1. ‘चंद्रगुप्त’ नाटक का प्रकाशन वर्ष क्या था?
A. 1928 ई. B. 1929 ई. C. 1930 ई. D. 1931 ई.
2. जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित ‘चंद्रगुप्त’ नाटक में अंकों की संख्या कितनी है?
A. तीन B. चार C. पाँच D. छह
3. जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित ‘चंद्रगुप्त’ नाटक में कुल कितने दृश्य हैं?
A. 42 B. 43 C. 44 D. 45
4. जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित ‘चंद्रगुप्त’ नाटक प्रथम अंक में कितने दृश्य हैं?
A. ग्यारह B. बारह C. तेरह D. चौदह
5. जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित ‘चंद्रगुप्त’ नाटक में कुल गीतों की संख्या कितनी है?
A. बारह B. तेरह C. चौदह D. पंद्रह
6. ‘चंद्रगुप्त’ नाटक में अलका द्वारा कितने गीत गाये गये हैं?
A. तीन B. चार C. पाँच D. छह
7. जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित ‘चंद्रगुप्त’ नाटक को किसका परिवर्द्धित रूप माना जाता है?
A. सज्जन B. स्कंदगुप्त C. कल्याणी परिणय D. कल्याणी
8. “स्कंदगुप्त की भाँती चंद्रगुप्त भी भारतीय संस्कृति, भारतीय
नाट्यकला, राष्ट्रीयता एवं काव्य के अनेक गुणों से युक्त है और अत्यंत प्रौढ़ रचना है।” यह कथन किस आलोचक का है?
A. डॉ. नेगेंद्र B. किशोरीलाल गोस्वामी C. डॉ. गुलाबराय D. आचार्य रामचंद्र शुक्ल
9. “अरुण यह मधुमय देश हमारा। जहाँ पहुँच अनजान क्षितिज को मिलता एक सहारा।” इस गीत को कार्नेलिया ने किस अंक में गाया है?
A. प्रथम अंक B. द्वितीय अंक C. तृतीय अंक D. चतुर्थ अंक
(B. द्वितीय अंक के प्रथम दृश्य में)
10. “तुम कनक किरण के अंतराल में लुक छिपकर चलते हो क्यों…अब सांध्य मलय आकुलित दुकुल कलित हो यों छिपते हो क्यों?” चंद्रगुप्त नाटक में उपर्युक्त गीत किसने गाया है?
A. अलका ने B. सुवासिनी ने C. कार्नेलिया ने D. मालविका ने
(B. सुवासिनी ने प्रथम अंक के द्वितीय दृश्य में गाया है)
11. “प्रथम यौवन मदिरा से मत्त, प्रेम करने की थी परवाह…और दुर्लभ होगी पहचान, रूप रत्नाकर भरा अथाह।”
चंद्रगुप्त नाटक में उपर्युक्त गीत किसने गाया है?
A. अलका ने B. कल्याणी ने C. राक्षस ने D. सुवासिनी ने
(A. अलका ने द्वितीय अंक में गाया है)
12. “बिखरी किरण अलक व्याकुल हो विरस वदन पर चिंता लेख…रूप-निशा उषा में फिर कौन सुनेगा तेरा गान।”
चंद्रगुप्त नाटक में उपर्युक्त गीत किसने गाया है?
A. सुवासिनी ने B. राक्षस ने C. अलका ने D. कल्याणी ने
(C. अलका ने द्वितीय अंक के अष्टम दृश्य में गाया है
13. “आज इस यौवन के माधवी कुंज में कोकिल बोल रहा…कौन मधु मदिरा घोल रहा।”
चंद्रगुप्त नाटक में उपर्युक्त गीत किसने गाया है?
