Question Paper with AnswerPart-2 (Que 51 to 100) 51. ऋतु वसंत का सुप्रभात था, मंद-मंद था अनिल बह रहा,बलारुण की मृदु किरणें थीं, अगल-बगल स्वर्णाभ शिखर थे,एक-दूसरे से विरहित हो अलग-अलग रह कर ही जिनको सारी रात बितानी होती, निशाकाल के चिर-अभिशापित बेबस उन चकवा-चकई का बंद हुआ क्रंदन…….उपर्युक्त पंक्तियों में चकवा-चकई के बारे में… Continue reading U.G.C. NET/JRF (2022) Hindi
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UGC NET/JRF (2022) HINDI
Question Paper with Answer Part-1 (Que 1 to 50) 1. द्वैतवादी वैष्णव संप्रदाय के प्रवर्तक है – (अ) रामानुजाचार्य (ब) मध्वाचार्य ✔ (स) वल्लभाचार्य (द) रामानंद 2. राम-रावण के युद्ध को रूपायित करने के लिए निराला ने- (अ) संस्कृत की सरल पद मैत्री का प्रयोग किया है। (ब) अधिकतर द्वित्व वर्णों का प्रयोग किया है। (स)… Continue reading UGC NET/JRF (2022) HINDI
रामधारी सिंह ‘दिनकर’ रश्मिरथी संक्षिप्त कथा
‘रश्मिरथी’ में सात सर्ग है। प्रथम सर्ग: कर्ण का शौर्य प्रदर्शन दूसरा सर्ग: परशुराम के आश्रम वर्णन (आश्रमवास) तीसरा सर्ग: कृष्ण का संदेश चौथा सर्ग: कर्ण के महादान की कथा पाँचवाँ सर्ग: माता कुन्ती की विनती छठा सर्ग: शक्ति प्रदर्शन साँतवा सर्ग: कर्ण के बलिदान की कथा प्रथम सर्ग: कर्ण का शौर्य प्रदर्शन प्रथम सर्ग… Continue reading रामधारी सिंह ‘दिनकर’ रश्मिरथी संक्षिप्त कथा
‘रश्मिरथी’ रामधारी सिंह ‘दिनकर’कथावस्तु और भूमिका
‘रश्मिरथी’ एक प्रसिद्ध ‘खण्डकाव्य’ है। यह 1952 ई० में प्रकाशित हुआ था। रश्मिरथी का अर्थ होता है ‘सूर्य का सारथी’ यह खड़ीबोली में लिखा गया है। इसमें कर्ण के चरित्र के सभी पक्षों का चित्रण किया गया है। दिनकर ने कर्ण को महा भारतीय कथानक से ऊपर उठाकर नैतिकता और विश्वसनीयता की नई भूमि पर… Continue reading ‘रश्मिरथी’ रामधारी सिंह ‘दिनकर’कथावस्तु और भूमिका
‘उर्वशी’ खंडकाव्य पर आधारित प्रश्नोत्तरी
1. ‘उर्वशी’ खंडकाव्य का प्रकाशन वर्ष क्या है? A. 1960 ई. B. 1961 ई. C. 1962 ई. D. 1963 ई. 2. निम्न में से ‘उर्वशी’ का काव्य रूप क्या है? A. खंडकाव्य B. महाकाव्य C. चरितकाव्य D. मुक्तककाव्य 3. “पुरुरवा:! पुनरस्तं परेहि, दुरापना बात इवाहमस्मि।” ‘उर्वशी’ का तृतीय अंक किस बीज भाव पर केद्रित है।… Continue reading ‘उर्वशी’ खंडकाव्य पर आधारित प्रश्नोत्तरी
रामधारी सिंह ‘दिनकर’‘उर्वशी’ (तीसरा अंक) संक्षिप्त कथा
ऋग्वेद में आई वैदिक संस्कृति की पहली कथा ‘उर्वशी’ और राजा ‘पुरुरवा’ की कथा है। इसका काल विद्वानों ने 1600 ई.पू. माना है। साहित्य और पुराण में उर्वशी सौंदर्य की प्रतिमूर्ति थी। स्वर्ग की इस अप्सरा की उत्पत्ति नारायण की जंघा से मानी जाती है। पद्मपुराण के अनुसार इनका जन्म कामदेव के ‘उरु’ से हुआ था। श्रीमद्भागवत के अनुसार यह स्वर्ग की सर्वसुंदरी अप्सरा थी। एक बार इंद्र की… Continue reading रामधारी सिंह ‘दिनकर’‘उर्वशी’ (तीसरा अंक) संक्षिप्त कथा
रामधारी सिंह ‘दिनकर’ ‘उर्वशी’ भूमिका
‘उर्वशी’ रामधारी सिंह 'दिनकर' द्वारा रचित एक काव्य नाटक है। यह 1961 ई० में प्रकाशित हुआ था। इस काव्य में दिनकर ने ‘उर्वशी’ और ‘पुरुरवा’ के प्राचीन आख्यान को एक नये अर्थ से जोड़ना चाहा है। इसके लिए 1972 ई० में उन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला था। इस कृति में ‘पुरुरवा’ और ‘उर्वशी’ दोनों अलग-अलग तरह की प्यास लेकर आये हैं। पुरुरवा धरती पुत्र है और उर्वशी देवलोक… Continue reading रामधारी सिंह ‘दिनकर’ ‘उर्वशी’ भूमिका
रामधारी सिंह ‘दिनकर’ समग्र परिचय
रामधारी सिंह ‘दिनकर’ जन्म- 23 सितंबर 1908 ई. सिमरिया, मुंगेर बिहार निधन- 24 अप्रैल 1974 ई. पिता- रविसिंह और माता- मनरूप देवी थी। काव्य गुरु- महावीर प्रसाद द्विवेदी आध्यात्मिक गुरु- ये रामकृष्ण परमहंस को मानते थे। रामधारी सिंह ‘दिनकर’ के उपनाम 1. इन्होंने स्वयं को कहा- ‘दिनकर’ 2. अज्ञेय- ‘समय सूर्य’ 3. मुक्तिबोध- ‘राग व… Continue reading रामधारी सिंह ‘दिनकर’ समग्र परिचय
पुरुष विमर्श
सब कहते हैं कि लडकियाँ परायी होती हैं कोई माने या न माने, लडकियाँ नहीं लड़के पराये होते हैं। कुछ कहते हैं, मर्द को दर्द नहीं होता कौन कहता है? मर्द को दर्द नहीं होता? दर्द होता है, लेकिन किससे कहे वो कौन मानता है उसकी? इसीलिए कहा जाता है कि कानून अंधा… Continue reading पुरुष विमर्श
‘ध्रुवस्वामिनी’ नाटक प्रश्नोत्तरी
1. ‘ध्रुवस्वामिनी’ नाटक का प्रकाशन वर्ष क्या था? A. 1931 ई. B. 1932 ई. C. 1933 ई. D. 1934 ई. 2. ‘ध्रुवस्वामिनी’ नाटक में कितने अंक हैं? A. तीन B. चार C. पाँच D. छह 3. ‘ध्रुवस्वामिनी’ नाटक की पात्र कोमा किसकी पालित पुत्री थी? A. शिखरस्वामी B. शकराज C. खिंगिल D. मिहिरदेव 4. ‘ध्रुवस्वामिनी’… Continue reading ‘ध्रुवस्वामिनी’ नाटक प्रश्नोत्तरी