पुलवामा के शहीद

14 फरवरी का दिन देश में एक कलंक के रूप में याद किया जायेगा। 1947 में देश के बटवारे के बाद कबाईलियो ने कश्मीर को कुचलने के लिए कश्मीर पर हमला कर दिया था। चारों तरफ से मुसीबत से घीरे कश्मीर के महाराज हरि सिंह ने भारत सरकार से आत्म रक्षा की गुहार लगाई और… Continue reading पुलवामा के शहीद

‘हाइकु’

‘हाइकु’ मूल रूप से जापानी कविता की एक विधा है। इसका प्रचलन 16वीं शताब्दी में प्रारम्भ हो गया था। हाइकु का जन्म जापानी संस्कृति की परम्परा और जापानी लोगों के सौंदर्य चेतना में हुआ था। हाइकु में अनेक विचार धाराएँ मिलती है जैसे- बौद्ध-धर्म, चीनी दर्शन और प्राच्य-संस्कृति आदि। यह भी कहा जा सकता है कि हाइकु में इन सभी विचार धाराओं की झाँकी मिल जाती है या हाइकु इन सबका दर्पण है।

प्रहरी

फौज का नाम सुनते ही हम सब का मन फौजी के प्रति आदर और सम्मान की भावना से भर जाता है। देश के रक्षक के रूप में उनके सेवा, त्याग और कर्तव्य निष्ठा के प्रति हम अपनी सेना के लोगों पर गर्व करते हैं और दिल से उनका आदर करते हैं। वे हमारे देश और… Continue reading प्रहरी

ऋतुराज बसंत

भारतवर्ष के प्रसिद्धी के अनेक कारण है जैसे- साहित्य, संस्कृति, संस्कार, भाषा आदि। भारत को ऋतुओं का देश भी कहा जाता है। भारत अनेकता में एकता का उदहारण प्रस्तुत करता है। वैसे तो हमारे देश में छः ऋतुएँ हैं लेकिन मुख्य रूप से चार का महत्व अधिक है- बसंत ऋतु, ग्रीष्म ऋतु, वर्षा ऋतु और… Continue reading ऋतुराज बसंत

गुरु का महत्व

गुरुर्ब्रह्मा  गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वर: ।गरु:साक्षात् परब्रह्म, तस्मै श्रीगुरुवे नमः।। पौराणिक समय से ही हमारे देश में गुरु का विशेष महत्व है। गुरु ही शिष्य के जीवन में ज्ञान रूपी प्रकाश फैलता है। कबीर दास जी भी कहते है कि गुरु कुम्भार शिष कुंभ है, गढ़ी-गढ़ी काढ़ै खोट।अंतर  हाथ  सहारि  दै, बाहर   बाहै   चोट।।    … Continue reading गुरु का महत्व

शिक्षण और प्रशिक्षण

सचिव वैद्य गुरु तीन जौं प्रिय बोलहिं भय आस । राज   धर्म    तन   तीनि   कर  होइ बेगिहीं नास ।। गोस्वामी तुलसी दास जी ने कहा है कि मंत्री, वैद्य और गुरु यदि भय बस सच न बोलकर (हित की बात न कहकर) प्रिय बोलें अर्थात सामने वाले को खुश रखने के लिए बोलें तो… Continue reading शिक्षण और प्रशिक्षण

किन्नर (कविता)

“वाह रे ! कुदरत तेरी कैसी खेल निराली, एक का घर भर दिया, दुसरे की झोली भी खाली । जिसको दिया आधा, दिल का वही है राजा, फिर भी घर-घर घूमकर, बजाता है बाजा । वे अपनी पहचान को भी हैं तरसते, फिर भी, उनकी दुआओं से हैं दुसरों के घर सजते ।।” “ना तो… Continue reading किन्नर (कविता)

हिन्दी गद्य विधा का वैश्विक स्तर पर महत्व

जन जन की है भाषा हिन्दी, जन समूह की जिज्ञासा हिन्दी । जन जन में रची बसी है, जन मन की  अभिलाषा  हिन्दी ।। वैश्विकरण का शाब्दिक अर्थ होता है किसी भी स्थानीय या क्षेत्रीय वस्तुओं का विश्व स्तर पर रूपांतर होना, 21वीं शताब्दी को अगर वैश्विकरण की शदी कहें तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी।… Continue reading हिन्दी गद्य विधा का वैश्विक स्तर पर महत्व

हिन्दी साहित्य के मुस्लिम लेखक : गंगा जमुनी तहज़ीब (रसखान)

हिन्दी साहित्य के इतिहास में आदिकाल से लेकर आधुनिक काल तक अनेकों मुसलमान लेखकों ने हिन्दी साहित्य को समृद्ध करने में विशेष भूमिका निभाई है। उसीप्रकार कई हिन्दू रचनाकारों ने भी उर्दू साहित्य को समृद्ध करने का काम किया है। हिन्दी साहित्य के रीतिकाल में रीतिमुक्त धारा के कविओं में रसखान का महत्वपूर्ण स्थान है।… Continue reading हिन्दी साहित्य के मुस्लिम लेखक : गंगा जमुनी तहज़ीब (रसखान)

पूर्वोत्तर भारत में हिन्दी

भाषा का कोई रंग, रूप, जाति या आकार नहीं होता है। इसे तो सिर्फ सुनकर महसूस किया जाता है। हमारी  हिन्दी का तो कुछ कहना ही नहीं इसकी शब्दों में इतनी मिठास है कि विश्व का हर व्यक्ति इसे सीखना और बोलना चाहता है। कुछ लोग तो हिन्दी सीखकर अपने आपको गौरवान्वित महसूस करते हैं।… Continue reading पूर्वोत्तर भारत में हिन्दी