ब्रह्म बाबा (बुजुर्ग बरगद)

हमारे गाँव में सड़क के किनारे एक विशाल बरगद का पेड़ है। यह विशालकाय बरगद चारों तरफ से लगभग 2 एकड़ में फैला हुआ है। इसकी लम्बी-लम्बी सुन्दर जटाएं, उभरी हुई जड़ें और तने देखकर मन खुश हो जाता है। गाँव के सब लोग कहते हैं कि यह बरगद का पेड़ बहुत ही पुराना है।… Continue reading ब्रह्म बाबा (बुजुर्ग बरगद)

ऋतु बसंत (कविता)

आया बसंत, आया ऋतुराज, भू पर लाया खुशियों का सौगात। बाग-बगीचे हुए खुशहाल, खेतों में फूले सरसों भरमार। आम के पेड़ों पर लदे मोजरें, झूम के गाये प्यारी कोयल। पीली सरसों हवा में झूमे, झूम-झूम के गीत सुनाये।   अलसी खेतों में डोल रही है, डोल-डोल कुछ बोल रही है।   रंग-बिरंगी धरा हो रही,… Continue reading ऋतु बसंत (कविता)

हनुमान जी की आरती

।।श्री हनुमंत स्तुति।। मनोजवं मारुत तुल्यवेगं, जितेन्द्रियं, बुद्धिमतां वरिष्ठम् ।। वातात्मजं वानरयुथ   मुख्यं, श्रीरामदुतं  शरणम प्रपद्धे ।। हनुमान जी की आरती आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट  दलन  रघुनाथ कला की ।।टेक।। जाके   बल  से गिरिवर काँपै। रोग-दोष जाके निकट न झांपै  ।।१।। अंजनि    पुत्र  महा बलदायी। संतान  के  प्रभु  सदा  सहाई ।।२।। दे  बीरा… Continue reading हनुमान जी की आरती

विक्रमादित्य के नवरत्न

विश्वविजेता चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य उज्जैन के राजा थे। वे अपने ज्ञान, वीरता और उदारशीलता के लिए प्रसिद्ध थे। विक्रमादित्य के काल को ‘कला और साहित्य का स्वर्णयुग’ कहा जाता था। राजा विक्रमादित्य का नाम- 'विक्रम' और 'आदित्य' के समास से बना है जिसका अर्थ होता है- 'सूर्य के समान पराक्रमी'। ‘भविष्य पुराण’ व ‘आईने अकबरी’ के अनुसार विक्रमादित्य… Continue reading विक्रमादित्य के नवरत्न

पंडिताईन

सब कहते हैं कि जोड़ियाँ भगवान के घर से ही बन कर आती है। पता नहीं यह कहाँ तक सत्य है। कुछ कहना बड़ा ही मुश्किल है। सच में कुछ जोड़ियों को देखकर लगता है कि सच में इस जोड़ी को भगवान ने बहुत फुर्सत में बनाया होगा और कुछ को देखकर ऐसा लगता है… Continue reading पंडिताईन

लुप्त विराशत (भारत के प्राचीन विश्वविद्यालय)

वैदिक काल से ही भारतवर्ष में शिक्षा एवं शिक्षण को बहुत अधिक महत्व दिया गया है। मनुष्य के सर्वांगीन विकास के लिए शिक्षा अति आवश्यक है। भारतवर्ष में गुरु का महत्व माता-पिता से भी बढ़कर माना गया है- इसलिए भारत को विश्व गुरु का दर्जा भी दिया जाता है। जिस काल में विश्व के सभी… Continue reading लुप्त विराशत (भारत के प्राचीन विश्वविद्यालय)

संत कबीर

“माटी  का  एक  नाग  बनाके, पुजे  लोग लुगाई! जिंदा नाग जब घर में निकले, ले लाठी धमकाई”!! संत कबीर दास जी कवि और समाज-सुधारक थे। कबीर दास जी सिकंदर लोदी के समकालीन थे। ‘कबीर’ का अर्थ अरबी भाषा में ‘महान’ होता है। कबीर भारतीय हिन्दी साहित्य के भक्ति कालीन काव्य परम्परा के महानतम कवियों में… Continue reading संत कबीर

धाय माँ (कहानी)

चितौड़गढ़ को शुरवीरों का शहर कहा जाता है। यह मेवाड़ की राजधानी भी रहा है। चितौड़गढ़ वह वीर भूमि है, जिसने समूचे भारत में शौर्य, देशभक्ति और बलिदान का अनूठा उदहारण प्रस्तुत किया है। चितौड़गढ़ के इतिहास में जहाँ पद्मिनी के जौहर की अमर गाथायें, मीरा बाई की भक्ति और माधुर्य प्रेम की कहानी है,… Continue reading धाय माँ (कहानी)

कवि ‘घाघ’ की कहावतें

भारत कृषि प्रधान देश है। हमारे देश की कृषि का मुख्य आधार ऋतुएँ हैं। अच्छी वर्षा होगी तभी अन्न का उपज भरपूर होगा, अतः इसका ज्ञान होना कृषि के लिए अनिवार्य है। हमारे किसानों को इन सब बातों की जानकारी नहीं थी। उन्हें इस बात का पता नहीं होता था कि  वर्षा कब होगी, कितना… Continue reading कवि ‘घाघ’ की कहावतें

हिंदी के लोक महाकवि घाघ

लगभग सन् 1700 ई० के आस-पास हिंदी कविता में एक नया मोड़ आया। जिसे रीतिकल के नाम से जाना जाता है। इस काल के कवि, राजाओं और रईसों के आश्रय में रहते थे। मध्यकाल के अन्य कवियों की ही तरह उत्तर भारत में एक प्रसिद्ध कवि थे, जिन्हें महाकवि ‘घाघ’ के नाम से जाना जाता… Continue reading हिंदी के लोक महाकवि घाघ