बहुव्रीहि समास- बहुव्रीहि दो शब्दों के मेल से बना है। बहु + व्रीहि = बहुव्रीहि जिसमें ‘बहु’ का अर्थ होगा ‘बहुत सारे अर्थों का’ और व्रीहि का अर्थ होगा ‘निषेध करने वाला’ अथार्त बहुत सारे अर्थों का निषेध कर एक अर्थ को रखनेवाला समास को बहुव्रीहि समास कहते है। पं. कामता प्रसाद गुरु के अनुसार-… Continue reading समास और समास के भेद : भाग-7 (बहुव्रीहि समास-Attributive Compound)
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समास और समास के भेद : भाग-6 (द्वंद्व समास)
द्वंद्व समास (Copulative Compound) साधारण बोलचाल की भाषा में ‘द्वंद्व’ समास के दोनों पद प्रधान होते हैं। पं. कामता प्रसाद गुरु के शब्दों में- “जिस समास में सब पद अथवा उनका समाहार प्रधान रहता है, उसे द्वंद्व समास कहते है।” द्वंद्व समास में समस्त पद के दोनों पद प्रधान होते हैं। समस्त पद का विग्रह… Continue reading समास और समास के भेद : भाग-6 (द्वंद्व समास)
समास और समास के भेद : भाग-5 (व्याधिकरण तत्पुरुष समास)
व्यधिकरण तत्पुरुष समास के अन्य भेद जिस तत्पुरुष समास में कारक चिह्न का लोप नहीं होता उसे अलुक् तत्पुरुष समास कहते हैं। अलुक् तत्पुरुष समास में कारक चिह्न किसी न किसी रूप में विद्यमान रहता है। अलुक् शब्द अ + लुक् के योग से बना है, जिसका शाब्दिक अर्थ ‘न छिपना’ होता है। दरअसल, तत्पुरुष… Continue reading समास और समास के भेद : भाग-5 (व्याधिकरण तत्पुरुष समास)
समास और समास के भेद : भाग-4 (द्विगु समास) (Numeral Compound)
परिभाषा- वह समास जिसका पहला पद यानी पूर्व पद कोई संख्यावाची शब्द तथा उत्तर पद संज्ञा शब्द हो तथा सम्पूर्ण सामासिक पद का कोई अन्य अर्थ अभिव्यक्त नहीं हो उसे द्विगु समास कहते है। जैसे- चौराहा = चार राहों का समाहार (चौराहा का कोई अन्य अर्थ नहीं निकल रहा है। अतः द्विगु समास है।) पं.… Continue reading समास और समास के भेद : भाग-4 (द्विगु समास) (Numeral Compound)
समास और समास के भेद : भाग-3 (कर्मधारय समास)
समानाधिकरण तत्पुरुष समास अथार्त ‘कर्मधारय समास’- कर्मधारय समास में, एक शब्द दूसरे शब्द की विशेषता बताता है, यानी पहले शब्द का अर्थ दूसरे शब्द के गुण या विशेषता को दर्शाता है। उदाहरण- 'नीलकमल' में 'नीला' रंग कमल की विशेषता को दर्शाता है। परिभाषा: कर्मधारय समास में, पूर्वपद (पहला पद) विशेषण होता है और उत्तरपद (दूसरा पद)… Continue reading समास और समास के भेद : भाग-3 (कर्मधारय समास)
समास और समास के भेद : भाग-2 (तत्पुरुष समास)
