भारतेंदु हरिश्चंद्र ‘अंधेर नगरी’ (नाटक) प्रश्नोत्तरी

1. भारतेंदु हरिश्चन्द्र द्वारा रचित नाटक ‘अंधेर नगरी’ नाटक का प्रकाशन कब हुआ था?  

A. 1880 ई. B. 1881 ई. C. 1882 ई. D. 1883 ई.

2. भारतेंदु हरिश्चन्द्र द्वारा रचित ‘अंधेर नगरी’ नाटक इनमें से क्या है?

A. प्रहसन B. भाण C. गीति रूपक D. लघु नाटिका 

3. भारतेंदु हरिश्चन्द्र द्वारा रचित नाटक ‘अंधेर नगरी’ नाटक में कुल कितने दृश्य है?

A. चार  B.   पाँच  C.  छह  D. सात

4. “‘अंधेर नगरी’ अंग्रेजी राज्य का दूसरा नाम है।” यह किस आलोचक का कथन है?

A. आचार्य रामचंद शुक्ल    B. रामविलास शर्मा

C. डॉ. नामवर सिंह        D. गुलाबराय

5. ‘अंधेर नगरी’ नाटक का कौन सा दृश्य एवं स्थान सुमेलित नहीं है?

A. प्रथम दृश्य का स्थान- बाह्य प्रांत

B. द्वितीय दृश्य का स्थान- बाजार 

C. तृतीय दृश्य का स्थान- जंगल 

D. चतुर्थ दृश्य का स्थान- अरण्य   

6. “सेत-सेत सब एक से, जहाँ कपूर कपास।

ऐसे देश कुदेस में, कबहुँ न कीजै बास॥”

‘अंधेर नगरी’ नाटक में उपर्युक्त दोहा का गायन किसके द्वारा किया गया है?

A. पाचकवाला B. महंत C. गोबरधनदास D. नारायणदास  

7. ‘अंधेर नगरी’ नाटक में ‘अंधेर नगरी’ किसका प्रतीक है?

A. लोभवृत्ति B. पाखंड C. अंध व्यवस्था D. आम जनता  

8. “लोभ पाप को मूल है, लोभ मिटावत मान।

लोभ कभी न कीजिए, या में नरक निदान॥”

‘अंधेर नगरी’ नाटक में यह कथन किसका है?

A. नारायणदास B. गोबरधनदास C. महंत D. पाचकवाला

9. “अंधेर नगरी अनबुझ राजा।

टका सेर भाजी टका सेर खाजा॥”

उपर्युक्त गायन गोबरधन दास द्वारा “अंधेर नगरी’ नाटक के किस दृश्य में है?

A. द्वीतीय दृश्य B. तृतीय दृश्य

C. चतुर्थ दृश्य D. पंचम दृश्य

10. “धर्म-अधर्म एक दरसाई।

राजा करे सो न्याव सदाई।”

‘अंधेर नगरी’ नाटक में यहाँ उपर्युक्त पद गोबरधनदास द्वारा किस राग में गाया गया है?

A. राग मालकोस    B. राग केदार

C. राग काफी       D. राग ध्रुवश्री

11. “अंधाधुंध मच्यौ सब देशा।

मानहु राजा रहत विदेसा॥”

‘अंधेर नगरी’ नाटक में यह किसका कथन है?

A. नारायणदास B. गोबरधनदास C. फरियादी D. महंत   

12. ‘अंधेर नगरी’ नाटक किसी जमींदार को लक्षित करके किसके लिए लिखा गया हैं?

A. कोलकात्ता थियेटर  B. पारसी थियेटर

C. नेशनल थियेटर    D. इप्टा  

13. ‘अंधेर नगरी’ नाटक का सर्वप्रथम मंचन काशी के हिंदू नेशनल थियेटर में कब हुआ था?

A. 1881 ई. B. 1882 ई. C. 1883 ई. D. 1884 ई.  

14. प्रतापनारायण मिश्र के प्रयास से ‘अंधेर नगरी’ नाटक का मंचन कानपुर में कब हुआ था?

A. 1881 ई. B. 1882 ई. C. 1883 ई. D. 1884 ई.

15. “बिहार प्रान्त के किसी जमींदार के अन्यायों को लक्ष्य कर उसे सुधरने के लिए तथा नेशनल थियेटर में अभिनीत किये जाने के लिए ‘अंधेर नगरी’ की रचना की गई थी।” यह किस विद्वान की मान्यता है?

