सुंदर विचार

दादी

‘वृद्धाश्रम’ इस नाम को सुनकर अब ना तो बुरा लगता है, और ना ही कोई आश्चर्य होता है, अब तो आदत सी पड़ गई है। फौजी महेश्वर सिंह और उनकी पत्नी लक्ष्मी के दो बच्चे थे। एक बेटा और एक बेटी भगवान ने उनकी दोनों मनोकामना पूरी कर दी थी। दोनों बहुत खुश थे। जहाँ-जहाँ… Continue reading दादी

भारतेंदु हरिश्चन्द्र समग्र परिचय

भारतेंदु जन्म- 9 सितंबर, 1850 ई. काशी निधन- 6 जनवरी, 1885 ई. काशी पिता- गोपालचंद्र (ये गिरिधरदास उपनाम से रचनाएँ लिखते थे।  नाटक ‘नहुष’ (1843 ई.) माता- मणि देवी (मन्नी देवी) गुरु- राजा शिवप्रसाद ‘सितार-ए-हिंद’, इनसे इन्होंने अंग्रेजी की शिक्षा ग्रहण की। पंडित ईश्वरदत्त से- हिंदी की शिक्षा ग्रहण की।  मौलवी ताजअली से- उर्दू की… Continue reading भारतेंदु हरिश्चन्द्र समग्र परिचय

प्रतापनारायण मिश्र संपूर्ण परिचय

रचनाकार - प्रतापनारायण मिश्र (1856 - 1894 ई.) जन्म - 1856 ई. बैजेगाँव, उन्नाव (म.प्र.) निधन- 1894 ई. में हुआ। पिता- संकटाप्रसाद मिश्र प्रतापनारायण मिश्र जी के उपनाम- 1. आचार्य रामचंद्र शुक्ल जी ने इन्हें ‘हिंदी का एडिसन’ कहा। 2. भारतेंदु जैसी रचना शैली, विषयवस्तु और भाषागत के कारण प्रतापनारायण मिश्र को ‘प्रति-भारतेंदु’ या ‘द्वितीय… Continue reading प्रतापनारायण मिश्र संपूर्ण परिचय

भारतेंदु हरिश्चंद्र ‘अंधेर नगरी’ (नाटक) प्रश्नोत्तरी

1. भारतेंदु हरिश्चन्द्र द्वारा रचित नाटक ‘अंधेर नगरी’ नाटक का प्रकाशन कब हुआ था?   A. 1880 ई. B. 1881 ई. C. 1882 ई. D. 1883 ई. 2. भारतेंदु हरिश्चन्द्र द्वारा रचित ‘अंधेर नगरी’ नाटक इनमें से क्या है? A. प्रहसन B. भाण C. गीति रूपक D. लघु नाटिका  3. भारतेंदु हरिश्चन्द्र द्वारा रचित नाटक… Continue reading भारतेंदु हरिश्चंद्र ‘अंधेर नगरी’ (नाटक) प्रश्नोत्तरी

बालकृष्ण भट्ट समग्र परिचय

जन्म - 1844 ई. प्रयागराज में और निधन- 1914 ई. में हुआ। पिता - बेणी प्रसाद और माता - पार्वती देवी थीं। विशेष तथ्य- डॉ. लक्ष्मीसागर वार्ष्णेय ने इनको हिंदी का प्रथम निबंधकार माना है। नलिन विलोचन शर्मा ने इनको ‘हिंदी का मोनतेन’ कहा है। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने इन्हें हिंदी का ‘प्रथम आलोचक’ माना… Continue reading बालकृष्ण भट्ट समग्र परिचय

रामवृक्ष बेनीपुरी ‘माटी की मूरतें’ प्रश्नोत्तरी

1. ‘माटी की मूरतें’ शब्द-चित्र संग्रह के रचनकार का नाम हैं ? A. हरिशंकर परसाई B. रामवृक्ष बेनीपुरी C. रामविलास शर्मा D. सरदार पूर्ण सिंह 2. ‘माटी की मूरतें’ शब्द-चित्र संग्रह के प्रथम संस्करण में कुल कितने शब्द-चित्र हैं? A. ग्यारह  B. बारह    C. तेरह D. चौदह 3. ‘माटी की मूरतें’ शब्द-चित्र संग्रह के… Continue reading रामवृक्ष बेनीपुरी ‘माटी की मूरतें’ प्रश्नोत्तरी

दिनकर ‘संस्कृति के चार अध्याय’ प्रश्नोत्तरी

1. ‘संस्कृति के चार अध्याय’ के रचनाकार इनमें से कौन है? A. डॉ.नामवर सिंह        B. रामधारी सिंह ‘दिनकर’ C. मैथिलीशरण गुप्त     D. अज्ञेय 2. ‘संस्कृति के चार अध्याय’ का प्रकाशन वर्ष क्या है? A. 1954 ई. B. 1955 ई. C. 1956 ई. D. 1957 ई.   3. ‘संस्कृति के चार अध्याय’ की भूमिका… Continue reading दिनकर ‘संस्कृति के चार अध्याय’ प्रश्नोत्तरी

नामवर सिंह: ‘संस्कृति और सौंदर्य’ (निबंध) भाग-2

संभवत: ऐसे ही पूर्वग्रह का प्रत्‍याख्‍यान करने के लिए द्विवेदीजी ने अपनी साहित्‍य-साधना के आरंभिक सोपान पर ही 'हिंदी साहित्‍य की भूमिका' के साथ ही 'प्राचीन भारत का कला-विलास' (1940) नामक पुस्‍तक लिखी जो आगे चलकर परिवर्धित रूप में 'प्राचीन भारत के कलात्‍मक विनोद' नाम से छपी। प्राचीन भारत में प्रचलित कलाओं के लगभग सौ… Continue reading नामवर सिंह: ‘संस्कृति और सौंदर्य’ (निबंध) भाग-2

नामवर सिंह: संस्कृति और सौंदर्य- निबंध भाग-1

'अशोक के फूल' केवल एक फूल की कहानी नहीं, भारतीय संस्‍कृति का एक अध्‍याय है; और इस अध्‍याय का अनंगलेख पढ़ने वाले हिंदी में पहले व्‍यक्ति हैं हजारीप्रसाद द्विवेदी। पहली बार उन्‍हें ही यह अनुभव हुआ कि 'एक-एक फूल, एक-एक पशु, एक-एक पक्षी न जाने कितनी स्‍मृतियों का भार लेकर हमारे सामने उपस्थित है। अशोक… Continue reading नामवर सिंह: संस्कृति और सौंदर्य- निबंध भाग-1

विवेकी राय: उठ जाग मुसाफिर (निबंध)

वहाँ जाते समय कल्पना कर रहा था कि सदा की भाँति तन-मन से पूर्ण स्वस्थ होंगे, पूर्ववत धधाकर सहास मिलेंगे, सदाबहार से दिखेंगे, फुल्ल कुसमित। ऐसी संक्रामक निरोगता कि प्रतिमूर्ति के चाहक-ग्राहक कम नहीं होते। सो घिरे होंगे गाँव के या इधर-उधर के प्रबुद्ध लोगों से। कुछ ले लो इस अंतिम आदमी से। क्या लोगे… Continue reading विवेकी राय: उठ जाग मुसाफिर (निबंध)