2. तत्पुरुष समास- जिससमास का पूर्व पद गौण और उत्तर पद प्रधान हो उसे ‘तत्पुरुष समास’ कहते हैं। पं. कामता प्रसाद गुरु के अनुसार- “इस समास में पहला शब्द बहुधा संज्ञा अथवा विशेषण होता है। इसके विग्रह में इस शब्द के साथ कर्ता और संबोधन कारकों को छोड़ शेष सभी कारकों की विभक्तियाँ लगती है।”… Continue reading समास और समास के भेद : भाग-2 (तत्पुरुष समास)
समास और समास के भेद : भाग-1 (अव्ययीभाव समास)
‘समास’ शब्द की उत्पति ‘सम्’ (उपसर्ग) + ‘आस’ (प्रत्यय) के मिलने से हुआ है। ‘सम’ का अर्थ होता है ‘पूर्णरूप’ से और ‘आस’ का अर्थ है ‘नजदीक आना’ अथार्त दो या दो से अधिक पदों का पूर्ण रूप से मिलना या नजदीक आना ‘समास’ कहलाता है। इसका शाब्दिक अर्थ ‘संक्षेपण’ होता है। परिभाषा- दो या… Continue reading समास और समास के भेद : भाग-1 (अव्ययीभाव समास)
उपसर्ग और प्रत्यय से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य
1. प्रायः जिस प्रकार का शब्द होता है, उसी प्रकार का उपसर्ग उस शब्द के साथ लगाया जाता है; अथार्त तत्सम शब्द के साथ तत्सम उपसर्ग, तद्भव शब्द के साथ तद्भव उपसर्ग तथा विदेशी शब्द के साथ विदेशी उपसर्ग। जैसे- ‘सु’ तत्सम उपसर्ग है, यहा तत्सम शब्द ‘पुत्र’ के साथ लगकर ‘सुपुत्र’ शब्द बनता है… Continue reading उपसर्ग और प्रत्यय से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य
प्रत्यय : भाग-5
(तद्धित प्रत्यय) 4. अपत्यवाचक/ संतानवाचक/ संतानसूचक प्रत्यय- जिन प्रत्ययों के योग से वंश, कुल, संतान का बोध कराने वाले शब्दों का निर्माण होता है, उसे ‘अपत्यवाचक प्रत्यय’ कहते हैं। इन प्रत्ययों में भी शब्दों के प्रथम वर्ण में लगे हुए स्वर में इक प्रत्यय की तरह परिवर्तन हो जाता है। जैसे- 1. अ का आ… Continue reading प्रत्यय : भाग-5
प्रत्यय (Suffix) भाग-4
3. गुणवाचक तद्धित प्रत्यय- जिन प्रत्ययों के योग से गुणवाचक शब्दों का निर्माण होता है, उसे गुणवाचक तद्धित प्रत्यय कहते हैं। जैसे- आ, ई, आना, आलु/आलू, इक, इत, इन, ‘ईन/ईण’,ईय, ईला, दार, मान, पूर्वक, शाली, वाँ, श:, वत्। 1. ‘आ’मूलशब्दप्रत्ययतद्धितांत प्यारआप्यारा प्यासआप्यासा ठंडआठंडा खारआखारा रुखआरूखासूखआसूखा भूखआभूखा 2. ‘ई’मूल शब्दप्रत्ययतद्धितांत सरकारईसरकारी मारवाड़ईमारवाड़ी गुलाबईगुलाबीजंगलईजंगली दोस्तईदोस्ती बैंगनईबैंगनी बैसाखईबैसाखी विदेशईविदेशी क्रोधईक्रोधी रोगईरोगी भोगईभोगी 3. ‘आना’मूल शब्दप्रत्ययतद्धितांत राजपूतआनाराजपूताना चक्करआनाचकराना सिरहआनासिरहाना तिलंगाआनातिलंगाना नज़रआनानजराना 4.‘आलु/आलूमूल शब्दप्रत्ययतद्धितांत कृपाआलुकृपालु संशयआलुसंशयालु लज्जाआलुलज्जालु श्रद्धाआलु श्रद्धालु ईर्ष्याआलुईर्ष्यालु दयाआलुदयालु ह्रदयआलुहृदयालु खर्चाआलूखर्चालू डरआलूडरालू भड़क आलू भड़कालू घनराआलूघनरालू हँसआलूहँसालू 5. ‘इक’ ‘इक’ प्रत्यय लगने से… Continue reading प्रत्यय (Suffix) भाग-4