'आलोचना' शब्द 'लोच्' धातु से बना है, लोच् का अर्थ है देखना। अतः आलोचना का अर्थ है 'देखना'। किसी वस्तु या कृति की सम्यक् व्याख्या, उसका मूल्याङ्कन आदि करना आलोचना ही आलोचना है। साहित्य के विश्व प्रसिद्ध आलोचक 'रोमन याकोब्सन' ने कहा था- "अगर मनुष्य ना होता, तब भी यह दुनिया होती। इसी… Continue reading आलोचना का अर्थ, परिभाषा, स्वरुप तथा साहित्य और आलोचना के अंतःसंबंध
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छायावाद पर आधारित प्रश्नोत्तरी भाग-2 ।। Chhayavad par adharit prshn
सगुण भक्ति की विशेषताएँ तथा सूरदास और तुलसीदास
ईश्वर की 'सगुण' और 'साकार' रूप में विश्वास करने वाले भक्त कवियों को 'सगुण' भक्ति का नाम दिया गया है। वैष्णव भक्ति के उद्भव के साथ ही सगुण भक्तिधारा विकसित हो गई थी। भक्ति प्राचीनकालीन भारतीय वैदिक भक्ति का हि विकसित रूप है। 'सगुण' का अर्थ होता है परमसत्ता के सभी गुणों से संपन्न।… Continue reading सगुण भक्ति की विशेषताएँ तथा सूरदास और तुलसीदास
हिंदी गद्य के उद्भव और विकास
हिंदी साहित्य का आधुनिक काल भारत के इतिहास के बदलते हुए स्वरूप से प्रभावित था। स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रीयता की भावना का प्रभाव साहित्य पर भी पड़ा। भारत में औद्योगीकरण का प्रारंभ होने लगा था। आवागमन के साधनों का विकास हुआ। अंग्रेज़ी और पाश्चात्य शिक्षा का प्रभाव बढ़ा और जीवन में बदलाव आने लगा। भावना… Continue reading हिंदी गद्य के उद्भव और विकास
दलित साहित्य
'मुर्दहिया'-तुलसीराम (आत्मकथा) एक समीक्षा 'दलित' वर्ग के लिए भारतीय समाज में अनेक शब्दों का प्रयोग किया जाता रहा है। जैसे- शूद्र, अछूत, बहिष्कृत, अंत्यज, पददलित, दास, दस्यु, अस्पृश्य, हरिजन आदि। दलित शब्द का शब्दिक अर्थ है- मसला हुआ, रौंदा या कुचला हुआ, नष्ट किया हुआ, दरिद्र और पीड़ित, दलित वर्ग का व्यक्ति। 'संक्षिप्त हिंदी… Continue reading दलित साहित्य
रिपोर्ताज
'रिपोर्ताज' गद्य-लेखन की एक विधा है। हिंदी में रिपोर्ताज को 'सूचनिका' और 'रूपनिका' भी कहा जाता है। परन्तु इसका प्रचलित शब्द 'रिपोर्ताज' है। रिपोर्ताज 'फ़्रांसिसी' भाषा का शब्द है। फ़्रांस में यह शब्द अंग्रेजी के 'रिपोर्ट' शब्द के आधार पर द्वितीय विश्व युद्ध के समय बनाया गया। रिपोर्ताज की परिभाषाएँ: हिंदी साहित्य कोश के अनुसार-… Continue reading रिपोर्ताज
सिद्ध साहित्य
आदिकालीन साहित्य: आदिकालीन साहित्य केकाव्य की निम्नलिखित धाराएँ हैं - 1. सिद्ध साहित्य 2. नाथ साहित्य 3. रास साहित्य 4. रासों साहित्य 5. लौकिक साहित्य 6. गद्य साहित्य 7. अपभ्रंश साहित्य सिद्ध साहित्य- परिभाषा- आदिकाल में बौद्ध धर्म की महायान शाखा के वज्रयानी कवियों द्वारा अपने धर्म का प्रचार-प्रसार करने के लिए जो साहित्य जनभाषा… Continue reading सिद्ध साहित्य
नाथ साहित्य
परिभाषा- आदिकाल में भगवान 'शिव' के उपासक भक्त कवियों के द्वारा जनभाषा में जिस साहित्य की रचना की गई या हुई उसे नाथ साहित्य के नाम से जाना जाता है। नाथ संप्रदाय को सिद्धों की परंपरा का विकसित रूप माना जाता है। नाथ साहित्य के प्रवर्तक गोरखनाथ को माना जाता है। इनकी साधना सिद्ध साधना… Continue reading नाथ साहित्य
शोध की परिभाषा, अर्थ, स्वरुप तथा प्रयोजन
'शोध' नया ज्ञान प्राप्त करने की एक प्रक्रिया है। शोध का अर्थ होता है, खोज करना या पता लगाना। शोध के लिए अंग्रेजी में रिसर्च (Research) शब्द का प्रयोग किया जाता है। 'रिसर्च' मूल रूप से 'लैटिन' भाषा का शब्द है। 'Re' का अर्थ 'दुबारा' और 'Search' का अर्थ 'खोजना' है अथार्त वैज्ञानिक पद्धति के… Continue reading शोध की परिभाषा, अर्थ, स्वरुप तथा प्रयोजन
शोध कार्य – संदर्भ ग्रंथ सूचि
शोध कार्य में ग्रंथ सूचि का महत्व निर्विवाद है। इसे संदर्भ ग्रंथ सूचि भी कहा जाताहै। ग्रंथ सूचि से तात्पर्य अंग्रेजी के शब्द 'बिब्लियोग्राफी' से बना है, जो बहुत ही व्यापक है। इसकी किसी एक निश्चित परिभाषा के संबंध में विद्वानों में मतभेद है। साहित्य एवं भाषा संबंधी शोध तथ्यों पर आधारित होता है।… Continue reading शोध कार्य – संदर्भ ग्रंथ सूचि
