ऐ वक्त और कितना साधेगा
चाहे तू जितना भी साध ले
लेकिन याद रखना मैं भी जिद्दी हूं
हार नही मानूंगी, कहीं किसी मोड़ पर तुझे
बदलने के लिए मजबूर कर दूंगी
विश्वास मुझे है तू मेरे साथ होगा।
जय हिन्द
मेरी रचनाएँ
ऐ वक्त और कितना साधेगा
चाहे तू जितना भी साध ले
लेकिन याद रखना मैं भी जिद्दी हूं
हार नही मानूंगी, कहीं किसी मोड़ पर तुझे
बदलने के लिए मजबूर कर दूंगी
विश्वास मुझे है तू मेरे साथ होगा।
जय हिन्द