A. अलका ने B. सुवासिनी ने C. कल्याणी ने D. मालविका ने
(B. सुवासिनी ने तृतीय अंक के प्रथम दृश्य में गाया है)
14. “सुधा सीकर से नहला दो…ये मोती बन जायें… मृदुल कर से लो…सहला दो।”
चंद्रगुप्त नाटक में उपर्युक्त गीत किसने गाया है?
A. सुवासिनी ने B. अलका ने C. मालविका ने D. कल्याणी ने
(D. कल्याणी ने चतुर्थ अंक के प्रथम दृश्य में गाया है)
15. “मधुप कब एक कलि का है… अली को केवल चाहिए सुखमय क्रीडा कुंज।”
चंद्रगुप्त नाटक में उपर्युक्त गीत किसने गाया है?
A. मालविका ने B. सुवासिनी ने C. अलका ने D. कल्याणी ने
(A. मालविका ने चतुर्थ अंक के चतुर्थ दृश्य में गाया है)
16. “बज रही बंशी आठों याम की…रूप सुधा के दो दृग प्यालों ने ही मति बेकाम की।”
चंद्रगुप्त नाटक में उपर्युक्त गीत किसने गाया है?
A. अलका ने B. मालविका ने C. कल्याणी ने D. सुवासिनी ने
(B. मालविका ने चतुर्थ अंक के चतुर्थ दृश्य में गाया है)
17. ओ मेरे जीवन की स्मृति! ओ अंतर के आतुर अनुराग…बहको मत क्या है न बता दो क्षितिज तुम्हारी नव सीमा।”
चंद्रगुप्त नाटक में उपर्युक्त गीत किसने गाया है?
A. मालविका ने B. सुवासिनी ने C. अलका ने D. कल्याणी ने
(A. मालविका ने चतुर्थ अंक के चतुर्थ दृश्य में गाया है)
18. “हिमाद्री तुंग श्रृंग से प्रबुद्ध शुद्ध भारती। स्वयंप्रभा समुज्ज्वला स्वतंत्रता पुकारती॥”
चंद्रगुप्त नाटक में उपर्युक्त गीत किसने गाया है?
A. अलका ने B. सुवासिनी ने C. कल्याणी ने D. समवेत गान
(D. अलका की प्रेरणा से समवेत गान है, यह चतुर्थ अंक, षष्ठ दृश्य में गाया गया है)
19. “सखे: वह प्रेममयी रजनी… आँखों में स्वप्न बनी स्मृतियों की भीड़ घनी॥”
चंद्रगुप्त नाटक में उपर्युक्त गीत किसने गाया है?
A. सुवासिनी B. अलका C. कल्याणी D. मालविका
(A. सुवासिनी ने चतुर्थ अंक के नवम दृश्य में गाया है)
20. ‘चंद्रगुप्त’ नाटक की पात्र अलका कहाँ की राजकुमारी थी?
A. मगध की B. नालंदा की C. कौशल की D. तक्षशिला की
21. ‘चंद्रगुप्त’ नाटक की पात्र कल्याणी कहाँ की राजकुमारी थी?
A. मगध की B. विक्रमशिला की C. सिंधु देश की D. तक्षशिला की
22. ‘चंद्रगुप्त’ नाटक की पात्र मालविका कहाँ की राजकुमारी थी?
A. मगध की B. अवध की C. सिंधुदेश की D. तक्षशिला की
23. सुवासिनी किसकी पुत्री थी?
A. वररुचि B. शकटार C. सिंहरण D. नागदत्त की
24. चंद्रगुप्त नाटक का पात्र आंभीक कहाँ का राजकुमार था?
A. मगध B. पंजाब C. तक्षशिला D. सिंधुदेश
25. चंद्रगुप्त नाटक का पात्र एनीसाक्रिटीज कौन था?
A. सिकंदर का क्षत्रप B. सिकंदर का सहचर C. यवन दूत D. सिकंदर का सेनापति
26. “संसार भर की नीति और शिक्षा का अर्थ मैंने यही समझा है कि आत्म-सम्मान के लिए मर मिटना ही दिव्य जीवन है।”
चंद्रगुप्त नाटक में उपर्युक्त कथन किसका है?