A. नेमीचन्द्र जैन  B. आचार्य रामचंद्र शुक्ल

C. ब्रजरत्नदास     D. रामविलास शर्मा

16. ‘अंधेर नगरी’ नाटक  में गोबर्धनदास किसका प्रतीक है?

A. लोभवृत्ति B. निति-उपदेशक C. सद्वृत्ति D. अन्याय

17. “चना हाकिम सब जो खाते।

सब दूना टिकस लगाते॥”

इस पद को घासीराम के द्वारा ‘अंधेर नगरी’ नाटक के किस दृश्य में गाया गया हैं?

A. प्रथम दृश्य     B. द्वितीय दृश्य

C. तृतीय दृश्य    D. चतुर्थ दृश्य

18. “प्रस्तुत प्रहसन एक मात्र उद्देश्य मुर्ख राजा की राज-व्यवस्था से जनता को अवगत कराना है।” ‘अंधेर नगरी’ नाटक के संबंध में यह कथन किस विद्वान का है?

A. आचार्य रामचंद्र शुक्ल    B. नेमीचन्द्र जैन

C. रामविलास शर्मा        D. वीरेन्द्र शुक्ल  

19. “जहाँ न धर्म न बुद्धि नहिं, नीति न सुजन समाज।

ते ऐसेहि आपुहि नसै, जैसे चौपट्ट राज॥”

उपर्युक्त महंत का कथन अंधेर नगरी नाटक के किस दृश्य में है? 

A. तृतीय दृश्य      B. चतुर्थ दृश्य

C. पंचम दृश्य      D. षष्ठ दृश्य

20. ‘अंधेर नगरी’ नाटक में ‘बकरी’ किसका प्रतीक है?

A. आम जनता का     B. आम जनता की त्रासदी का

C. न्याय का          D. न्यायप्रियता का

21. भारतेंदु ने अपने किस नाटक को देव-वत्सला कहा है?

A. अंधेर नगरी        B. भारत-दुर्दशा

C. दुर्लभ बंधु         D. रत्नावली

22. भारतेंदु द्वारा रचित कौन सा नाटक हिंदी का प्रथम मौलिक राजनीतिक नाटक माना जाता है?

A. नीलदेवी     B. प्रेम जोगिनी

C. अंधेर नागरी  D. अंधेर नगरी  

23. “अंगरेजराज सुख साज सजे सब भारी।

पै धन विदेस चली जात इहै अति ख्वारी॥”

भारतेंदु द्वारा रचित यह नाटक पंक्तियाँ हैं?

A. अंधेर नगरी        B. भारत-दुर्दशा

C. चन्द्रावली          D. विद्यासुंदर   

24. भारतेंदु द्वारा रचित ‘भारत-दुर्दशा’ नाटक का प्रकाशन वर्ष हैं?

A. 1880 ई. B. 1881 ई. C. 1882 ई. D. 1883 ई.

25. ‘भारत-दुर्दशा’ नाटक में कितने अंक हैं?

    A. चार अंक B. पाँच अंक C. छह अंक D. सात अंक   

26. ‘भारत-दुर्दशा’ नाटक का कौन सा अंक सुमेलित नहीं है?

A. प्रथम अंक का स्थान- बीथी

B. द्वितीय अंक का स्थान- श्मशान

C. तृतीय अंक का स्थान- मैदान

D. चतुर्थ अंक का स्थान- बाजार

27. ‘भारत-दुर्दशा’ किस श्रेणी का नाटक है?

A. भाण  B. प्रहसन C. लास्य रूपक D. गीति रूपक    

28. “रोवहु सब मिलिकै आवहु भारत भाई।

 हा, हा भारत-दुर्दशा न देखी जाई।”

उपर्तुक्त गीत योगी के द्वारा ‘भारत-दुर्दशा’ नाटक के किस अंक में गाया गया है? 

A. प्रथम अंक में      B. द्वितीय अंक में

C. तृतीय अंक में      D. चतुर्थ अंक में   

29. इनमें से कौन सा पात्र ‘भारत-दुर्दशा’ नाटक में नहीं है?

A. रोग B. दुराचार C. आलस्य D. अंधकार   

30. “मिल जाये हिंद खाक में हम कातिलों को क्या

ऐ मीर-फर्श रंज उठाना नहीं अच्छा।”

भारत दुर्दशा नाटक में उपर्युक्त कथन किसका है?

A. रोग B. भारत-दुर्दैव  C. आलस्य D. मदिरा   

31. ‘भारत-दुर्दशा’ नाटक का नायक कौन है?

    A. भारत-भाग्य  B. भारत  C. योगी  D. रामजी   

32. “हिंदी साहित्य में राष्ट्रीय भावना का प्रारंभ ‘भारत-दुर्दशा’ से होता है।” यह कथन किस विद्वान् का है?

