1. ‘ध्रुवस्वामिनी’ नाटक का प्रकाशन वर्ष क्या था?
A. 1931 ई. B. 1932 ई. C. 1933 ई. D. 1934 ई.
2. ‘ध्रुवस्वामिनी’ नाटक में कितने अंक हैं?
A. तीन B. चार C. पाँच D. छह
3. ‘ध्रुवस्वामिनी’ नाटक की पात्र कोमा किसकी पालित पुत्री थी?
A. शिखरस्वामी B. शकराज C. खिंगिल D. मिहिरदेव
4. ‘ध्रुवस्वामिनी’ नाटक के अनुसार शकराज का गुरु कौन है?
A. शिखरस्वामी B. पुरोहित C. खिंगिल D. मिहिरदेव
5. निम्नलिखित में कौन ‘ध्रुवस्वामिनी’ नाटक का पात्र नहीं है?
A. चंद्रगुप्त B. रामगुप्त C. विजया D. मंदालिनी
6. ‘ध्रुवस्वामिनी’ नाटक का नायक कौन है?
A. चंद्रगुप्त B. रामगुप्त C. शिखरस्वामी D. पुरोहित
7. “पुरुषों ने स्रियों को अपनी पशु-सम्पत्ति समझकर उन पर अत्याचार करने का जो अभ्यास बना लिया है, वह मेरे साथ नहीं चल सकता।” ‘ध्रुवस्वामिनी’ नाटक में यह कथन किसका है?
A. कोमा B. मंदाकिनी C. ध्रुवस्वामिनी D. खड्गधारिणी
8. “जीवन विश्व की सम्पत्ति है। प्रमाद से, क्षणिक आवेश से या दुःख की कठिनाइयों से उसे नष्ट करना ठीक तो नहीं।” ‘ध्रुवस्वामिनी’ नाटक में यह कथन किसका, किससे है?
A. पुरोहित B. चंद्रगुप्त C. मिहिरदेव D. शकराज
(B.चंद्रगुप्त का कथन ध्रुवस्वामिनी से है)
9. “विधान की स्याही का एक बिंदु गिरकर भाग्य-लिपि पर कालिमा चढ़ा देता है।” ‘ध्रुवस्वामिनी’ नाटक में यह किसका कथन है?
A. रामगुप्त B. मिहिरदेव C. ध्रुवस्वामिनी D.चंद्रगुप्त
10. “रोग-जर्जर शरीर पर अलंकारों की सजावट, मलिनता और कलुष की ढ़ेरी पर बाहरी कुंकुम-केसर का लेप गौरव नहीं बढ़ाता।” ‘ध्रुवस्वामिनी’ नाटक में यह कथन किसका है?
A. शिखरस्वामी B. ध्रुवस्वामिनी C. चंद्रगुप्त D. मिहिरदेव
11. “वीरता जब भागती है, तब उसके पैरों से राजनीति के छल- छंद धूल उड़ती है।” ‘ध्रुवस्वामिनी’ नाटक में यह किसका कथन है?
A. मंदाकिनी B. कोमा C. ध्रुवस्वामिनी D. चंद्रगुप्त
12. ‘ध्रुवस्वामिनी’ नाटक में कुल कितने दृश्य हैं?
A. तीन B. चार C. पाँच D. छह
(इस नाटक में तीन अंक तीन दृश्य है। प्रत्येक अंक में 3 दृश्य है)
13. “यह कसक अरे आँसू सह जा, बनकर विनम्र अभिमान मुझे, मेरा अस्तित्त्व बता, रह जा।” ‘ध्रुवस्वामिनी’ नाटक में यह यह गीत किसने गाया है?
A. ध्रुवस्वामिनी B. मंदाकिनी C. कोमा ने D. खड्गधारिणी
(मंदाकिनी ने प्रथम अंक में गाया है)
14. “स्त्रियों के इस बलिदान का भी कोई मूल्य नहीं। कितनी असहाय दशा है। अपने निर्बल और अवलंब खोजने वाले हाथों से यहाँ इनको तिरस्कार, घृणा और दुर्दशा की भिक्षा से उपकृत करता है।” ध्रुवस्वामिनी नाटक में यह किसका कथन है?
A. मंदाकिनी B. कोमा C. ध्रुवस्वामिनी D. मिहिरदेव
15. “प्रत्येक स्थान और समय बोलने योग्य नहीं होता, कभी- कभी मौन रह जाना बुरी बात नहीं है।” ‘ध्रुवस्वामिनी’ नाटक में यह कथन किसका है?