A. चाणक्य B. नन्द C. सिंहरण D. चंद्रगुप्त
27. “मानव कब दानव से ही दुर्दांत, पशु से भी बर्बर और पत्थर से भी कठोर, करुणा के लिए नीरवकाश हृदयवाला हो जाएगा, नहीं जाना जा सकता।”
चंद्रगुप्त नाटक में उपर्युक्त कथन किसका है?
A. चाणक्य B. सिंहरण C. अलका D. चंद्रगुप्त
28. “त्याग और क्षमा, तप और विद्या-तेज और सम्मान के लिए है।” चंद्रगुप्त नाटक में यह कथन किसका है?
A. सिंहरण B. पर्वतेश्वर C. चाणक्य D. चंद्रगुप्त
29. “भूमा का सुख और उसकी महत्ता का जिसको आभासभाव हो जाता है- उसको ये नश्वर चमकीले प्रदर्शन नहीं अभिभूत कर सकते हैं।” चंद्रगुप्त नाटक में यह कथन किसका है?
A. चाणक्य B. दाण्ड्यायन C. सिंहरण D. आंभिक
30. “मंगलमय विभु अनेक अमंगलों में कौन-कौन से कल्याण छिपाते रहता है। हम सब उसे नहीं समझ सकते।” चंद्रगुप्त नाटक में यह कथन किसका, किससे है?
A. दाण्ड्यायन का एनीसाक्रिटीज से B. दाण्ड्यायन का सिंहरण से
C. दाण्ड्यायन का अलका से D. दाण्ड्यायन का सुवासिनी से
31. “विजय-तृष्णा का अंत पराभव में होता है।” चंद्रगुप्त नाटक में यह कथन किसका है?
A. दाण्ड्यायन B. चाणक्य C. सिंहरण D. पर्वतेश्वर
32. “मनुष्य अपनी दुर्बलता से भली-भाँति परिचित रहता है। परंतु उसे अपने बल से भी अवगत होना चाहिए। असंभव कहकर किसी काम को करने से पहले कर्मक्षेत्र के काँपक्र लड़खड़ाओं मत।” चंद्रगुप्त नाटक में यह कथन किसका, किससे है?
A. दाण्ड्यायन का पर्वतेश्वर से B. चाणक्य का पर्वतेश्वर से
C. दाण्ड्यायन का चंद्रगुप्त से D. चाणक्य का चंद्रगुप्त से
33. “यह स्वप्नों का देश, यह त्याग और ज्ञान का पालना, यह प्रेम की रणभूमि, क्या भुलायी जा सकती है? कदापि नहीं, अन्य देश मनुष्यों की जन्मभूमि है, यह भारत मानवत की जन्मभूमि है।” चंद्रगुप्त नाटक में यह कथन किसका, किससे है?
A. सिकंदर B. कार्नेलिया C. एनीसाक्रीटीज D. सिहरण
(B. कार्नेलिया का कथन चंद्रगुप्त से)
34. “महत्त्वकांक्षा का मोती निष्ठुरता की सीपी में रहता है।” चंद्रगुप्त नाटक में यह कथन किसका, किससे है?
A. दाण्ड्यायन B. अलका C. आंभिक D. चाणक्य
(D. चाणक्य का कथन चंद्रगुप्त से)
35. “कृतज्ञता पाश है, मनुष्य की दुर्बलताओं के फंदे और भी दृढ़ करते हैं।” चंद्रगुप्त नाटक में यह कथन किसका, किससे है?
- दाण्ड्यायन B. चाणक्य C. अलका D. कार्नेलिया
(D. कार्नेलिया का कथन राक्षस के प्रति)
36. “प्रेम में स्मृति का ही सुख है। एक टीस उठती है, वही तो प्रेम का प्राण है।” चंद्रगुप्त नाटक में यह कथन किसका है?