A. रामचंद्र शुक्ल      B. गुलाबराय

C. रामविलास शर्मा    D. श्यामसुंदर दास    

33. “कोऊ नहिं पकरत मेरो हाथ।

सब विधि दुःख सागर में डूबत धाइ उबारौ नाथ।”

उपर्युक्त गीत ‘भारत-दुर्दशा’ नाटक में भारत द्वारा किस अंक में गाया गया है?  

A. प्रथम अंक      B. द्वितीय अंक

C. तृतीय अंक     D. चतुर्थ अंक    

34. “अरे उपजा ईश्वर कोप से औ आया भारत बीच।

तुम मुझे सहज न जानो जी, मुझे इक राछस मानो जी॥”

उपर्युक्त गीत ‘भारत-दुर्दशा नाटक में किसके द्वारा गाया गया है?

A. रोग  B. भारत-दुर्दैव   C. आलस्य  D. अंधकार

35. “हमने बहुत से वीर हिन्दुस्तान में भेजे हैं परंतु तुमसे

जितनी आशा है और किसी से नहीं॥” यह कथन भारत-दुर्दैव का किससे हैं?   

A. मदिरा से B. आलस्य से C. रोग से D. अंधकार से

36. “जै जै कलयुग राज की जै महामोह महाराज की।

नास के साज की।”

उपर्युक्त गीत ‘भारत-दुर्दशा’ नाटक में किसके द्वारा गाया गया है?

A. रोग  B. मदिरा  C. आलस्य  D. अंधकार

37. ‘जगत सब मेरी मानत आन’ यह उक्ति ‘भारत-दुर्दशा’ नाटक में किसकी है?

A. भारत  B. भारत-दुर्दैव  C. रोग  D. मदिरा

38. “तुम्हारे और साथी सब हिन्दुस्तान भेजे गये हैं। तुम भी

जाओ और अपनी जोगनिंद्रा से सबको बश में करो।”

भारत-दुर्दैव का उपर्युक्त कथन किसके प्रति है?  

A. अंधकार  B. रोग  C. मदिरा  D. आलस्य

39. “कौड़ी-कौड़ी को करूँ मैं सबको मुहताज।

भूखे प्राण निकालू इनका तो मैं सच्चा राज॥”

‘भारत-दुर्दशा’ नाटक में उपर्युक्त कथन किसका है?

A. आलस्य B. रोग C. भारत-दुर्दैव  D. अंधकार

40. “धरके हम लाखों ही वेस।

किया चौपट यह ख़ास देश॥”

‘भारत-दुर्दशा’ नाटक में उपर्युक्त कथन किसका है?

 A. सत्यानाश फौजदार   B. भारत-दुर्दैव  

 C. रोग               D. आलस्य

41. ‘भारत-दुर्दशा’ नाटक में ‘कलयुग का सखा’ किसे कहा गया है?

A. आलस्य B. अंधकार को C. रोग को D. भारत-दुर्दैव  

42. ‘भारत-दुर्दशा’ नाटक में ‘सात सभ्यजनों’ द्वारा भारत के उद्धार के लिए विचार-विमर्श किस अंक में किया गया है?

A. चतुर्थ अंक में   B. पंचम अंक में

C. षष्ठ अंक में    D. उपर्युक्त में से कोई नहीं

43. “बहु हमने फैलाए धर्म।

बढ़ाया छुआछुत का कर्म॥”

‘भारत-दुर्दशा’ नाटक में उपर्युक्त कथन किसका है?

    A. अंधकार B. भारत-दुर्दैव C. रोग D. सत्यानाश फौजदार

44. ‘भारत-दुर्दशा’ नाटक में किसने अपने-आपको ‘जयचंद’ कहा है?

A. अंधकार B. भारत-दुर्दैव C. रोग D. सत्यानाश फौजदार

45. ‘भारत-दुर्दशा’ नाटक में महाराज किसे कहा गया है?

A. भारत को            B. भारत-दुर्दैव को

C. भारत-भाग्य को       D. कलयुग को

46. “विधवा ब्याह निषेध कियो बिभिचार प्राचार्यो।”

‘भारत-दुर्दशा’ नाटक में उपर्युक्त कथन किसका है?

    A. भारत-भाग्य को      B. भारत को

C. भारत-दुर्दैव को       D. सत्यानाश फौजदार को

47. ‘भारत-दुर्दशा’ नाटक में किसने अपने आपको ‘परम पिता’ कहा है?