A. ध्रुवस्वामिनी B. खड्गधारिणी C. कोमा D. पुरोहित
16. “जीवन का प्राथमिक प्रसन्न उल्लास मनुष्य के भविष्य में मंगल और सौभाग्य को आमंत्रित करता है।” ‘ध्रुवस्वामिनी’ नाटक में यह कथन किसका है?
A. कोमा B. मंदाकिनी C. ध्रुवस्वामिनी D. खड्गधारिणी
17. “प्रेम जब सामने से आते हुए तीव्र अलोक की तरह आँखों में प्रकाश-पूँज उँडेल देता हैं, तब सामने की सब वस्तुएँ और भी अस्पष्ट हो जाती हैं।” ‘ध्रुवस्वामिनी’ नाटक में यह कथन किसका है?
A. ध्रुवस्वामिनी B. कोमा C. खड्गधारिणी D. मंदाकिनी
18. “अपने तेज की अग्नि में जो सबकुछ भस्म कर सकता हो, उस दृढ़ता का, अवकाश के नक्षत्र कुछ बना-बिगाड़ नहीं सकते।” ‘ध्रुवस्वामिनी’ नाटक में यह कथन किसका है?
A. मिहिरदेव B. पुरोहित C. कोमा D. ध्रुवस्वामिनी
19. “राजनीति ही मनुष्यों के लिए सब कुछ नहीं है। राजनीति के पीछे नीति से भी हाथ न धो बैठो, जिसका विश्वमानव के साथ व्यापक संबंध है।” ‘ध्रुवस्वामिनी’ नाटक में यह कथन किसका है?
A. पुरोहित B. मिहिरदेव C. चंद्रगुप्त D. रामगुप्त
20. “ब्रह्मण केवल धर्म से भयभीत है, अन्य किसी भी शक्ति को वह तुच्छ समझता है?” ‘ध्रुवस्वामिनी’ नाटक में यह कथन किसका है?
- चंद्रगुप्त B. ध्रुवस्वामिनी C. मिहिरदेव D. पुरोहित
(D. पुरोहित का कथन रामगुप्त से है)
21. जयशंकर प्रसाद का कौन सा नाटक विशाख के ‘देवी’ चंद्रगुप्त के आधार पर रचित है?
A. चंद्रगुप्त B. स्कंदगुप्त C. करुणालय D. ध्रुवस्वामिनी
22. “अमात्य तुम बृहस्पति हो चाहे शुक्र, किंतु धूर्त होने से ही क्या मनुष्य भूल नहीं सकता?” ‘ध्रुवस्वामिनी’ नाटक में यह किसका कथन है?
A. ध्रुवस्वामिनी B. कोमा C. खड्गधारिणी D. रामगुप्त
( A. ध्रुवस्वामिनी का कथन प्रथम अंक में)
23. “‘कुमार’ यह मृत्यु और निर्वासन का सुख, तुम अकेले ही लोगे यह नहीं हो सकता।” यह किस नाटक की पंक्ति हैं?
A. चंद्रगुप्त B. स्कंदगुप्त C. ध्रुवस्वामिनी D. कामना
24. “मृत्यु के गह्वर में प्रवेश करने के समय मैं भी तुम्हारी ज्योति बनकर बुझ जाने की कामना रखती हूँ।” ‘ध्रुवस्वामिनी’ नाटक में यह किसका कथन है?
- मंदाकिनी B. कोमा C. ध्रुवस्वामिनी D. मिहिरदेव
‘ध्रुवस्वामिनी’ नाटक के महत्वपूर्ण गीत :
1. “पैरों के नीचे जलधर हों, बिजली से उनका खेल चले।”
(मंदाकिनी प्रथम अंक में गाती है।)
2. “संकीर्ण कगारों के नीचे, शत-शत झरने बेमेल चले।”
(मंदाकिनी प्रथम अंक में गाती है।)
3. “अस्ताचल पर युवती संध्या की खुली अलक घुँघराली है, लो, मानिक मदिरा की धारा अब बहने लगी निराली है।”
(शकराज के दरबार में नर्तकियों द्वारा 2 अंक में गाया गया है।)
4. “यौवन! तेरी चंचल छाया। इसमें बैठे घूँट भर पी लूँ जो रस तू है लाया।”
(दूसरा अंक में कौमा गाती है)
‘ध्रुवस्वामिनी’ नाटक के महत्वपूर्ण कथन:
1. “राज-चक्र सबको पीसता है, पिसने दो, हम निःसहायों और दुर्बलों को पिसने दो।”
(ध्रुवस्वामिनी का कथन प्रथम अंक में)
2. “जगत की अनुपम सुंदरी मुझसे स्नेह नहीं करती और मैं हूँ इस देश का राजाधिराज!”
