बेटा बचाओ, देश बचाओ

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी जी ने राजस्थान के झुंझुनू से एक योजना को पुरे देश में लागू किए थे । जिसका नाम था ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’। यह योजना आज पूरे भारत में एक आन्दोलन की तरह फैल गया है। सभी लोग, मीडिया, सिनेमा, टीवी चैनल वाले सभी पूरे जोश के… Continue reading बेटा बचाओ, देश बचाओ

एक निवेदन पत्र किन्नर गुरुओं के नाम

सेवा में, किन्नर गुरु                                                                                                 12.01.19 महोदय/महोदया, मेरा शत्-शत् प्रणाम माता-पिता भारतीय संस्कृति के दो ध्रुव है। जब ये दोनों मिलकर तीसरे की कामना करते है तो उनके दिल में बहुत सारे अरमान होते हैं। इसके साथ ही वे उसकी… Continue reading एक निवेदन पत्र किन्नर गुरुओं के नाम

किन्नरों का इतिहास वर्तमान और भविष्य

“वाह  रे ! कुदरत  तेरी  कैसी  खेल  निराली, एक का घर भर दिया, दुसरे की झोली भी खाली । जिसको  दिया  आधा, दिल का  है वह राजा, फिर भी  घर-घर  घूमकर, बजाता  है  बाजा । वे  अपनी  पहचान  को   भी  हैं     तरसते, फिर भी, उनकी दुआओं से हैं दुसरों के घर सजते ।”   ये… Continue reading किन्नरों का इतिहास वर्तमान और भविष्य

मन्नू भण्डारी की कहानियों में यथार्थ बोध

हिन्दी साहित्य की विधाएँ: हिन्दी साहित्य की मुख्य तीन विधाएँ हैं – काव्य         2. गद्द      3. चम्पू काव्य। गद्द साहित्य के अंतर्गत – कहानी, जीवनी, आत्मकथा, नाटक, एकांकी, निबंध आदि अनेक विधाएँ हैं। गद्द की सभी विधाओं में कहानी की विधा सबसे पुरानी मानी जाती है। कहानी का आरम्भ कब और कहाँ हुआ यह बताना कठिन है। पुराणों… Continue reading मन्नू भण्डारी की कहानियों में यथार्थ बोध

महामानव पंडित दीनदयाल उपाध्याय

भारत में आजादी के पहले और आजादी के बाद कई महान सपूत हुए जिन्होंने अपने बूते पर समाज को बदलने की कोशिश की, उन्ही सपूतों में से एक थे भारतीय जनता पार्टी के मार्ग दर्शक और नैतिक प्रेरणा के स्रोत पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी। पंडित जी ने अपने चिंतन और कार्य से केवल भारत माता… Continue reading महामानव पंडित दीनदयाल उपाध्याय

मकर संक्रांति

चला भास्कर मकर से मिलने धनु राशि को छोड़।नई वर्ष की नई उमंगे जन-जीवन में जोड़ ।। तील-तील बड़ा होने लगा दिन और रातें तील-तील छोटी।सर्दी की अब हुई बिदाई गर्मी की स्वागत होती ।। गंगा स्नान और दान-पुण्य कर दही चिवड़ा खाते।आसमान में पतंगों का मेला लोग लगाते ।। भारत त्यौहारों का देश है।… Continue reading मकर संक्रांति

रामकृष्ण परमहंस

भारत एक विशाल देश है। इस देश में अनेक भाषा भाषी, संस्कृति तथा जाति के लोग रहते हैं। यहाँ प्रकृति ने प्राणियों के लिए अनेक सुख सुविधाएँ प्रदान की है। हमारे देश की धरती पर अनेक संतों, कवियों, लेखकों, वज्ञानिकों, सैनिकों तथा ऋषि मुनिओं का जन्म हुआ है। कोलकाता शहर में एक संत रामकृष्ण का… Continue reading रामकृष्ण परमहंस

नववर्ष की शुभकामनाएं

नया वर्ष आएगा नई रोशनी लेकर सभी प्राणियों के लिए कई खुशियाँ लेकर । अपने विश्वास की लौ हमेशा जलाये रखना वही रौशनी देगा अंधेरे में दीया बनकर ।। नया वर्ष आजकल राष्ट्रीय पर्व की तरह पूरे विश्व में मनाया जाता है। भारत एक विशाल देश है। हमारे देश में विभिन्न संस्कृतियों, समप्रदायों तथा विभिन्न… Continue reading नववर्ष की शुभकामनाएं

पिता की परिवार में भूमिका

हम सभी हमारे जीवन में हर चीज की परिभाषा लिखते और पढ़ते हैं । ये परिभाषाएँ तथ्य पर आधारित होती हैं लेकिन हमारा भारतवर्ष ही एक ऐसा देश है, जहाँ कुछ परिभाषाएँ भावनाओं से बनती हैं जैसे- प्यार, लगाव और भावनाओं की परिभाषाएँ आदि । आज ऐसी ही परिभाषा हम लिखने की कोशिश करने जा… Continue reading पिता की परिवार में भूमिका

परिवार का बदलता स्वरूप

साधारण बोल - चाल की भाषा में संस्कार का अर्थ होता है शुद्धिकरण। संस्कार के दो रूप है -आतंरिक रूप और बाहरी रूप। बाहरी रूप का नाम रीति-रिवाज है जो हमारी आतंरिक रूप की रक्षा करता है। आतंरिक रूप हमारी जीवन चर्या में शामिल है जो कुछ नियमों पर आधारित होता  है। इन नियमों के पालन में अनुशासन का बहुत महत्व होता है।  अनुशासन और सामाजिक नियमों को सम्मान देकर ही मनुष्य आत्मिक उन्नति प्राप्त कर सकता है।