विश्वविजेता चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य उज्जैन के राजा थे। वे अपने ज्ञान, वीरता और उदारशीलता के लिए प्रसिद्ध थे। विक्रमादित्य के काल को ‘कला और साहित्य का स्वर्णयुग’ कहा जाता था। राजा विक्रमादित्य का नाम- 'विक्रम' और 'आदित्य' के समास से बना है जिसका अर्थ होता है- 'सूर्य के समान पराक्रमी'। ‘भविष्य पुराण’ व ‘आईने अकबरी’ के अनुसार विक्रमादित्य… Continue reading विक्रमादित्य के नवरत्न
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पंडिताईन
सब कहते हैं कि जोड़ियाँ भगवान के घर से ही बन कर आती है। पता नहीं यह कहाँ तक सत्य है। कुछ कहना बड़ा ही मुश्किल है। सच में कुछ जोड़ियों को देखकर लगता है कि सच में इस जोड़ी को भगवान ने बहुत फुर्सत में बनाया होगा और कुछ को देखकर ऐसा लगता है… Continue reading पंडिताईन
लुप्त विराशत (भारत के प्राचीन विश्वविद्यालय)
वैदिक काल से ही भारतवर्ष में शिक्षा एवं शिक्षण को बहुत अधिक महत्व दिया गया है। मनुष्य के सर्वांगीन विकास के लिए शिक्षा अति आवश्यक है। भारतवर्ष में गुरु का महत्व माता-पिता से भी बढ़कर माना गया है- इसलिए भारत को विश्व गुरु का दर्जा भी दिया जाता है। जिस काल में विश्व के सभी… Continue reading लुप्त विराशत (भारत के प्राचीन विश्वविद्यालय)
संत कबीर
“माटी का एक नाग बनाके, पुजे लोग लुगाई! जिंदा नाग जब घर में निकले, ले लाठी धमकाई”!! संत कबीर दास जी कवि और समाज-सुधारक थे। कबीर दास जी सिकंदर लोदी के समकालीन थे। ‘कबीर’ का अर्थ अरबी भाषा में ‘महान’ होता है। कबीर भारतीय हिन्दी साहित्य के भक्ति कालीन काव्य परम्परा के महानतम कवियों में… Continue reading संत कबीर
धाय माँ (कहानी)
चितौड़गढ़ को शुरवीरों का शहर कहा जाता है। यह मेवाड़ की राजधानी भी रहा है। चितौड़गढ़ वह वीर भूमि है, जिसने समूचे भारत में शौर्य, देशभक्ति और बलिदान का अनूठा उदहारण प्रस्तुत किया है। चितौड़गढ़ के इतिहास में जहाँ पद्मिनी के जौहर की अमर गाथायें, मीरा बाई की भक्ति और माधुर्य प्रेम की कहानी है,… Continue reading धाय माँ (कहानी)
कवि ‘घाघ’ की कहावतें
भारत कृषि प्रधान देश है। हमारे देश की कृषि का मुख्य आधार ऋतुएँ हैं। अच्छी वर्षा होगी तभी अन्न का उपज भरपूर होगा, अतः इसका ज्ञान होना कृषि के लिए अनिवार्य है। हमारे किसानों को इन सब बातों की जानकारी नहीं थी। उन्हें इस बात का पता नहीं होता था कि वर्षा कब होगी, कितना… Continue reading कवि ‘घाघ’ की कहावतें
हिंदी के लोक महाकवि घाघ
लगभग सन् 1700 ई० के आस-पास हिंदी कविता में एक नया मोड़ आया। जिसे रीतिकल के नाम से जाना जाता है। इस काल के कवि, राजाओं और रईसों के आश्रय में रहते थे। मध्यकाल के अन्य कवियों की ही तरह उत्तर भारत में एक प्रसिद्ध कवि थे, जिन्हें महाकवि ‘घाघ’ के नाम से जाना जाता… Continue reading हिंदी के लोक महाकवि घाघ
गौरइया का संघर्ष (बाल साहित्य)
बचपन में हम संयुक्त परिवार में रहा करते थे। उस समय हम दादी-नानी से रोज कहानियाँ सुना करते थे। आज का समय एकल परिवार का हो गया है। अब ज्यादातर परिवार के साथ दादा–दादी या नाना-नानी नहीं रहते हैं और न ही उनकी कहानियाँ होती है। आज मुझे एक कहानी याद आई जिसे हमारी दादी… Continue reading गौरइया का संघर्ष (बाल साहित्य)
बिहारी सतसई
हिन्दी साहित्य के महाकवि बिहारी रीतिकालीन, रीतिसिद्ध काव्यधारा के श्रेष्ठ कवि थे। बिहारीलाल का जन्म सन् 1603 ई० के लगभग ग्वालियर के पास बसवा गोविंदपुर गाँव में हुआ था। इनके पिता का नाम केशवराय था। वे संस्कृत के विद्वान थे। बिहारीलाल माथुर चौबे थे। इस दोहे में उनके बाल्यकाल और यौवनकाल का प्रमाण मिलता है-… Continue reading बिहारी सतसई
‘हनी गर्ल’ बनी यूनिसेफ गर्ल
अपने इरादों का इम्तिहान है बाकी, जिंदगी की असली उड़ान है बाकी। अभी तो मापी है मुट्ठी भर जमीं हमने, आगे तो पूरा असमान है बाकी।। “आँखों में सपने और कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो मंजिल चाहे कितनी भी दूर क्यों न हो उस पर सफलता पाया जा सकता है”। दुष्यंत की इस… Continue reading ‘हनी गर्ल’ बनी यूनिसेफ गर्ल