संस्कृत की वे रचनाएँ जो रीतिकाल का आधार बनी रचना और रचनाकार 1. कामसूत्र - वात्स्यायन 2. काव्य प्रकाश - मम्मट 3. चंद्रलोक एवं रतिमंजरी - जयदेव 4. साहित्य दर्पण - विश्वनाथ 5. वृत्त रत्नाकर - भट्ट केदार 6. छंदों मंजरी - गंगादास 7. शृंगार मंजरी - अकबर साह 8. शृंगार तिलक - रूद्र भट्ट… Continue reading रीतिकाल के महत्वपूर्ण रचनाएँ और रचनाकार
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सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’गैंग्रीन/रोज (कहानी)
गैंग्रीन/रोज - यह वास्तविक घटना पर आधारित कहानी है। रचनाकार- स. ही. वा. अज्ञेय रचनाकाल- मई, 1934 ई. (डलहौजी नामक स्थान पर रचित) पहले यह कहानी ‘रोज’ के नाम से प्रकाशित हुआ था। मार्च 1982 ई में रचनाकार द्वारा नाम परिवर्तित कर गैंग्रीन कर दिया गया। विपथगाह- 1937 ई. प्रथम संस्करण ‘रोज’ नाम से था।… Continue reading सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’गैंग्रीन/रोज (कहानी)
फणीश्वर नाथ रेणु लाल पान की बेगम (कहानी)
‘लालपान की बेगम’ 1957 में भावात्मक शैली में लिखी गई एक आँचलिक कहानी है। ठुमरी संग्रह में संकलित लालपान की बेगम 1956 की कहानी है। यह इलाहाबाद से प्रकाशित ‘कहानी’ पत्रिका के जनवरी 1957 के अंक में प्रकाशित हुई थी। पुंज प्रकाश ने इस कहानी का नाट्य रूपान्तरण भी किया है, जिसे सन् 1907 में… Continue reading फणीश्वर नाथ रेणु लाल पान की बेगम (कहानी)
काव्य आन्दोलन और उसके प्रवर्तक
काव्य आन्दोलन – प्रवर्तक 1. नयी कविता (1951) स. ही. वा. अज्ञेय 2. नयी कविता आंदोलन (1954) - डॉ. जगदीश गुप्त 3. अकविता आंदोलन (1954) - डॉ. जगदीश चतुर्वेदी 4. प्रतिबद्ध कविता आंदोलन (1957) परमानंद श्रीवास्तव . 5. ताज़ी कविता आंदोलन (1958) - लक्ष्मीकांत वर्मा 6. नवगीत आंदोलन (1958) - राजेंद्रप्रसाद सिंह 7. सनातन सुर्योदयी… Continue reading काव्य आन्दोलन और उसके प्रवर्तक
नयी कविता प्रश्नोत्तरी
नयी कविता से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य: नयी कविता का समय (1953-1960 ई.) 'नयी कविता' शब्द का प्रयोग सबसे पहले अज्ञेय ने 'प्रतीक पत्रिका' के जून 1951 के अंक में किया था। उसके बाद अज्ञेय ने 1952 ई. में इलाहबाद के ऑल इंडिया 'रेडियों स्टेशन' से एक भेटवार्ता में इस 'नयी कविता' के अवधारणा को स्पष्ट… Continue reading नयी कविता प्रश्नोत्तरी
प्रयोगवाद के महत्वपूर्ण तथ्य और कथन
प्रयोगवाद का समय: 1943- 1952 1943 ई. में अज्ञेय द्वारा ‘तारसप्तक’ का प्रकाशन हुआ था। 1952 ई. में अज्ञेय ने ‘नई कविता’ का प्रवर्तन किया था। अतः अज्ञेय ‘प्रयोगवाद’ और ‘नई कविता’ दोनों के प्रवर्तक है। प्रयोगवाद का अर्थ: 1943 से 1952 के बीच अज्ञेय और उनके समर्थक कवियों द्वारा काव्य के क्षेत्र में भाषा,… Continue reading प्रयोगवाद के महत्वपूर्ण तथ्य और कथन
रामस्वरूप चतुर्वेदी जी के महत्वपूर्ण कथन
हिंदी साहित्य और संवेदना का विकास (1986) संसार को समझना दर्शन का काम है, उसे बदलना राजनीति का और उसकी पुनर्रचना साहित्य का दायित्व है। इसी रूप में यहाँ साहित्य का विकास समझने का यत्न हुआ है। भाषा, साहित्य और संस्कृति के संपृक्त सन्दर्भ में यह हिंदी साहित्य के साथ संवेदना का इतिहास भी होने… Continue reading रामस्वरूप चतुर्वेदी जी के महत्वपूर्ण कथन
जैनेंद्र कुमार ‘अपना-अपना भाग्य’ कहानी
कहानी से संबंधित जैनेन्द्र कुमार का एक कथन है- “कहानी एक भूख है जो निरंतर समाधान पाने की कोशिश करती हैं।” जैनेन्द्र कुमार का जन्म 2 जनवरी सन् 1905, में अलीगढ़ के कौडियागंज गाँव में हुआ था। उनके बचपन का नाम आनंदीलाल था। जैनेन्द्र कुमार हिन्दी साहित्य के प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक, कथाकार, उपन्यासकार और निबंधकार… Continue reading जैनेंद्र कुमार ‘अपना-अपना भाग्य’ कहानी
डॉ. गोपालराय के महत्वपूर्ण कथन
“प्रकृति ने शेखर और शशि को भाई-बहन बनाकर नहीं प्रेमी-प्रेमिका बनाकर भेजा था।” यह एक क्लासिक रोमांटिक उपन्यास है। अपने बंध, चित्रण, वर्ण शिल्प और शैली में यह क्लासिक है और परांगत ऊष्मा में रोमांटिक।” उपन्यास साहित्य की प्रमुख विधाओं में से एक है। 20वीं शताब्दी के अंत के साथ ही हिंदी उपन्यास की उम्र… Continue reading डॉ. गोपालराय के महत्वपूर्ण कथन
जयशंकर प्रसाद ‘आकाशदीप’ कहानी
‘आकाशदीप’ कहानी और कहानी संग्रह दोनों है। ‘आकाशदीप’ कहानी 1928 ई. में प्रकाशित हुआ था। ‘आकाशदीप ‘कहानी संग्रह का 1929 ई. प्रकाशित हुआ था। इस कहानी में प्रेम और प्रतिशोध जैसे दो परस्पर विरोधी भावों के द्वंद्व का चित्रण है। अंत में प्रेम की विजय होती है। कहानी की नायिका – ‘चंपा’ और नायक ‘बुद्धगुप्त’… Continue reading जयशंकर प्रसाद ‘आकाशदीप’ कहानी