A. सुवासिनी B. कार्नेलिया C. अलका D. कल्याणी
37. “मैंने भारत में हरक्यूलिस, एचिलिस की आत्माओं को भी देखा है- मेगास्थनीज को। संभवतः प्लेटो और अरस्तु भी होंगे, मैं भारत का अभिनंदन करता हूँ।” चंद्रगुप्त का नाटक में यह कथन किसका है?
A. चाणक्य B. सिकंदर C. फिलिप्स D. साइबर्टीयस
(B. सिकंदर का कथन चंद्रगुप्त से)
38. “हे लाज भरे सौंदर्य बता दो मौन बने रहते हो क्यों?”
उपर्युक्त गीत की पंक्तियाँ जयशंकर प्रसाद की किस रचना से संबंधित है?
A. प्रलय की छाया B. स्कंदगुप्त C. कामायनी D. चंद्रगुप्त
39. “बिखरी किरण अलक व्याकुल हो, विरस बदन पर चिंता लेख।” चंद्रगुप्त नाटक में यह गीत मालविका किस अंक में गाती है?
A. प्रथम अंक B. द्वितीय अंक C. तृतीय अंक D. चतुर्थ अंक
40. “मधुप एक कली का है, पाया जिसने प्रेम रस।” इस गीत को मालविका किसके निवेदन पर गाती है?
- चाणक्य B. दाण्ड्यायन C. चंद्रगुप्त D. सिंहरण
(C. चंद्रगुप्त के निवेदन पर चतुर्थ अंक में गाती है)
41. “ब्राह्मण न तो किसी के राज्य में रहता है और न ही किसी के अन्न पर पलता है।” यह जयशंकर प्रसाद जी के किस नाटक का कथन है?
A. स्कंदगुप्त B. अजातशत्रु C. चंद्रगुप्त D. ध्रुवस्वामिनी
42. “महत्वकांक्षा का मोती निष्ठुरता की सीपी में पलता है।” यह प्रसाद जी के किस नाटक का कथन है?
A. अजातशत्रु B. जनमेजय का नाग यज्ञ C. स्कंदगुप्त D. चंद्रगुप्त
43. “अतएव, दो बालुकापूर्ण कगारों के बीच में एक निर्मल- स्रोतस्विनी का रहना आवश्यक है।” यह संवाद चंद्रगुप्त नाटक के किस पात्र है?
A. चंद्रगुप्त B. चाणक्य C. सिल्यूक्स D. राक्षस
44. “पतन और कहाँ तक हो सकता है मौर्य चंद्रगुप्त अपना अधिकार छीन लो।” यह कथन किसका, किससे है?
A. चाणक्य B. सिंहरण C. पर्वतेश्वर D. शकटार
(A. चाणक्य का चंद्रगुप्त से चौथा अंक में)
45. “यह युद्ध ग्रीक व भारतियों का नहीं, यह अरस्तू व चाणक्य की चोट है।” यह किसका कथन है?
- कार्नेलिया B. अलका C. सुवासिनी D. मालविका
46. “यह युद्ध देखना चाहो तो मेरा हृदय फाड़कर देखो मालविका।” यह किसका कथन है?
A. चाणक्य B. पर्वतेश्वर C. चंद्रगुप्त D. सिंहरण
47. “मैं लेखक नहीं हूँ काव्यायन, शास्त्र प्रणेता हूँ, व्यवस्थापक हूँ।” चंद्रगुप्त नाटक में यह किसका कथन है?
A. चंद्रगुप्त B. सिल्यूक्स C. राक्षस D. चाणक्य
48. “तुझे उलट दूँगा ! नया बनाऊँगा, नहीं तो नाश ही करूँगा।” यह किसका कथन है?
A. सिल्युक्स B. चंद्रगुप्त C. चाणक्य D. राक्षस
(प्रथम अंक के तृतीय दृश्य में चाणक्य का कथन)
49. “भाषा ठीक करने से पहले मैं मनुष्य को ठीक करना चाहता हूँ।” चंद्रगुप्त नाटक में यह किसका कथन है?