(रामगुप्त का कथन प्रथम अंक में)
3. “मेघ संकुल आकाश की तरह जिसका भविष्य घिरा हो, उसकी बुद्धि को तो बिजली के सामान चमकना ही चाहिए।”
(शिखारस्वामी का कथन प्रथम अंक में)
4. “निर्लज्ज! मद्यप!! क्लीव!!! ओह, तो मेरा कोई रक्षक नहीं (ठहरकर) नहीं, मैं अपनी रक्षा स्वयं करुँगी। मैं उपहार में देने की वस्तु, शीतलमणि नहीं हूँ। मझमें रक्त की तरल लालिमा है। मेरा ह्रदय उष्ण है और उसमें आत्मसम्मान की ज्योति है। उसकी रक्षा मैं ही करुँगी।”
(ध्रुवस्वामिनी का कथन प्रथम अंक में)
5. “मैं केवल रानी ही नहीं, किंतु स्त्री भी हूँ।”
(ध्रुवस्वामिनी का कथन प्रथम अंक में)
6. “सौभाग्य और दुर्भाग्य मनुष्य की दुर्बलता के नाम हैं। मैं तो पुरुषार्थ को ही सबका नियामक समझता हूँ।”
(शकराज का कथन दूसरा अंक में)
7. “स्त्री का सम्मान नष्ट करके तुम जो भयानक अपराध करोगे, उसका फल क्या अच्छा होगा?”
(मिहिरदेव का कथन 2 अंक में)
8. “स्त्रियों का स्नेह-विश्वास भंग कर देना, कोमल तंतु को तोड़ने से भी सहज है।”
(मिहिरदेव का कथन 2 अंक में)
9. “स्त्री और पुरुष का परस्पर विश्वासपूर्ण अधिकार रक्षा और सहयोग ही तो विवाह कहा जाता है। यदि ऐसा न हो तो धर्म और विवाह खेल है।”
(पुरोहित का कथन 3 अंक में)
10. “विधान की स्याही का एक बिंदु गिरकर भाग्य-लिपि पर कालिमा चढ़ा देता है। मैं आज यह स्वीकार करने से भी संकुचित हो रहा हूँ कि ध्रुवस्वामिनी मेरी है।”
(चंद्रगुप्त का कथन 3 अंक में)
11. “भगवान् ने स्त्रियों को उत्पन्न करके ही अधिकारों से वंचित नहीं किया है। किंतु तुम लोगों की दस्युवृत्ति ने उन्हें लूटा है।”
(मंदाकिनी का कथन 3 अंक में)
12. “स्त्रियों के इस बलिदान का भी कोई मूल्य नहीं, कितनी असहाय दशा है। अपने निर्बल और अवलंबन खोजने वाले हाथों से यह पुरुषों के चरणों को पकड़ती हैं और वह सदैव ही इनको तिरस्कार, घृणा और दुर्दशा की भिक्षा से उपकृत करता है। तब भी यह बावली मानती है।”
(मंदाकिनी का कथन 3 अंक में)
जय हिंद
सभी प्रश्नों के उत्तर:
1. C. 1933 ई.
2. A. तीन
3. D. मिहिरदेव
4. D. मिहिरदेव
5. C. विजया
6. A. चंद्रगुप्त
7. C. ध्रुवस्वामिनी
8. B. चंद्रगुप्त
9. D.चंद्रगुप्त
10. C. चंद्रगुप्त
11. A. मंदाकिनी
12. A. तीन
13. B. मंदाकिनी
14. A. मंदाकिनी
15. B. खड्गधारिणी
16. A. कोमा
17. B. कोमा
18. C. कोमा
19. B. मिहिरदेव
20. D. पुरोहित
21. D. ध्रुवस्वामिनी
22. A. ध्रुवस्वामिनी
23. C. ध्रुवस्वामिनी
24. C. ध्रुवस्वामिनी