हिंदी के लोक महाकवि घाघ

लगभग सन् 1700 ई० के आस-पास हिंदी कविता में एक नया मोड़ आया। जिसे रीतिकल के नाम से जाना जाता है। इस काल के कवि, राजाओं और रईसों के आश्रय में रहते थे। मध्यकाल के अन्य कवियों की ही तरह उत्तर भारत में एक प्रसिद्ध कवि थे, जिन्हें महाकवि ‘घाघ’ के नाम से जाना जाता… Continue reading हिंदी के लोक महाकवि घाघ

गौरइया का संघर्ष (बाल साहित्य)

बचपन में हम संयुक्त परिवार में रहा करते थे। उस समय हम दादी-नानी से रोज कहानियाँ सुना करते थे। आज का समय एकल परिवार का हो गया है। अब ज्यादातर परिवार के साथ दादा–दादी या नाना-नानी नहीं रहते हैं और न ही उनकी कहानियाँ होती है। आज मुझे एक कहानी याद आई जिसे हमारी दादी… Continue reading गौरइया का संघर्ष (बाल साहित्य)

बिहारी सतसई

हिन्दी साहित्य के महाकवि बिहारी रीतिकालीन, रीतिसिद्ध काव्यधारा के श्रेष्ठ कवि थे। बिहारीलाल का जन्म सन् 1603 ई० के लगभग ग्वालियर के पास बसवा गोविंदपुर गाँव में हुआ था। इनके पिता का नाम केशवराय था। वे संस्कृत के विद्वान थे। बिहारीलाल माथुर चौबे थे। इस दोहे में उनके बाल्यकाल और यौवनकाल का प्रमाण मिलता है-… Continue reading बिहारी सतसई

‘हनी गर्ल’ बनी यूनिसेफ गर्ल

अपने इरादों का इम्तिहान है बाकी, जिंदगी की असली उड़ान है बाकी। अभी तो मापी है मुट्ठी भर जमीं हमने, आगे तो पूरा असमान है बाकी।। “आँखों में सपने और कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो मंजिल चाहे कितनी भी दूर क्यों न हो उस पर सफलता पाया जा सकता है”। दुष्यंत की इस… Continue reading ‘हनी गर्ल’ बनी यूनिसेफ गर्ल

समकालीन हिन्दी कविता में पर्यावरण विमर्श

पर्यावरण में उपस्थित प्राणवायु गैस (ऑक्सीजन) मानव के लिए प्राणदायक है। हम सब श्वास द्वारा ऑक्सीजन लेते है और कार्बन-डाई-ऑक्साइड गैस बाहर निकालते हैं। इसी गैस को पेड़-पौधे अपना भोजन बनाने के लिए उपयोग में लाते हैं और हमें ऑक्सीजन लौटा कर हमारी रक्षा करते हैं। प्रकृति की यह बहुत ही सुन्दर व्यवस्था है कि… Continue reading समकालीन हिन्दी कविता में पर्यावरण विमर्श

पेड़ की हत्या (कहानी) (Murder of a Tree)

यह कहानी ‘अशोक’ के एक पेड़ की कहानी है। अशोक के पेड़ को सकारात्मक उर्जा का प्रतीक माना गया है। ‘अशोक’ का अर्थ है, जहाँ ‘शोक’ (दुःख) नहीं हो। घर के पास अशोक का पेड़ होने से सुख, शांति और समृधि बनी रहती है। अशोक का पेड़ घर के पास लगाने से परिवार की महिलाओं… Continue reading पेड़ की हत्या (कहानी) (Murder of a Tree)

छपरा (सारण), बिहार (पौराणिक तीर्थस्थल)

सारण भारत के बिहार प्रान्त में स्थित एक प्रमंडल एवं जिला है। यहाँ का प्रशासनिक मुख्यालय छपरा में है। सारण जिला तीन ओर से गंगा, गंडक एवं घाघरा नदियों से घिरा हुआ त्रिकोणीय भू-क्षेत्र है। सम्पूर्ण जिला समतल एवं उपजाऊ प्रदेश है। कहते हैं कि प्राचीन समय में यहाँ वनों का भरमार था। इन वनों… Continue reading छपरा (सारण), बिहार (पौराणिक तीर्थस्थल)

‘डोरिस लेसिगं’ (घर से नोबल तक)

मिटा दो अपनी हस्ती को, अगर कुछ मर्तबा-चाहो।कि दाना खाक में मिलकर गुल-ए-गुलजार होता है।। ‘डोरिस लेसिगं’ का जन्म पर्सिया (अब ईरान) में हुआ था। उनके माता-पिता दोनों ब्रिटिश थे। पिता पर्सिया के इम्पीरियल बैंक में कलर्क और माँ एक नर्स थी। लेसिंग का बचपन सुख और दुःख दोनों की छाया में बीता था,जिसमें सुख… Continue reading ‘डोरिस लेसिगं’ (घर से नोबल तक)

हिंदी लोक साहित्य : सांस्कृतिक परिदृश्य

लोक साहित्य दो शब्दों के साथ मिलकर बना है ‘लोक’ और ‘साहित्य’ जिसका शाब्दिक अर्थ होता है ‘लोक का साहित्य’। लोक साहित्य मूलतः लोक की मौलिक अभिव्यक्ति है जो लोगों के सम्पूर्ण जीवन का नेतृत्व करती है। लोक साहित्य की परम्परा उतना ही प्राचीन है, जितना की मनुष्य। इसीलिए इसमे लोक जीवन की प्रत्येक अवस्था,… Continue reading हिंदी लोक साहित्य : सांस्कृतिक परिदृश्य

शबरी के राम

शबरी एक भील कुल की कन्या थी। उनका वास्तविक नाम ‘श्रमणा’ था। ‘श्रमणा’ ‘भील समुदाय’ के ‘शबरी’ जाती की थी। शबरी प्रभु ‘राम’ की भक्त थी। परिवार के लोगों को शबरी का इस तरह से पूजा-पाठ करना अच्छा नहीं लगता था। कुछ समय के बाद उनके पिता शबरी का विवाह निश्चित कर दिये। आदिवासियों के… Continue reading शबरी के राम