बचपन में हम संयुक्त परिवार में रहा करते थे। उस समय हम दादी-नानी से रोज कहानियाँ सुना करते थे। आज का समय एकल परिवार का हो गया है। अब ज्यादातर परिवार के साथ दादा–दादी या नाना-नानी नहीं रहते हैं और न ही उनकी कहानियाँ होती है। आज मुझे एक कहानी याद आई जिसे हमारी दादी… Continue reading गौरइया का संघर्ष (बाल साहित्य)
Author: इंदु सिंह
बिहारी सतसई
हिन्दी साहित्य के महाकवि बिहारी रीतिकालीन, रीतिसिद्ध काव्यधारा के श्रेष्ठ कवि थे। बिहारीलाल का जन्म सन् 1603 ई० के लगभग ग्वालियर के पास बसवा गोविंदपुर गाँव में हुआ था। इनके पिता का नाम केशवराय था। वे संस्कृत के विद्वान थे। बिहारीलाल माथुर चौबे थे। इस दोहे में उनके बाल्यकाल और यौवनकाल का प्रमाण मिलता है-… Continue reading बिहारी सतसई
‘हनी गर्ल’ बनी यूनिसेफ गर्ल
अपने इरादों का इम्तिहान है बाकी, जिंदगी की असली उड़ान है बाकी। अभी तो मापी है मुट्ठी भर जमीं हमने, आगे तो पूरा असमान है बाकी।। “आँखों में सपने और कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो मंजिल चाहे कितनी भी दूर क्यों न हो उस पर सफलता पाया जा सकता है”। दुष्यंत की इस… Continue reading ‘हनी गर्ल’ बनी यूनिसेफ गर्ल
समकालीन हिन्दी कविता में पर्यावरण विमर्श
पर्यावरण में उपस्थित प्राणवायु गैस (ऑक्सीजन) मानव के लिए प्राणदायक है। हम सब श्वास द्वारा ऑक्सीजन लेते है और कार्बन-डाई-ऑक्साइड गैस बाहर निकालते हैं। इसी गैस को पेड़-पौधे अपना भोजन बनाने के लिए उपयोग में लाते हैं और हमें ऑक्सीजन लौटा कर हमारी रक्षा करते हैं। प्रकृति की यह बहुत ही सुन्दर व्यवस्था है कि… Continue reading समकालीन हिन्दी कविता में पर्यावरण विमर्श
पेड़ की हत्या (कहानी) (Murder of a Tree)
यह कहानी ‘अशोक’ के एक पेड़ की कहानी है। अशोक के पेड़ को सकारात्मक उर्जा का प्रतीक माना गया है। ‘अशोक’ का अर्थ है, जहाँ ‘शोक’ (दुःख) नहीं हो। घर के पास अशोक का पेड़ होने से सुख, शांति और समृधि बनी रहती है। अशोक का पेड़ घर के पास लगाने से परिवार की महिलाओं… Continue reading पेड़ की हत्या (कहानी) (Murder of a Tree)
ज्ञान का अहंकार (कहानी)
महाकवि कालिदास के कंठ में साक्षात माता सरस्वती का वास था। कालिदास को शास्त्रार्थ में कोई भी पराजित नहीं कर सकता था। अपार यश, प्रतिष्ठा और सम्मान को पाकर कालिदास जी को अपने विद्वता और ज्ञान पर घमंड हो गया था। उन्हें लगा कि उनसे बड़ा ज्ञानी कोई नहीं है। एक बार पड़ोसी राज्य से… Continue reading ज्ञान का अहंकार (कहानी)
हमारी ‘हिन्दी’ (कविता)
सरस भाषा हिन्दी है, सरल भाषा हिन्दी है सरस, सरल और रुचिर भाषा हिन्दी है। मृदुल भाषा हिन्दी है, मधुर भाषा हिन्दी है मृदुल, मधुर और कोमल भाषा हिन्दी है। कर्म भाषा हिन्दी है, धर्म भाषा हिन्दी है कर्म, धर्म और काव्य भाषा हिन्दी है। संस्कार भाषा हिन्दी है, संस्कृति भाषा हिन्दी है संस्कार, संस्कृति… Continue reading हमारी ‘हिन्दी’ (कविता)
छपरा (सारण), बिहार (पौराणिक तीर्थस्थल)
सारण भारत के बिहार प्रान्त में स्थित एक प्रमंडल एवं जिला है। यहाँ का प्रशासनिक मुख्यालय छपरा में है। सारण जिला तीन ओर से गंगा, गंडक एवं घाघरा नदियों से घिरा हुआ त्रिकोणीय भू-क्षेत्र है। सम्पूर्ण जिला समतल एवं उपजाऊ प्रदेश है। कहते हैं कि प्राचीन समय में यहाँ वनों का भरमार था। इन वनों… Continue reading छपरा (सारण), बिहार (पौराणिक तीर्थस्थल)
हाइकु (1 से 100)
1. हे! माँ शारदे काव्य कला के ज्ञान का विवेक दे। 2. हे! वागेश्वरी भर शब्दों में शक्ति लेखनी पर। 3. हे! वीणा पाणी सितार में झंकार सुरीली लय। 4. हंसवाहिनी सुर में यति गति झंकार भर। 5. हे! स्वर दात्री तानसेन वैजू को लौटा दे धरा। 6. वर्तमान के मकड़जाल में उलझे हम। 7. … Continue reading हाइकु (1 से 100)
हे! प्रभु आनंद-दाता (प्रार्थना)
प्रार्थना मनुष्य के मन की समस्त विश्रृंखलित एवं चारों तरफ भटकने वाली प्रवृतियों को एक केन्द्र पर एकाग्रचित करने वाला मानसिक व्यायाम है। प्रार्थना एक ऐसा कवच है जो डर या भय से हमारी रक्षा करते हुए हमें सत्य, ज्योति, और अमृत को प्राप्त करने के लिए समर्थवान बनता है। रामनरेश त्रिपाठी ‘पूर्व छायावाद युग’… Continue reading हे! प्रभु आनंद-दाता (प्रार्थना)