A. आलस्य ने B. रोग ने C. भारत-दुर्दैव D. अंधकार ने

48. “धोवहु भारत अपजस पनका।

 मेटहूँ भारत भूमि कलंक॥”

‘भारत-दुर्दशा’ नाटक में उपर्युक्त कथन किसका है?

 A. एडिटर B. सभापति C. भारत-भाग्य D. कवि

49. “रोकि विलायतगमन कूप मंडूक बनायो।”

‘भारत-दुर्दशा’ नाटक में उपर्युक्त कथन किसका है?

A. भारत-दुर्दैव      B. सत्यानाश फौजदार

C. भारत-भाग्य     D. आलस्य

50. किसने ‘भारत-दुर्दशा’ नाटक को प्रतिकात्मक नाटक कहाहै?

A. आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने   B. दशरथ ओझा ने

C. रामविलास शर्मा ने       D. ब्रजरतनदास ने

51. “भारत-दुर्दशा अतीत गौरव की चमकदार स्मृति है, आँसू-भरा वर्तमान है और भविष्य-निर्माण की भव्य प्रेरणा है। इसमें भारतेंदु का भरत प्रेम करुणा की सरिता के रूप में उमड़ चला आया है। आशा की किरण के रूप में झिलमिला उठा है।” यह किसका कथन है?

        A. जयनाथ नलिन B. जयदेव तनेजा

C. गिरीश रस्तोगी D. भारतेंदु   

52. रोवहु सब मिलि कै आवहु भारत भाई

हा! हा! भारत दुर्दशा न देखी जाई।

उपर्युक्त लावणी गीत को कौन गाता है?

A. कवि  B. योगी  C. भारत  D. भारत-भाग्य   

53. “जागो जागो रे भाई।

सोअत निसि बैस गँवाई।

जागो जागो रे भाई॥”

उपर्युक्त गीत राग चैती में कौन गाता है?

A. भारत-दुर्दैव B. भारत-भाग्य C. आलस्य D. कवि   

54. “जय सतजुग-थापन करन, नासन म्लेच्छ-आचार।

कठिन धार तरवार कर, कृष्ण कल्कि अवतार॥”

उपर्युक्त पंक्तियाँ किस नाटक का मंगलाचरण है?

A. अंधेर नगरी     B. नीलदेवी

C. भारत-दुर्दशा    D. प्रेम जोगिनी  

55. पंचम अंक के सभ्य लोगों की कमिटी में कितने पात्र है?

A. 7    B. 8    C. 9    D. 10   

सभी प्रश्नों के उत्तर-

1. B. 1881 ई.

2. A. प्रहसन

3. C. छह

4. B. रामविलास शर्मा

5. D. चतुर्थ दृश्य का स्थान- अरण्य (राजसभा है)

6. B. महंत

7. C. अंध व्यवस्था

8. C. महंत

9. D. पंचम दृश्य

10. C. राग काफी       

11. B. गोबरधनदास

12. C. नेशनल थियेटर

13. A. 1881 ई.

14. B. 1882 ई.

15. C. ब्रजरत्नदास

16. A. लोभवृत्ति

17. B. द्वितीय दृश्य

18. D. वीरेन्द्र शुक्ल 

19. D. षष्ठ दृश्य

20. B. आम जनता की त्रासदी का

21. B. भारत-दुर्दशा

22. D. अंधेर नगरी

23. B. भारत-दुर्दशा

24. A. 1880 ई.

25. C. छह अंक

26. C.चतुर्थ अंक का स्थान- बाजार (अंग्रेजी ढंग से सजा हुआ कमरा है) 

27. C. लास्य रूपक

28. A. प्रथम अंक में

29. B. दुराचार

30. C. आलस्य

31. B. भारत

32. D. श्यामसुंदर दास

33. B. द्वितीय अंक

34. B. भारत-दुर्दैव  

35. A. मदिरा से

36. D. अंधकार

37. C. रोग  

38. D. आलस्य

39. C. भारत-दुर्दैव  

40. A. सत्यानाश

41. B. अंधकार को

42. B. पंचम अंक में

43. D. सत्यानाश फौजदार

44. D. सत्यानाश फौजदार

45. B. भारत-दुर्दैव को

46. D. सत्यानाश फौजदार को

47. B. रोग ने

48. C. भारत-भाग्य

49. B. सत्यानाश फौजदार

50. B. दशरथ ओझा ने

51. A. जयनाथ नलिन

52. B. योगी

53. B. भारत-भाग्य

54. C. भारत-दुर्दशा

55. A. 7           

जय हिंद

Leave a comment

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.