मिटा दो अपनी हस्ती को, अगर कुछ मर्तबा-चाहो।कि दाना खाक में मिलकर गुल-ए-गुलजार होता है।। ‘डोरिस लेसिगं’ का जन्म पर्सिया (अब ईरान) में हुआ था। उनके माता-पिता दोनों ब्रिटिश थे। पिता पर्सिया के इम्पीरियल बैंक में कलर्क और माँ एक नर्स थी। लेसिंग का बचपन सुख और दुःख दोनों की छाया में बीता था,जिसमें सुख… Continue reading ‘डोरिस लेसिगं’ (घर से नोबल तक)
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हिंदी लोक साहित्य : सांस्कृतिक परिदृश्य
लोक साहित्य दो शब्दों के साथ मिलकर बना है ‘लोक’ और ‘साहित्य’ जिसका शाब्दिक अर्थ होता है ‘लोक का साहित्य’। लोक साहित्य मूलतः लोक की मौलिक अभिव्यक्ति है जो लोगों के सम्पूर्ण जीवन का नेतृत्व करती है। लोक साहित्य की परम्परा उतना ही प्राचीन है, जितना की मनुष्य। इसीलिए इसमे लोक जीवन की प्रत्येक अवस्था,… Continue reading हिंदी लोक साहित्य : सांस्कृतिक परिदृश्य
शबरी के राम
शबरी एक भील कुल की कन्या थी। उनका वास्तविक नाम ‘श्रमणा’ था। ‘श्रमणा’ ‘भील समुदाय’ के ‘शबरी’ जाती की थी। शबरी प्रभु ‘राम’ की भक्त थी। परिवार के लोगों को शबरी का इस तरह से पूजा-पाठ करना अच्छा नहीं लगता था। कुछ समय के बाद उनके पिता शबरी का विवाह निश्चित कर दिये। आदिवासियों के… Continue reading शबरी के राम
कवि भूषण
हिन्दी साहित्य में भक्तिकाल के उपरांत कविता में एक नया युग प्रारम्भ हुआ जिसे रीतिकाल के नाम से जाना जाता है। आचार्य रामचंद्र शुक्ल के अनुसार रीतिकाल का आरम्भ सन् 1700 ई० से सन् 1900 ई० तक माना जाता है। भूषण का जन्म संवत् 1670 में कानपुर जिले के तिकवापुर ग्राम में हुआ था। उनके… Continue reading कवि भूषण
भारत में किसानों की स्थिति
हो जाए अच्छी भी फसल, पर लाभ कृषकों को कहाँ खाते, खवाई, बीज ऋण से हैं रंगे रक्खे जहाँ आता महाजन के यहाँ वह अन्न सारा अंत में अधपेट खाकर फिर उन्हें काँपना हेमंत में – मैथिलीशरण गुप्त मैथिलीशरण गुप्त की ये पंक्तियाँ तत्कालीन किसानों की दयनीय दशा का चरित्र-चित्रण करती… Continue reading भारत में किसानों की स्थिति
भारतीय भाषाएँ : दशा और दिशा
भारत एक प्राचीन देश है। इसकी मुख्य विशेषता यह है कि यह विभिन्ताओं में एकता का देश है। भारत में विभिन्नता का रूप केवल भौगोलिक ही नहीं बल्कि भाषायी तथा सांस्कृतिक भी है। देश और काल के अनुसार भाषा अनेक रूपों में बटी है। यही कारण है कि भारत में अनेक भाषाएँ प्रचलित हैं। हर… Continue reading भारतीय भाषाएँ : दशा और दिशा
तानसेन के गुरु ‘स्वामी हरिदास’
हम सभी जानते हैं कि भारत का महान मुग़ल शासक अकबर था। अकबर स्वयं तो अधिक पढ़ा लिखा नहीं था लेकिन वह बुद्धिजीवियों का बहुत प्रेमी था। कहा जाता है कि अकबर के दरबार में नौ गुणवान दरबारी थे। ये सभी नवरत्न अपने-अपने क्षेत्र में प्रवीण विद्वान थे। इन्हें नवरत्न के नाम से जाना जाता… Continue reading तानसेन के गुरु ‘स्वामी हरिदास’
माँ (कविता)
स्वर्ग लोक से जब आई मैं भू पर, माँ ही एक सहारा थी। माँ की गोद मुझे अब तो, सारे ब्रह्माण्ड से प्यारा थी।। ममता की एक झलक पाकर, मैं बहुत खुश हो जाती थी। उसका दूध (अमृत) पीकर हमें, नया जीवन मील जाती थी।। हम चाहे कितना भी दुःख दें, वो मेरे सुख में… Continue reading माँ (कविता)
सच्ची घटना (कहानी) दोषी कौन
हमारे जीवन में चाहे जो भी घटनाएं घटती है। हम बिना कुछ सोचे-समझे भगवान को दोषी बना देते है। आज मैं जिस घटना की चर्चा करने जा रही हूं वह आंखों देखी है। करीब चालीस साल पहले की बात है। मेरे पड़ोस में एक परिवार रहता था। उस परिवार में एक बेटा और दो बेटियाँ… Continue reading सच्ची घटना (कहानी) दोषी कौन
ऋषि अष्टावक्र
हम हमेशा से यह सुनते आ रहे हैं कि जिस पेड़ में फल-फूल पूर्ण रूप से आता है वह पेड़ झुका हुआ रहता है अर्थात पूर्णता ही ज्ञान है। यहाँ मैं जिस कथा की चर्चा करने जा रही हूं वह त्रेता युग की घटना है और महर्षि ‘अष्टावक्र’ की कहानी है। ऋषि ‘उद्दालक’ की पुत्री… Continue reading ऋषि अष्टावक्र