A. चंद्रगुप्त B. राक्षस C. चाणक्य D. सिंहरण
50. “भारतीय कृतघ्न नहीं होते।” चंद्रगुप्त नाटक में यह किसका कथन है?
A. पर्वतेश्वर B. चंद्रगुप्त C. राक्षस D. चाणक्य
51. “पराधीनता से बढ़कर विडंबना और क्या है।” चंद्रगुप्त नाटक में यह कथन किसका है?
A. अलका B. मालविका C. सुवासिनी D. कार्नेलिया
52. “मैं तलवार खींचे हुए भारत में आया, हृदय देकर जा रहा हूँ।” चंद्रगुप्त नाटक में यह कथन किसका है?
A. सिकंदर B. सिल्युक्स C. सिंहरण D. फिलिप्स
‘चंद्र्गुप्न’ नाटक महत्वपूर्ण बिंदु
1. प्रसाद के सम्पूर्ण नाटकों में सबसे विस्तृत, प्रौढ़ नाट्यकृत ‘चन्द्रगुप्त’ नाटक है।
2. प्रसाद जी ने 1912 ई० में ‘कल्याणी परिचय’ शीर्षक एक लघु नाटिका लिखी थी।
3. ‘चन्द्रगुप्त’ नाटक के चतुर्थ अंक में ‘कल्याणी परिणय’ नाटिका में कुछ परिवर्तन करके इसी नाटक में शामिल कर दिया था।
4. ‘चन्द्रगुप्त’ नाटक का प्रकाशन 1931 में हुआ था।
5. इस नाटक में कुल चार (4) अंक और चौआलीस (44) दृश्य है। इनमें गीतों की संख्या तेरह (13) है।
6. प्रथम अंक में ग्यारह दृश्य है, दूसरा अंक में दस दृश्य, तीसरा अंक में नौ दृश्य और चौथे अंक में चौदह दृश्य है।
7. तृतीय अंक सबसे छोटा 9 अंकों का हैं।
8. चतुर्थ अंक सबसे बड़ा 14 अंकों का हैं।
जय हिंद
सभी प्रश्नों के उत्तर:
1. D. 1931 ई.
2. B. चार
3. C. 44
4. A. ग्यारह
5. B. तेरह
6. A. तीन
7. C. कल्याणी परिणय
8. B. किशोरीलाल गोस्वामी
9. B. द्वितीय अंक
10. B. सुवासिनी ने
11. A. अलका ने
12. C. अलका ने
13. B. सुवासिनी ने
14. D. कल्याणी ने
15. A. मालविका ने
16. B. मालविका ने
17. A. मालविका ने
18. D. समवेत गान
19. A. सुवासिनी
20. D. तक्षशिला की
21. A. मगध की
22. C. सिंधुदेश की
23. B. शकटार
24. C. तक्षशिला
25. B. सिकंदर का सहचर
26. D. चंद्रगुप्त
27. B. सिंहरण
28. C. चाणक्य
29. B. दाण्ड्यायन
30. C. दाण्ड्यायन का अलका से
31. A. दाण्ड्यायन
32. B. चाणक्य का पर्वतेश्वर से
33. B. कार्नेलिया
34. D. चाणक्य
35. D. कार्नेलिया
36. A. सुवासिनी
37. B. सिकंदर
38. D. चंद्रगुप्त
39. B. द्वितीय अंक
40. C. चंद्रगुप्त
41. C. चंद्रगुप्त
42. D. चंद्रगुप्त
43. B. चाणक्य
44. A. चाणक्य
45. A. कार्नेलिया
46. C. चंद्रगुप्त
47. D. चाणक्य .
48. C. चाणक्य
49. C. चाणक्य
50. B. चंद्रगुप्त
51. A. अलका
52. A. सिकंदर