, ‘ईन/ईण’,ईय, ईला, दार, मान, पूर्वक, शाली, वाँ, श:, वत्।   1. ‘आ’मूलशब्दप्रत्ययतद्धितांत प्यारआप्यारा प्यासआप्यासा ठंडआठंडा खारआखारा रुखआरूखासूखआसूखा भूखआभूखा    2. ‘ई’मूल शब्दप्रत्ययतद्धितांत सरकारईसरकारी मारवाड़ईमारवाड़ी गुलाबईगुलाबीजंगलईजंगली दोस्तईदोस्ती बैंगनईबैंगनी बैसाखईबैसाखी विदेशईविदेशी क्रोधईक्रोधी रोगईरोगी भोगईभोगी    3. ‘आना’मूल शब्दप्रत्ययतद्धितांत राजपूतआनाराजपूताना चक्करआनाचकराना सिरहआनासिरहाना तिलंगाआनातिलंगाना नज़रआनानजराना    4.‘आलु/आलूमूल शब्दप्रत्ययतद्धितांत कृपाआलुकृपालु   संशयआलुसंशयालु लज्जाआलुलज्जालु श्रद्धाआलु  श्रद्धालु   ईर्ष्याआलुईर्ष्यालु दयाआलुदयालु ह्रदयआलुहृदयालु खर्चाआलूखर्चालू डरआलूडरालू भड़क आलू भड़कालू घनराआलूघनरालू हँसआलूहँसालू 5. ‘इक’ ‘इक’ प्रत्यय लगने से… Continue reading प्रत्यय (Suffix) भाग-4

प्रत्यय (Suffix) भाग-3

क्रिया को छोड़कर संज्ञा, सर्वनाम और विशेषण के अंत में लगनेवाले प्रत्यय को ‘तद्धित प्रत्यय’ कहा जाता है। और उनके मेल से बनने वाले को ‘तद्धितांत शब्द’ कहते है। जैसे- मानव + ता = मानवता अच्छा + आई = अच्छाई अपना + पन = अपनापन जादू  + गर = जादूगर विशेष- ‘कृत’ प्रत्यय धातुओं के… Continue reading प्रत्यय (Suffix) भाग-3

प्रत्यय (Suffix) भाग-2

2. कर्मवाचक ‘प्रत्यय’- जिन प्रत्ययों से कर्मवाचक शब्द बनता है, उसे ‘कर्मवाचक कृत’ प्रत्यय कहते हैं। ‘कर्मवाचक कृत’ के कुछ महत्वपूर्ण प्रत्यय निम्नलिखित हैं-­ औना/औनी, ना, नी 1. औना/औनीधातुप्रत्यय कृदंत  खेल (ना)    औनाखिलौना घिनऔनाघिनौना गा (गै)औनागाना पहरऔनीपहरौनी बिछऔनाबिछौना मीचऔनामिचौना ओढ़औना/औनीऔढ़ना    2. ‘ना’धातुप्रत्ययकृदंत ओढ़नाओढ़ना कसनाकसना कूटनाकूटना खानाखाना घोटनाघोटना चाटनाचाटना छाननाछानना दानादाना पढ़नापढ़ना पाहुँनापाहुँना बाँधनाबाँधना बेलनाबेलना बोलनाबोलना    3. ‘नी’धातुप्रत्ययकृदंत ओढ़नी ओढ़नी चाटनीचटनी       चलनीचलनी पढ़नीपढ़नी करनीकरनी भरनीभरनी सुननीसुननी सूँघनीसूँघनी कह   नीकहनी कहानीकहानी विशेष नोट- ‘कर्मवाचक’ प्रत्ययों से केवल संज्ञाएँ बनती है। 3. करणवाचक कृत प्रत्यय- जिन कृत प्रत्ययों से… Continue reading प्रत्यय (Suffix) भाग-2

प्रत्यय (Suffix) भाग-1

परिभाषा- शब्दों के बाद जो अक्षर या अक्षरसमूह लगाया जाता है उसे ‘प्रत्यय’ कहते हैं। प्रत्यय दो शब्दों से बना है- प्रति + अय। प्रति का अर्थ ‘साथ में पर बाद में’ और ‘अय’ का अर्थ चलनेवाला होता है। अतएव, ‘प्रत्यय’ का अर्थ है ‘शब्दों के साथ’, पर बाद में चलनेवाला या लगनेवाला। ‘प्रत्यय’ उपसर्गों… Continue reading प्रत्यय (Suffix) भाग-1

हिंदी व्याकरण – ‘उपसर्ग’ और ‘प्रत्यय’ (Prefix & Suffix) भाग-3

तद्भव/हिंदी उपसर्ग- तद्भव उपसर्ग मूलतः संस्कृत के (तत्सम) उपसर्गों से ही विकसित हुआ है। इसे ही हिंदी उपसर्ग कहते हैं। हिंदी में तद्भव उपसर्गों की संख्या 10 है- अ, अध, उन, औ, दु, अन, बिन, भर, कु और सु। 1. अ (उपसर्ग) अर्थ- निषेध, अभाव शब्द- अनपढ़, अनजान, अनहोनी, अनबोल, अछूत, अथाह, अनबन, अचेत, अनमोल,… Continue reading हिंदी व्याकरण – ‘उपसर्ग’ और ‘प्रत्यय’ (Prefix & Suffix) भाग-3