कवि भूषण

हिन्दी साहित्य में भक्तिकाल के उपरांत कविता में एक नया युग प्रारम्भ हुआ जिसे  रीतिकाल के नाम से जाना जाता है। आचार्य रामचंद्र शुक्ल के अनुसार रीतिकाल का आरम्भ सन् 1700 ई० से सन् 1900 ई० तक माना जाता है। भूषण का जन्म संवत् 1670 में कानपुर जिले के तिकवापुर ग्राम में हुआ था। उनके… Continue reading कवि भूषण

भारत में किसानों की स्थिति

हो जाए अच्छी भी फसल, पर लाभ कृषकों को कहाँ                   खाते,  खवाई,  बीज  ऋण  से  हैं  रंगे रक्खे जहाँ                   आता  महाजन  के  यहाँ  वह  अन्न सारा अंत में                   अधपेट   खाकर   फिर  उन्हें  काँपना  हेमंत   में – मैथिलीशरण गुप्त     मैथिलीशरण गुप्त की ये पंक्तियाँ तत्कालीन किसानों की दयनीय दशा का चरित्र-चित्रण करती… Continue reading भारत में किसानों की स्थिति

भारतीय भाषाएँ : दशा और दिशा

भारत एक प्राचीन देश है। इसकी मुख्य विशेषता यह है कि यह विभिन्ताओं में एकता का देश है। भारत में विभिन्नता का रूप केवल भौगोलिक ही नहीं बल्कि भाषायी तथा सांस्कृतिक भी है। देश और काल के अनुसार भाषा अनेक रूपों में बटी है। यही कारण है कि भारत में अनेक भाषाएँ प्रचलित हैं। हर… Continue reading भारतीय भाषाएँ : दशा और दिशा

तानसेन के गुरु ‘स्वामी हरिदास’

हम सभी जानते हैं कि भारत का महान मुग़ल शासक अकबर था। अकबर स्वयं तो अधिक पढ़ा लिखा नहीं था लेकिन वह बुद्धिजीवियों का बहुत प्रेमी था। कहा जाता है कि अकबर के दरबार में नौ गुणवान दरबारी थे। ये सभी नवरत्न अपने-अपने क्षेत्र में प्रवीण विद्वान थे। इन्हें नवरत्न के नाम से जाना जाता… Continue reading तानसेन के गुरु ‘स्वामी हरिदास’

माँ (कविता)

स्वर्ग लोक से जब आई मैं भू पर, माँ ही एक सहारा थी। माँ की गोद मुझे अब तो, सारे ब्रह्माण्ड से प्यारा थी।। ममता की एक झलक पाकर, मैं बहुत खुश हो जाती थी। उसका दूध (अमृत) पीकर हमें, नया जीवन मील जाती थी।। हम चाहे कितना भी दुःख दें, वो मेरे सुख में… Continue reading माँ (कविता)

सच्ची घटना (कहानी) दोषी कौन

हमारे जीवन में चाहे जो भी घटनाएं घटती है। हम बिना कुछ सोचे-समझे भगवान को दोषी बना देते है। आज मैं जिस घटना की चर्चा करने जा रही हूं वह आंखों देखी है। करीब चालीस साल पहले की बात है। मेरे पड़ोस में एक परिवार रहता था। उस परिवार में एक बेटा और दो बेटियाँ… Continue reading सच्ची घटना (कहानी) दोषी कौन

ऋषि अष्टावक्र

हम हमेशा से यह सुनते आ रहे हैं कि जिस पेड़ में फल-फूल पूर्ण रूप से आता है वह पेड़ झुका हुआ रहता है अर्थात पूर्णता ही ज्ञान है। यहाँ मैं जिस कथा की चर्चा करने जा रही हूं वह त्रेता युग की घटना है और महर्षि ‘अष्टावक्र’ की कहानी है। ऋषि ‘उद्दालक’ की पुत्री… Continue reading ऋषि अष्टावक्र

पुलवामा के शहीद

14 फरवरी का दिन देश में एक कलंक के रूप में याद किया जायेगा। 1947 में देश के बटवारे के बाद कबाईलियो ने कश्मीर को कुचलने के लिए कश्मीर पर हमला कर दिया था। चारों तरफ से मुसीबत से घीरे कश्मीर के महाराज हरि सिंह ने भारत सरकार से आत्म रक्षा की गुहार लगाई और… Continue reading पुलवामा के शहीद

‘हाइकु’

‘हाइकु’ मूल रूप से जापानी कविता की एक विधा है। इसका प्रचलन 16वीं शताब्दी में प्रारम्भ हो गया था। हाइकु का जन्म जापानी संस्कृति की परम्परा और जापानी लोगों के सौंदर्य चेतना में हुआ था। हाइकु में अनेक विचार धाराएँ मिलती है जैसे- बौद्ध-धर्म, चीनी दर्शन और प्राच्य-संस्कृति आदि। यह भी कहा जा सकता है कि हाइकु में इन सभी विचार धाराओं की झाँकी मिल जाती है या हाइकु इन सबका दर्पण है।

प्रहरी

फौज का नाम सुनते ही हम सब का मन फौजी के प्रति आदर और सम्मान की भावना से भर जाता है। देश के रक्षक के रूप में उनके सेवा, त्याग और कर्तव्य निष्ठा के प्रति हम अपनी सेना के लोगों पर गर्व करते हैं और दिल से उनका आदर करते हैं। वे हमारे देश और… Continue reading प्रहरी